Suna Aangan - Part 3   in Hindi Moral Stories by Ratna Pandey books and stories PDF | सूना आँगन - भाग 3

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सूना आँगन - भाग 3

अभी तक आपने पढ़ा वैजयंती अभिमन्यु के आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। उसने अभिमन्यु की पसंद की लाल साड़ी पहन रखी थी; तभी अभिमन्यु का वीडियो कॉल आया। अब पढ़िए आगे -

"अरे-अरे वैजयंती गुस्सा नहीं, शांत हो जाओ। देखो तुम्हारे लिए यह मंगलसूत्र लिया है। बस पेमैंट करना बाकी था, सोचा एक बार तुम्हें दिखा देता हूँ । बहुत कीमती है इसलिए तुम्हारी पसंद ज़रूरी है, देखो।"

"ओ माय गॉड अभि यह कितना सुंदर है। मुझे बहुत पसंद है पर बहुत कीमती है तो मत लो।"

"क्यों नहीं लूँ? मैं जानता हूँ तुम्हें सजने का, सोलह श्रृंगार का कितना शौक है।"

"अच्छा ठीक है ले लो पर जल्दी आओ और हाँ संभल कर आना।"

"संभल कर ही आऊँगा, ऐ वैजयंती एक बार आई लव यू कहो ना!"

"क्या आप भी … "

"अरे इतनी सुंदर गिफ्ट के बाद आई लव यू तो बनता है।"

"अरे वीडियो है, कोई आस पास में खड़ा देखेगा तो?"

"तो देखने दो, मंगलसूत्र खरीदा है अपनी पत्नी के लिए, बोलो ना प्लीज़ …"

"ठीक है पर मेरी तरफ से आई लव यू ही तुम्हारे लिए उपहार होगा क्योंकि ना मैं कमाती हूँ और ना आपके बिना कहीं जाती हूँ।"

"अरे इससे बड़ा उपहार और क्या होगा?"

"ठीक है अभि, आई लव यू! आई लव यू! आई लव यू!"

"अरे वाह तुमने तो ब्याज के साथ यह सुंदर उपहार मुझे दे दिया।"

"ठीक है चलो आता हूँ, सब तैयार हैं ना।"

"हां सब तैयार हैं।"

"अच्छा सुनो एक बार आईने के सामने खड़ी होकर बैक से भी दिखाओ ना, कैसी लग रही हो? मुझे तुम्हें पूरा देखना है।"

"अरे क्या है? अभी आ तो रहे हो ना, अभि परेशान मत करो, जल्दी आओ ना, सब इंतज़ार कर रहे हैं।"

"अरे वह गिफ्ट पैक करवा रहे हैं तब तक तो रुकना पड़ेगा ना। दिखाओ ना प्लीज़ … "

"लो देखो अब बताओ कैसी लग रही हूँ?"

दुल्हन की तरह सजी धजी वैजयंती को इस रूप में देखकर अभिमन्यु दंग हो गया और बोला, "वाह वैजयंती मैं कितना ख़ुश क़िस्मत हूँ जो इतनी सुंदर, इतनी प्यारी, तुम मुझे मिली हो।" 

तभी पीछे से आवाज़ आई, "लीजिए सर यह पैक हो गया है।" 

"ठीक है चलो रखता हूँ, बाय।"

"बाय-बाय"

"हाँ भैया लाओ, गिफ्ट पैक किया है ना?"

"हाँ सर, बधाई हो सर लगता है शादी की सालगिरह है?"

"हाँ तुम सही समझे।"

अभिमन्यु उपहार लेकर गाड़ी से निकल गया। वह अपनी धुन में चला जा रहा था, आँखों में नया मंगलसूत्र पहने हुए वैजयंती का ख़्याल मन में बसा कर। तभी एक चौराहे पर तेज गति से ग़लत दिशा से आते हुए ट्रक ने अभिमन्यु की कार को जोर की टक्कर मारी। अभिमन्यु को तो कुछ भी सोचने का वक्त ही नहीं मिला। कोई भी ग़लती ना होने के बावजूद भी वह कुछ ना कर सका और दूसरे की ग़लती का शिकार हो गया। उसने वहीं पर दम तोड़ दिया। अपनी आँखों में वही सुंदर वैजयंती की तस्वीर लिए वह यह दुनिया छोड़ गया।

आधे घंटे तक अभि के ना आने से वैजयंती चिंता करने लगी। क्या हुआ होगा? निकल ही तो रहे थे, कहाँ अटक गए। इतने में वैजयंती के फ़ोन की घंटी बजी। वैजयंती ने लपक कर फ़ोन उठाया।

तब उधर से आवाज आई, "हैलो मैं पुलिस इंस्पेक्टर तिवारी बोल रहा हूँ, यहाँ एक दुर्घटना हुई है।"

"जी कैसी दुर्घटना?"

"जी एक लाल रंग की कार का एक्सीडेंट हुआ है। मोबाइल में यह नंबर सबसे ऊपर दिख रहा था इसलिए आपको फ़ोन किया है। आप लोग जल्दी लाल बत्ती चौराहे पर आ जाइए।"

"यह आप क्या कह रहे हैं? जिनका एक्सीडेंट हुआ उन्हें ज्यादा चोट आई है क्या?"

"जी आप यहाँ आइए तो सही… "  

 

रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)

स्वरचित और मौलिक

क्रमशः