BLAST in Hindi Fiction Stories by Muhib Khan books and stories PDF | BLAST - EPISODE 9

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BLAST - EPISODE 9

हमदान मीर अपने घमंड में मुस्कुराते हुए शेख मंसूर और दिमित्री को डील की बारीकियाँ समझा रहा था। वह हाथ में पकड़ा हुआ ग्लास घुमा ही रहा था कि उसकी पैनी और शातिर नज़रें अचानक साहिर के कोट के बीच वाले हिस्से पर टिक गईं।
कमरे की पीली हैलोजन लाइट की एक बारीक किरण साहिर के कोट के बटन से टकराकर अजीब तरीके से चमकी। हमदान की आँखें तुरंत सिकुड़ गईं। उसने अंडरवर्ल्ड और हथियारों की काली दुनिया में दशकों बिताए थे—वह एक ही नज़र में भांप गया कि वह कोई आम बटन नहीं, बल्कि मिलिट्री-ग्रेड पिनहोल माइक्रो-कैमरे का हाई-टेक लेंस है, जो इस पूरी बातचीत को लाइव ब्रॉडकास्ट कर रहा था।
हमदान के चेहरे का रंग ज़रा भी नहीं बदला, लेकिन उसके दिमाग में खतरे का रेड अलार्म बज उठा। उसे समझ आ गया कि उसके अपने ही सेफ ज़ोन में किसी ने उसके खिलाफ बहुत बड़ा जाल बिछा दिया है।
उसने बिना कोई घबराहट दिखाए अपने सिगार को ऐशट्रे में मसला और टेबल के नीचे लगे एक सीक्रेट इमरजेंसी पैनल पर अपने बाएं घुटने से दबाव बनाया। साथ ही, उसने दीवार के सहारे खड़े अपने दोनों गनमैनों को बाएं हाथ की दो उंगलियों से एक सीक्रेट इशारा किया—'मिशन अबॉर्ट, इवेकुएट।'
ठीक अगले ही पल, कमरे की फॉल्स सीलिंग में छिपे वेंटिलेशन पाइप्स से बेहद तेज़ स्लीपिंग गैस का घना सफेद धुआं फुफकार के साथ छूट पड़ा।
"खाँसी... यह क्या बकवास है?!" दिमित्री चिल्लाया और अपनी जेब से गन निकालने की कोशिश की, लेकिन गैस इतनी तेज़ और नशीली थी कि दो सांसें लेते ही उसकी आँखों के आगे अंधेरा छा गया और वह कुर्सी समेत धड़ाम से फर्श पर गिर पड़ा। शेख मंसूर का भी वही हाल हुआ।
साहिर का दम घुटने लगा और उसकी नजरें धुंधलाने लगीं। वह तुरंत समझ गया कि हमदान ने कैमरा देख लिया है। अपने हाथ-पैर सुन्न होने से ठीक पहले, साहिर ने अपनी पूरी ताकत समेटकर अंगूठी में लगा सिक्योरिटी एसओएस ट्रिगर दबा दिया। यह नौशाद के लिए सीधे 'रेड अलर्ट' का संदेश था। इसके बाद साहिर का सिर भी टेबल से टकराया और वह बेसुध हो गया।
हमदान और उसके गार्ड्स ने पलक झपकते ही अपनी जेबों से मिनी-ऑक्सीजन मास्क निकालकर चेहरों पर चढ़ा लिए थे। हमदान ने टेबल पर रखी एनक्रिप्टेड हार्ड ड्राइव और केमिकल की शीशी उठाई, और पीछे की लकड़ी की दीवार में छिपे एक गुप्त स्टील के स्लाइडिंग दरवाजे को धक्का देकर उस अंधेरी इमरजेंसी सुरंग के रास्ते फरार हो गया।
ऊपर कॉरिडोर में नौशाद की कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच पर लाल बत्ती के साथ चमका: 'CODE RED: COMPROMISED'।
नौशाद ने एक सेकंड भी गंवाए बिना अपनी साइलेंसर लगी पिस्तौल शेरवानी के अंदर से निकाली और बिजली की फुर्ती से सीढ़ियों से नीचे भागा। उसने अंडरग्राउंड ऑफिस के भारी दरवाजे को एक जोरदार लात मारकर खोल दिया।
अंदर सफेद धुएं का घना गुबार छाया हुआ था।
कमरे में हमदान का एक भी गार्ड मौजूद नहीं था। दिमित्री, शेख मंसूर और खुद साहिर फर्श पर बेसुध और बेहोश पड़े थे। हमदान अपने सारे सुराग और माल समेटकर उस सीक्रेट रास्ते से गायब हो चुका था, और दीवार का गुप्त दरवाज़ा पीछे से ऑटो-लॉक हो चुका था।
नौशाद गैस से अपना मुंह ढंकते हुए तेजी से आगे बढ़ा और उसने नीचे झुककर सीधे साहिर की नब्ज़ पर उंगलियां रखीं।

नौशाद ने जैसे ही साहिर की नब्ज़ पर हाथ रखा, साहिर की उंगलियों में हल्की सी हरकत हुई। बेहोशी के धुंधलके से लड़ते हुए साहिर ने अपनी कलाई की सीक्रेट जेब से एक इमरजेंसी न्यूट्रलाइजिंग मिनी-मास्क निकाला और अपने चेहरे पर चढ़ा लिया।
नौशाद ने भी तुरंत अपना टैक्टिकल मास्क चेहरे पर खींच लिया।
साहिर ने खांसते हुए अपनी आंखें खोलीं और नौशाद का हाथ पकड़कर खुद को दीवार के सहारे खड़ा किया। उसकी आवाज़ कमजोर थी, लेकिन लहज़े में वही पुराना संकल्प था।
साहिर:
"मैं ठीक हूँ नौशाद... मेरी फिक्र छोड़ो! हमदान अभी-अभी निकला है, वो ज्यादा दूर नहीं गया होगा। पकड़ो उसे!"
साहिर ने दीवार पर बने उस गुप्त स्लाइडिंग पैनल की तरफ इशारा किया, जिसका लॉक सिस्टम हमदान के भागने के बाद आधा खुला रह गया था।
साहिर:
"यह रास्ता सीधा शादी के हॉल की अंडरग्राउंड वीआईपी पार्किंग की तरफ जाता है। उसकी गाड़ी वहीं होगी... निकलो यहाँ से, जल्दी!"
नौशाद ने बिना एक पल गंवाए उस अंधेरी गुप्त सुरंग में छलांग लगा दी। वह पूरी रफ्तार से दौड़ता हुआ कुछ ही सेकंड्स में सीधे वीआईपी पार्किंग एरिया में जा पहुंचा।
जैसे ही नौशाद पार्किंग के बाहर निकला, उसे टायरों की चीखने की तेज़ आवाज़ सुनाई दी। हमदान की बुलेटप्रूफ ब्लैक मर्सिडीज पार्किंग के एग्जिट बैरियर को तोड़ते हुए तूफानी रफ्तार से मेन रोड की तरफ भागी।
नौशाद ने देखा कि पास ही एक गार्ड की हाई-स्पीड हेवी स्पोर्ट्स बाइक खड़ी थी, जिसमें चाबी लगी हुई थी। उसने बिना वक्त गंवाए बाइक स्टार्ट की, एक्सीलरेटर पूरा खींचा और मर्सिडीज के पीछे हवा से बातें करता हुआ निकल पड़ा।
सड़क पर रोंगटे खड़े कर देने वाला चेस शुरू हो गया।
हमदान की कार अंधेरी गलियों और ट्रैफिक को चीरती हुई भाग रही थी। नौशाद ने बाइक की स्पीड 140 के पार पहुंचा दी और अपनी एक हाथ से साइलेंसर वाली पिस्तौल निकालकर कार के पिछले टायरों पर तीन सटीक फायर किए।
ठाँय! ठाँय! ठाँय!
लेकिन गोलियां बुलेटप्रूफ रबर और आर्मर्ड बॉडी से टकराकर चिंगारियां छोड़ती हुई छिटक गईं।
अगले ही मोड़ पर, हमदान के ड्राइवर ने एक भारी कंटेनर ट्रक के ठीक सामने से गाड़ी तेज़ी से काटी। ट्रक का रास्ता ब्लॉक होते ही नौशाद को अपनी बाइक पर इमरजेंसी ब्रेक लगाने पड़े। बाइक फिसलती हुई बची, लेकिन उस दो सेकंड की देरी का फायदा उठाकर हमदान की मर्सिडीज कराची की तंग गलियों के अंधेरे में पूरी तरह ओझल हो गई।
हमदान एक बार फिर हाथ से फिसल चुका था।
नौशाद ने गुस्से में बाइक के हैंडल पर मुक्का मारा। उसकी सांसें फूल रही थीं और टाइमर की सुइयां लगातार उसके खिलाफ भाग रही थीं।