Srushthi in Hindi Love Stories by Radha books and stories PDF | सृष्टि - 4

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सृष्टि - 4

अभी तक हमने देखा कि सृष्टि ने ध्रुव को पहचान लिया था लेकिन सामने नहीं गयी ओर होटल चली गयी वहां वेद ने अपना काम उसे करने को कहा, ये ही नहीं अनजाने मे ध्रुव भी उसी होटल मे आ गया। वेद ने ज़ब उसका आर्डर लेने को कहा तब वो घबरा गयी कि वो उसे पहचान ना ले वो अपने कदम उसकी ओर बढ़ा ही रही थी तब उसे याद आया कि ज़ब वो मंदिर मे पहली बार मिले थे तब भी उसकी आवाज़ नहीं पहचानी थी उस समय उसे हल्का हल्का जुकाम हो रहा था जिसकी वजह से आवाज़ बदली हुई थी। लेकिन आज पता नहीं क्या होगा वो उसके पास जाकर खड़ी हो गयी ओर पीछे मूड कर देखा कि वेद चला गया क्या, लेकिन वो उसे ही देख रहा था वो आगे देख कुछ बोलने ही वाली थी कि ध्रुव ने बिना उसकी ओर देखे ही अपना आर्डर दे दिया, आर्डर लेकर सृष्टि बिना कुछ बोले वहा से जाने लगी तभी पीछे से ध्रुव ने अपनी नज़रे ऊपर उठायी वो उसे जाता हुआ देख कर वापिस फ़ोन चलाने लग गया ऐसे ही अपना काम ख़तम कर सृष्टि अपने घर गयी

      देर रात हो गयी थी सृष्टि सोने कि कोशिश कर रही थी लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी वो लगातार करवटे बदल रही थी फिर परेशान होकर बालकनी पर जाकर बैठ गयी ओर उसी बगीचे मे नज़र गयी आज भी ध्रुव उसी बेंच पर बैठा हुआ और आसमान कि तरफ देख रहा था लेकिन पल पल मे फ़ोन कि तरफ देख रहा था जैसे किसी चीज का इंतज़ार कर रहा हो।  सृष्टि भी उसी ओर देखे जा रही थी उसे वो पुराने पल याद आने लगे।

        आज से 2 साल पहले ज़ब सृष्टि अपने गांव रहती थी गाव मे वो अपने मम्मी पापा ओर आदी के साथ रहती थी उसके पापा एक प्राइमरी टीचर थे ओर मम्मी सिलाई करती थी गांव कि ही ओरतों के व्यवहारिक कपडे सिलती थी सृष्टि स्कूल जाती थी ओर आदी का ख्याल रखती थी आज उसका 12th का रिजल्ट आये था उसने अच्छे नम्बरों से स्कूल पास की थी उसके पापा उसके लिए नया फ़ोन लाये थे वो आज तक मम्मी पापा के फ़ोन का ही थी। अपना नया फ़ोन लेकर वो बहुत खुश थी उसने अपनी सारे दोस्तों को फ़ोन कर करके अनजान बन कर बाते कर रही थी।

            रात के 9 बज रहे थे सृष्टि को याद आया की उसे अपनी बेस्ट फ्रेंड को कॉल करके ऐसे ही चिढ़ाना चाहिए उसने जल्दी जल्दी मे मम्मी के फ़ोन से न. लिए। उसे कॉल किया और अपना गला साफ किया फिर बोली - नमस्ते !!  सामने से कोई आवाज़ नहीं आयी उसने दुबारा बोला - हैल्लो, कोई है क्या?? फिर से कोई आवाज़ नहीं आयी  उसने दुबारा चिढ़ाते हुए बोला - हैल्लो, सायद तुम मुझे नहीं जानती लेकिन मै तुम्हें बहुत अच्छे से जानती हुँ तुम रोशनी हो ना?? तभी सामने से बिल्कुल धीरे से मर्दाना आवाज़ आयी - नहीं।

मै घबरा गयी फिर मुझे लगा शायद मेने गलत सुन लिया होगा, आवाज़ को नज़रअंदाज़ करके मैंने फिर बोला - रोशनी तुम्हें पता है तुम्हारा जो बॉयफ्रेंड है ना,  वो तुम्हें धोका दे रहा है वो मेरे भी पीछे भी पड़ा हुआ है कहता है की वो मेरे लिए तुम्हें छोड़ देगा इसलिए अपने उस लड़के को समझा ले। फिर वो सामने से बोलने का इंतज़ार करने लगी तभी एक आवाज़ गुंजी - हैल्लो….. कौन ??

अचानक उसकी आवाज़ सुन मेरे शरीर मे ऐसा करंट का झटका लगा की मै अपना होश खो बैठी। मैंने अपना कान से हटाकर अपने दिल से लगा लिया जो बहुत तेज़ी से धड़क रहा था फ़ोन पर उसकी तीखी आवाज़ सीधा मेरे दिल को चीर कर गहराई मे प्रवेश कर गयी। ऐसा मेरी लाइफ मे पहली बार हुआ था मुझे आज तक कोई लड़का पसंद नहीं आया लेकिन उसकी आवाज़ मे पता नहीं क्या था  मैंने अपने आप को संभाला और न. को दुबारा देखा। मैंने नंबर लगाते समय एक नम्बर गलत लगा दिया था  मैंने अपनी गलती सुधारते हुए दुबारा अपना फ़ोन अपने कान पर लगाया और जैसे ही रॉंग नंबर बोलने वाली थी उससे पहले ही उसने दुबारा बोला - मुझे माफ करना अगर आपको बुरा लगे तो लेकिन आपका दिल बहुत तेज़ धड़क रहा है  साफ सुनाई दे रहा है और आपकी आवाज़ बहुत स्वीट है। ऐसा लगा जैसे सुनते ही जाओ।

एक पल के लिए मुझे लगा की ये मेरी फीलिंग्स के बारे मे बोल रहा है मै कुछ बोल नहीं पायी।फिर उसने दुबारा बोला - मुझे माफ कर देना मेरा कोई गलत इरादा नहीं है मुझे जो लगा वो बोल दिया बस। इतना बोल कर वो रुक सा गया जैसे वो इंतज़ार कर रहा हो की सामने से दुबारा वो आवाज़ आये। मैंने बात को काटते हुए रॉंग नंबर बोला और जैसे ही कॉल कट करने लगी तभी सामने से सुकून से भरी लम्बी आह की आवाज़ सुनाई दी जैसे की उसे जो चाहिए हो वो मिल गया हो और कॉल कट !!


क्रमश: .......





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