भरोसा--अनोखी प्रेम कथा - 1 in Hindi Love Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | भरोसा--अनोखी प्रेम कथा - 1

भरोसा--अनोखी प्रेम कथा - 1

"वाह--ब्यूटीफुल-अतिसुन्दर-बेमिसाल",बाएं हाथ मे लगी मेहंदी को देखकर प्रफ्फुलित होते हुए दाया हाथ आगे करते हुए रीना बोली,"राजेश देखेगा तो खुश हो जाएगा।"
"राजेश   कौन?"
"हसबेंड--मेेरा पति।"
आज करवा   चौथ थी।सुहागनों का   त्यौहार।औरतो ने अपने सुुहग की सलामती के   लिए  करवा चौथ का व्रत रखा था।सुबह से    भूखी प्यासी थी।पानी भी नही पी रही थी।फिर भी उनमे ज़बरदस्त  जोश,उमंग,उत्साह,उल्लास था।बाजारों में आज चारो तरफ  औरते ही औरते नज़र आ रही थी।चूूूडी की दुकानें, ज्वेलरी ,गिफ्ट सेेेटर, कपडे की दुकान, ब्यूटी पार्लर सब जगह औरते ही औरते।रीना की  पहली करवा चौथ थी।
यू तो बाजारों मे जगह जगह लड़के लड़कियों  सड़कों के किनारे बैठकर मेहंदी लगा रहे थे।लेकिन उसे सड़क किनारे बैठकर मेहंदी लगाना अटपटा सा लगा इसलिए वह ब्यूटी पार्लर चली आयी।यहाँ भी भीड़ थी।कई औरतो के बाद उसका नम्बर आया था।दूसरे हाथ मे मेहंदी लगवाते हुए,अचानक उसका ध्यान मेहंदी लगाने वाली के हाथ पर गया।वह उसके सुने हाथ देखकर बोली,",दुसरो के हाथो में इतनी सुंदर सूंदर मेहंदी लगा रही हो- - -और तुम्हारे हाथ- -आज करवा चौथ को भी अपने हाथ मे मेहंदी नहीं लगाओगी।"
"क्यो नही?त्यौहार को सभी औरतें मेहंदी लगाती है"।
"तुम्हारा नाम क्या है?"
नाज़िया"।
"मै भी निरी बद्दू हूँ।तुम्हारे बारे मे जाने बिना न जाने क्या क्या बोल गईं।"उसका नाम सुनकर रीना बोली,"तुम मुसलमान हो।मुसलमान औरत करवा चौथ का व्रत कन्हा रखती है?"
"तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो।करवा चौथ हिंदुओ का त्यौहार है।इसलिए मुसलमान औरते इस त्यौहार को नही मनाती।लेकिन मैंने करवा चौथ का व्रत रखा है।सुबह से कुछ भी नही खाया पिया।रात को चांद देखकर पति के हाथों से ही मै अपना व्रत तोड़ूंगी।"
"तुमने करवा चौथ का व्रत रखा है।?"नाज़िया की बात सुनकर रीना चोंकते हुए आश्चर्य से बोली,"तुम मुसलमान हो।फिर तुमने व्रत क्यो रखा है?"
"मै मुसलमान हूँ,लेकिन मेरा पति तो हिन्दू है।मै अपने पति विवेक की सलामती के लिए हरसाल करवा चौथ का व्रत रखती हूं।"
"तुम मुसलमान पति हिन्दू प्यार व्यार का चक्कर होगा।तभी अलग अलग धर्म के होकर भी तुमने शादी की है।"रीना, नाज़िया से  चुहलबाजी करते हुए बोली।
"तुम जैसा समझ रही हो ऐसा कुछ भी नही है।आजकल के लड़के लडकिया प्यार व्यार के चक्कर मे पड़ जाते है।लेकिन मेरा मानना था कि औरत को शादी के बाद ही प्यार करना चाहिए।वो भी सिर्फ अपने पति से।अपनी इसी सोच के कारण में निकाह से पहले प्यार के चक्कर मे नही पड़ी।वैसे भी मेरा जन्म कट्टर मुस्लिम परिवार में हुआ था।मेरे अब्बा पक्के नवाजी और धर्म के पति कट्टर थे।मेरे अब्बा ने मुस्लिम रीति रिवाजों और परंपराओं के अनुसार मेरा  निकाह अपने धर्म जाती के लड़के से ही किया था।"
"तुमने अभी कहा,तुम्हारा पति हिन्दू है।जब तुम्हारा निकाह मुस्लिम लड़के से हुआ था,तो हिन्दू पति कहा से आ गया?"
रीना का प्रश्न सुनकर नाज़िया के अतीत का पन्ना फड़फड़ाकर खुल गया।
बेटी के जवान होते ही हर माँ बाप को उसकी शादी की चिंता सताने लगती है।रहीस ने भी बेटी के बीए करते ही उसके लिए शौहर की तलाश शुरू कर दी थी। कई लड़के देखने के बाद उसे नसीम पसंद आया था।
नसीम एक कम्पनी में मुलाज़िम था।छानबीन करने पर पता चला कि नसीम में कोई ऐब नही है।वह निहायत शरीफ और नेकदिल इंसान है।पूरी तरह से आश्वस्त हो लेने के बाद रहीस ने अपनी बेटी  का निकाह नसीम से कर दिया।
(क्रमश- - - -