Gyarah Amavas - 31 in Hindi Thriller by Ashish Kumar Trivedi books and stories PDF | ग्यारह अमावस - 31

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ग्यारह अमावस - 31



(31)

उत्तर वाले पहाड़ के खंडहर में मिली लाशों और सात नर मुंडों की जांच की गई। लाशों से मिले डीएनए को कांस्टेबल उद्धव, अहाना और मंगलू के परिवार वालों से मिलाया गया। लाशें उन तीनों की ही थीं। नर मुंडों में भी तीन नर मुंडों की पहचान अहाना, मंगलू और अमन के रूप में हुई। अहाना और मंगलू के घर वालों को सूचना दे दी गई।
बसरपुर में तनाव का माहौल था। लोगों में और अधिक डर बैठ गया था। सब तरफ केवल मिली हुई लाशों की चर्चा हो रही थी। चंद्रेश कुमार की अगुवाई में एक बार फिर कुछ लोग गुरुनूर से बातचीत करने थाने पहुँचे थे। उनके साथ मंगलू के माता पिता भी थे। दोनों रो रहे थे। मंगलू का पिता मनसुखा गुरुनूर से बोला,

"आपने तो कहा था कि हमारे बेटे मंगलू को ढूंढ़कर ले आएंगी। लेकिन आप तो उसकी लाश लेकर आई हैं।"
मंगलू की माँ गुस्से में ज़मीन पर बैठ गई। अपनी छाती पीटते हुए बोली,
"हम अभी अपनी जान दे देंगे। हमें हमारा बच्चा चाहिए। उसकी लाश नहीं।"
विलायत खान ने समझाया,
"हम आपका दुख समझ रहे हैं। पुलिस ने अपनी कोशिश की। तभी आपके बच्चे की लाश मिल पाई। अब इस तरह पुलिस पर दबाव मत बनाइए।"
यह सुनकर सर्वेश ने कहा,
"सुनो सब लोग, पुलिस ने लाश ढूंढ़कर अपना फर्ज़ निभा दिया है। उनका काम खत्म। अब सब उस दिन का इंतज़ार करो जब हमारे अपनों की लाशें मिलेंगी। इससे अधिक कुछ और उम्मीद मत रखो।"
सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे ने कहा,
"ये क्या बकवास है। हम लोग पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम कर रहे हैं। जल्दी ही गुनहगार हमारे कब्ज़े में होंगे।"
जोगिंदर ने कहा,
"जब एसपी मैडम बसरपुर आई थीं तब भी उन्होंने यही कहा था कि जल्दी ही मामले को सुलझा लेंगी। लेकिन हुआ क्या ? कुछ नहीं। लाशों के मिलने का सिलसिला बंद नहीं हुआ। अरे जब मैडम अपने पुलिस वालों को नहीं बचा पा रही हैं तो हमें क्या बचाएंगी। कांस्टेबल उद्धव की सरकटी लाश मिली है। सुनने में आया है कि सब इंस्पेक्टर रंजन सिंह लापता है।"
बंसीलाल और मनसुखा के बीच थाने आने से पहले झड़प हो चुकी थी। मनसुखा मंगलू की हत्या का दोष उस पर लगा रहा था। यह सब सुनकर बंसीलाल ने मनसुखा से कहा,
"मंगलू की हत्या की ज़िम्मेदारी मैडम पर है। आखिर सुरक्षा की जिम्मेदारी इन पर ही है। अच्छा खासा वह मेरे पास रह रहा था। चार पैसे कमाकर तुम्हारी और अपनी मदद कर रहा था। लेकिन मैडम जी अपना काम छोड़कर नेतागिरी पर उतर आईं। इनके कारण ही उसे गांव भेजना पड़ा। बड़ी बड़ी बातें करना आसान होता है। लेकिन काम करके दिखाना बड़ा मुश्किल। मैडम से अपना काम हो नहीं पा रहा।"
विलायत खान ने गुस्से में डांटा,
"बंसीलाल तुम पहले भी इस तरह की बेहूदा बात कर चुके हो। संभल जाओ नहीं तो थाने में बंद कर दूंँगा।"
बंसीलाल दबने की जगह और अधिक मुखर हो गया। वह बोला,
"बंद कर दीजिए थाने में। वहाँ शायद सुरक्षित तो रहेंगे।"
बंसीलाल की बात सुनकर भीड़ में सभी चिल्लाने लगे कि हमें थाने में बंद कर दो। हम वहाँ सुरक्षित रहेंगे। माहौल बिगड़ता देखकर चंद्रेश कुमार आगे आकर बोला,
"आप लोग कृपया शांत रहें। इस तरह से पुलिस के साथ बर्ताव करने से कुछ नहीं होगा।"
सर्वेश फौरन आगे आकर बोला,
"हम लोग तो यहांँ इंसाफ मांगने आए हैं। इंसाफ लेकर ही रहेंगे। हम चुपचाप बैठकर पुलिस की नाइंसाफी नहीं सहेंगे। हमें तो अब पूरी सुरक्षा चाहिए। तुमको शांत रहना हो तो एक तरफ खड़े हो जाओ।"
भीड़ ने सर्वेश की बात का समर्थन किया। चंद्रेश कुमार मौके की नज़ाकत को समझकर एक तरफ खड़ा हो गया। भीड़ गुस्से में चिल्लाने लगी,
"हमें सुरक्षा दो.....नया अधिकारी बुलाओ.... मैडम से कुछ नहीं होगा...."
गुरुनूर चुपचाप यह सब देख रही थी। उसे लोगों के इस बर्ताव से कोई शिकायत नहीं थी। उसे महसूस हो रहा था कि उसने लोगों का भरोसा तोड़ा है। उन्हें सुरक्षा का आश्वासन देकर अपनी बात पर खरी नहीं उतर पाई। जो कुछ घट रहा है उसमें उसका दोष है। सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे उसकी तरफ देख रहा था कि शायद अब वह कुछ बोले। लेकिन गुरुनूर चुपचाप खड़ी थी। सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे ने विलायत खान की तरफ देखा। विलायत खान ने कहा,
"आप लोगों से गुज़ारिश है कि शांति बनाए रखिए। इस तरह अगर आप लोग थाने में शोर शराबा करेंगे तो हमें बल प्रयोग करना पड़ेगा।"
भीड़ और अधिक ज़ोर से नारे लगाने लगी। यह सुनकर गुरुनूर आगे आई। उसने हाथ के इशारे से सबको शांत किया। सर्वेश ने कहा,
"क्या बात है मैडम ? अब आप क्या नया कहना चाहती हैं ?"
गुरुनूर ने शांत किंतु गंभीर आवाज़ में कहा,
"मैंने आप लोगों से कहा था कि मैं जल्दी ही केस सॉल्व कर लूँगी। मैंने अपनी पूरी कोशिश की है और अभी भी कर रही हूँ। तब तक शांत नहीं बैठूँगी जब तक केस सॉल्व ना हो जाए। मानती हूँ कि मुझे समय अधिक लग गया है। किंतु यह केस बहुत जटिल है। इसलिए मुझ पर भरोसा बनाए रखिए। मैं उस कातिल को पकड़ कर रहूँगी जो इन हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार है।"
यह कहकर गुरुनूर ने हाथ जोड़ दिए। कुछ देर तक भीड़ में शांति रही। बंसीलाल ने शांति को भंग करते हुए कहा,
"फिर भी कोई समय सीमा होनी चाहिए। ऐसे तो आप हर बार यही कहती रहेंगी।"
विलायत खान ने कहा,
"बहुत हुआ बंसीलाल.... मैडम ने आश्वासन दिया है। उन पर यकीन करो। इस तरह की बातें करके माहौल मत बिगाड़ो। अब मैं तुम्हें चेतावनी नहीं दूंँगा। सीधे अंदर कर दूँगा।"
चंद्रेश कुमार ने कहा,
"आप सब लोग अब चलिए। हमने अपनी बात कह दी है। अब तो पुलिस को अपना काम करने दीजिए।"
भीड़ को भी लगा कि अब यहाँ खड़े रहने का कोई लाभ नहीं है। सब लोग चुपचाप चले गए। मंगलू के माता पिता अभी भी वहीं थे। गुरुनूर ने मंगलू की माँ को समझाते हुए कहा,
"आपके बेटे की मौत पर मुझे बहुत अफसोस है। यकीन मानिए हमने उसे तलाश करने की पूरी कोशिश की थी। पर अब आपको धैर्य से काम लेना होगा। आप घर जाइए।"
विलायत खान ने मनसुखा से कहा,
"आप मंगलू के शव के अंतिम संस्कार की तैयारी करिए। शव इस स्थिति में नहीं है कि उसे अधिक समय रखा जा सके।"
समझा बुझाकर उन्होंने मंगलू के माता-पिता को भी भेज दिया।

सब इंस्पेक्टर नंदकिशोर की टीम को खबर मिली कि रानीगंज में एक सुनसान मकान है‌। इस मकान में कुछ संदिग्ध गतिविधियों के होने की संभावना है। सब इंस्पेक्टर नंदकिशोर ने फौरन रानीगंज पुलिस के साथ उस मकान पर छापा मारा। यह मकान एकांत में था। पुलिस ने मकान को चारों तरफ से घेर लिया। सावधानी से पुलिस मकान के भीतर दाखिल हुई।
मकान के अंदर उन्हें कोई नहीं मिला। एक कमरे में उन्हें एक बेड मिला। कमरे में एक डस्टबिन में उन्हें इस्तेमाल की हुई डिस्पोजेबल सीरींज मिलीं। साथ में नींद की दवा के खाली इंजेक्शन मिले। लेकिन वहांँ कोई आदमी नहीं था। वहाँ उन्हें एक और महत्वपूर्ण चीज़ मिली। यह एक बैसाखी थी। रानीगंज थाने में राजू नाम के जिस पंद्रह साल के लड़के की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, उसके बाएं पैर में चोट थी। वह बैसाखी का प्रयोग करता था। बैसाखी उसकी हो सकती थी। इतना तय हो गया था कि उस स्थान का प्रयोग बच्चों को कैद करके रखने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त और कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई थी।
पुलिस ने और अधिक जांच पड़ताल की पर कुछ और पता नहीं चल पाया। सब इंस्पेक्टर नंदकिशोर अपनी टीम के साथ पालमगढ़ लौट गया। उसने सारी सूचना इंस्पेक्टर कैलाश जोशी को दी। इंस्पेक्टर कैलाश जोशी ने कहा,
"नंदकिशोर एक बात तो तय है कि उस जगह ही अपहरण करने के बाद बच्चों को रखा जाता था। उसके बाद उन्हें बसरपुर बलि के लिए पहुँचा दिया जाता था। एसपी गुरुनूर कौर ने मुझे बलि के बारे में बताया है। अहाना और मंगलू की सरकटी लाश भी बसरपुर में ही मिली है। एसपी गुरुनूर कौर का कहना है कि यह एक पूरा गिरोह है।"
सब इंस्पेक्टर नंदकिशोर को अहाना और मंगलू के बारे में जानकर बुरा लगा। उसने कहा,
"सर जिस तरह से मंगलू और अहाना का अपहरण कर उनकी बलि दे दी गई यह बहुत दर्दनाक है। अब वो लोग राजू के साथ भी वही करने की फिराक में होंगे। हमको किसी भी कीमत पर यह रोकना होगा।"
इंस्पेक्टर कैलाश जोशी ने कहा,
"एसपी गुरुनूर कौर ने हमसे मदद मांगी है। उन्होंने कहा है कि पालमगढ़ और रानीगंज के आसपास एकांत में बनी इमारतों पर नज़र रखी जाए। बसरपुर में उन्होंने जिन स्थानों पर बलि दी थी उनका पता पुलिस को लग चुका है। अब उनके लिए बसरपुर में शायद कोई जगह बची नहीं है।"
"ठीक है सर मैं रानीगंज थाने को इस बात की सूचना दे दूँगा। वैसे रानीगंज पुलिस राजू को तलाशने की पूरी कोशिश कर रही है।"
इंस्पेक्टर कैलाश जोशी ने कहा कि वह खुद रानीगंज पुलिस को सूचना दे दे रहा है। तब तक वह उसके निर्देश के अनुसार पालमगढ़ में एकांत इमारतों का पता लगाने का प्रयास करे। सब इंस्पेक्टर नंदकिशोर उसके निर्देश के अनुसार काम करने के लिए चला गया।

रानीगंज के जिस मकान पर पुलिस ने छापा मारा था राजू को वहाँ से निकाल कर दूसरी जगह पहुँचा दिया गया था। वह एक कोठरी की फर्श पर बेहोश पड़ा था। उसके पास दो आदमी थे। उनमें से एक के पास फोन आया। वह कोठरी से निकल कर बाहर बात करने चला गया। जब लौटकर आया तो उसने अपने साथी को बताया कि उन्हें याद किया गया है।