Mr. Ms. Fake in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 48

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 48

एपिसोड 48: वो स्पर्श, जो अतीत तक ले गया

“Welcome back, Son.”

स्क्रीन पर चमक रहे इन दो शब्दों ने कमरे की हवा तक बदल दी थी।

कोई कुछ नहीं बोल रहा था।

आर्यवीर स्क्रीन को घूर रहा था।

उसके चेहरे पर पहली बार ऐसा डर दिखाई दे रहा था, जिसे वह छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रहा था।

साँवी धीरे-धीरे उसके पास आई।

“आर्यवीर…”

उसने कोई जवाब नहीं दिया।

साँवी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“मेरी तरफ देखो।”

आर्यवीर ने धीरे से उसकी तरफ देखा।

साँवी की आँखों में डर था, लेकिन उससे ज्यादा भरोसा था।

“जो भी इस फाइल में लिखा है… वो जरूरी नहीं कि सच हो।”

आर्यवीर हल्का-सा मुस्कुराया।

“अगर सच हुआ तो?”

“तो भी…”

साँवी ने उसका हाथ अपने दोनों हाथों में ले लिया।

“मैं तुम्हारे साथ हूँ।”

आर्यवीर कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।

“तुम्हें पता भी है तुम क्या कह रही हो?”

“हाँ।”

“तुम्हें नहीं पता मैं कौन हूँ।”

“मुझे ये भी नहीं पता कि मैं खुद कौन हूँ।”

साँवी की आँखों में हल्की नमी आ गई।

“लेकिन एक बात पता है।”

“क्या?”

“जब तुम मेरे पास होते हो… मुझे डर कम लगता है।”

आर्यवीर की आँखें नरम पड़ गईं।

“और मुझे…”

वह कुछ पल रुका।

“तुम्हारे बिना डर ज्यादा लगता है।”

साँवी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

“तो फिर मुझे छोड़ना मत।”

आर्यवीर ने उसका हाथ अपनी छाती पर रख दिया।

“कभी नहीं।”

साँवी की उंगलियों के नीचे उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।

वह उसे देखती रही।

“तुम्हारा दिल इतनी तेजी से क्यों धड़क रहा है?”

आर्यवीर ने मुस्कुराकर कहा,

“क्योंकि तुम इतनी करीब खड़ी हो।”

साँवी झेंप गई।

“तुम भी ना…”

लेकिन तभी—

धक!

साँवी का हाथ अचानक आर्यवीर की छाती से हट गया।

उसकी आँखें बंद हो गईं।

“साँवी?”

उसने कोई जवाब नहीं दिया।

उसके सामने अचानक अंधेरा छा गया।

और फिर…

एक पुराना कमरा।

दीवारों पर सफेद लाइटें।

एक छोटी बच्ची रो रही थी।

एक महिला उसे अपनी बाहों में लिए हुए थी।

महिला का चेहरा साफ नहीं था।

लेकिन उसकी आवाज साफ सुनाई दे रही थी।

“डरो मत, बेटा।”

बच्ची रोते हुए बोली—

“मुझे यहाँ नहीं रहना।”

महिला ने उसे सीने से लगा लिया।

“तुम्हें जाना होगा।”

“कहाँ?”

“उसके पास।”

“किसके पास?”

महिला ने कमरे के दूसरे कोने की तरफ देखा।

वहाँ एक छोटा बच्चा खड़ा था।

लगभग पाँच-छह साल का।

उसकी कलाई पर एक काली पट्टी थी।

और उसके हाथ में…

नागमुद्रा।

साँवी की सांस रुक गई।

बच्ची ने उस लड़के की तरफ देखा।

लड़का धीरे-धीरे उसके पास आया।

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

बच्ची ने उसका हाथ पकड़ लिया।

और उसी पल—

दोनों की हथेलियों पर हल्की सुनहरी रोशनी चमकी।

महिला घबरा गई।

“नहीं!”

उसने तुरंत दोनों को अलग कर दिया।

“उन्हें एक-दूसरे के करीब मत आने देना!”

एक आदमी की आवाज आई—

“बहुत देर हो चुकी है।”

दृश्य अचानक टूट गया।

---

“साँवी!”

आर्यवीर ने उसे संभाल लिया।

साँवी ने आँखें खोलीं।

वह बुरी तरह कांप रही थी।

“क्या हुआ?”

उसने आर्यवीर की तरफ देखा।

कुछ सेकंड तक वह बोल नहीं पाई।

फिर उसने धीमे से कहा—

“मैंने तुम्हें देखा।”

आर्यवीर का चेहरा बदल गया।

“कहाँ?”

“बहुत साल पहले।”

“क्या मतलब?”

साँवी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“तुम बच्चे थे।”

कमरे में मौजूद सभी लोग चुप हो गए।

राघव आगे आया।

“क्या देखा तुमने?”

साँवी ने आँखें बंद करके याद करने की कोशिश की।

“एक कमरा था… Project S-21 जैसा।”

“और?”

“एक औरत थी।”

राजवीर की सांस अटक गई।

“मीरा?”

साँवी ने सिर हिलाया।

“शायद।”

“और तुम?”

“मैं भी थी।”

फिर उसने आर्यवीर की तरफ देखा।

“और वो भी।”

आर्यवीर कुछ बोल नहीं पा रहा था।

“उसने मेरा हाथ पकड़ा था।”

राघव ने तुरंत पूछा,

“किसने?”

“आर्यवीर ने।”

राघव पीछे हट गया।

“ये संभव नहीं है।”

आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।

“क्यों?”

राघव कुछ बोलने ही वाला था कि साँवी ने उसका हाथ फिर पकड़ लिया।

उसी पल—

चमक!

दोनों की हथेलियों पर एक जैसा सुनहरा निशान उभर आया।

नैना चीख पड़ी—

“ये वही निशान है!”

आरोही भी आगे आई।

“जो हमारी दीवार पर बना था!”

राघव ने काँपती आवाज में कहा,

“ये तो…”

राजवीर ने पूछा,

“क्या?”

राघव ने धीरे से कहा—

“Bond Mark.”

आर्यवीर ने पूछा,

“Bond Mark?”

“Project S-21 में इसके बारे में लिखा था।”

राघव ने फाइल के पन्ने पलटे।

“लेकिन ये सिर्फ दो लोगों में बन सकता है।”

साँवी ने पूछा,

“किसके बीच?”

राघव ने कुछ पल दोनों को देखा।

फिर बोला—

“जिसे Project S-21 में Anchor और Key कहा गया था।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

साँवी ने आर्यवीर की तरफ देखा।

“तो मैं Key हूँ…”

आर्यवीर ने उसकी बात पूरी की।

“…और मैं Anchor।”

तभी स्क्रीन पर एक नई लाइन दिखाई दी—

ANCHOR + KEY = CONTROL

साँवी के चेहरे पर डर आ गया।

“तो Founder हमें एक-दूसरे से जोड़ना चाहता है?”

राघव ने सिर हिलाया।

“शायद।”

आर्यवीर ने पूछा,

“लेकिन क्यों?”

स्क्रीन पर अगली लाइन दिखाई दी—

“Because love creates the strongest bond.”

साँवी की आँखें फैल गईं।

आर्यवीर कुछ सेकंड तक स्क्रीन को देखता रहा।

फिर धीरे से साँवी की तरफ मुड़ा।

“तो…”

साँवी ने उसकी तरफ देखा।

“हमारा रिश्ता भी?”

आर्यवीर ने कहा,

“हो सकता है इसी वजह से किसी ने हमें करीब आने दिया।”

साँवी की आँखों में अचानक आँसू आ गए।

“मतलब… जो कुछ मैंने महसूस किया…”

वह रुक गई।

“क्या वो भी Project S-21 का हिस्सा था?”

आर्यवीर तुरंत उसके सामने आया।

“नहीं।”

“तुम कैसे कह सकते हो?”

“क्योंकि अगर किसी ने हमें करीब आने के लिए मजबूर किया होता…”

उसने साँवी का चेहरा अपने हाथों में लिया।

“…तो मेरे अंदर तुम्हारे लिए ये feelings पैदा नहीं की जा सकती थीं।”

साँवी की आँखों से आँसू गिरने लगे।

“लेकिन अगर ये सब किसी की planning थी?”

आर्यवीर ने उसका आँसू पोंछा।

“तो भी एक चीज मेरी अपनी है।”

“क्या?”

“तुम्हें खोने का डर।”

साँवी कुछ पल उसे देखती रही।

फिर उसने धीरे से अपना माथा उसके माथे से लगा दिया।

दोनों की आँखें बंद हो गईं।

और उसी पल—

Bond Mark फिर चमक उठा।

लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ।

दोनों के सामने एक दृश्य उभर आया।

एक अस्पताल।

एक महिला बिस्तर पर लेटी थी।

वह मीरा थी।

उसकी गोद में एक बच्चा था।

लेकिन इस बार वह बच्चा आर्यवीर था।

मीरा उसके माथे को चूमते हुए कह रही थी—

“इसे उनसे दूर रखना।”

सामने खड़ा आदमी बोला—

“लेकिन वो लड़का Project के लिए जरूरी है।”

मीरा ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

“क्यों?”

मीरा की आँखों में आँसू थे।

“क्योंकि ये बच्चा हथियार नहीं है।”

दृश्य बदल गया।

अब एक दूसरी महिला दिखाई दी।

अनन्या।

उसकी गोद में छोटी साँवी थी।

मीरा उसके सामने खड़ी थी।

“अनन्या… मेरी बेटियों को अलग रखना।”

अनन्या रोते हुए बोली,

“और ये लड़का?”

मीरा ने आर्यवीर की तरफ देखा।

“इसे भी उनसे दूर रखना।”

अनन्या ने पूछा,

“क्यों?”

मीरा ने सिर्फ एक बात कही—

“क्योंकि अगर ये चारों एक साथ आ गए… तो Founder उन्हें रोक नहीं पाएगा।”

दृश्य अचानक खत्म हो गया।

साँवी ने आँखें खोल दीं।

“चारों?”

आर्यवीर ने भी उसी वक्त उसकी तरफ देखा।

“चारों कौन?”

राघव का चेहरा सफेद पड़ चुका था।

राजवीर ने उसकी तरफ देखा।

“राघव?”

राघव ने कोई जवाब नहीं दिया।

“तुम कुछ जानते हो।”

राघव ने आखिरकार धीमे से कहा—

“हाँ।”

सबकी नजरें उसकी तरफ उठ गईं।

“Project S-21 में सिर्फ तीन बच्चियों का रिकॉर्ड नहीं था।”

उसने फाइल का आखिरी पन्ना खोला।

वहाँ चार नाम थे।

पहले तीन—

SAANVI

AAROHI

NAINA

और चौथा नाम…

कुछ हिस्से काले रंग से मिटाया गया था।

लेकिन नीचे एक कोड साफ दिखाई दे रहा था—

S-21-A

आर्यवीर ने पूछा,

“ये कौन है?”

राघव ने धीरे से उसकी तरफ देखा।

“मुझे नहीं पता।”

“झूठ।”

राघव चुप रहा।

तभी कमरे के कोने में पड़ा पुराना फोन अचानक बज उठा।

सब चौंक गए।

राघव ने फोन उठाया।

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक कोई आवाज नहीं थी।

फिर एक महिला की आवाज आई।

बहुत धीमी।

बहुत जानी-पहचानी।

“राघव…”

राघव का चेहरा बदल गया।

“नहीं…”

राजवीर ने पूछा,

“कौन है?”

राघव ने फोन को कान से हटाया।

उसकी आँखों में डर था।

“ये…”

फोन से फिर आवाज आई—

“तुमने बच्चों को बचा लिया… लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।”

राघव की सांस रुक गई।

क्योंकि वह आवाज किसी और की नहीं…

मीरा की थी।

और फोन कटने से पहले एक आखिरी बात सुनाई दी—

“उसे मत बताना कि उसका असली नाम क्या है।”

आर्यवीर ने चौंककर पूछा—

“किसका असली नाम?”

फोन की स्क्रीन पर अचानक एक शब्द चमका—

S-21-A

और उसके नीचे…

ARYAN

आर्यवीर की आँखें फैल गईं।

“आर्यन…?”

राजवीर ने काँपते हुए कहा—

“ये नाम…”

राघव ने उसकी बात पूरी की—

“तुम्हारे पिता का नाम नहीं है।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

“ये…”

राघव ने आर्यवीर की तरफ देखा।

“…तुम्हारा पुराना नाम था।”

आर्यवीर जैसे पत्थर का हो गया।

साँवी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

लेकिन इस बार—

उसकी हथेली का Bond Mark नहीं चमका।

बल्कि आर्यवीर की हथेली से काला निशान निकल आया।

और दीवार पर अपने आप एक लाइन लिख गई—

“THE ANCHOR REMEMBERS.”

आर्यवीर ने अपनी हथेली को देखा।

फिर साँवी की तरफ।

और पहली बार उसकी आँखों में सवाल नहीं…

एक धुंधली बचपन की याद थी।

जारी रहेगा…