Tezabi barish in Hindi Drama by Neha Agarwal Neh books and stories PDF | तेजाबी बारिश

Featured Books
  • Do you Love Me - 1

    Episode 1: The First QuestionThe college campus was full of...

  • Beyond His Memory

    Once upon a time, in a small village, lived a young woman na...

  • Parents

    The Two LampsIn a small village near an ancient temple, ther...

  • Lakshmi Amma - 2

    Sumit had gradually accepted the strange comfort of being ca...

  • Specialz - 3

    S- Such a b- big amount!W- Why would master g- give me?This...

Categories
Share

तेजाबी बारिश

" तेजाबी बारिश "

" सुनिए आपके पास फिजिक्स के नोट्स होगें क्या, मैनें सब से पूछ लिया है पर सबने कहा सिर्फ आप मेरी मदद कर सकते है । "

" अच्छा जी सबने कहा और आपने मान लिया, वैसे आपको क्यों लगा की मैं अपनी मेहनत आपके हवाले कर दूँगा, आप जैसी लड़कियों की यहीं परेशानी है, खुद तो कॉलेज आयेगी नहीं और फिर भोली सूरत बना कर मदद ले लेगी । सॉरी पर मैं आपकी मदद नहीं कर सकता । "

सीमा को टका सा जवाब देकर समय कैन्टीन की तरफ चल दिया ।

कैन्टीन में उसके दोस्तों का हुजूम आज बेहद शान्त था उसे बहुत आश्चर्य हुआ, क्योंकि जब सब मिल जाते थे तो सुनामी आना तो पक्की थी । बेहद हैरान होते हुये समय ने एक दोस्त के कन्धे पर हाथ रखा और बोला ।

" क्या हुआ मेरे शेरों आज महफिल मे उदासी क्यों घुली हुयी है । "

समय की बात सुनकर उसका सबसे अच्छा दोस्त निर्णय बोला,

" अरे तुझे नहीं पता, सीमा की माँ बहुत बीमार रहने के बाद आखिरकार कुछ दिन पहले दुनिया को अलविदा कह गयी, बेचारी इसलिए बहुत दिन से कॉलेज नहीं आ रही थी, हम सब को भी आज ही पता लगा । अफसोस की किसी को भी इस बात की भनक भी नहीं लगी । "

निर्णय की बात सुनकर समय को झटका लगा, और वो वापस क्लास की तरफ भागा, पीछे से सब दोस्त अवाज ही लगाते रह गये, कोई समझ नहीं पाया की समय को हुआ क्या है ।

समय ने क्लास में जाकर देखा पर सीमा उसे कहीं नहीं दिखी, तो उसने क्लास में सबसे पूछा कि किसी को पता है क्या, की सीमा कहाँ है ।

तभी एक लड़की बोली, मैनें उसे लाइब्रेरी की तरफ जाते हुये देखा था ।

उस लड़की की बात सुनकर समय लाइब्रेरी की तरफ उड़ चला ।

लाइब्रेरी के शान्त माहौल में सीमा बहुत सी किताबों के अम्बार में उलझी हुई थी । परेशानी की लकीरें उसके माथे पर चमक रहीं थी । समय हौले से सीमा के पास गया और अपनी नोटबुक उसकी तरफ बढ़ाते हुये बोला ।

" मुझे माफ कर दो सीमा मैं नहीं जानता था की तुम क्यों कॉलेज नहीं आ रही हो, आगे भी पढ़ाई में कोई भी मदद चाहिए हो तो बेझिझक बताना । "

समय की बात सुनकर सीमा ने भीगी पलकों को उठाकर समय को देखा और हौले से मुस्कुरा दी पर बोली कुछ नहीं, पता नहीं क्या था उन भीगी आँखो में समय हिप्नोटाइज हो गया था, उसने एक बार उन गहरी नीली आँखो को देखा और लाइब्रेरी से बाहर निकल गया ।

अब अक्सर समय और सीमा की निगाहें आपस में टकरा जाती थी, ना समय कुछ कहता ना सीमा, पर समय का दिल उससे बगावत करनें लगा था । सीमा की खुशी के लिए चुपके-चुपके वो जो कर सकता था करता था,

पर सीमा की मुस्कुराहट हमेशा भीगी पलकों के साथ ही होती थी । शायद कोई चुम्बक था उसकी आँखो में जो समय को अपनी तरफ खींच रहा था । दोनों के बीच कोई अनुबंध नहीं था । पर जब भी सीमा किसी परेशानी में होती समय हमेशा उसके साथ खड़ा होता था ।

कई बार समय ने सोचा की अपने दिल की हालत सीमा को बताये पर सीमा के सामने आने पर लफ्ज़ साथ देने की जहमत ही नहीं उठाते थे । वक्त बीतता गया और कॉलेज का आखिरी साल भी आ गया ।

समय ने सोच लिया था की अब वो वक्त को अपने हाथों से फिसलने नहीं देगा । हर हाल में अपने दिल के हालात सीमा पर जाहिर कर देगा।

पक्का इरादा करके जब वो आज कॉलेज आया तो ठगा सा रह गया हर तरफ सीमा की शादी के चर्चे थे ।

समय के काधें पर हाथ रखता हुआ निर्णय बोला ।

" समय तूने सुना सीमा ने कितना लम्बा हाथ मारा है, हम सब उसे कितना मासूम समझते थे । पर वो तो बहुत चालक निकली,

पता है अपनी पढ़ाई भी अधूरी छोड़ रही है, अगले हफ्ते ही उसकी शादी है, सुना है लड़का बहुत अमीर है । "

निर्णय की बात सुनकर समय को लगा जैसे किसी ने उसे एवरेस्ट की चोटी से धक्का दे दिया हो अभी तो उसके दिल के मौसम में बहार आयी भी नहीं थी की पतझड़ ने दस्तक दे दी । आँखो आँखो में ही सही पर समय को लगता था की सीमा भी उससे प्यार करती है आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा था वो

समय कॉलेज से तुरन्त ही बाहर आ गया था । वो कदम कहीं रख रहा था पर उसके पैर कहीं पड़ रहे थे, दो बार तो उसका एक्सिडेंट होते होते बचा । उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका पूरा वजूद तेजाबी बारिश मे झुलस रहा हो । आगे सिर्फ एक गहरी खाई ही नजर आ रही थी, जहाँ वो खुद को लापता कर देना चाहता था ।

जैसे तैसे घर पहुंच कर समय ने खुद को कमरें में बन्द कर लिया । घर वालें हर कोशिश करके हार गये पर समय ने पूरा दिन दरवाजा नहीं खोला ।

नफरत की आग उसके जहन में धधक रही थी समय ने सोच लिया था । अगर सीमा उसकी नहीं हो सकती तो वो किसी की भी नहीं हो सकती । एक बेहद खतरनाक ख्याल उसके जहन में जन्म ले रहा था ।

अगली ही सुबह उसने तेजाब की दो बॉटल खरीद ली और अपनी नफरत की आग को बुझाने चल दिया । कॉलेज के बाहर ही उसे सीमा नजर आ गयी ।

सीमा को देखकर समय ने सोचा आज जरूर उसकी आँखो में खुशी की चमक होगी । मैं उन आँखो की रोशनी ही छीन लूँगा, जो किसी और के लिए जगमगा रहीं होगी, सीमा समय के करीब आती जा रही थी । और समय की पकड़ तेजाब की बॉटल पर बढ़ती जा रही थी ।

धीरे धीरे पल गुजर रहे थे .एक ... दो.... तीन..... चार......

और फिर....

सीमा समय के पास से गुजर गयी । समय ने अपना बैग कूड़ेदान में डाला और घर वापस आ गया ।

वो समझ गया था की वो चाह कर भी सीमा के साथ कुछ बुरा नहीं कर सकता था।

उसने सीमा से सच्चा प्यार किया था । और जहाँ प्यार होता है वहाँ नफरत हो ही नहीं सकती । वो कैसे सीमा पर तेजाब फेंक सकता था, जबकि वो तो उसकी भीगी हुई पलकों को भी बर्दाश्त नहीं कर पाता था ।

कुछ दिन दिल को समझा कर आखिरकार वो कॉलेज आ ही गया, कुछ कर्ज तो माँ बाप के भी अदा करने थे ना, , , ,

कॉलेज के बगीचे में कुछ लड़किया आपस में कानाफूसी कर रहीं थी, फिजाओं में सीमा का नाम सरसरता सुन समय के कदम ठिठक गये ।

" सीमा कितनी बदनसीब है हम सब को लग रहा था वो अपनी खुशी से शादी कर रहीं है, पर वो तो अपने बीमार बाप को खुश देखना चाहती थी । पता है अपने कॉलेज में ही कोई था, जिसे वो दिलोजान से चाहती थी । पर उसके लिए अपने पापा से बढ़कर अपनी खुशी नहीं थी । "

" तभी तो जब वो आखिरी बार कॉलेज आयी थी । उसमें आँखों में आँसू झिलमिला रहें थे, कोशिश की थी मैनें पर खुशियों का इन्द्रधनुष उसके चेहरे पर नहीं मिला मिलता भी कैसे वो तो अपनी खुशिया यहीं कॉलेज में छोड़ गयी पता नहीं कौन था वो खुशनसीब ... जिस पर सीमा दिलो जान से मरती थी । "

" नेहा अग्रवाल नेह "