Bhutiya Mandir - Last Part in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | भूतिया मंदिर - अंतिम भाग

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भूतिया मंदिर - अंतिम भाग

शैतान अंत और मंदिर शुद्ध...
विनय और विशाल कोलकाता पहुँचें और वहां से
तारापीठ । तारापीठ को मां काली की जागृत मूर्ति
कहा जाता है , पर यह कैसे पता किया जाए कि
कौन से जागृत वस्तु ले जाया जाए । और वो मिलेगा
कैसे ?
कई साधु संतों से बात करने के बाद उन्हें पता चला
कि बड़ेपुजारी श्री शक्तिदानंद के पास इस सवाल
का जवाब जरूर होगा ।
श्री शक्तिदानंद से मिलना उतना आसान नही था , वह
हर वक्त अपने पूजा साधना में ही व्यस्त रहते थे ।
तो इसी बीच माँ तारा के दर्शन किया दोनों ने विनय
तो माँ तारा के सामने रो पड़ा और बोलने लगा " हे माँ
अब तुम ही हमारा साथ दो और रास्ता दिखाओ ।"
दिन भर वहीं मंदिर में बैठे रहे , शाम के सात बजे
उन्हें श्री शक्तिदानंद से मिलने का मौका मिला वो एक
सिद्ध पुरुष थे । देखते ही समझ गए कि कोई विचित्र
वस्तु इनके ऊपर साया बनाये हुए हैं ।विनय और विशाल
ने उन्हें पूरी बात बताई और यह भी बताया कि उन्हें
कोई जागृत वस्तु चाहिए उस मंदिर के पुनः शुद्धि के
लिए , और उनके दोस्त को बचाने के लिए ।
श्री शक्तिदानंद बोले – " मां की जागृत वस्तु यह सम्भव
नही है और तुम्हारे अनुसार पहले भी वहां जागृत वस्तु
ले जाया गया है और फिर भी शैतान की समाप्ति नही हुई ।
ऐसा हो ही नही सकता देवी शक्ति के जागृत वस्तु की
छाप पूरे भूमंड शैतानी शक्ति के लिए काफी है । और
जागृत वस्तु को कोई ऐसा वैसा स्थापित नही कर सकता
अपितु उसे ले जाना ही असंभव है , मां के स्वयं न चाहने
से कोई भी जागृत वस्तु को स्थापित नही किया जा सकता ।"
विशाल बोला – " तब कोई और उपाय बताइए "
श्री शक्तिदानंद बोले – " चलो कुछ दिन दो सोचकर
बताता हूँ ।"
यह बात दोनों को निराश करने वाली थी , और जिस
प्रकार श्री शक्तिदानंद ने कहा उससे तो यही लगता है
कुछ नही हो सकता । तो वो दोनों यही सोचने लगे कि
अब तो कुछ नही हो सकता और उनका दोस्त भी मारा
जाएगा ।
रात को मां तारा के मंदिर के सामने के चबूतरे पर दोनों
लेट गए , लोग आ रहे थे मां के दर्शन कर रहे थे और
बाहर से विनय केवल मां की मूर्ति को नम आंखों से
देखे जा रहा था , उसके मन में एक लहर जाग गयी थी
कि वह उस पूरे गांव को इस शैतानी आत्मा से मुक्ति
दिलाएगा पर यह उतना आसान नही था जितना उसने
सोचा था । इससे पहले जागृत वस्तु के नाम पर जो व्यक्ति
भी कुछ ले गया वह सब कुछ नही था ।
पर उसके मन में एक बात बार - बार उठ रही थी कि
वह यह काम कर लेगा , वह आंख बंद कर मां के नाम
का जप करने लगा और यह करते करते वहीं सो गया ।
उधर असाध्य रात में पूर्ण निद्रा में बाबा शक्तिदानंद ने
सपने में देखा कि उन्हें मां कह रहीं हैं कि एक जागृत
वस्तु कहीं और भी ले जाना है और यह काम किसी
श्रेष्ठ से हो ।सुबह उठ बाबा शक्तिदानंद जान गए थे
कि यह मां का संदेश था ।
सुबह विनय और विशाल को खुद बाबा शक्तिदानंद ने
जगाया । उनके साथ एक लड़की थी उसकी उम्र यही
कोई चौदह पंद्रह साल की होगी । न जाने क्यों उसे देखते
ही कई लोग उस छोटी लड़की के पैर छूकर और आशीर्वाद
लेकर गए । उस लड़की का नाम था रजवंतीतारा , वह
बाबा शक्तिदानंद के भाई की बेटी थी , कहतें हैं सभी
बीज मंत्रो से शुशोभित थी , गुरु मंत्र और सिद्धि मंत्र इस
छोटी अवस्था में ही पा ली थी , दिन भर माँ तारा की आराधना करती इसी मंदिर में ही मिली थी तभी उसका नाम का अंश मां तारा के नाम से रखा । हर वर्ष माँ के बड़े पूजा
में वही मां की साक्ष्य बनती और लोगों को उनके दुःख का
हल बताती जिसे माता आना कहते हैं । उससे कोमल और श्रेष्ठ बाबा शक्तिदानंद को कोई और न मिला तो उसी के पास
थी जागृत वस्तु पर यह बताना देवी के सख्त खिलाफ
था तो उस लड़की को विनय और विशाल के साथ भेज
दिया । पूरे रास्ते वह आंख बंद कर ध्यान मग्न थी ।
शाम को विनय और विशाल उस लड़की को लेकर उस
मंदिर के पास पहुंचे वह लड़की कुछ न बोलती केवल
एक छोटी सी मुस्कान उसके मुख पर सदा खेलती
रहती । पर मंदिर देखते ही उसके चेहरे के भाव बता
रहे थे कि वह मारे गुस्सा के आगबबूला है नाक
से निकलते फुंफकार साफ सुनाई दे रहे थे । कुछ ही
दूर खड़े विनय और विशाल के लिए यह बहुत आश्चर्यजनक
था । धीरे धीरे उस लड़की की आंखे लाल होने लगी
बाल धीरे धीरे हवा में उड़ने लगी , चारों ओर के सन्नाटे
के बीच ही एक चलते तूफान को सुनना शायद बहुत
आसान था । यह दृश्य बहुत भयानक लग रहा था
मानों कोई शैतान खुद उस लड़की के अंदर आ गयी
हो । फिर पैर झटक झटक कर वह लड़की मंदिर की
तरफ बढ़ी , अब तक जितना विनय और विशाल ने
उस लड़की को देखा था वह ऐसी नही थी , मंदिर
के सामने आकर वह बदल गयी थी ।
गेट पर पहुँचतें ही गेट अपनेआप खुल गया अंदर
से कई प्रकार के भयानक आवाज एक साथ आने लगी
और फिर कई काली परछाई बाहर आने लगी । यह
बहुत ही भयानक दृश्य था मानो कई शैतानी आत्माएं
इस मंदिर से निकलकर भाग रहीं हो , चारों ओर का
वातावरण एकदम काले कोहरे से घिर आया उस
लड़की के पीछे पीछे विनय और विशाल ने भी उस
मंदिर में प्रवेश किया । अंदर नरमुंड चारों ओर बिखरे
हुए थे और नितिन की आंखे उस लड़की पर टिकी
हुई थी । तभी उस लड़की ने साथ लाये एक पोटली में
से एक सोने की कोई वस्तु निकली और उसे वहीं
प्रवेश कराया तभी एक रोशनी चारों ओर फैल गयी
पूरा मंदिर शैतानों की गूंज से भर उठा और नितिन
वहीं पर गिर तड़पने लगा उसके शरीर से धुआं निकल
रहा था मानो उसका चमड़ा जल रहा हो । तभी एक
तीव्र रोशनी के साथ सारा नरमुंड और पूरा मंदिर
ठीक हो गया और वह लड़की वहीं बेहोश हो गई ।
इस दौरान इतने प्रकाश के बीच विनय और विशाल
ने कुछ नही देखा , जब उन्होंने आंख खोला तो
केवल रजवंतीतारा और नितिन बेहोश अवस्था में
मिले ।
कुछ ही देर बाद दोनों को होश आया रजवंतीतारा
अब एकदम शांत थी , नितिन ,विनय और विशाल
ने एक दूसरे को गले से लगा लिया । और तीनों
ने रजवंतीतारा के पैर छुए ।
बाला के गांव में चारों ओर शोक था। विनय और विशाल
के जाने के बाद भी मौतें हुई थी ।
गांव पहुँच विनय और विशाल ने गांव वालों को सब कुछ
बताया । यहां आने के पहली बार रजवंतीतारा ने
अपने मुख से कुछ कहा " अब यह मंदिर माँ का स्थल है ,
उनका ध्यान रखना ।"
अगले दिन विनय , नितिन और विशाल तीनों रजवंतीतारा
को तारापीठ छोड़ कर आये और उन्होंने एक बार नम
आँखों से मां तारा का दर्शन किया ।आखिर यह सब
उन्ही की कृपा से संभव हुआ था ।
उस शैतानी कहे जाने वाले मंदिर को एकदम
साफ किया गया और एकबार फिर उसमें पूजा आरम्भ
हुई कुछ ही दिन बाद उसमें बाबा शक्तिदानंद के
कहे अनुसार मूर्ति की स्थापना भी हुई , इसमें तीनों
दोस्तों ने भाग लिया ।
नितिन पर उसके भाई की हत्या का भी कोई सबूत
न मिलने के कारण उसे मुक्त कर दिया गया ।
शैतानी मंदिर अब माँ का स्थल बन चुका था आसपास
के भी कई गांव वाले इसी मंदिर में पूजा करने लगे ,
यहां मांगी गई मनोकामना पूरी होती ।
शैतानी साया तो मानो नैनादेवी और बड़ीकाली की
माया से पूरा नैनीताल छोड़ चुकी थी ।।


|| समाप्त ||