भरोसा- -अनोखी प्रेम कथा (भाग 3) in Hindi Love Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | भरोसा- -अनोखी प्रेम कथा (भाग 3)

भरोसा- -अनोखी प्रेम कथा (भाग 3)

वह जाती तो कहा जाती?वह अपने अब्बा के पास लौट आयी।तलाक की बात सुनकर रहीस बहुत दुखी हुआ।पर कर कुछ नही सकता था।उसके धर्म मे ऐसा करना जायज था।मर्द को अख्तियार था कि तीन बार तलाक़ बोलकर बीबी से रिश्ता तोड़ सकता था।
तलाक से नाज़िया का  दिल टूट गया। वह उदास, गुमसुम रहने लगी।बेटी के दुख से रहीस भी दुखी था।लेकिन दुखी रहकर  कुछ हासिल   होने वाला नही  था।
नाज़िया अभी जवान  थी।पूरी जिंदगी उसके सामने पड़ी थी।जिंदगी के लंबे सफर को तय करने के लििि मर्द औरत को हमसफर की ज़रूरत    होती है। इसीलिए निकाह करते है।   रहीस ने बेटी का दूसरा निकाह करने का  फैसला लिया।उसने बेटी से बात की तोो वह बोली,"मुझे दूसरे निकाह से ऐतराज नहीं, लेकिन मै दूसरा निकाह किसी हिन्दू मर्द से ही करूंगी।"
"बेटी यह तू क्या कह रही है?"बेटी की बात सुनकर रहीस आश्चर्य से बोला,"क्या हमारे धर्म मे मर्दो का अकाल पड़ गया है जो तू एक हिन्दू मर्द को अपना शौहर बनाना चाहती है?"
"अब्बा हमारे धर्म मे मर्दो का अकाल नही पड़ा है, लेकिन मर्दो को तलाक का ऐसा अख्तियार दे रखा है कि वह जब चाहे तीन बार तलाक बोलकर औरत को दर दर की ठोकरे खाने के लिए घर से निकाल सकता है।ऐसा करते समय वह बीबी के मान सम्मान का जरा भी ख्याल नही रखता।न ही उसे इस बात का अहसास होता है कि औरत के अहम को कितनी ठेस पहुँचेगी।"इसलिए नाज़िया अपने अब्बा की बात सुनकर बोली,"इसलिए  मै दूसरा निकाह हिन्दू मर्द से ही करना चाहती हूँ।"
"लेकिन कयो बेटी?"
"हिन्दू मर्द को शौहर बनाउंगी,तो वह भले ही मुझे  मारे पीटे, तंग करे लेकिन जिंदगी भर अपनी बनाकर तो रखेगा।तीन बार तलाक बोलकर तो घर से नही  निकालेगा।"
"बेटी तेरा गुस्सा जायज है। बाप हूँ तेरा।तेरे दर्द को समझ सकता हूँ।नसीम ने ऐसा किया इसका मतलब यह तो नही है कि दूसरा मर्द भी तेरे साथ ऐसा ही करेगा।?"
"अब्बा इसकी भी क्या गारंटी है कि तीसरा मर्द ऐसा नही करेगा?"क्या दूसरे मर्द ने तलाक दे दिया तो मेरा तीसरा निकाह करोगे?"
"तो तुम्हारे अब्बा मान गए।"रीना बोली थी।
मेरे अब्बा मेरी बात से इतफाक तो रखते थे,लेकिन अपने धर्म के प्रति कट्टर थे।जात, बिरादरी, समाज में उन्हें अपनी इज़्ज़त की बहुत चिंता थी।"अत्तित से वर्तमान में लौटते हुए नाज़िया बोली,"मेरे अब्बा ने हिन्दू मर्द से मेरा निकाह करने से साफ इंकार कर दिया।मै भी अपनी जिद्द पर अड़ गईं"
"फिर?"
"पूरे दिन घर मे पड़े पड़े बोरियत होती थी।फिर मुझे अपने भविष्य के बारे में भी सोचना था।जिंदगी गुज़ारने के लिए पैसा चाहिए था।पैसे कमाने के लिए काम करना जरूरी था।इसलिए मैंने ब्यूटी पार्लर खोल लिया।"
"विवेक तुम्हारी जिंदगी में कैसे आया?"
"रीना का प्रश्न सुनकर नाज़िया के अत्तित का एक पन्ना और खुल गया।
नाज़िया का ब्यूटी पार्लर धीरे धीरे चलने लगा।वह दुल्हन के मेकअप की बूकिंग भी करने लगी थी।वह ज्यादातर मेकअप करने के लिए दुल्हन को पार्लर पर ही बुलाती थी।लेकिन कभी कभी उसे मेकअप करने के लिए   मैरिज होम भी जाना पड़ता था।
एक रात वह दुल्हन का मेकअप करने के बाद मेर्रिज होम से लौट रही थी।बस से उतरकर घर की तरफ चल पड़ी।बस स्टॉप से कॉलोनी का रास्ता कच्चा था।रास्ते के दोनों तरफ पेड़,घास और झाड़ियां थी।सर्दियी कि रात चारों तरफ सन्नाटा पसरा था।कोई शोर, कोई आहत ,कोई आवाज नही।उस रास्ते पर वह अकेली थी।वह आधे रास्ते ही पहुची होगी कि दो आदमी अचानक यमदूत की तरह उसके सामने आ खड़े हुए।