Rajkumari Shivnya - 3 books and stories free download online pdf in Hindi

राजकुमारी शिवन्या - भाग 3

भाग ३

अब तक आपने देखा कि वैध ने रानी की जांच की ओर पता चला कि रानी मां बनने वाली है। अब आगे की कहानी देखते है।

महल की सारी दासिया रानी के मां बनने की खबर से बहुत खुश हुए, फिर एक दासी ने यह खबर एक सैनिक को बताई ओर बोला इस खबर को जल्द से जल्द संदेश द्वारा महाराज विलम तक पोहचाई जाय, वहां दूसरी ओर रानी निलंबा को होश आया , रानी ने पूछा मुझे क्या हुआ था अचानक।
एक दासी ने बताया मुबारक हो आपको रानी जी आप मां बनने वाली है , जब यह बात रानी को पता लगी वह खुशी से फूले नहीं समा रही थी ओर खुश हो भी क्यों ना पूरे १० साल बाद उन्हे संतान की प्राप्ति होने वाली है ।

रानी निलंबा यह खबर सुनते ही बोली सब शिव जी का कमाल है , मेरी मन्नत सफल रही
फिर वह तुरंत शिव जी को धन्यवाद कहने के लिए भागती हुई मंदिर गई ओर शिव जी से बोला " है शिव अपने मेरी मन्नत पूरी की आपका कोटी कोटी धन्यवाद प्रभु " ओर कहा जैसे ही मेरे स्वामी वापिस महल लौटेंगे हम १००० गरीबों को जरूर खाना खिलाएंगे। फिर वह घर पर चली आती है ओर सोचती है अगर यहां स्वामी मौजूद होते तो वह खुशी से पागल हो जाते।
उसने दासी से कहा दासी क्या किसीने महाराज तक यह खबर पोहचा दी?? फिर दासी ने कहा जी रानी जी एक सैनिक ने यह बात संदेश द्वारा उन तक पोहचा दी है आप चिंता ना करे ओर कृपिया आराम फरमाइए।

वहा दूसरी ओर रानी का खत राजा तक पोहच गया था , राजा ने बड़े ध्यान से वह संदेश पढ़ा जब उन्हे पता चला कि रानी गर्भवती है, उनकी आखों मे खुशी के अश्रु आ चुके थे , लेकिन उन्हे खेद भी हो रहा था कि इस वक्त यह खुशी बाटने के लिए वह रानी के पास नहीं थे उन्हों ने भी "शिव जी को कोटी कोटी धन्यवाद किया "।
यह संदेश पढ़ कर राजा विलम ने एक ओर संदेश रानी के लिए भिजवाया उसमे लिखा था प्रिय निलंबे मे पिता बनने वाला हूं मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा, मुझे माफ़ करीएगा इस वक्त मे आपके साथ नहीं हु , मुझे लौटने मे ५ या ६ दिन लगेंगे परंतु मे लौटने की जल्द ही पूरी कोशिश करूंगा , आप अपना ख्याल रखे।

यह संदेश राजा ने लिख कर सैनिक द्वारा भेज दिया , शाम को रानी तक यह संदेश पहुंच गया । रानी ने इस खत को पढ़ा उन्हे पता चला कि अभी भी उनको आने मे ५ या ६ दिन लगने वाले थे वह थोड़ी उदास हो गई । लेकिन उन्होंने सोचा अब तो मे गर्भवती हूं मुझे उदास नहीं रहना चाहिए वरना इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।
उन्हों ने अपनी उदासी दूर कर दी , उनको आज खीर बनाने का मन किया तो वह रसोई घर मे खीर बनाने चली गई , दासी ने कहा महारानी अगर आपको खीर खाने का मन है तो मे बना देती हूं आप जाकर शयन खंड मे विश्राम कीजिए , मगर रानी ने कहा नहीं दासी आज हम खीर बनाएंगे ।
फिर रानी ने अपने हाथो से खीर बनाई ओर पूरे महल मे बाट दी , फिर वह सोने चली गई ऐसा करते करते दिन बित गए ६ दिन पूरे हो चुके थे , ओर राजा विलम कल आने वाले थे ।

पूरे राज्य में राजा के आने की खबर फेल गई तो सब प्रजा भी अपने राजा के स्वागत मे आ गई महल रानी निलंबा पूजा की थाली ले कर मुख्य द्वार पर खड़ी थी , जेसे ही राजा आए शहनाई बजना शुरू हो गई । रानी ने राजा को तिलक लगाया राजा ने कहा हम युद्ध जीत गए निलंबा, राजा ने रानी को गले लगाया ओर अपनी प्रजा को बताया कि उनकी रानी गर्भ वती है ।
यह बात सुन कर सबमें उमंग छा सा गया , फिर रानी राजा महल के अंदर पधारे।

राजा अपनी रानी का पूरा ध्यान रखने लगे वह क्या खाती पिती है ऐसे ही नों मास बीत गए ,एक दिन रानी के पेट मे दर्द शुरू हो गया राजा ने तुरंत उनकी वैध को बुलाया , रानी दर्द से चीख रही थी थोड़ी ही देर में बच्चे का जन्म हो गया ।

वैध ने कहा मुबारक हो राजा जी आपके आंगन में बेटी का जन्म हुआ है , यह बात सुन कर राजा के चहरे पर हल्की उदासी छा गई।


कहानी को यही तक रखते है दोस्तो , अगला भाग जल्द ही आयेगा।😊

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