Teri Chahat Main - 51 in Hindi Love Stories by Devika Singh books and stories PDF | तेरी चाहत मैं - 51

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तेरी चाहत मैं - 51

वक्त और जिंदगी की रफ्तार कभी नहीं रुकती, देखते ही देखते सिमरन दुल्हन बन कर राज के घर आ गई थी। राज के घर मैं हर तरफ खुशनुमा महौल था। सिमरन ने बड़े सलिके से घर को संभाल लिया था। ऑफिस भी जल्दी ही आना शुरू कर देती अगर मुकेश रॉय ने राज और उसेके शादी के बाद शिमला ना भेजा होता।


“मुझे आपसे कुछ बात करनी है! ज़रूरी। आज शाम फ्री हैं आप!” अजय रिया के पास जा के बोला।
"डेट पे ले जा रहे हो मुझे, मैं तो सच मैं कब से इंतजार कर रही थी!" रिया ने अजय से कहा।
"आप वैसा ही समझ लो, पर आप फ्री हो की नहीं शाम को।" अजय ने कहा तो कशिश बोली, “ऐसे कैसे समझ लूं। कभी मुझे कहीं ले तो जाते नहीं। बस शुरू मैं थोड़ा बहुत वक्त देते था। अब तो बस मुझे ऑफिस मैं ही शक्ल दिखाते हो।”
“ऐसा नहीं है, बस आज कल काम ज्यादा है, आप तो जानती है कितना बड़ा प्रोजेक्ट है। आप भी तो काम कर रही हैं।" अजय समझाते हुवे बोला।

"हां पता है, मुझे पूरे दिन फाइल्स और प्रेजेंटेशन मिलते हैं और खुद भी वही करती हूं। क्या कुछ तैयारी करोगे हमारी शादी की या नहीं।” रिया ने गुस्से से कहा।
"शादी की तैयारी? अब इसमे क्या तैयारी करनी है!” अजय ने मजे से पुछा तो रिया बिफरते हुए बोली "तो क्या युंही हो जाती है शादी, कुछ ढंग के कपड़े तो खरीदलो। ये सोचा है किसको इनवाइट करना है। मुझे शादी के बाद कहां घुमाने लेके जाएंगे। इतनी अक्ल तो होनी चाहिए। बस रोज़ जब देखो ये फाइल ये प्रेजेंटेशन और प्रोजेक्ट। वहा पापा ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। यहां तुमको कुछ होश ही नहीं है।"

“अछा बाबा गल्ती हो गई, आज से जैसा आप कहेंगे वैसा करुंगा, पर आज शाम को मिलना भी जरूरी है। मुझे कुछ बताना है।" अजय ने हाथियार डालते हुए कहा।
“क्या कहने वाले हो तुम, कहीं तुम अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड के कॉन्टैक्ट मे तो नहीं आ गए, या तुमको अब लगता है की मैं तुम्हारे कबील नहीं। अजय अगर ऐसा वैसा कुछ भी हुआ तो मुझसे बुरा कुछ नहीं होगा। मैं अभी पूरी तरह नहीं सुधरी हूं।" रिया ने अजय से गुस्से से कहा।


"हां!!!! ऐसा कुछ नहीं है। शाम का छोड़ो, आप कॉन्फ्रेंस रूम मैं चलिये।” अजय रिया का हाथ पकड़ कर बोला तो रिया ने हस्ते हुई कहा “वाओ! सीक्रेट बात करनी है क्या।”

कांफ्रेंस रूम मे अजय ने रिया को एक फाइल दी और कहा "इसको देखो जरा, सर ने मुझे आजीब कश्मोकश मैं डाल दिया है। अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।”
रिया ने बड़े सामान्य अंदाज मैं कहा "इस्मे इतना घबराने वाली क्या बात है, मैं देख चुकी हूं और पापा ने मुझसे पूछ कर ही बनायी है ये वसियत।"
"मतलब आपको पता है और आपको कोई फरक नहीं पड़ता" अजय ने हेयरत ​​से कहा।

"हां, अब इसमे तीन क्लॉस मैं हैं, पहला की पापा की प्रॉपर्टी पर शादी के बाद मेरा और तुम्हारा बराबर का हक होगा, दुसरा ये की अगर हमदोनो में से कोई भी खुदा ना करे मर जाए तो सारी प्रॉपर्टी दुसरे को ट्रांसफर होगी। इसके अलावा अगर तुम आने वाले वक्त में तुम मुझे परेशान करते हो या तुम किसी गलत कामों मैं शमिल होते हो जैसे आपराधिक गतिविधियां, शराब पीना और जुआ तो सारी संपत्ति मेरे नाम हो जाएगी। ये कह कर रिया हसने लगी तो अजय बोला “आपको कोई फरक नहीं पड़ता, इन सबसे। और इतना हंस क्यों रही हैं आप।"
रिया ने अपने आप को संभला और कहा "तीसरी शर्त पे हसी आ रही है, की तुम मुझे परेशान करोगे और किसी गलत एक्टिविटीज मेन फसोगे। तुम मुझे परेशान करोगे, सोच के ही हसी आ जाती है।" रिया फिर हसने लगी।
“यहाँ आपको हसी आ रही है, और मैं ये सोच रहा हूं की सर को मुझे नहीं इंक्लूड करना था वील मे। मैं नहीं चहता ये सब। ये सब सिर्फ आपका है। मेरा क्या हक है इन सब पे। मुझे अच्छा नहीं लग रहा रिया। सर से कहिये की मुझे ना इंक्लूड करें।'' अजय ने रिया से कहा।
"मैंने कहा था पापा से की अजय को अच्छा नहीं लगेगा, पर वो बोले, तुमको वो समझा लेंगे।" ये कह कर रिया फिर हसने लगी। अजय बोला "आपका दिमाग कुछ खराब हो गया है क्या। इतना क्यूं हंस रही है?" रिया समझ गई की अजय का मूड अब खराब होने लगा है, वो बोली "सॉरी बस वो तीसरी शर्त ना, मुझे हांसी दिला देता है, तुम और मुझे परेशान करो, उल्टा होना चाहिए था की मैं अगर तुमको परेशान कारती तो ऐसा होता।"

"ओह! तो आपको लगता है की मैं आपसे डरता हूं। आप मुझे जानती नहीं हो अभी! मेरा गुस्सा बहुत तेज है।” अजय ने कहा तो रिया मस्कुराते और अजय के करीब आते हुए बोली "हमको पता है की तुम कैसे हो। और हमको पता है की तुम हम से कितना प्यार करते हो। और अपने गुस्से को अपने पास रखो। हमने तुमसे कितनी बदतमीजी करी उसके बावजूद तुम हमको जरा सा परेशान ना देख सके। तुम हमको परेशान करो या कोई नुक्सान पहुचाओ, ये तो कभी हो ही नहीं सकता, चाहे दुनिया इधर की उधर क्यों ना हो जाए।"

"ओह तो इतना यकीन कारती हैं आप हम पर!" अजय ने रिया की आंखो मैं देखते हुए कहा

“रिया खुद से भी ज्यादा अपने अजय पे यकीन करती है। और इस ऐतबार को कभी चोट मत पहुचाना, वर्ना रिया टूट जाएगी, और बिखर जाएगी।” ये कह कर रिया वहां से चली गई।


To be continued
in 52th Part