प्रकरण - 14 : इतना कुछ करने के बाद भी मैं स्वस्थ महसूस नहीं कर पाया था. यह देखकर ओपरेटर काजल ने मुझे इंटर कोम मे बताया था." आप के घर से फोन आया था. आप के पिताजी की तबियत ख़राब हो गई हैं. आप क़ो फ़ौरन घर बुलाया है. "और मैं सुशील भाई की अनुमति लेकर तुरंत ओफिस से निकल गया था.काजल और ' कीसी ' ने पिताजी की तबियत के बहाने मुझे ओफिस से दूर किया था. मेरा मूड भी ठीक नहीं हुआ था. इस स्थिति मे मुझे माहौल बदलने की जरूरत थी. में किसी को परेशान नहीं करना चाहता था. इस लिये मैं सीधा जाकर थियेटर मे बैठ गया था.सामने परदे पर फ़िल्म प्रदर्शित हो रही थी.. उस मे कया दिखाया जा रहा था? उस के बारे मे मुझे कुछ पता नहीं था. मैं आँखे मुंदकर फ़िल्म खत्म होने तक सिनेमा हॉल में चुपचाप बैठा रहा था., मेरी आँखे नम हो गई थी.फ़िल्म पूरी होने के बाद मैं ' कीसी' को मिलना चाहता था. उस के इंतजार में एक घंटा बगीचे में बिताया था.उस के घर पहुंचने के बाद मैं उसे मिलने गया था. काफ़ी कुछ बातें हुई थी. सारे गीले शिकवे दूर हो गये थे. परमेश्वर घर में नहीं था. वह अच्छा था. मैं उसे कुछ भी बताकर परेशान करना नहीं चाहता था.मेरी जो स्थिति थी उस से ओफिस में लोगो को चर्चा का विषय मिल गया था.' कीसी ' को मैंने पूछा था. "तुम्हे तो किशन से प्रोब्लेम हुआ था. फिर भी ऐसा कया हो गया? जो तुमने इतनी जल्दी उस से सुलह कर ली. "उस पर ' कीसी' ने खुलासा किया था." वह मेरे लिये दूसरे जोब की ओफर लाया था. इस के लिये मैं उस के बारे बात चीत कर रही थी. "मैंने उस की बात मान ली थी.लेकिन वह क्यों ' कीसी' पर इतना मेहरबान हो रहा था? यह बात मेरी समझ से बाहर हो रही थी.काजल के साथ किशन को भी हमारे रिश्ते से दिक्कत हो रही थी. मैं रोज उस के साथ आता था. उस बात को लेकर किशनने मुझे सवाल किया था." आप फ्लोरा के साथ आते जाते हो. उस के बारे में आप की बीवी को पता है? "उस ने जिस अंदाज से सवाल किया था. उस से एक बात साफ हो गई थी. उसे हमारे रिश्ते को लेकर कुछ संशय हो रहा था.हमारी ओफिस में उस के जैसे कई लोग थे जिसे मैं बिल्कुल पसंद नहीं करता था. वैसी दो व्यकित थी.एक तो पूजा का भाई रामन्ना और दूसरा रायजी . वह दोनो दुनिया की आठवीं अजायबी थेरायजी तो ओफिस का जीता जागता समाचार पत्र था.. वह ओफिस में होने वाली हर कोई चीज पर सी सी टी वी जैसी नजर रखता था. क़ोई भी बात उस की नजर से छटकती नहीं थी.उस की एक ओर विशेषता रही थी. वह ज़ब भी किसी से फोन पर बात करता था. वह अपनी पहचान देते हुए कहता था." रायजी हियर. "वह हर किसी पर नजर रखता था. मीठी मीठी बातें कर के सब की बातें जानने, सुनने में व्यस्त रहता था. और दूसरी और कम पगार मिलता हैं, ऐसा आलाप छेड़कर रोजाना मैनेजमेंट के सामने रोना रोता था. लोगो की कुठली कर के अपनी जेब भरता था.धीमन्त कुमार कंपनी के जूनियर पार्टनर थे. उन्हें धंधे के अलावा दूसरी छोटी मोटी चीजों में ज्यादा दिलचस्पी थी. उन के साथ उन की तलाक सुदा बहन भी ओफिस में सम्मिलित थी.वह ओफिस में इधर उधर चककर लगाती रहती थी. और कौन कितना पानी पीता हैं? , बाथरूम जाता हैं? चाय पीता हैं, किस से बात करता हैं? कितना काम करता हैं? उस का हवाला अपने भाई को देती थी. और भाई भी अपनी बहन का अनुकरण करता था.रायजी कंपनी का जीता जागता न्यूज पेपर था. धीमन्त कुमार का जासूस था. सब के बारे में हवाला देकर वह मानो वह अपनी जेब गर्म करता था. किशन उस का काउंटर पार्ट था. वह भी उसी लाइन पर चलता था.उस के अलावा एक मेरी ही कक्षा का ओफिसर था. वह अकाउंट डिपार्टमेंट का हेड था जिस की हैसियत एक मामूली क्लार्क से विशेष नहीं थी.ओफिस के सभी सदस्य मुझे मानते थे. मैं उन का ख्याल रखता था.मैं ज़ब ओफिस में आया तो मुझे मामूली समजकर रामन्ना ने मुज पर रोब जमाने की गुस्ताखी की थी. तब मैंने उसे बूरी तरह झाड दिया था. उस के अहम को कुचल कर रख दिया था. वह मेरी पीठ के पीछे कुछ न कुछ चित्र विचित्र हरकते करते रहता था. धीमन्त कुमार को भड़काने की कोशिश करता था. लेकिन वह मेरा स्वभाव जानते थे. इस लिये उस ने मुझे छेड़ने की कभी कोशिश नहीं की थी. वह मेरे और ' कीसी' के रिश्ते को लेकर धीमन्त कुमार के कान भरता रहता था. . संजोग कहो या मजबूरी, उसे रामन्ना के बाजू के टेबल पर बैठना पड़ता था. उस की हर मूवमेंट पर रामन्ना कड़ी नजर रखता था.मैं काम के बहाने ' कीसी ' के पास जाता था. मैं उसे ' कीसी ' कहकर बुलाता था, यह बात भी रामन्ना को खटकती थी. वह हर किसी चीज का सारा हवाला मिर्च मसाले के साथ धीमन्त कुमार को बताता था.उस पर उन्हों ने कमेंट्स किये थे:" ओफिस में शिस्त जैसी क़ोई चीज नहीं हैं. "यह सुनकर मेरा गुस्सा लावा बन गया था. फिर भी मैंने अपने आप को चुप रखा था.उसी दौरान ओफिस में एक नई बात हुई थी.कुछ लोगो ने ओफिस में लाइब्रेरी चालू करने का सुझाव दिया था.उस का जिम्मा ' कीसी' ने उठाया था. जो उस के लिये एक बड़ा अपराध साबित हुआ था.ओफिस के सब लोग मेगेझिन या किताब बदलने के बहाने किसी भी वक़्त ' कीसी' के टेबल के पास जमा हो जाते थे. जिस वजह से उस की इमेज़ को चोट पहुंचती थी.धीमन्त कुमार ने उसे बुलाकर कहां था." तुम्हारी वजह से ओफिस में हर क़ोई अपनी मनमानी करने लगे हैं. किसी को कायदा क़ानून से कुछ लेना देना ही नहीं रहा हैं! "उस पर ' कीसी' ने उस का मुंह तोड़ लिया था.तब से वह ' कीसी' को जोब से बेदखल करने के लिये उतारू हो गया था. लेकिन कोई ठोस वजह नहीं मिलने कारण विवश, मजबूर हो गया था.किशनने सब से पहले धीमन्त कुमार के सामने धड़ाका किया था." सर! फ्लोरा प्रेग्नेंट हैं. उस को डिलीवरी के लिये लंबी छुट्टी देनी पड़ेगी. पगार भी देना पड़ेगा. "उन्ही दिनों किशन के जरिये धीमन्त कुमार ने अफवाह का बाजार गर्म किया था." धंधा टूट रहा हैं. कंपनी कुछ लोगो को निकालने वाली हैं. "अजंता से लौटने समय फ्लोरा ' कीसी' अतीत की यादो में खो गई थी.सुबह आठ बजे के इर्द गिर्द हम लोग गेट वे ओफ इंडिया पहुंचे थे. और रात नौ बजे घर लौटे थे.000000000 ( क्रमशः ): प्रकरण - 15 : घर पहुंचते ही मैंने परमेश्वर क़ो पूछा था." ठीक से घर पहुंच गये ना? "" हा! संभव भैया? और आप?? "" हम भी. "थकान तो बहुत महसूस हो रही थी लेकिन कीसी और परमेश्वर की यादों ने सारी थकान मिटा दी थी.सुबह समय पर उठकर ऑफिस जाने के तैयार हो गया था. रोज की 9-35 की गाड़ी पकड कर 10-10 के आसपास चर्च गेट स्टेशन पऱ उतरा था. और रोज की तरह कीसी का OCM बैनर के नीचे ऊस का इंतजार कर के खड़ा रह गया था . करीब करीब 10 मिनिट राह देखकर मैं बस स्टोप की ओर अकेला ही चल पडा था.तब यह ख्याल आया था. शायद कीसी थक गई होगी. इस लिये शायद वह नहीं आयेगी.दो मिनिट में मैं बस स्टोप पहुंच गया था..एक साथ दो बसें ख़डी थी. मुझे पिछली बस मे चढने क़ो मिल गया था.दोनों बसें आगे जाकर सिग्नल पर रुक गई थी. ऊस वक़्त मेरी नजर दूसरी बस मे ख़डी ' कीसी ' पर पड़ी थी. आज कैसे भगवान ने हमें नहीं मिलाया? मेरे दिमाग़ मे सवाल हुआ था.