एक अधूरी मुलाकात
शहर के एक छोटे से कॉलेज में आरव पढ़ाई करता था। वह शांत स्वभाव का लड़का था। ज्यादा लोगों से बात नहीं करता था और अपना ज्यादातर समय किताबों में बिताता था। एक दिन कॉलेज की लाइब्रेरी में उसकी मुलाकात एक लड़की से हुई, जिसका नाम सिया था।
सिया हमेशा मुस्कुराती रहती थी। उसकी मुस्कान देखकर आरव के चेहरे पर भी अपने आप मुस्कान आ जाती थी। पहली मुलाकात में दोनों ने सिर्फ कुछ शब्द ही बोले, लेकिन आरव के दिल में सिया के लिए एक खास जगह बन गई।
धीरे-धीरे दोनों रोज लाइब्रेरी में मिलने लगे। कभी किताबों की बात होती, कभी पढ़ाई की, तो कभी अपने सपनों की। आरव को पता चला कि सिया अपने माता-पिता के लिए कुछ बड़ा करना चाहती थी। सिया को भी आरव की सादगी और ईमानदारी बहुत पसंद थी।
एक दिन बारिश बहुत तेज हो रही थी। कॉलेज की छुट्टी हो चुकी थी, लेकिन सिया बस स्टॉप पर अकेली खड़ी थी। आरव ने अपना छाता उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा, “तुम मेरे साथ चल सकती हो।”
सिया मुस्कुराई और बोली, “लेकिन तुम भी तो भीग जाओगे।”
आरव ने हंसकर कहा, “तुम्हें बारिश से बचाना ज्यादा जरूरी है।”
उस दिन दोनों पहली बार लंबे समय तक साथ चले। रास्ते में सिया ने धीरे से कहा, “आरव, अगर जिंदगी में कभी कोई ऐसा इंसान मिले जो बिना किसी मतलब के आपका साथ दे, तो उसे कभी खोना नहीं चाहिए।”
आरव कुछ नहीं बोला। उसके दिल में बहुत कुछ था, लेकिन वह कह नहीं पाया।
समय बीतता गया। कॉलेज खत्म होने वाला था। आरव ने सोचा कि अब वह सिया से अपने दिल की बात कह देगा। लेकिन तभी सिया ने बताया कि उसके पिता की नौकरी दूसरे शहर में लग गई है और उसका पूरा परिवार वहां जाने वाला है।
आरव के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई।
जाने से एक दिन पहले दोनों उसी पुराने पेड़ के नीचे मिले, जहां वे अक्सर बैठकर बातें किया करते थे।
सिया की आंखों में आंसू थे। उसने कहा, “आरव, शायद हमारी कहानी यहीं खत्म हो रही है।”
आरव ने पहली बार अपने दिल की बात कह दी।
“नहीं सिया, मेरी कहानी तुम्हारे जाने से खत्म नहीं होगी। मैं तुमसे प्यार करता हूं।”
सिया कुछ देर चुप रही। फिर उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने कहा, “मैं भी तुमसे प्यार करती हूं। लेकिन मुझे डर है कि दूरी हमें अलग न कर दे।”
आरव ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “अगर प्यार सच्चा हो, तो दूरी सिर्फ रास्ता होती है, मंजिल नहीं।”
अगले दिन सिया अपने परिवार के साथ चली गई। दोनों ने एक-दूसरे से रोज बात करने का वादा किया। शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन कुछ महीनों बाद दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए। फोन कम होने लगे और बातें भी छोटी हो गईं।
आरव ने फिर भी सिया का इंतजार नहीं छोड़ा।
तीन साल बाद एक दिन आरव उसी पुराने कॉलेज के पास से गुजर रहा था। अचानक किसी ने पीछे से उसका नाम पुकारा।
“आरव!”
वह पलटा तो सामने सिया खड़ी थी।
दोनों कुछ पल तक एक-दूसरे को देखते रहे। फिर सिया की आंखों में आंसू आ गए।
“तुमने मेरा इंतजार किया?” उसने पूछा।
आरव मुस्कुराया और बोला, “मैंने कहा था ना, सच्चा प्यार दूरी से खत्म नहीं होता।”
सिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।
उस दिन दोनों ने समझा कि सच्चा प्यार हमेशा आसान नहीं होता। कभी दूरी आती है, कभी इंतजार करना पड़ता है, लेकिन अगर दिल में विश्वास हो तो अधूरी कहानी भी एक दिन पूरी हो सकती है।
और उनकी वह अधूरी मुलाकात, आखिरकार जिंदगी भर की मुलाकात बन गई।
आरव और सिया के संघर्ष बढ़ाइए
अंत को अधिक भावुक बनाइए
मुलाकात का कारण स्पष्ट कीजिए