Tere Mere Darmiyan yah rishta anjaana - 21 in Hindi Fiction Stories by Priya Maurya books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियां यह रिश्ता अंजाना - (भाग -21) आदित्य - अस्मिता

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तेरे मेरे दरमियां यह रिश्ता अंजाना - (भाग -21) आदित्य - अस्मिता









जब अस्मिता सुबह उठ कर देखती है तो आदित्य बैड पर नही था । वह उठ कर बिस्तर को छूकर पाती है कि उसकी तरफ का बिस्तर एकदम ठंडा है।वो अचानक से उठ इधर उधर देखती है क्योकि अभी भोर के 5 ही बज रहे थे और इतनी सुबह आदित्य कहाँ जा सकता था। अस्मिता उठकर दरवाजे के पास आती है तो दरवाजा अंदर से ही बंद था।
अस्मिता मन में -" इन्हे जमीन निगल गयी क्या।"
तभी वो देखती है आदित्य बैड के नीचे जमीन पर ही चादर बिछा सोया था।
अस्मिता यह देख की आदित्य जो अपने आलीसान बैड पर सोता है वो बस अपनी मर्यादा के लिये जमीन पर सो गया था आज। यह देख अस्मिता के नजरों मे आदित्य के लिये और सम्मान बढ़ जाता है।
अस्मिता चलकर उसके पास आती है और वही नीचे बैठ उसके चेहरे को देखने लगती है।
अस्मिता आदित्य के बालों मे हाथ फेरते हुये उसके सोते हुये चेहरे को देख रही थी तभी उसे याद आता है की यहां सुबह नहाने और पानी लाने के लिये तालाब पर जाना होगा। अस्मिता उसके बालों से हाथ निकाल बोलती है -" आपके यह बाल हमें ना बहुत पसंद है। "
फिर उसके नाक पर ऊँगली से छुते हुए-" और आपकी छोटी सी नाक भी।"
अस्मिता इतना बोल मुस्कुराने लगती है और उठकर जाने को होती है तभी आदित्य उसका हाथ पकड वापस खिचते हुये अपने ऊपर ही गिरा लेता है जिससे अस्मिता का चेहरा उसके चेहरे के बिल्कुल ऊपर आ जाता है। वो अपनी बड़ी बड़ी आँखो से उसे देख रही थी। तभी उसे अपनी कमर पर एक मजबूत हाथ महसूस होता है।
आदित्य उसको कमर से अपनी तरफ खीचकर अपनी बंद आँखो से मुस्कुराते हुये -" हाँ तो क्या बोल रही थी आप।"
अस्मिता हैरानी से -" मतलब आप सोये नही थे।"
आदित्य -" हनन ,,, सो तो अभी भी रहा हुं।"
अस्मिता नकली गुस्सा करते हुये उसके सीने पर मारने लगती है।
आदित्य अपनी आँखे खोल कर -"अरे बस भी करो ना।"
अस्मिता -" छोडिए हमें।"
आदित्य -" अब अपनी पत्नी पर थोड़ा प्यार भी नही बरसा सकता ।"
अस्मिता हैरानी से -" हें ,,,,,,,, आपकी पत्नी और मैं ।"
आदित्य -" बहुत जल्दी भुल जाती हैं आप कल रात को अपने उस ,,,,, क्या बोलतीं है उनको ,,, हाँ ,,, रंगीला बुड्ढा ,,, तो उस रंगीले बुड्ढे से क्या बोला था । "
अस्मिता -" वो तो ऐसे ही बोला था ऐसे ही सच नही हो जाता है बोलने से ।"
आदित्य -" अच्छा यह सब छोड़ो ,,, और क्या बोल रही थी आप ,,,, हाँ की आपको हमारी नाक और बाल पसंद है ,,, हमशे पुछोगी नही की हमको क्या अच्छा लगता है आप में।"
अस्मिता - " क्या?"
आदित्य सोचते हुये -" वैसे बताऊंगा तो शर्मा जाओगी ,,, अच्छा चलो बता ही देता हुं ,,, आपकी यह जो गुस्से में लाल नाक है ना एकदम टमाटर की तरह लगती है और ,,,,।"
अस्मिता -"और क्या।"
आदित्य शरारत से -" और आपके यह जो गुलाब की तरह होठ है वो भी, मन तो करता है की ,,,,,,,,,,।"
अस्मिता आंख फाड उसकी बात को समझते हुये -" कितने गंदे है आप ,,,,, छोडिए हमें जाना है अब।"
आदित्य -" अरे रुको तो एक चीज और पसंद है आपकी बोलो तो बता दूँ ।"
अस्मिता -" मानेंगे तो है नही फिर बता ही दिजीये।"
आदित्य उसको चिढाते हुये -" आपकी कमर ,,,, आह क्या बोलू मैं।"
अस्मिता उसको धक्का देते हुये -" कितने बेशर्म हो।"
अस्मिता उठकर जल्दी से अपने कपड़े और बाल्टी लेकर घर से बाहर भाग जाती है।
आदित्य वही दोनो हाथ सर के पीछे कर लेटते हुये -" पता नही था आप शर्माती भी हैं ,,,,, काश मेरी हर रोज की सुबह इन लाल गालों को देखकर हो।"
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आदित्य की हवेली --

रौनक उछ्लते कूदते पन्कुडी से सुबह सुबह मिलने आया था। पन्कुडी उसे देखते ही आकर गले लग जाती है।
रौनक - अरे वो लाल बंदरिया बड़ा प्यार आ रहा है भैया पर।"
पन्कुडी उससे अलग होते हुये -" चुप करो ,,,,, पहले मेरा गिफ्ट निकालो ,,, लाए भी हो की नही ?"
रौनक अपनी पोकेट से निकाल चार पांच इमलियां उसके हाथ मे रख देता है।"
ममता उसे इमली देते देख -" यह क्या रौनक बाबु आप यह लाए हैं अपनी छुट्की के लिये।"
रौनक -" अब इसी ने तो कहा था।"
ममता हसते हुये-" अभी भी पूरी की पूरी बच्ची ही हो।"
तभी कामिनी और राजेस्वरी आते हुये रौनक से -" रौनक जाओ त तनिक ढेर से इमली ले आओ ऊ काका जी को चटनी बहुत अच्छी लगती है ना उकी ।"
रौनक मुह बनाते हुये -" अच्छा जा रहे हैं चाची।"
पन्कुडी उसका ऐसा मुह बनता देख हसते हुये अपनी अम्मा से जिद करती है -" अम्मा हम भी जाये भैया के साथ।"
कामिनी डांटते हुये -" नही ,,, अब बड़ी हो गयी है आप हमेशा बच्चो वाली हरकत करतीं है घर मे भी रहना सिखिये शादी के बाद हवेली मे ही रहना पड़ेगा हमेशा।"
पन्कुडी अपनी अम्मा को मस्का लगाते हुये उनको पीछे से गले लगा कर -" अम्मा हमारा जो राजकुमार होगा ना एकदम गुस्सैल होगा ,,, जो भी हमको कुछ बोलेगा उसको पटक के मारेगा और हम तो उसके साथ रोज पूरा गावँ घूमेंगे बिल्कुल उस श्रीमान गुस्सैल की तरह।"
उसकी अन्त की बात पर रौनक के सिवा कोई ध्यान नही देता है
राजेस्वरी हसते हुये -" और अगर गुस्से में आपको ही मार दिया तो।"
पन्कुडी उनकी बात पर चिढ्ते जाती है क्योकि पहले से ही उसे राजेस्वरी बिल्कुल पसंद नही थी । पन्कुडी टपाक से बोलती है -" तो मेरी सासु माँ रहेंगी ना एकदम प्यारी सी वो मेरे पति को पकड के मारेन्गी आपकी तरह नही जो वीर भैया के कान भरेंगी।"
उसकी बातों से घर में शान्ति छा जाती है। तभी रौनक खासते हुये पन्कुडी का हाथ खिच कर बाहर ले कर आता है।
रौनक उसको अपने साथ ही जीप में बिठाकर -" एकदम पगाल लड़की हो ,,, चाची को क्या बोल रही थी ऐसे कोई बोलता है क्या।"
पन्कुडी उसकी बात पर चिढ्ते हुये -" मेरी सास अगर ऐसी हुई ना तो उसको मै जिन्दा जमीन मे गाड़ दूंगी।"
रौनक -" बाप रे तुम तो एकदम खतरनाक हो गयी हो ,,,, अच्छा वो श्री मान गुस्सैल कौन है।"
पन्कुडी चहकते हुये उसके ओर मुड़ कर -" पता है एकदम राजकुमार की तरह लगता है।"
रौनक -" अच्छा ,,, नाम क्या है उसका और कहाँ मिली उससे।"
पन्कुडी उदास होते हुये -" नाम तो नही पता ,,, और हमे कल वही लाया था यहां छोड़ने जब हमारी हंटर रेत मे फस गयी थी तो।"
रौनक धीरे से -" मतलब दोनो भाई बहन पागल वाले ही आशिक हैं।"
पन्कुडी उसकी बात सुनकर -" मतलब आदित्य भैया की भी है क्या कोई।"
रौनक हसते हुये -" वो तो पागल है एकदम उस लड़की के लिये ।"
पन्कुडी को इन सब में बहुत मजा आ रहा था फिर वो अपने भाई की जासूसी करते हुये -" अच्छा नाम क्या है उसका।"
रौनक -" अस्मिता ,,,, वो थोड़ा भी भाव नही देती है तुम्हारे भाई को ,,, लेकिन वह छोटे वर्ग की है।"
पन्कुडी -"भाव तो वो भी मुझे नही देता मुझे और हमारी भाभी छोटे वर्ग की हो या बड़े हमसे क्या मतलब ,,,कोई नही तो हम करायेंगे शादी अपने भाई की ,,, हमे ऐसे प्यार हो और परिवार वाले ना माने तो छत कुद भाग जायेंगे।"
रौनक हसते हुये जीप चला रहा था -" वैसे अस्मिता और वो जंगली प्राणी दोनो मिल कर बहुत काण्ड करती फिरती है किसीको भी मार - पिट देती है । हम भी उनके चप्प्लों से पिट चुके है।"
पन्कुडी उसकी बात सुन जोर जोर से हसते हुये - बहुत बढ़िया ,,, भैया हमेशा मुझे बदमाशी करने के लिये डांटते थे ना अब तो उनकी पत्नी ही वैसी होगी बहुत मजा आयेगा और मुझे एक प्यारी सी दोस्त भी मिल जायेगी।"
अभी रौनक बात करने मे व्यस्त था तभी एक लड़की उसके जीप के सामने आ जाती है जो की शॉल ओढी थी।
रौनक उसे देखकर -" अरे वो बददिमाग औरत सड़क के बीच से कौन जाता है वो भी सिर ढक कर इतनी उमस ( गर्मी ) मे।"
वो लड़की धीरे से मुड़ कर देखती है जैसे ही उसकी नजर रौनक पर पड़ती है जो की को गाड़ी मे बैठा था वह जल्दी से आकर उसके जीप मे बैठ जली है।
रौनक -" अरे अरे कहाँ आ रहीं है मोहतरमा।"
वो लड़की हाँफते हुये शॉल हटाती है तो उसे रौनक देखकर चिल्लाते हुये -" तुमम ,,,, जंगली बंदरिया उतरो जल्दी मेरे जीप से।"
सारंगी -" पहले चुप रहो और मुझे उस जंगल वाले तालाब तक छोड दो।"
रौनक -" मैने बोला पहले उतरो।'
सारंगी उससे धमकाते हुये -" बोला ना मैने ले चलो ।'
रौनक जीप वापस चालू करते हुये -" लेकिन तुम इधर इस टोले मे क्या करने आई हो।
सारंगी मुँह बना कर -" अस्मिता की याद आ रही थी तो चूरमूरा लेने आ गयी लेकिन पूरी बाजार ही बन्द है अभी,,,,, बेचारी मेरी अस्मिता कैसे होगी वहाँ मेरे बिना ।"
रौनक हल्का से हसते हुये -" मजे मे एकदम ,,,, ।"
सारंगी -" मतलब।"
रौनक -" वो आदित्य भी गया है साथ में।"
इस बार पन्कुडी ही पहले चिल्लाते हुये -" मतलब भाई शहर नही अस्मिता के साथ गये है।"
इस बार सारंगी ध्यान से देखती है की रौनक के साथ एक लड़की भी है । वो पन्कुडी को देखकर मन ही मन सोचती है रौनक के साथ यह लड़की क्या कर रही है। सारंगी को पता तो नही चल रहा था लेकिन कहीं न कहीं वो बहुत जलन महसूस कर रही थी।
पन्कुडी उसे खूद को ऐसे देख -" अरे हम रौनक भैया की बहन लगेंगे ऐसे ना देखो प्रेमिका तुम ही हो।"
रौनक और सारंगी एक साथ -" क्यायाआआआ;,,,,,,,,।
पन्कुडी दांत दिखाते हुये -" यह सब छोड़ो अब जब बाजार बंद है तो इमली कहाँ से लायें।"
रौनक -" वापस जायेंगे तो फिर चाची हमें कही न कहीं जरुर भेजेंगी।"
पन्कुडी -" उस बूढ़ी का तो मुह तोड दूं मै अगर रौनक भाई की अम्मा न होती तो।"
सारंगी उसकी बात सुन हसने लगती है फिर बोलती है -" बताये ना हमारे गाँव के जो पास वाला गाँव हैं वहाँ के ठाकुर साहब हैं ना उनका एक इमली का बगीचा है वहाँ से इमली ले सकते हो।"
रौनक -" मतलब चोरी करें हम ,,,, और तुम्हे कैसे पता की वहाँ बगीचा है ,,,,।"
सारंगी दांत दिखाकर -" वो हम अपनी अस्मिता के जाने का गम भुलाने के लिये वहाँ गये थे कल इमली खाने।"
पन्कुडी -" चलो हम भी चलते है ना प्लीज रौनक भाई ,,, आप दूर रहना हम और सारंगी लाएंगे इमली। "
रौनक उसकी जिद पर -" ठीक है ,,, लेकिन हमारा कोई हाथ नही होगा इन सब मे अगर पकड़ी गयी तो भी।"
पन्कुडी मुस्कुराते हुये -" ठीक है।"
तीनो दुसरे गाँव के रास्ते पर अपनी गाड़ी मोड लेते है।


क्रमश :


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