A Normal Day in Hindi Fiction Stories by M noctis books and stories PDF | A Normal Day

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A Normal Day

सुबह के आठ बजकर सत्रह मिनट हो चुके थे।
कमरे की खिड़की से आती हल्की धूप धीरे-धीरे बिस्तर तक पहुंच रही थी।
नकुल की आंखें खुलीं। कुछ क्षणों तक वह छत को देखता रहा फिर उसने पास रखी घड़ी उठाई।
8:17 AM.
उसका चेहरा बिल्कुल शांत था लेकिन अगले ही पल—
नकुल: "देर हो गई।"

वह बिस्तर से उठ गया। कमरे में ज्यादा सामान नहीं था।
एक साधारण बिस्तर, लकड़ी की अलमारी, किताबों से भरी एक छोटी shelf और खिड़की के पास रखा एक पौधा।
नकुल सीधे bathroom में चला गया।
कुछ देर बाद वह नहाकर बाहर आया।
उसने अपनी शर्ट पहनी, बाल ठीक किए और मेज पर रखी घड़ी बांध ली।
कमरे से निकलने से पहले उसकी नजर कुछ देर के लिए एक पुराने pendant पर पड़ी।
उसने उसे उठाया नहीं बस एक पल देखा।
फिर कमरे से बाहर निकल गया।



************


शहर के एक पुराने लेकिन अच्छे अस्पताल की चौथी मंजिल पर एक कमरा था।
कमरा शांत था, बहुत शांत।
अंदर एक लड़की बिस्तर पर लेटी थी। उसका चेहरा शांत था, आंखें बंद थीं। मशीन की धीमी आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।
बीप...
बीप...
नकुल कमरे में दाखिल हुआ। उसने कुछ नहीं कहा बस कुर्सी खींचकर बिस्तर के पास बैठ गया।

कुछ देर तक वह उसे देखता रहा।
वह लड़की थी—
नैना।
कई वर्षों से coma में।

नकुल ने मेज पर रखे फूलों को ठीक किया।
फिर धीरे से बोला—
नकुल: "सुबह हो गई।"
कोई जवाब नहीं आया।
नकुल को शायद इसकी उम्मीद भी नहीं थी फिर भी वह बोलता रहा।
नकुल: "आज देर से उठा।"
कुछ क्षण रुका।
नकुल: "साढ़े आठ के बाद ऑफिस पहुंचूंगा शायद।"
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
नकुल: "सिया फिर बोलेगी कि मैं काम को गंभीरता से नहीं लेता।"
कमरे में केवल मशीन की आवाज थी।
नकुल की नजर नैना के चेहरे पर गई।
नकुल: "कल एक spirit मिली।"
उसका स्वर थोड़ा धीमा हो गया।
नकुल: "काफी गुस्से में थी।"
वह कुछ देर चुप रहा।
नकुल: "लेकिन आखिर में... शांत हो गई।"
उसने कुर्सी से उठते हुए कहा—
नकुल: "मैं शाम को फिर आऊंगा।"
वह कमरे से बाहर निकल गया।

****



शहर अब पूरी तरह जाग चुका था। सड़क पर गाड़ियों की आवाजें, दुकानदार अपनी दुकानें खोल रहे थे। चाय के ठेलों पर भीड़।
हॉर्न।
लोगों की आवाजें।

इसी भीड़भाड़ वाली सड़क पर एक पुरानी-सी इमारत थी।
उसकी पहली मंजिल पर एक छोटा-सा ऑफिस था।
दरवाजे के ऊपर एक साधारण-सा बोर्ड लगा था।

NAKUL — SPIRITUAL INVESTIGATION

ऑफिस बहुत बड़ा नहीं था लेकिन साफ-सुथरा और elegant था।

अंदर आते ही एक छोटा reception जैसा हिस्सा था दो desks सामने रखे थे एक तरफ किताबों की shelves थीं। कुछ shelves में पुराने artifacts और छोटे spiritual objects रखे थे। दीवार पर शहर का बड़ा नक्शा लगा था। कुछ जगहों पर छोटे pins लगे हुए थे।
पीछे एक छोटा attached kitchen था और एक तरफ दो छोटे sofas थे, जहां टीम अक्सर बैठकर बातें करती थी।
उस समय तक...
सिया और समीर वहां पहुंच चुके थे।
सिया अपनी desk पर बैठी कुछ papers देख रही थी।
समीर kitchen से चाय लेकर बाहर आया।
समीर: "तुम्हारे लिए।"
सिया ने कप लिया।
सिया: "thanks"
समीर अपने लिए दूसरा कप लेकर sofa पर बैठ गया।
कुछ सेकंड दोनों शांत रहे फिर सिया ने घड़ी देखी।

सिया: "नकुल अभी तक नहीं आया।"
समीर ने आराम से चाय पी।

समीर: "आ जाएगा।"

सिया: "आज फिर देर से उठा होगा।"
समीर मुस्कुराया।

समीर: "वो देर से उठता है या बाकी लोग बहुत जल्दी उठते हैं?"
सिया ने उसे देखा।

सिया: "तुम उसका बचाव क्यों कर रहे हो?"

समीर: "मैं किसी का बचाव नहीं कर रहा। बस facts बता रहा हूं।"
सिया हल्का सा मुस्कुराई।
तभी दरवाजा खुला और नकुल अंदर आया।
दोनों ने उसकी तरफ देखा।

सिया: "Good morning."

नकुल: "Morning."

समीर ने घड़ी देखी।
समीर: "आठ बजकर पचपन मिनट।"

नकुल ने उसकी तरफ देखा।
समीर: "बस बता रहा था।"
नकुल ने अपना बैग रखा।

नकुल: "चाय है?"
सिया ने kitchen की तरफ इशारा किया।
सिया: "खुद बना लो।"
नकुल कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
फिर kitchen की तरफ चला गया।

समीर मुस्कुराया।
समीर: "आज mood अच्छा है।"

कुछ देर बाद दरवाजा खुला।
कव्या अंदर आई।
लेकिन इस बार कव्या अकेली नहीं थी। उसके हाथ में एक बहुत बड़ा cardboard box था।
वह उसे दोनों हाथों से पकड़कर चल रही थी।
वेदांत उसके पीछे था और box को दूसरी तरफ से संभाल रहा था।
कव्या: "नकुल!"
Kitchen से नकुल बाहर आया।
उसने box देखा।

नकुल: "आ गया?"
कव्या ने box जमीन पर रखा।

धड़ाम।

कव्या: "हाँ। और तुम्हारा सामान उठाते-उठाते मेरी कमर भी आ गई।"
नकुल box के पास गया।

नकुल: "मैंने इतना सामान नहीं मंगाया था।"

वेदांत ने शांत भाव से कहा—
वेदांत: "तुम्हारी list में इतना ही था।"

कव्या ने तुरंत कहा—
कव्या: "बल्कि इससे ज्यादा था।"

नकुल ने box खोला।
अंदर कई अलग-अलग चीजें थीं।

कुछ spiritual materials, कुछ छोटी bottles, कुछ protective items और कुछ ऐसी चीजें जिन्हें देखकर बाकी लोग भी उत्सुक हो गए।

समीर ने झुककर देखा।
समीर: "ये सब किसलिए है?"

नकुल ने एक सामान उठाया।

नकुल: "काम आएंगी।"

कव्या ने हाथ बांध लिए।
कव्या: "मैंने तीन दुकानों में घूमकर ये सब ढूंढा है।"
नकुल ने सिर उठाकर कहा—
नकुल: "thank you।"
कव्या थोड़ी देर चुप रही।
कव्या: "बस?"
नकुल: "क्या चाहिए?"
कव्या: "कम से कम एक coffee।"
नकुल: "ठीक है।"
कव्या मुस्कुराई।
कव्या: "अब ठीक है।"
वेदांत चुपचाप sofa पर बैठ गया।
समीर ने उसकी तरफ देखा।
समीर: "तुमने box उठाने में मदद क्यों की?"
वेदांत ने सीधा जवाब दिया—
वेदांत: "क्योंकि box भारी था।"
समीर कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
समीर: "बहुत गहरी बात है।"
वेदांत ने उसे देखा।

कुछ देर बाद दरवाजा फिर खुला।
इस बार विवान अंदर आया।
उसके हाथ में फोन था और कंधे पर छोटा bag।
अंदर आते ही उसने सबको देखा।
विवान: "Good morning."
सभी ने जवाब दिया।
विवान सीधे अपनी desk पर गया और laptop खोल लिया।
सिया ने पूछा—
सिया: "आज social media का क्या scene है?"
विवान ने स्क्रीन देखते हुए कहा—
विवान: "कल वाली investigation की photos डालनी हैं।"
समीर तुरंत उसकी तरफ मुड़ा।
समीर: "मेरी photos इस्तेमाल करना।"
विवान: "अगर अच्छी होंगी तो।"
समीर: "मेरी सारी photos अच्छी होती हैं।"
कव्या ने हंसते हुए कहा—
कव्या: "ये camera वाला confidence है?"
समीर ने मुस्कुराकर कहा—
समीर: "Talent।"
विवान ने laptop से नजर उठाई।
विवान: "Delusion।"
समीर ने उसकी तरफ cushion फेंका।
विवान ने आसानी से पकड़ लिया।
सिया ने सिर हिलाया।
सिया: "तुम दोनों कभी बड़े नहीं होगे।"
वेदांत ने शांत स्वर में कहा—
वेदांत: "शायद यही ठीक है।"
सभी कुछ पल के लिए उसकी तरफ देखने लगे।
कव्या मुस्कुराई।
कव्या: "तुम कभी-कभी बहुत अजीब अच्छी बातें बोल देते हो।"
वेदांत ने चाय पी।
वेदांत: "कभी-कभी।"

*******


नकुल अपनी desk पर बैठा था। उसके सामने कुछ files खुली थीं। वह पूरी तरह अपने काम में व्यस्त था।
ऑफिस में बाकी लोग अपनी-अपनी चीजों में लगे थे।
किसी की चाय।
किसी का laptop।
किसी की बातें।
किसी की किताब।
बाहर शहर अपनी रफ्तार से चल रहा था।
अंदर...
उन छह लोगों की अपनी छोटी-सी दुनिया थी।
कोई बड़ा headquarters नहीं।
कोई विशाल organization नहीं।
बस एक छोटा ऑफिस...
और कुछ ऐसे लोग जो सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे थे।
तभी—
टिंग!
नकुल के laptop पर notification आया।
उसने screen देखी।
एक नया email।
Investigation Request.
उसने email खोला।
कुछ पंक्तियां पढ़ीं।
उसकी आंखें गंभीर हो गईं।
सिया ने तुरंत पूछा—
सिया: "क्या हुआ?"
नकुल ने email उनकी तरफ घुमा दिया।

"पिछले कुछ दिनों से हमारे इलाके में असामान्य घटनाएं हो रही हैं। रात के समय लोगों को एक औरत दिखाई देती हैं। कुछ लोगों ने उसे छोटी बच्चियों पर हमला करने की भी बात कही है। कृपया जांच के लिए आएं।"

नीचे location दी हुई थी।
कव्या ने location देखी।

कव्या: "काफी दूर है।"

नकुल ने सिर हिलाया।
फिर उसने टीम की तरफ देखा।
लेकिन इस बार उसने सबको नहीं बुलाया। उसने केवल तीन लोगों की तरफ देखा।
सिया।
कव्या।
वेदांत।
नकुल: "तुम तीनों मेरे साथ चलोगे।"
समीर ने तुरंत सिर उठाया।
समीर: "मैं नहीं?"
नकुल: "तुम्हें कल की footage organize करनी है।"
विवान ने laptop से नजर उठाई।
विवान: "और मुझे?"
नकुल: "Social media और office संभालना है।"
विवान ने सिर हिलाया।
विवान: "ठीक है।"
समीर ने थोड़ा सोचकर कहा—
समीर: "तो अगली बार camera वाला भी चाहिए होगा।"
नकुल ने उसकी तरफ देखा।
नकुल: "अगली बार।"
समीर ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया।
कव्या अपना bag उठाने लगी।
वेदांत ने अपना compass जेब में रखा।
सिया ने अपनी चीजें संभालीं।
नकुल ने laptop बंद किया।
ऑफिस का माहौल कुछ ही मिनटों में फिर बदल गया।
कुछ लोग investigation पर जा रहे थे।
कुछ वहीं रह रहे थे।
लेकिन जाने से पहले नकुल दरवाजे पर रुका।
उसने पीछे मुड़कर अपने छोटे-से ऑफिस को देखा।
विवान फिर laptop पर काम कर रहा था।
समीर camera footage देख रहा था।
कव्या, सिया और वेदांत उसके पीछे खड़े थे।
एक पल के लिए सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगा।
फिर नकुल ने दरवाजा खोला।
नकुल: "चलो।"
तीनों उसके साथ बाहर निकल गए।
दरवाजा बंद हुआ।
और ऑफिस में पीछे रह गए—
समीर और विवान।
विवान ने कुछ सेकंड दरवाजे की तरफ देखा।
फिर समीर की तरफ।
विवान: "चाय?"
समीर ने कैमरे से नजर हटाई।
समीर: "चाय।"
दोनों kitchen की तरफ चले गए।
बाहर शहर अपनी रफ्तार से चल रहा था।
और एक छोटे-से ऑफिस के भीतर...
उनकी साधारण जिंदगी अभी जारी थी।