Mafia saiya chapter 7 in Hindi Love Stories by Shilpi Mishra books and stories PDF | Mafia saiya chapter 7

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Mafia saiya chapter 7



अध्याय 7 : रुद्र का बचपन का पागल प्यार में

"आराध्या? मेरी बड़ी बहन?" नित्या की आँखें फटी की फटी रह गईं।

"मेरी बहन तो 5 साल पहले गायब हो गई थी! पुलिस ने कहा था वो नदी में डूब गई! तुम झूठ बोल रहे हो!"

रुद्र ने खिड़की के पास जाकर एक पुरानी फोटो निकाली। धूल भरी हुई फोटो।

उसने फोटो नित्या के सामने फेंकी।

फोटो में 12 साल का एक लड़का और 10 साल की दो जुड़वां लड़कियां। एक स्कूल ड्रेस में हंस रही थी। दूसरी थोड़ी सहमी हुई।

"पहचान इसे?" रुद्र ने कहा।

नित्या ने फोटो देखी और उसका दिल बैठ गया। वो लड़कियां... वो वो और उसकी बड़ी बहन आराध्या ही थीं। और वो लड़का...

"ये... ये तुम हो?" नित्या ने रुद्र को देखा।

"हाँ मैं हूँ। 12 साल का रुद्र।" रुद्र की आँखों में बचपन का दर्द लौट आया। "तुझे याद है? कक्षा 5... स्कूल... रायपुर... एक लड़का रोज तुम्हें अपना टिफिन देता था। तुम उसे 'कल्लू' कहकर चिढ़ाती थी क्योंकि वो काला था, मोटा था।"

नित्या को धुंधली सी याद आई। हाँ, एक लड़का था... जो हमेशा उसका होमवर्क करता था।

"तुम... तुम वही कल्लू हो?"

"कल्लू नहीं... रुद्र।" रुद्र चिल्लाया। "मैंने अपना नाम, अपना चेहरा, सब बदल दिया तेरे लिए! ताकि तू मुझे पसंद करे! मैंने जिम किया, बिजनेस बनाया, पूरा रायपुर मेरे नाम से कांपता है... सिर्फ इसलिए कि एक दिन तू मुझे देखे और कहे - हाँ मैं तुझसे प्यार करती हूँ!"

नित्या पीछे हट गई।

"पर 5 साल पहले क्या हुआ... मैं तुझे लेने आया था तेरे घर। देखा तो दो लड़कियां एक जैसी। मुझे लगा आराध्या तू है। क्योंकि उस दिन तूने आराध्या की ड्रेस पहनी थी। मैं उसे उठा ले गया।"

रुद्र जमीन पर बैठ गया। पहली बार उसकी आँखों में आँसू थे।

"बाद में पता चला वो तू नहीं है। वो तेरी बहन है। पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अगर मैं उसे छोड़ता, तो वो पुलिस को सब बता देती। इसलिए मुझे उसे तहखाने में रखना पड़ा।"

नित्या का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने रुद्र का कॉलर पकड़ा।

"तुमने मेरी बहन की जिंदगी बर्बाद कर दी! 5 साल से वो अंधेरे में है! तुम इंसान हो या जानवर?"

रुद्र ने उसका हाथ पकड़ा और अपने दिल पर रखा।

"जानवर हूँ। तेरे प्यार में जानवर बन गया हूँ। पर अब... अब तू आ गई है। अब मैं आराध्या को छोड़ दूंगा। सच में।"

"सच में छोड़ दोगे?" नित्या को उम्मीद जगी।

"हाँ, एक शर्त पर।" रुद्र ने उसके आँसू पोंछे। "तुझे मेरे साथ एक महीने तक... एक अच्छी बीवी बनकर रहना होगा। मेरे साथ हंसना, मेरे साथ खाना, मेरे साथ... सोना भी। अगर एक महीने में तुझे मुझसे प्यार नहीं हुआ... तो मैं तुम दोनों बहनों को छोड़ दूंगा। और खुद को गोली मार लूंगा।"

नित्या सोच में पड़ गई। एक तरफ बहन की जिंदगी, दूसरी तरफ इस पागल आशिक के साथ एक महीना।

"सोच ले।" रुद्र ने कहा। "सुबह तक का टाइम है तेरे पास।"

इतना कहकर रुद्र बाथरूम में चला गया।

नित्या अकेली बेड पर बैठी थी। उसके दिमाग में एक ही ख्याल था - कैसे बचाए अपनी बहन को?

तभी उसकी नजर रुद्र के उतारे हुए कुर्ते पर पड़ी। कुर्ते की जेब से एक चाबी झांक रही थी।

*तहखाने की चाबी!*

नित्या ने धीरे से चाबी निकाली। उसका दिल जोर से धड़क रहा था।

बाथरूम से पानी की आवाज आ रही थी। रुद्र नहा रहा था।

यही मौका था!

नित्या दबे पांव दरवाजा खोलकर तहखाने की तरफ भागी।

तहखाने का ताला खोला। अंदर गई।

आराध्या अभी भी वहीं बंधी थी।

"दीदी!" नित्या ने उसे खोला।

"नित्या तू फिर आ गई? भाग जा! वो आ जाएगा!"

"मैं तुम्हें लेने आई हूँ दीदी! चलो!"

नित्या ने आराध्या का हाथ पकड़ा और दोनों ऊपर आने लगीं।

जैसे ही वो आखिरी सीढ़ी पर पहुँचीं...

सामने रुद्र खड़ा था। सिर्फ टॉवल में। गीले बाल, गुस्से से लाल आँखें, और हाथ में बंदूक।

उसने बंदूक सीधा आराध्या पर तान दी।

*"मैंने कहा था ना... मेरे साथ गद्दारी मत करना, बीवी।"*

*अगले अध्याय में क्या होगा?*

क्या रुद्र आराध्या को गोली मार देगा? क्या नित्या अपनी बहन को बचाने के लिए रुद्र के सामने घुटने टेकेगी? और एक महीने की बीवी बनने की शर्त का क्या होगा?

जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 8 : एक महीने की बीवी का सौदा