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प्रेम ही जीवन है!!!

हमारी कहानी का नायक राजीव लंदन में रहते बिजनेसमैन धीरजलाल का एकलौता पुत्र है। धीरजलाल लंदन में फास्टफूड का बिजनेस करते हैं। पूरे इंग्लैंड में उसके फास्टफूड की चैन है। राजीव भारत में जन्मा और लंदन में पला-बड़ा है। वह भारतीय संस्कृति का आदर करनेवाला संस्कारी लड़का है। वह यह मानता है कि अगर हम किसी को खुशियां देते हैं तो हमें अपने आप ही खुशियां मिल जाती हैं।

राजीव अपना MBA का अभ्यास खत्म करके उसके पापा का बिजनेस joint कर लेता है| वह उसके पापा का बिजनेस पूरे वर्ल्ड में फैलाना चाहता है और इसकी शुरुआत वह इंडिया से करना चाहता है। इंडिया में दिल्ली में वह पहली ब्रांच शुरू करना चाहता है और ब्रांच का पूरा कामकाज संभालना चाहता है। धीरुभाई अपने बेटे के निर्णय से सहमत होते हैं और बहुत ही खुश होते हैं। उसको विश्वास होता है कि राजीव अपनी काबिलियत के दम पर एक दिन जरूर successful बिजनेसमैन बनकर दिखाएगा क्योंकि राजीव में मेहनत करने की लगन, क्षमता और आत्मविश्वास है।

राजीव के पिताजी धीरूभाई लंदन में 20 सालों से रह रहे है लेकिन वह भारतीय परंपराओं को भूले नहीं है इसलिए वह भारत की संस्थाओं को दान करते रहते हैं। उसमें से एक संस्था दिल्ली से 25 km दूर है जहां पर अनाथ बच्चों को आश्रम में रखा जाता है, उसको पढ़ाया जाता है और उसकी देखभाल की जाती है। धीरजलाल हर साल इस आश्रम को दान की रकम का चेक भेजते रहते हैं। इस बार राजीव दिल्ली जा रहा था तो उसने राजीव को चेक देकर वहां पर रूबरू जाने को कहा और संस्था में कामकाज कैसे चल रहा है वह देखने को कहा।

राजीव जब दिल्ली पहुंचता है तो वह सबसे पहले अपने पिताजी का काम पूरा करना चाहता हैं इसलिए वह प्राइवेट कार से दिल्ली की वह संस्था में जाने के लिए निकलता है। सुबह का वक्त होता है, कुदरती हरियाली के बीच वह संस्था आई हुई है। राजीव संस्था में दाखिल होता है और संचालक की ऑफिस की ओर जाता है। वह ऑफिस का दरवाजा खटखटाता है तो अंदर से आवाज आती है "come in" राजीव जब ऑफिस के अंदर जाता है तो वह बहुत ही आश्चर्यचकित हो जाता है।

उसकी मुलाकात रश्मि से होती है जो उस संस्था की संचालक हैं। रश्मि उसको बैठने के लिए कहती है और उसके आने की वजह पूछती है। राजीव रश्मि को अपना परिचय देता है और दिल्ली अपने बिजनेस के बारे में बताता है और दान का चेक रश्मि को देता है। राजीव रश्मि से पूछता है कि संस्था कैसी चल रही है? बच्चे कैसे रहते हैं? बच्चों को कौन पढ़ाता है? संस्था में कहां-कहां से दान आता है? रश्मि राजीव के सब सवालों का details में जवाब देती है।( actually, रश्मि को देख कर राजीव को पहली नजर में प्यार हो जाता है और उसके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने के लिए वह सारे सवाल पूछता है। उसको संस्था में कोई दिलचस्पी नहीं है और ना ही कोई जानने की इच्छा है। वो तो बस रश्मि के बारे में जानना चाहता है।)

रश्मि राजीव को संस्था के बारे में बताती है कि कैसे उसके पिताजी ने इस संस्था की शुरुआत की थी और उसके पिताजी को बच्चों से बड़ा लगाव था इसलिए जब भी वह कोई अनाथ बच्चा देखते थे तो उसको घर पर ले आते थे और उसको अपने बेटे जैसा प्यार करते थे और ख्याल रखते थे, ये देखकर किसी भले आदमी ने अपनी जमीन को मेरे पिताजी को दान में दिया, इस तरह इस संस्था की शुरुआत हुई। पिताजी के गुजर जाने के बाद उसका अधूरा सपना पूरा करने के लिए वह संस्था को संभाल रही है। अभी यहां पर दाता की संख्या बहुत ही कम है और अनाथ बच्चों की संख्या ज्यादा है लेकिन यह संस्था प्रेम के धागों से चलती है और अब यही संस्था उसका सब कुछ है।

रश्मि राजीव को एक दाता की नजरों से देखती है इसलिए संस्था के बारे में वह सब कुछ बताती है लेकिन राजीव तो दूसरे ही ख्यालों में खोया हुआ है। इस समय में भी एक अकेली लड़की, इस प्रकार की संस्था संभाल सकती है यह उसकी कल्पना से परे था। रश्मि के लिए उसका आदर बढ़ जाता है।

रश्मि राजीव को formality के लिए संस्था में खाना खाने के लिए कहती है। राजीव को तो किसी भी तरह रश्मि के साथ वक्त गुजारना होता है इसलिए वह कोई भी बहाना बनाए बगैर उसके आमंत्रण का स्वीकार कर लेता है। रश्मि उसको संस्था के बच्चों के साथ खाना खिलाने के लिए भी बिठाती है जो राजीव को पसंद नहीं आता है। उसको रश्मि से कुछ स्पेशल ट्रीट की अपेक्षाएं होती है लेकिन रश्मि ऐसा कुछ नहीं करती हैं।

संस्था का environment एकदम naturally होता है। खाना खाने के बाद राजीव संस्था के बच्चों के साथ मैदान में क्रिकेट खेलने जाता है। रश्मि और संस्था के कर्मचारी भी यह क्रिकेट मैच देखते हैं| अनाथ बच्चों को किसी अजनबी के साथ इतने उत्साह और उमंग से क्रिकेट खेलते हुए देखकर रश्मि को भी बड़ी खुशी होती है। बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने के बाद शाम को राजीव दिल्ली के लिए रवाना होता है तब सभी बच्चे उसको कार तक छोड़ने के लिए आते हैं। राजीव कार में पूरे रास्ते रश्मि के बारे में ही सोचता रहता है।

रश्मि एक समझदार और modern लड़की है जो अपने पिताजी का अधूरा सपना पूरा करने के लिए संस्था को चलाने की जिम्मेदारी लेती है। अंदर से वह बहुत ही अकेली और अपने सपनों में जीनेवाली लड़की हैं। वह लड़कों से ज्यादा बात नहीं करती है क्योंकि उसके कॉलेज में उसके साथ दो-तीन बार छेड़ती के बुरे हादसे हो गए थे। तब से पैसे वाले लड़कों के प्रति उसको पूर्वाग्रह होता है कि वो लड़के अच्छे नहीं होते हैं। वह स्वच्छंदी, निकम्मे, नाकारा और अपने बाप के पैसों को उड़ाने वाले होते हैं। उसको दूसरों की भावना की कोई परवाह नहीं होती है बस वह दूसरों की भावना के साथ खिलवाड़ करना जानते हैं। इसलिए रश्मि का स्वभाव उसके प्रति rude होता है।

रश्मि का एक बड़ा भाई भी होता है जो अपनी पढ़ाई और शादी के बाद Noida शिफ्ट हो गया है। वह कभी भी रश्मि से मिलने नहीं आता है और ना ही उसकी कोई परवाह करता है।

राजीव दिल्ली वापस आता है लेकिन उसका दिल तो रश्मि के पास ही रह गया है। वह हर वक्त रश्मि के ख्यालों में ही खोया रहता है। 2-3 दिन के बाद वह संस्था में रश्मि को फोन करता है और किसी भी चीज की जरूरत हो तो मदद के लिए भरोसा दिलाता है लेकिन रश्मि उसकी ऑफर को सहर्ष अस्वीकार करती है। रेस्टोरेंट का प्रोजेक्ट का काम शुरू हो जाता है पर उसका काम में दिल नहीं लगता है।

राजीव रश्मि को जानने के लिए 1 month के बाद संस्था में वापस जाता है लेकिन तब रश्मि संस्था के काम की वजह से दिल्ली गई हुई थी। राजीव संस्था के कर्मचारी, क्लार्क, सिक्योरिटी गार्ड से मिलकर रश्मि के बारे में जानने की कोशिश करता है। रश्मि के बारे में जानने के बाद राजीव को रश्मि का जीवन एकदम black & white लगता है। तभी राजीव मन ही मन में संकल्प लेता है कि वह रश्मि के जीवन में रंग भर के ही रहेगा और बाद में दिल्ली वापस आ जाता है।

दिल्ली वापस आने के बाद सबसे पहले वह अपने पापा को लंदन फोन करता है और रश्मि और संस्था के बारे में सब कुछ बताता है तब धीरुभाई उसको कहते हैं कि कामकाज तो जिंदगी भर चलता रहेगा अभी रश्मि और उसकी संस्था को तुम्हारी जरूरत है, तुम संस्था में जाकर रश्मि की मदद करो। यह सुनकर राजीव बड़ा खुश होता है।

दूसरे दिन राजीव अपना सामान लेकर संस्था में दाखिल होता है और संस्थामें रश्मि से रहेने के लिए परमिशन मांगता है। रश्मि राजीव को बताती है कि संस्था में बच्चों और संस्था के कर्मचारी के अलावा और कोई भी नहीं रह सकता। तब राजीव रश्मि को कहता हैं कि वह संस्था में बच्चों को पढ़ाएगा इस तरह वह संस्था का कर्मचारी ही बन जाएगा। तब रश्मि उसको कहती है कि संस्था में अभी टीचर की कोई जरूरत नहीं है। तब राजीव कहता है कि संस्था में वह कोई भी काम कर लेगा तब रश्मि को राजीव के इरादों पर संदेह होता है और वह राजीव को कहती है कि अभी संस्था को उसकी कोई जरूरत नहीं है जब होगी तब आपको message कर दूंगी लेकिन राजीव दृढ़ निश्चय करके आया था कि वह कुछ भी करके संस्था में ही रहेगा।

वह संस्था के गेट के बाहर तंबू लगाकर वहां पर रहता है। दिन भर वह बच्चों के साथ नई नई गेम खेलता रहता है। रश्मि इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं देती है। संस्था के कर्मचारी राजीव को समझाते हैं कि वह अपनी जीद छोड़ दें और दिल्ली वापस चला जाए लेकिन राजीव अपनी जिद नहीं छोड़ता है। ऐसा करते-करते 1 week पसार होता है बाद में संस्था के कर्मचारी रश्मि को समझाते हैं कि वह राजीव को संस्था में रहने की परमिशन दे दे क्योंकि राजीव बच्चों के साथ बहुत ही घुल मिल गया है। बच्चे भी राजीव को बहुत ही पसंद करते हैं। संस्था के अनाथ बच्चे भी हाथ जोड़कर रश्मि को विनती करते हैं कि वह राजीव को संस्था में as a teacher रहने दे। अनाथ बच्चों की विनती सुनकर रश्मि का दिल पिघल जाता है और उसकी इच्छा ना होते हुए भी वह राजीव को संस्था में रहने की परमिशन देती है। सभी बच्चे बहुत ही खुश हो जाते हैं।

रश्मि राजीव को संस्था में दाखिल होने से पहले संस्था के नियम समझाती है और नियम पालन की सलाह देती है, साथ में यह ताकीद भी करती है कि वह बच्चों को पढ़ाने के अलावा और किसी प्रवृत्ति में ध्यान ना दें और बच्चों को पढ़ाने के लिए उसको तनख्वाह भी लेनी पड़ेगी। राजीव को तो बस रश्मि के साथ ही रहना था इसलिए वह सब शर्तों का पालन करने के लिए मान जाता है। अब राजीव को रश्मि के साथ वक्त गुजारने का मौका मिल जाता था। जब भी वक्त मिलता वो रश्मि के साथ बातों में लग जाता था और सबके साथ मजाक मस्ती करने लगता था लेकिन रश्मि को राजीव की बातों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उसको तो संस्था के हितों में ही दिलचस्पी थी इसलिए रश्मि को खुश करने के लिए राजीव संस्था की कायापलट करने में लग जाता है। वो इंटरनेट के माध्यम से संस्था की एक वेबसाइट बनाता है और उसमें संस्था के photos और videos upload करता है और सोशल मीडिया के माध्यम से उस वेबसाइट के जरिए संस्था का प्रमोशन करता है। इससे संस्था में दान आना शुरू हो जाता है। संस्था में दान की आवक से संस्था का renovation का काम शुरू हो जाता है। दाताए बच्चों के लिए नया संसाधन और रमत गमत के लिए साधन संस्था को देते है। राजीव अपने innovative ideas के जरिये बच्चों को पढ़ाता है और संस्था की कायापलट हो जाती है जिससे रश्मि बहुत ही खुश हो जाती है।

रश्मि को खुश देखकर एक दिन राजीव अपने प्यार का इजहार रश्मि के सामने करता है और उसके लिए ही वह संस्था में आया था वह बताता है। तब रश्मि राजीव से नाराज होकर स्पष्ट शब्दों में कहती है कि उसको संस्था के हितों के अलावा और किसी भी चीज में दिलचस्पी नहीं है तब राजीव रश्मि को समझाने की ओर मनाने की कोशिश करता है। संस्था के कर्मचारियों को भी इस बात का पता चल जाता है तब राजीव रश्मि को बताता है कि उसने संस्था के लिए कया कूछ नहीं किया। राजीव की बातों से रश्मि को गुस्सा आ जाता है, वह राजीव को संस्था से चले जाने के लिए कहती है। राजीव का दिल टूट जाता है वह रश्मि को घमंडी और पत्थर दिल कहता है और वह अब संस्था में कभी भी वापस नहीं आएगा यह कहकर दिल्ली वापस चला जाता है।

राजीव दिल्ली जाकर अपना ध्यान अपने होटल के प्रोजेक्ट में लगा देता है लेकिन उसका ध्यान प्रोजेक्ट पर कम और रश्मि के खयालों में ज्यादा चला जाता है। वह सोचता है कि रश्मि ने उसके साथ ऐसा क्यों किया? ऐसे विचारों से वह बेचैन हो जाता है। उसके मन में गडमथल शुरू हो जाती है कि अब वह क्या करें? कोई रास्ता सुज नहीं रहा है। तब राजीव के पापा धीरूभाई का लंदन से फोन आता है। वह राजीव का हाल-चाल पूछते हैं और संस्था में सब कुछ कैसा चल रहा है वह पूछते हैं तब बातों बातों में राजीव की गले से आवाज नहीं निकल रही होती है और वह अचानक रो पड़ता है। धीरुभाई को राजीव के बातों से कुछ संदेह होता है। पहले वह राजीव को सांत्वना देते हैं और उसे शांत करते हैं बाद में उसे संस्था में क्या हुआ उसके बारे में पूछते हैं। तब राजीव संस्था में क्या-क्या हुआ वह सब details में धीरुभाई को बताता है। राजीव की बात सुनकर धीरुभाई उसको समझाते हैं कि प्रेम में अधीराई करना ठीक बात नहीं है। प्रेम तो निरंतर झरने की तरह बहेते रहना चाहिए। तुम पहले यह जानो कि रश्मि ऐसा behaviour क्यों कर रही है? भूतकाल में उसके साथ कोई घटना तो नहीं हुई? अगर हुई हो तो उसे जानकर उसका डर दूर करने में उसकी help करो। क्योंकि प्रेम तो सदा ही निस्वार्थ होना चाहिए। यह जरूरी तो नहीं कि तुम जिसे प्यार करो वह तुम्हें भी प्यार करें। तुम्हें तो सिर्फ अपना प्यार दिखाना है बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ दो। वही रास्ता दिखाएगा। शायद वह परिवार से दूर अकेले रहती है इसलिए उसका ऐसा behaviour हो, अगर उसको उसके परिवार से मिला सको तो शायद उसका हृदय परिवर्तन हो जाएगा।

धीरजलाल की बातें सुनकर राजीव को अचानक रश्मि का भूतकाल सामने आ जाता है जो संस्था के कर्मचारियों ने उसको बताया था। अचानक राजीव के अंदर एक नया विश्वास और उत्साह खड़ा हो जाता है। वह धीरजलाल को thanks कहता है और वह उसको विश्वास दिलाता है कि वह रश्मि की जरुर मदद करेगा। धीरजलाल बहुत ही खुश होते है और उसको ऐसे ही आगे बढ़ने की सलाह देते हैं और उसे best of luck कहते हैं।

इस तरफ, राजीव के संस्था छोड़ जाने के बाद रश्मि को कहीं भी चैन नहीं आता है। राजीव संस्था में ऐसा घूल मिल गया था कि उसकी याद रश्मि को हर पल सताती है। कैसे राजीव सबको हसाता था। अपनी नटखट हरकतों से सबको खुश कर देता था। उसके बिना संस्था अधूरी सी लगती है लेकिन अपने पूर्वाग्रहों के कारण रश्मिने राजीव को भूलाने का निर्णय लिया।

इस तरफ, राजीव रश्मि के कॉलेज के प्रिंसिपल से मिलकर रश्मि के बारे में सारी हकीकत बताता है। रश्मि के बारे में जानकर प्रिंसिपल भी राजीव का सहयोग करने के लिए तैयार हो जाते है। रश्मि जीस साल कॉलेज में पढ़ती थी तब कि उसकी friend list details राजीव कॉलेज में से निकाल लेता है और उन सब से मिलकर जिन जिन लोगों ने रश्मि को छेडा था उन सब का address लेकर उनसे मिलने उनके घर पर पहुंच जाता है।

राजीव उन सबको एहसास दिलावाता है कि कॉलेज में जो उन्होंने किया था वह उनकी भूल थी। जिसके लिए उनको रश्मि से माफी मांगनी चाहिए। सब लोग राजीव के बात से agree हो जाते हैं और रश्मि को फोन करके उनके कीये की माफी मांगते हैं। रश्मि को भी आश्चर्य होता है 4-5 सालों के बाद सबको अपनी गलती का एहसास एक साथ कैसे हुआ? वह सब को माफ कर देती हो और उसको अंदर से खुशी और संतोष मिलता है।

इस तरफ राजीव रश्मि के बड़े भाई का address लेकर नोएडा पहुंच जाता है। भाई के घर जाकर राजीव अपना परिचय देता है की वो रश्मि का friend है और उसका दुख दर्द बांटने के लिए यहां पर आया है। रश्मि ने उसको नहीं भेजा है लेकिन वह रश्मि के परिवार को उनसे मिलाने के लिए यहां पर आया है।

रश्मि का बड़ा भाई मयंक राजीव की सारी बातें बातें सुनता है और उसको बताता है की उसके पिताजी ने उसको पूछे बिना उसकी सगाई अपने किसी दोस्त की बेटी से कई कर दी थी लेकिन वह वृंदा से प्यार करता था और उसी से शादी करना चाहता था इसलिए उसने अपने पिताजी का घर छोड़ दिया था और वृंदा से शादी करके अपना एक अलग संसार बसा लिया है। रश्मि ने उस वक्त अपने पिताजी का साथ दिया था इसलिए उसने रश्मि के साथ भी अपना रिश्ता तोड़ दिया था। हाल में, मयंक नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है। उसके दो संतान है, जिसमें बड़ा बेटा अखिलेश और नन्ही बेटी स्वीटी है। उसका अपना छोटा सा सुखी परिवार का है अब वह कोई दूसरी झंझट में पडना नहीं चाहता है।

राजीव मयंक को समझाते हुए कहता है कि अब तुम्हारे पिताजी इस दुनिया में नहीं है तो अभी यह नाराजगी का क्या फायदा? अभी तुम्हारी बहन अकेली है उसको तुम्हारे सपोर्ट की बहुत जरूरत है लेकिन मयंक और वृंदा उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। तब राजीव उसको कहता है कि आपके दोनों संतान जब एक दूसरे से झगड़ा करते हैं तो वह क्या हर दिन एक दूसरे से रूठे हुए रहते हैं? नाराज रहते है? क्या भाई बहन में झगड़ा मनमुटाव नहीं होता है? क्या उस झगड़ा को पूरी जिंदगी अपने दिल से लगाए रखना है? जब झगड़ा होता है तो सुलेह भी होती है। यह जिंदगी बहुत ही छोटी है उसमें नाराजगी की जगह नहीं होनी चाहिए।

राजीव के सवालों का मयंक और वृंदा के पास कोई जवाब नहीं होता है उसको अपनी गलती का एहसास होता है। तब राजीव उन दोनो से कहता हैं कि सब कुछ भूल कर अपनी बहन से मिलो। मेरा यकीन करो आपके जीवन में खुशियां बढ़ जाएगी।

राजीव की बातें सुनकर मयंक और वृंदा रश्मि को मिलने के लिए तैयार हो जाते हैं। राजीव की कार से वह सब संस्था में जाने के लिए रवाना होते हैं। रास्ते में मयंक राजीव से पूछता है तुम यह सब क्यों कर रहे हो? सिर्फ दोस्ती के लिए कोई एक दूसरे के लिए इतना नहीं करता है। तब राजीव उसको सब सच्चाई बताते हुए कहता है कि वह रश्मि से बहुत प्यार करता है और वह उसकी खुशी के लिए ये सब कर रहा है। बाद में राजीव कैसे रश्मि से मिला और संस्था में दाखिल हुआ वह सब बातें शुरुआत से लेकर अंत तक बताता है। राजीव की बातें सुनकर मयंक और वृंदा उसके सामने नतमस्तक हो जाते है और राजीव के लिए उसके दिल में आदर पैदा होता है। जिसने राजीव को संस्था में से अपमान करके निकाल दिया था वही आज उसकी खुशियों लिए सब कुछ कहां कर रहा था यह जानकर राजीव के लिए उनके दिल में जगह बन गए थी।

राजीव मयंक और वृंदा को संस्था के गेट के पास छोड़ता है तब मयंक राजीव को अंदर आने के लिए कहता है तब राजीव उसे बताता है कि रश्मि उसे पसंद नहीं करती है इसलिए संस्था के अंदर आकर वो उसको नाराज नहीं करना चाहता है और वह मयूर को भी कसम देता है कि वह रश्मि को यह बात ना बताये कि मैं आप सब को यहां पर लाया था। ऐसा कहकर राजीव वहां से चला जाता है।

मयंक वृंदा और उसके दो kids संस्था के अंदर दाखिल होते हैं। रश्मि के ऑफिस का पता जानकर वह ऑफिस की तरफ बढ़ते हैं तब अचानक मयंक के पैर में जैसे बैड़िया लग गई हो ऐसा उसको एहसास होता है। उसके माथे पर पसीना आता है और मन में बहुत ही गडमथल होती है कि रश्मि से मिलकर वह क्या कहेगा? क्या वह रश्मि से नजरे मिला पाएगा? क्या रश्मि उसको माफ करेगी? तब वृंदा उसके मन को पढ़ते हुए उसका हाथ थाम लेती है और उसको शांत रहने के लिए इशारा करती है।

जब मयंक, वृंदा और उसके kids रश्मि की ऑफिस में दाखिल होते हो तब रश्मि की आंखें फटी की फटी रह जाती है वह अवाचक नजरों से सबको निहारती है। वह कुछ कहने जाती हैं लेकिन उसके गले से आवाज नहीं निकलती है। उसकी आंखों से गंगा जमुना की धाराए बहने लगती है। रश्मि को रोता हुआ देखकर मयंक और वृंदा की आंखों में भी आंसू निकल आते हैं। रश्मि मयंक को गले लगाकर जोर जोर से रोने लगती है और फरियाद करने लगते हैं की अपनी छोटी बहन को मिलने में इतनी देर क्यों की? वृंदा रश्मि को शांत करती है और उसके आंसू पोछती है बाद में मयंक और वृंदा रश्मि की माफी मांगते हैं और अपनी गलती पर पछतावा करते हैं। तब रश्मि फिर से सबको गले लगा कर रो देती है जाने कब से उसने अपने आंसुओं का बांध अपनी आंखों में कैद कर रखा था आज वो बांध टूट चुका था उसमें सब शिकायते बह गई थी। रश्मि मयंक को माफ करती है और उसके दोनों बच्चों को गले से लगा लेती है।

बाद में रश्मि सबको अपनी संस्था बताती है, संस्था में कैसे काम होता है? बच्चों को कैसे पढ़ाया जाता है? रश्मि सब बच्चों और कर्मचारियों से उनका परिचय करवाती है। बाद में सब लोग मिलकर खाना खाने के लिए जाते हैं।

रश्मि को यही लगता था कि मयंक को अपनी गलती का एहसास हुआ है इसलिए वह मुझसे मिलने के लिए यहां पर आया हुआ है। उसे उसका परिवार वापस मिल गया था इसलिए रश्मि बहुत ही खुश थी।

दूसरे दिन मयंक और वृंदा रश्मि से मिलने जाते हैं और उसको बताता है कि उसको ऑफिस के काम की वजह से Noida निकलना होगा। तब रश्मि उसे कुछ दिन और रुकने का आग्रह करती हैं लेकिन मयंक उसे बताता है कि वह बच्चों के वेकेशन में आएगा तब वह ज्यादा दिन यहां पर रुकेगा ऐसा प्रॉमिस करता हैं। तब रश्मि उनको खुशी-खुशी जाने की परमिशन देती है।

रश्मि मयंक वृंदा और दो kids को बस स्टॉप तक छोड़ने के लिए जाती है तब रश्मि खुश होकर उसे बताती है कि यह week उसके जिंदगी का सबसे यादगार week बन गया है। क्योंकि उसको उसका परिवार वापस मिल गया है और दूसरा जीन जीन लड़कों ने उसको कॉलेज में छेड़ा था वह लडको ने फोन करके उससे माफी मांग ली थी।

अब मयंक का सब्र का बांध टूट जाता है वह रश्मि को कहता है कि दुनिया में कोई भी घटनाए अचानक यादगार नहीं होती। उसको यादगार बनाने के पीछे किसी की मेहनत होती है, किसी का सच्चा प्यार होता है। रश्मि को कुछ समझ में नहीं आता है, मयंक यह क्या बोल रहा है? रश्मि की यह मनस्थिति देखकर मयंक उसे कहता है कि तुम अपने मन से सोचो कि कॉलेज के लड़कों ने अपनी गलती के लिए इतने सालों के बाद माफी क्यों मांगी? क्या उन्हें वाकई अपनी गलती का एहसास हुआ है या किसी ने उन्हें यह अहसास करवाया है। तेरा भाई जो बरसों से तुझसे दूर था वह अचानक तेरे पास आकर तेरी माफी क्यों मांगता है? और तेरी भाभी और बच्चों के साथ संस्था में क्यों आता है? कोई भी घटना अचानक यादगार नहीं होती रश्मि!! उसके पीछे किसी का दिल से प्रयास होता है, ये तो अपना अहंकार और घमंड होता है जो उसके प्रयासों को पहचानता नहीं है। मयंक की ऐसी बातों से रश्मि अवाचक हो जाती है उसको मालूम नहीं पडता है कि मयंक यह सब क्यों बोल रहा है? वह मयंक को साफ साफ शब्दों में हकीकत बताने के लिए कहती है तब मयंक उसे राजीव के बारे में बताता है कि कैसे राजीव उससे मिलने के लिए नोएडा उसके घर आया था। कैसे उसने मुझे और तेरी भाभी को यहां आने के लिए convince किया। इसी तरह शायद छेड़ती करनेवालों लड़कों को भी उसने ही convince किया होगा। मयंक रश्मि को बताता है कि राजीव उससे सच्चा प्यार करता है और उसी ने हमें कसम दी थी कि हम तुम्हें कुछ ना बताएं।

रश्मि का दिल एक पल के लिए थम जाता है। उसको अचानक राजीव की flashback की सभी यादें सामने आ जाती हैं। कैसे राजीव से उनकी पहली मुलाकात हुई थी? कैसे राजीव संस्था मे दाखिल हुआ था। राजीव का मजाकिया स्वभाव, उसका बच्चों जैसा behaviour, उसके innovative ideas, कैसे राजीव खेल खेल में बच्चों को पढ़ाता था, उसके साथ हंसी-मजाक करता था। संस्था के लिए दाताए ढूंढता था। संस्था के लिए उसकी मेहनत, लगन और समर्पण आज सब कुछ रश्मि को याद आ रहा था।

राजीव ने उसके जीवन को खुशियों से भर दिया था बदले में उसने राजीव को क्या दिया? अपमान के कड़वे घूंट? उसके पूर्वाग्रह की वजह से संस्था के सभी कर्मचारियों के बीच में उसने राजीव का अपमान किया था। आज, यह बातें याद आते ही रश्मि के शरीर में कंपन सी छूट जाती है और वह जोर जोर से रोने लगती है। मयंक और वृंदाने जैसे तैसे उसको संभाला लेकिन रश्मि रोते रोते एक ही बात कह रही थी कि राजीव ने उसको कितना प्यार किया और बदले में मैंने सिर्फ नफरत की। आज पहली बार राजीव के सच्चे प्यार का रश्मि को अहेसास हो रहा था। वो रोते रोते राजीव के घर की तरफ जाने लगती है तब मयंक और वृंदाने उसको रोका और कहा कि हम सब उसके घर साथ में जाएंगे।

सब लोग टैक्सी करके राजीव के घर पहुंचते है, तब सबको पता चलता है कि राजीव तो हमेशा के लिए लंदन जाने के लिए एयरपोर्ट निकल चुका है। सब लोग उसी टैक्सी में एयरपोर्ट के लिये निकलते है। रास्ते में मयंक ने राजीव को फोन लगाने की ट्राई की लेकिन राजीव का फोन स्विच ऑफ आ रहा था।

एयरपोर्ट पहूंचते ही रश्मि लंदन जानेवाली फ्लाइट की लॉबी में जाने लगी तब सिक्योरिटी वालों ने उन सब को रोका, तब मयंक ने सिक्योरिटी वालो को सब सच्चाई बताई। बाद में सिक्योरिटी ऑफिसर ने उसे अंदर जाने की परमिशन दी। रश्मि दौड़ते दौड़ते लंदन जानेवाली फ्लाइट की लॉबी में पहुंच गई। राजीव प्लेन में जाने के लिए queue में खड़ा था।

रश्मि ने राजीव को देखा राजीव प्लेन में जाने ही वाला था, अचानक रश्मि जोर से चिल्लाई "राजीव..............."। लोबी में खड़े सब लोग चौक गए। राजीव ने रश्मि को देखा, रश्मि दो हाथ जोड़े अपने घुटनों पर बैठ गई और जोर-जोर से रोने लगी। राजीव queue में से कूदकर दौड़ता दौड़ता रश्मि के पास आया और उसको गले से लगा लिया। रश्मि को भी जैसे इस पल का इंतजार था उसने भी राजीव को कस के गले से लगा लिया। दोनों की आंखों में हर्ष के आंसू बहने लगे। लॉबी में खड़े सब लोगों ने तालियां बजाकर उन दोनों का अभिवादन किया। दूर खड़े मयंक और वृंदा के आंखों में भी है हर्ष के आंसू बह रहे थे और मन ही मन में वह दोनों को आशीर्वाद दे रहे थे। अब सच्चे अर्थ में आज का दिन सबके लिए यादगार बन गया था।

समाप्त