भरोसा-- अनोखी प्रेम कथा - (भाग 2) in Hindi Love Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | भरोसा-- अनोखी प्रेम कथा - (भाग 2)

भरोसा-- अनोखी प्रेम कथा - (भाग 2)

जैसा निकाह से पहले नाज़िया ने सुना था,निकाह के बाद ठीक वैसा ही  शौहर को पाया था।आजकल के युवकों को शराब,सिगरेट, गुटके की लत लग जाती है।लेजिन वह इन सब बुराइयों से दूर था।वह बेहद शरीफ और सच्चा इंसान था।वह नाज़िया जैसी सूंदर बीबी पाकर बेहद खुश था।वह उसे बहुत चाहता था।प्यार करता था और उसका ख्याल रखता था।उसकी हर ख्वाहिश को पूरी करने के लिए हमेशा तैयार रहता था।नाज़िया भी शरीफ, जहीन प्यार करने वाला शौहर पाकर बेहद खुश थी।उसके दिन हंसते खेलते गुज़र रहे थे।लेकिन न जाने किसकी नज़र लग गई।
निकाह के साल भर बाद ही शौहर के व्यवहार में अचानक परिवर्तन आने लगा।पहले आफिस से छुट्टी होते ही सीधा घर आता था।लेकिन अब देर से आने लगा।नाज़िया देर से आने का कारण पूछती तो कोई न कोई बहाना बना देता।इतवार को आफिस की छुट्टी रहती थी।पहले छुट्टी के दिन वह घर पर ही रहता।अगर  कंही जाना होता ,तो वह नाज़िया को साथ लिए बिना नही जाता था।लेकिन अब छुट्टी वाले दिन अकेला ही घर से जाने लगा था।
शौहर में अचानक आये परिवर्तन का कारण उसकी समझ मे नही आया था।शायद समझ मे आता भी नही।अगर एक दिन चोरी छिपे पति को फोन पर बाते करते न सुन लेती।वह किससे बाते कर रहा था?मौका मिलने पर उसने शौहर का मोबाइल चेक किया तो पता चला।वह आयशा नाम की किसी औरत से बाते कर रहा था।
आयशा नाम ने नाज़िया  के दिमाग मे शक का बीज बो दिया।कौन है आयशा?नाज़िया ने खोज बिन की तो पता चला।उसके शौहर का साथ काम करने वाली आयशा से चक्कर चल रहा है।हकीकत जानकर नाज़िया ने शौहर से साफ शब्दो मे कहा,"शादी शुदा मर्द का पराई औरत से इश्क़ लड़ना सही नहीं है।"
"मैआयशा से प्यार करता हूँ।"बीबी कु बात सुनकर नसीम भी अपने प्यार का इज़हार करते हुए बोला,"मैआयशा के बिना नही रह सकता।"
"मतलब,"शौहर की बात सुनकर नाज़िया बोली,"कहना क्या चाहते हो।"
"मैआयशा से निकाह करना चाहता हूँ।"
"क्या?"शौहर की बात सुनकर नाज़िया चोंकते हुए बोली,"जानते हो क्या कह रहे ह?/मै तुम्हारी बीबी हूँ।
एक बीबी के होते दूसरा निकाह?"
"हमारे धर्म मे मर्द को चार शादी करने की छूट है।"
"मतलब तुम मेरी सौतन लाना चाहते हो?"
"आयशा को तुम्हारी सौतन बनने में कोई ऐतराज नही है।"
"उसे न हो,लेकिन मुझे ऐतराज है।"
"नाज़िया,आयशा के इस घर मे आने से तुम्हे  कोई परेशानी नही होगी।तुम मेरी बीबी हो और रहोगी।तुम्हारे हक कम नही होंगे।तुम उसे अपनी कनीज बना लो।वह तुम्हारी खूब सेवा करेगी।तुम बेगम बनकर राज करोगी।"नसीम ने बीबी को समझाया था
"मै दूसरी औरत को अपने घर या जिंदगी में हरगिज नही आने दूँगी।"
"यह तुम्हारा आखरी फैसला है?"
"हॉ"नाज़िया दृढ़ता से बोली थी।
"अगर तुम्हारा यही फैसला है तो, मेरा फैसला भी सुन लो।मै तुम्हे इसी समय तलाक देता हूँ।"
और उसने तीन बार तलाक बोल दिया था।
जो शौहर नाज़िया को जी जान से चाहता था।प्यार करता था।और जिसके बिना एक पल नही रह सकता था।जी नाज़िया उसकी जिंदगी थी।उसी नाज़िया को दूसरी औरत को अपना बनाने के लिए अपनी जिंदगी से हमेशा के लिए निकालने में एक क्षण की भी देर नही लगाई थी।
जब नसीम ने तलाक दे दिया,तो फिर नाज़िया क्या करती?

(क्रमशः
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