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उरांगम

उरंगम


रोनित ने दिल्ली विश्वविद्यालय में बी एस सी प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया विश्वविद्यालय द्वारा आवंटित डिग्री कॉलेज में एडमिशन लिया ।

सत्र शुरू होने पर कॉलेज जाना प्रारम्भ करता है दिल्ली में उसे जानने पहचानने वाला कोई नही था।

गांव से वह सीधे देश कि राजधानी भारत के दिल दिल्ली कि चकाचौंध में आकर उंसे अक्सर भ्रम भय लगता अंतर्मन भीड़ और शोर में खोया खोया रहता बार बार उसे अपना गांव सागर पाली पूर्णिया बिहार कि याद आता।

गांव बचपन के दोस्त माटी कि सोंधी खुशबू उंसे परेशान करती अपनी ओर आकर्षित करती रोनित का मन कभी कभी पढ़ाई लिखाई छोड़ कर गांव बापू एव माई की सेवा में लौटना चाहता मात्र एक महीने कि ही अवधि में जाने कितनी बार गांव कि रेलगाड़ी में बैठा और यह सोच कर उतर जाता जब उसे बाबू माई के सपने उम्मीदों अरमानों का ख्याल आ जाता लेकिन उसका मन नही लगता और पढ़ाई भी ठीक से नही हो पाती।

कॉलेज में दाखिला लिए एक माह का समय बीत चुका था अचानक एक दिन तेज रफ्तार से आती अनजानी उस जमाने में मशहूर भरतीय कार अम्बेसडर ने रोनित को धक्का मारते हुए आगे बढ़ गयी रोनित जमीन पर घायल होकर गिर पड़ा कार फर्राटे भरती हुयी आगे निकल गयी ।

भारत मे यह परंपरा है कि सड़क पर गिरे किसी भी व्यक्ति को उठाने कि कोई कोशिश नही करता है बल्कि भय सताता है कि बेवजह कानूनी पचड़े में कौन पड़े रोनित जमीन पर पड़ा जख्मी हालत में कराह रहा था भीड़ कयास लगाने में ही मशगूल थी कौन है पता नहीं कैसे किसने घायल कर दिया।

रोनित का सहपाठी धीरज भीड़ को चिरता हुआ जमीन पर पड़े रोनित के पास गया और उसने रोनित अपने सहपाठी को पहचान लिया आनन फानन वह अपने कंधे पर उठा कर रोनित को पास के अस्पताल ले गया जहाँ डॉक्टर द्वारा रोनित का प्राथमिक उपचार करने के बाद एक्स रे आदि के लिए भेज दिया गया और मेडिको लीगल कि औपचारिकता पूर्ण करते हुए नज़दीक के थाने को दुर्घटना कि सूचना दे दी गयी।

धीरज रोनित को लेकर पुनः सरकारी अस्पताल ले गया जहां से उंसे पता लगा कि रोनित का दाहिना पैर एव दाहिनी कोहनी टूटी है जिसके इलाज के लिए अच्छे खासे धन कि आवश्यकता है उसके पास जितने पैसे थे वह समाप्त हो चुके थे वह रोनित को अस्पताल में एडमिट कराने के बाद सीधे कॉलेज गया और सहपाठियों को रोनित के दुर्घटना में घायल होने कि बात बताई।

रोनित कॉलेज का नया छात्र था कॉलेज में भी उंसे जानने वाले बहुत नही थे फिर भी धीरज ने जब रोनित के दुर्घटना में घायल होने कि बात बताई तो बात बिजली कि तरह कॉलेज के छात्रों के बीच फैल गयी धीरज ने रोनित के इलाज में धनाभाव कि बात सहपाठियों को बताई तब सभी छात्रों ने रोनित कि चिकित्सा के लिए आपस मे धन एकत्र करना शुरू किया परिणाम स्वरूप रोनित कि चिकित्सा के लिए अच्छा खासा धन एकत्र हो गया औऱ उसकी चिकित्सा में धन कि बाधा नही आने पाई ।

कॉलेज के प्राचार्य को जब रोनित के दुर्घटनाग्रस्त होने कि सूचना मिली स्वंय जाकर उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों से सम्पर्क कर उसके इलाज में कोई कोताही ना हो इसको सुनिश्चित किया और पैसे कि व्यवस्था कॉलेज फण्ड से भी करने कि व्यवस्था कि रोनित के सहपाठियों ने उसके माता पिता को दुर्घटना कि सूचना दी उसके पिता रास बिहारी और माँ जानकी गांव से आ गए ।

रोनित बहुत साधारण परिवार का था उसके माता पिता के पास बहुत खेती भी नही थी न ही कोई आय का स्रोत थोड़ी बहुत खेती थी जिससे किसी तरह परिवार का गुजर बसर होता फिर भी रोनित को उच्च शिक्षा देने की हिम्मत जुटाई थी रोनित अस्पताल में भर्ती था उसके सहपाठीयों ने उसकी देख रेख एव चिकित्सा में कोई कोर कसर नही उठा रखा था।

प्राचार्य दिवेंदु सावरकर ने भी कालेज के तरफ़ से सभी सम्भव व्यवस्थाओं को सुनिश्चित कर रखा था गौरी को रोनित के घायल होने कि जानकारी तब मिली जब कालेज के अन्य सहपाठी रोनित कि चिकित्सा के लिए चंदा एकत्र कर रहे थे उंसे मालूम था कि दुर्घटना उसी के कार से हुई है वह भी रोनित से मिलने अस्पताल पहुंची और रोनित को अकेला देख दुर्घटना का उसी के कार से होने की पुष्टि करते हुए माफी मांगी।

रोनित बोला माफी कि क्या बात है आप जैसी अमीर बाप कि सहजादी को अपनी गलती का एहसास हुआ यही बड़ी बात है बड़ी विनम्रता से गैरी से निवेदन किया कि वह दोबारा अस्पताल न आए ना ही कॉलेज में दुर्घटना का कारण स्वंय को बताये।

गैरी लौट गई यह कहते हुए की अस्पताल आना या ना आना उसका अपना निर्णय है वह इस संदर्भ में कोई आश्वासन नही दे सकती।

पिता रास बिहारी माता जानकी बेटे रोनित कि देख रेख के लिए अस्पताल में ही रहते रोनित के कॉलेज के सहपाठी नियमित आते रोनित से मिलने गौरी भी नियमित रोनित के मना करने के बाद भी आती और रोनित के माता पिता के लिए अपने घर से दोनों वक्त का खना बनवा कर लाती औऱ रोनित से बात करने कि कोशिश करती लेकिन रोनित बहुत महत्व नही देता धीरे धीरे रोनित को अस्पताल में भर्ती हुये एक माह का समय बीत गया दुर्घटना के जख्म ठीक हो चुके थे सिर्फ प्लास्टर चढ़ा हुआ था डॉक्टरों ने रोनित को अस्पताल से छुट्टी देने कि बात कही और घर पर ही रहकर चिकित्सा निर्देशो का पालन करने कि हिदायत दी समस्या यह थी कि रोनित एक कमरा लेकर अध्ययन की दृष्टि से रहता था वहां उसके माता पिता कैसे रहेंगे जिनका रहना आवश्यक है ।

यह बात गैरी को पता चली उसने जिस मकान के एक कमरे में रोनित रहता था उसके मकान मालिक लीला धर सेठ को पूरे छः महीने का अग्रिम किराया भुगतान कर उसी मकान के दूसरे हिस्से में पूरा दो कमरों का प्लेट किराए पर ले लिया और मकान मालिक लीलाधर सेठ से रोनित एव उसके माता पिता से कुछ भी बताने के लिए मना किया ।

वह रोनित के पिता रास बिहारी और जानकी से मिली और बताया कि रोनित जिस मकान में रहता है उस मकान मालिक को जब रोनित कि दुर्घटना कि बात पता चली उन्होंने अपने मकान में खाली दो कमरे के फ्लैट को रोनित के स्वस्थ होने तक के लिए मानवीय आधार पर रहने के लिए दे दिया है चिंता कि कोई बात नही है।

डॉक्टरों कि सलाह के अनुसार रोनित कि आगे की चिकित्सा में कोई व्यवधान नही आयेगा रास बिहारी और जानकी बेटे रोनित को अस्पताल से छुट्टी करा कर सेठ लीला धर द्वारा दिये फ्लेट पहुंचे रोनित को बहुत आश्चर्य इस बात पर हुआ कि जो मकान मालिक दस पांच पैसे के लिए किसी स्तर पर उतर आता हो वह कैसे मुफ्त में अपना फ्लेट दे सकता है उंसे लगा की शायद उसके हालात पर सेठ लीला धर को दया आ गयी हो और उसमे मानवता जाग गयी हो उसने इस बात पर बहुत दिमाग लगाना उचित नही समझा ।

हर दिन उसके सहपाठी उससे मिलने आते रोनित के सहपाठियों ने चार चार पांच पांच की टीम बनाकर रोनित की देखभाल के लिए दिन समय निर्धारित कर रखा था जिससे अध्ययन में खलल न पड़े और रोनित कि देखभाल में भी साथ ही साथ गौरी नियमित आती और रोनित के माता पिता के पास बैठती रोनित उससे बहुत औपचारिक औऱ सीमित बात ही करता।

रोनित धीरे धीरे लगभग छः माह में चलने फिरने लायक हो गया और सातवें माह पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर पुनः कॉलेज जाने लगा माता पिता रास बिहारी एवं जानकी गांव लौट चुके थे अब सब कुछ सामान्य था जब रोनित पुनः अपने एक कमरे में शिफ्ट होने लगा और मकान मॉलिक को बीमारी के दौरान मुक्त बिजली पानी सुविधाओं के साथ फ्लैट देने के लिए आभार जताने लगा।

तब सेठ लीलाधर बोले रोनित आप किसी गलत फहमी में न रहे मैंने अपना फ्लैट मुफ्त में नही दिया था बल्कि गौरी ने पूरे छः महीने का किराया अग्रिम दे रखा था और सातवें माह का किराया उसने कल ही अपने होम मेट नवरत्न के हाथों भिजवाया है और हाँ इस दौरान तुम्हारे इलाज पर जो भी खर्च हुआ है गौरी के पिता सेठ पीतरुमल्ल ने दिया है किस बात का आभार यदि आभार व्यक्त करना ही है तो गौरी और उसके पिता का करे रोनित को लगा जैसे उसके पैर से जमीर कि जमीन ही खिसक गई वह अगले दिन के सुबह का इंतजार करने लगा।

सुबह होते ही रोनित कालेज पहुंचा और गौरी कि का इंतजार करने लगा गौरी कि कार अपने चिरपरिचित अंदाज़ में कॉलेज प्रांगण में दाखिल हुई ज्यो ही गौरी कार से उतरी भागे भागे हांफते हुये रोनित गौरी के पास गया और बोला गौरी मुझे माफ़ करना मैं तुम्हे समझ नही पाया तुमने तो मुझे अपने एहसान के बोझ से बोझिल कर दिया मैं तुम्हारा ऋणी हूँ मेरी माँ तुम्हारी बहुत तारीफ करती है आज पता चला वह सही है मैंने ही झूठे अंहकार कि पट्टी बांध रखी थी।

गौरी अपने चिरपरिचित अंदाज़ में बोली तुम थोड़ा आराम कर लो हांफ रहे हो फिर बात करते है मैं कहाँ भागी जा रही हूँ और रोनित और गौरी एक साथ क्लास रूम में दाखिल हुए क्लास रूम में पहले से बैठे सहपाठियों ने खड़े होकर तालियों कि गड़गड़ाहट के साथ गौरी और रोनित कि दोस्ती का स्वागत किया ।

गौरी और रोनित के बीच दुर्घटना को लेकर पली गलत फहमियां दूर हो चूंकि थी अब दोनों स्वस्थ एव खुशनुमा वातावरण में एक दूसरे को बेहतर समझने लगे थे ।

दो दिन बाद ही कॉलेज के प्राचार्य दिव्येन्दु सावरकर ने रोनित को अपने कार्यालय में बुलाकर कहा सात महीने का कोर्स निकल चुका है अब तुम्हारे सामने एक ही विकल्प है कि तुम एक वर्ष ड्राप कर दो क्योकि बहुत कठिन होगा सात महीने के पिछड़े कोर्स को कवर कर पाना या तो तुम्हे कालेज द्वारा निर्धारित कमेटी के समक्ष एक निर्धारित समय के बाद उपस्थित होकर पिछड़े कोर्स कि परीक्षाओं को कम से कम साठ प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण करना होगा तुम्हे एक सप्ताह का समय दिया जाता है स्वंय बताओ कि तुम्हे कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर परीक्षा देना है या ड्रॉप करोगे अब तुम जा सकते हो।

रोनित लौटकर क्लास रूम में बहुत उदास होकर बैठ था जब उसके सहपाठी उसकी उदासी का कारण जानते है सभी मिलकर एक रोनित सहयोग समिति बनाते है जिसकी अध्यक्षा गौरी को बनाते है और पिछड़े कोर्स को पूरा कराने के अभियान में जुट जाते है गौरी रोनित कि सम्बल शक्ति की तरह उसकी प्रेरणा बनकर उंसे हिम्मत देती रहती है।

एक सप्ताह बाद रोनित प्राचार्य दिव्येन्दु सावरकर के समक्ष उपस्थित होकर कालेज कमेटी कि निर्धारित परीक्षा परिक्षा में उपस्थित होने कि सहमति दे दिया प्राचार्य महोदय ने उसे पैंतालीस दिन का समय दिया तीन महीने बाद विश्वविद्यालय कि परीक्षाएं होनी थी ।

रोनित सहयोग समिति गौरी कि अध्यक्षता में रोनित के पिछड़े कोर्स को केवल पूरा ही नही कराया बल्कि उसे विल्कुल अद्यतन कर दिया निर्धारित समय पैंतालीस दिन बाद रोनित कालेज कि कमेटी के समक्ष उपस्थित हुआ और कमेटी द्वारा निर्धारित परीक्षाओं को दिया पंद्रह दिन बाद पुनः कालेज के प्राचार्य दिव्यन्दू सावरकर ने रोनित को बुलाया और बड़े जोश से उसका स्वागत अपने कार्यालय में किया और बताया तुमने तो अपने सहपाठियों के सहयोग और गौरी कि अध्यक्षता में कामाल ही कर दिया है भयंकर दुर्घटना से उबरने के बाद सात माह कोर्स में पिछड़ने के बाद कालेज कमेटी कि इंटरनल स्क्रीनिंग परीक्षा में अस्सी प्रतिशत अंक प्राप्त करके एक नया रिकॉर्ड ही बना डाला अब तुम्हारा एक दिन भी बर्वाद नही होगा और तुम विश्विद्यालय कि परीक्षा दे सकोगे रोनित को तो जैसे जीवन के अंधेरे से ही निजात मिल गया हो ।

सारे सहपाठियों ने रोनित कि खुशी में सम्मिललित होने के लिए एक पार्टी दी जिसका अधिकतम व्यय गौरी ने उठाया बी एस सी प्रथम वर्ष द्वितीय वर्ष फिर एम एस सी गौरी एव रोनित ने किया गौरी ने जैविक विज्ञान तो रोनित ने क्वांटम फिजिक्स में एम एस सी किया ।

कोलेज में पास आउट स्टूडेंट के सम्मान समारोह में प्राचार्य दिव्यन्दू सावरकर ने गौरी और रोनित से अपना व्याख्यान शुरू किया और उन्हीं पर केंद्रित रखते हुए सारे दोस्तो सहपाठियों के उज्ज्वल भविष्य कि शुभकनाये एव आशीर्वाद दिया ।

दिव्यन्दू सावरकर ने अपने सारगर्भित एव भावनात्मक संबोधन में कहा कि हमारे कॉलेज में प्रतिवर्ष पास आउट सम्मान विदाई का आयोजन होता रहता है और हमे अपने कॉलेज के हर स्टूडेंट से यही अपेक्षा रहती है कि वह कालेज का नाम रौशन करेगा और कॉलेज द्वारा दिये गए सबृद्ध सांस्कार को अक्षुण रखेगा ।

देश समाज परिवार कि महिमा गरिमा को बढ़ाएगा इस वर्ष के विदाई समारोह कि खास बात यह है कि यह समूर्ण छात्र समुदाय बहुत विशेषताओं से विभूषित है चाहे आपसी समन्वय हो या परीक्षा में अंक प्राप्ति हो या खेल नाटक संगीत सभी क्षेत्रों में कॉलेज को गौरवान्वित किया है निश्चय ही गौरी एव रोनित का विरिधाभाषीय संगम कालेज के इतिहास में अविस्मरणीय रहेगा जो अपनी उपलब्धियों से कॉलेज का नाम रौशन करते ही रहेंगे साथ ही साथ अपनी उपलब्धियों से हर सत्र के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंज गया समारोह के अंत मे सभी आचार्यो ने अपने प्रिय शिष्यों को आर्शीवाद के सम्बल कि शुभकामनाएं दी एव सभी सहपाठियों ने एक दूसरे कि सफलता के लिये शुभकनाये दी।

एक दो दिन बाद हॉस्टल खाली हो गए रोनित को भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी करनी थी वह अपने उद्देश्य पथ पर दृढ़ता से चल पड़ा गौरी को भी भारतीय प्रशासनिक परीक्षा ही देनी थी वैसे माँ बाप कि एकलौती पुत्री पैसे कि कोई कमी नही थी फिर भी वह कुछ अलग उपलब्धि के साथ अपनी माँ बाप का नाम
रौशन करने के लिए दृढ़ थी ।

फिर क्या था एक बार पुनः भगवान ने गौरी और रोनित को एक ही उद्देश्य पथ का मुसाफिर बना दिया दोनों साथ मिलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा कि तैयारी करने लगे उस जमाने मे कोचिंग कि सुविधाएं बहुत ही सीमित थी और महंगी एव दुरूह गौरी कोचिंग कर रही थी रोनित के पास इतना पैसा तो था नही की वह कोचिंग ज्वाइन करता गौरी कोचिंग के नोट्स टिप्स उंसे हर सप्ताह बृहस्पतिवार एव रविवार देती डिस्कस करती और रोनित के द्वारा उठाये गए प्रश्नों को कोचिंग में पूछती यह सीलसिला चलता रहा भारतीय प्रशासनिक सेवा कि परीक्षा निकट थी तभी समय ने पुनः एक बार करवट बदला।

गौरी अपने कार से रोनित को साथ लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के परीक्षा के लिए जा रही थी कार चालक कार चला रहा था दोनों आपस मे अपनी अपनी तैयारियों कि चर्चा कर रहे थे परीक्षा केंद्र से कुछ दूर पूर्व ही गौरी अचनाक बेहोश हो गयी रोनित ने उसे होश में लाने कि बहुत कोशिश की लेकिन कोई फायदा नही हुआ तब रोनित ने कार चालक मौलिक से कहा कि वह कार किसी अच्छे अस्पताल कि तरफ़ मोड मौलिक ने रोनित से कहा कि साब आप जाकर परीक्षा दो हम गौरी बेबी को लेकर जाते है लेकिन रोनित के लिए परीक्षा से अधिक महत्व गौरी का होश में आना ही था मौलिक ने पुनः रोनित से विनम्र भाव से निवेदन करता बोला साब आप परीक्षा दो हम बेबी को लेकर जाते है आपकी मेहनत बेकार हो जाएगी रोनित गुस्से से लाल पीला होते हुए बोला तुम्हे दिखता नही जिसकी वजह से मेरा वजूद है मेरी परीक्षा का उद्देश्य है उसकी परीक्षा छूट रही है तुम बिना कोई सवाल जबाब किये कार अस्पताल कि तरफ़ ले चलो मौलीक ने कार को सर गंगाराम अस्पताल कि तरफ़ मोड़ दिया और कार इतनी तेज चलाने लगा जैसे उंसे स्वंय कि जिंदगी से कोई लगाव नही है कुछ ही देर में वह सर गंगा राम हॉस्पिटल पहुंच गया रोनित ने जल्दी से गौरी को उठाया और आकस्मिक वार्ड कि तरफ़ चल पड़ा जहां ड्यूटी पर डॉ श्रेया थी उन्होंने रोनित कि घबड़ाहट देख कर समझाते हुए कहा हिम्मत रखिये हम इनका इलाज शुरू करते है और डॉ श्रेया ने गौरी को जितनी भी संम्भवः चिकित्सा थी दिया मगर कोई विशेष फायदा नही हुआ बस हुआ इतना गौरी को कुछ देर के लिए होश आता और पुनः वह बेहोश हो जाती ।

डॉ श्रेया ने अपने सीनियर डॉ अक्रूर आनंद को बुलाया और पेशेन्ट कि केस हिस्ट्री से अवगत कराया इतने देर में मौलिक गौरी के पिता पीतरुमल को एव माँ कामिनी को लेकर अस्पताल पहुंचा।

डॉ अक्रूर आनंद ने कुछ टेस्ट कराए जिनके रिपोर्ट निष्कर्ष पर पहुंचे की गौरी को ब्रेन ट्यूमर है जो इतना बढ़ चुका है कभी भी ब्रस्ट कर सकता है तब गौरी को नही बचाया जा सकता है।

गौरी के पापा पीतारु मल जी को जब गौरी कि बीमारी का पता चला वह विचलित हो गए एक ही तो लाडली बेटी थी जो उनके जीवन कि सारी खुशियों कि दुनियां थी उन्होंने बेटी कि उचित चिकित्सा के लिए भारत के बड़े से बड़े डॉक्टरों से सम्पर्क किया डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि भारत मे फिलहाल ब्रेन ट्यूमर कि सर्जरी अभी नही होती है अतः गौरी को इंग्लैंड या अमेरिका ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए जाना पड़ेगा।

पैसा तो कोई समस्या नही थी क्योकि सेठ पीतारु मल्ल बहुत बड़े उद्योगपति एव व्यवसायी थे बिना बिलम्ब किये वह बेटी गौरी को लेकर अमेरिका के लिए रवाना हो गए गौरी कि बीमारी के कारण गौरी एव रोनित दोनों का ही भारतीय प्रशासनिक सेवा चयन परीक्षा छूट गयी दोनों एक दूसरे के साथ ही परीक्षा देना चाहते थे जिसके लिए दोनों ने तैयारी कर रखी थी ।

अमेरिका में गौरी कि चिकित्सा चल रही थी इधर रोनित गैरी के स्वस्थ होकर लौटने का इंतजार कर रहा था गौरी कि चिकित्सा में छः महीने से अधिक का समय लग गया जिसके कारण रोनित ने दूसरी बार भारतीय प्रशाशनिक सेवा का आवेदन ही नही किया जब गौरी पूरी तरह स्वस्थ हो गयी और भारत लौट आयी किंतु एक समस्या ने उसे चिंतित कर रखा था ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद गौरी के सर के बाल सदा के लिए खत्म हो चुके थे और उसे ह्विग लगाना पड़ता था इस बात को उसने रोनित को नही बताया क्योकि उंसे यह डर था कि सर पर बाल न होने से उसका ख़ूबहसुरत चेहरा बदसूरत दिखता है जिसे रोनित कभी पसंद नही करेगा वह रोनित को किसी कीमत पर खोना नही चाहती थी रोनित इस सच्चाई से बेखबर हर हाल में गौरी को खुश देखना चाहता था गौरी के स्वस्थ होकर अमेरिका से लौटने के बाद पुनःदोनो भारतीय प्रशासनिक सेवा कि तैयारी में जुट गए और दोनों ने एक साथ मिल कर आपसी ताल मेल से बहुत आत्मविश्वास के साथ तैयारी किया और दोनों ही अच्छी वरीयता से चयनित हुये अब क्या था रोनित कि खशियो कि दुनियां एक बार फिर से रौनक होने लगी दोनों को ही केन्द्रशासित कैडर मिला था जो उनकी प्रथम वरीयता थी कारण गौरी के पापा सेठ पीतारुमल्ल का दिल्ली में व्यवसायिक एव आद्योगिक साम्राज्य था जिसके चलते रोनित ने भी केंद्रशासित कैडर को वरीयता दे रखी थी दोनों का प्रशिक्षण समाप्त हुआ और पदस्थापना भी देश कि राजधानी दिल्ली ही हुयी दोनों के बीच आपसी समझ तो थी ही दोनों के परिवारों में भी रिश्ते को लेकर समझ थी।

दोनों परिवार बहुत खुश थे और गौरी एव रोनित भी लेकिन शायद ईश्वर ने कुछ और ही सोच रखा था एक दिन बिना किसी पूर्व सूचना के रोनित गौरी के घर सुबह सात आठ बजे अचानक पहुंच गया नौकर ने बताया कि बेबी बाथरूम में स्नान कर रही है और पापा मम्मी बाहर दो दिनों के लिए गए है रोनित को लगा उंसे गौरी का इंतज़ार करना चाहिये वह ड्राइंग रूम में बैठ गया ड्राइंग रूम से गौरी के बेड रूम का ट्रेसिंग टेबल बहुत साफ दिख रही थी जिस पर ह्विग रखा हुआ था ड्राइंग रूम का पर्दा उठा हुआ था नौकर किसी काम से चला गया क्योकि उंसे गैरी और रोनित के रिश्ते एव दोनों परिवारों कि रजामंदी की बात मालूम थी रोनित सोच में पड़ गया कि आखिर गौरी के घर ह्विग कौन लगाता है वह इसी उधेड़ बुन में पड़ा ही हुआ था कि

तभी गौरी बाथरूम से बाहर निकती रोनित को दिखाई दे गई वह गौरी को देखते ही डर गया उंसे सपने में भी अंदाजा नही था कि गैरी ही हेयर ह्विग का इस्तेमाल करती है गौरी ने ध्यान ही नही दिया कि ड्राइंग रूम में रोनित बैठा हुआ है वह ड्रेसिंग टेबल पर रखें ह्विग को लगा कर बकायदे प्रतिदिन कि तरह ड्राइंग रूम में दाखिल हुई उसे जरा भी अंदाज़ा नही था कि रोनित ने उसका बिना व्हीग भयानक चेहरा देख लिया है वह अपने चिर परिचित मुस्कान के साथ रोनित का स्वागत किया रोनित के चेहरे से स्वभाविक खुशी गायब थी और बनावटी तौर तरीके उसके व्यवहार से विल्कुल स्पष्ठ हो रहा था रोनित एकाएक उठा औऱ बोला गौरी हम चलते है गौरी को रोनित का अंदाज़ अच्छा नही लगा बल्कि नागवार गुजरा उसने पूछ ही लिया रोनित आखिर बात क्या है तुम आज खिंचे खिंचे लग रहे हो या मैं ये कहूं कि बदले बदले सरकार नज़र आते है तो अतिश्योक्ति नही होगी रोनित के चेहरे पर औपचारिक बनावटी हंसी बहुत साफ दिख रही थी जो गौरी को परेशान किये जा रही थी इधर रोनित जल्दी से जल्दी गौरी के पास से हटना चाहता था वह चलने के लिए उठा और बाहर निकल पड़ा गौरी ने उसे रोकने कि बहुत कोशिश किया लेकिन कोई फायदा नही हुआ रोनित चला गया और गौरी के लिए छोड़ गया प्रश्नों का पुलिंदा जिसे गौरी अपने अंतर्मन में समेटे उत्तर खोजने कि कोशिश करने लगी।

सेठ पितरुमल इन सब से बेखबर रोनित को अपने व्यवसायिक एव आद्योगिक साम्राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में रोनित को चुन चुके थे साथ ही साथ अपने घर अपनी लाडली के जीवन के लिए भी चुन चुके थे उन्होंने रोनित के माता पिता से भी रिश्ते की बात कर रखी थी उनको किसी भी अनहोनी कि दूर दूर तक कोई आशंका नही नज़र आती ना ही इस रिश्ते में व्यवधान उधर रोनित ने गौरी से मिलना जुलना बन्द कर दिया जब भी गौरी रोनित से मिलने का प्रायास करती वह कोई न कोई बहाना बना देता गौरी को मालूम ही नही था कि रोनित ने उसका गंजा चेहरा देख लिया है जो किसी भी नौ जवान के लिए अच्छा तो नही हो सकता गौरी अनुमान ही लगा सकती थी और रोनित के एकाएक आये व्यवहार में परिवर्तन के कारण को पता करने में जुट गई एक दिन वह बिना बताए रोनित के घर सुबह सुबह पहुंच ही गयी रोनित अभी रात भर कि नींद से जागा ही था गौरी को सुबह सुबह देख कर हत प्रद रह गया उसने गौरी को बड़े आदर सम्मान के साथ बैठाया और इधर उधर कि बाते करने लगा उसकी बातों में प्यार एव भवनाओं का कही कोई स्थान नही था दोनों बहुत देर तक इधर उधर कि बाते करते रहे बीच बीच मे साथ बिताए खुशी गम के लम्हो कि भी चर्चा हो जाती लेकिन रोनित इन चर्चाओं पर गम्भीर हो जाता गौरी रोनित कि बातों हाव भाव से जानने का प्रायास करती रही तभी उसने कुछ ऐसा नाटक किया जिससे कि गौरी के सर का व्हीग नीचे गिर गया रोनित एकाएक पागल सा चिल्लाता हुआ बोला गौरी नही यह तुम्हारा रूप बहुत भयानक डरावना लगता है औऱ आंख बंद कर लिया गौरी को समझते देर नही लगी कि रोनित को व्हीग की सच्चाई पता चल चुकी है वह छुपा भी कब तक पाती एक न एक दिन सच्चाई सामने आनी ही थी जब गौरी कि समझ मे बात आ गयी और रोनित कि मानसिक स्थिति को समझ चुकी तब वह बोली

#रोनित प्यार सिर्फ वासना नही है शरीर मन कि संतुष्टि मात्र नही है बल्कि वासना सतुष्टि का प्यार में कोई मतलब नही प्यार ईश्वर का दिया जीवन में सबसे कीमती दौलत है जो भाग्य से ही बिरलों को ही मिलता है मेरे सर से बाल चले गए तो मेरा इसमें क्या दोष है? बीमारी मैने जान बूझ कर मोल तो नही ली थी#
रोनित सर झुका कर गौरी कि बाते सुनता रहा कुछ भी बोल सकने कि हिम्मत नही जुटा सका।

गौरी बोलती रही अगर तुम्हारे साथ कुछ ऐसा हो जाता तो क्या मैं अपने जीवन भर कि दौलत प्यार जो तुम हो को छोड़ देती हरगिज नही क्योकि नारी मोम पत्थर दोनों बन सकती है नारी ममता घृणा में नौ दुर्गा की अवतार है तो अन्याय अत्याचार कि काल बन सकती है ।

हां नारी पुरुष प्रधान समाज मे एक हद तक समझौता करती है सिसकती है नम आंखों से रोती है मन कि आंखों से बिलखती है फिर भी पुरुष के अहंकार कि संतुष्टि के लिए काल कराल नही बनती बल्कि ममता कि सागर ही रहती है जिसके अंतर्मन में अनेको विषैले पड़ाव के जख्म होते है फिर भी उसकी लहरे उठती है तो पुरुष के पराक्रम के लिए उसके पुरुषार्थ के उत्कर्ष के लिये प्यार के प्रवाह में युग समाज कल्याण में तब भी तुम पुरुष नारी को खिलौना ही समझते हो कभी सामाजिकता के नांम कभी धर्म के नाम कभी ऊंच नीच के नाम कभी स्वंय के स्वार्थ के नाम बलि तो नारी की ही चढ़ती है तुम पुरुष का कही कोई दोष नही होता है आज मै गौरी खुले मन से प्रकृति परमेश्वर को चुनौती देती हूँ कि यदि तुम्हे मुझे सिर्फ मुझे ही स्वीकार करना होगा किसी भी और को तुम इस जन्म में तो क्या किसी जन्म में स्वीकार नही कर सकते हो इतना कहते हुए गौरी ऐसे बाहर निकली जैसे कोई घायल शेरनी ।

रोनित को पूरा विश्वास था कि गौरी ने जो कहा है वह अवश्य ही संम्भवः कर दिखाएगी रोनित गौरी से प्यार करता था उंसे बहुत अच्छी तरह जानता भी था वर्षो से दोनों साथ साथ ही रहे लेकिन जिंदगी ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हो गयी जहां किसी भी निर्णय पर पहुंचना मुश्किल था वह अपने उच्च अधिकारियों से स्थिति पर चर्चा किया और निवेदन किया कि मनावीय पक्षो को ध्यान में रखते हुए उसका स्थानांतरण केंद्र शासित राज्य अंडमान निकोबार कर दिया जाय जहाँ कोई अधिकारी जाने से ही डरता है।

रोनित के उच्च अधिकारियों को कोई आपत्ति नही थी बल्कि बैठे बैठाए उन्हें अंडमान निकोबार के लिए एक योग्य अधिकारी तो मिला ही दिल्ली में एक खाली जगह अपने चहेते के लिए मिल गयी रोनित का स्थानांतरण अंडमान निकोबार हो गया और वह बिना किसी से बताये अंडमान निकोबार चल पड़ा ।

जब यह बात गौरी को पता लगी वह बड़े निश्चिन्तता से अपना कार्य करती रही और अपने पापा सेठ पितरुमल को समझा दिया कि रोनित का स्थानांतरण एक सामान्य प्रशासनिक घटना है पितरुमल भी निश्चिंत भाव से बेटी के भविष्य कि योजनाओं पर तेजी से अमल कर रहे थे ।

इधर गौरी ने एका एक पापा पितरुमल से अंडमान जाने के लिए अपनी मंशा जाहिर किया पितरुमल को कोई आपत्ति नही थी उनको यह एहसास था कि जिस रोनित से गौरी कि प्रतिदिन मिलते साथ रहते उठते बैठते थे रोनित के अंडमान चले जाने के कारण निश्चित तौर पर दोनों एक दूसरे को याद करते होंगे गौरी को जाकर मिलते रहने में क्या आपत्ति ?
उन्हें रोनित एव गौरी के मध्य मतभेद का कत्तई अंदाज़ा तक नही था ।

गौरी अंडमान पहुंच गई और गेस्ट हाउस में रुकी और रोनित से मिलने का समय मांगा रोनित ने उसे अपने सरकारी आवास पर शाम का समय दिया गौरी निर्धारित समय पर पहुंच गई रोनित ने गौरी का खुले मन मस्तिष्क से बहुत जोरोदार स्वागत किया दोनों में बहुत देर तक बाते होती रही रोनित गौरी को समझाता रहा कि वह जीवन भर किसी लड़की से ना तो शादी करेगा ना ही किसी से प्यार तो क्यो न हम दोनों एक दूसरे के अच्छे दोस्त बनकर रहे गौरी बार बार यह समझाती रही कि मेरे सिर पर आम लड़कियों जैसे बाल नही है जिसमे मेरी कोई गलती नही मैं गंजी जान बूझकर नहीं हुई ईश्वरीय विधान मानो या विज्ञान का चमत्कार मुझे गंजी ही जीना होगा यही जीवन जन्म के बाद चिकित्सा विज्ञान के कारण मिला है नही तो शायद मैं जीवित ही नही होती ।

रोनित ने गौरी के सभी तर्को को सुनने के बाद कहा गौरी हमारे धर्म शास्त्र में किसी लड़की या औरत के सिर के बाल तब मुड़वाये जाते है जब वह विवाहिता हो और विधवा हो चुकी हो मुझे पता नही इस प्रथा में सत्यता है या अंध विश्वास लेकिन बचपन से मेरे समाज ने मेरे मन मस्तिष्क पर इसी तथ्य कि सत्यता कि लकीर खींच रखी है जिसे मिटाने कि बहुत कोशिश कर रहा हूँ लेकिन मन मस्तिष्क से मिटती ही नही गौरी मैं नही चाहता कि तुम्हे जीवन मे कभी किसी तरह से दुःख मिले तुम्हरा नाम गौरी है प्रत्येक मांगलिक शुभारम्भ में गौरी कि अर्चना होती है तो स्वंय गौरी के जीवन मे अशुभ का ही शुभारम्भ क्यो ?

अब गौरी को बहुत साफ समझ मे आ गया था कि रोनित क्यो उससे सिर्फ सर पर बाल न होने के कारण दूर हो रहा है जब की ख़ूबहसुरत व्हीग लगाती हूँ खूबसूरत दिखती हूँ दुनियां नही जानती कि मैं गंजी हो चुकी हूं वह एका एक उठी जैसे कोई घायल शेरनी और उसने रोनित से हाथ मिलाया हाथ मिलाते समय हाथ मे पहने कड़े को कुछ इस तरह से रोनित से स्पर्श कराया कि रोनित के हाथ मे हल्की खरोंच आ गयी और खून का रिसाव हो गया गौरी बोली देखो रोनित तुम्हारे रगों में दौड़ती खून कि धाराएं भी हमे नही छोड़ना चाहती रोनित बोला यही तो हमारे प्यार कि गहराई है जो दुनियाभर के लोगो को आने वाले दिनों में प्यार का नव सन्देस देगी गौरी कि आंखे भर आयी वह बोली रोनित वास्तव में मैं और तुम युगों युगों तक जब तक जहाँ है मिलेंगे और प्यार कि इबारत का नया आयाम अध्याय बनाते रहेंगे जिस वक्त रोनित कि कलाई पर गौरी के कड़े से खरोंच आयी ठिक उसी समय गौरी कि भी कलाई से हल्का खरोच आया और खून का रिसाव हुआ गौरी ने बड़े भारी मन से रोनित से विदा लिया और गेस्ट हाउस आकर सीधे वह अपना सामान लेकर एयर पोर्ट पहुंची सुबह चार बजे कि फ्लाइट से कलकत्ता फिर दिल्ली पहुंच गई इधर सुबह रोनित उठा उंसे लगा जैसे उसने जीवन मे सब कुछ खो दिया उसके पास सिर्फ ईश्वर के दिये हुए साँसों धड़कन कि जिंदगी के अतिरिक्त कुछ भी नही है वह दिन भर अपने कार्यालयी कार्यो को निपटाता रहा शाम को जब वह कार्यालय से आवास हेतु निकलने को हुआ तभी वह अचानक गिर पड़ा सारे स्टाफ में अफरा तफरी मंच गयी तुरंत ही उसे अंडमान के सबसे बड़े हॉस्पिटल एव चिकित्सक कि देख रेख में रखा गया लेकिन डॉ अमूल्य टैगोर ने रोनित को तुरंत दिल्ली के लिये रेफर कर दिया डॉ अमूल्य टैगोर को यह समझ ही नही आ रहा था कि रोनित को हुआ क्या है क्योंकि मेडिकल साइंस ने अब तक इस प्रकार कि शारीरिक स्थिति पर विचार तक नही किया है चूंकि मामला शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी का था तुरंत सारा अमला रोनित को दिल्ली शिफ्ट करने में लग गया ।

उधर गौरी जब शाम को दिल्ली अपने घर पहुंची कुछ ही देर बाद उसकी भी दशा बहुत गम्भीर हो गयी दिल्ली का बड़ा से बड़ा डॉक्टर चिकित्सा करने की बात तो दूर समझ नही पा रहा था कि गौरी को हुआ क्या है और इसके इलाज कि शुरुआत कैसे कि जाय?

गौरी कि नई बीमारी कि खबर दिल्ली में आग की तरह फैल चुकी थी तब तक रोनित भी दिल्ली पहुंच चुका था।

रोनित के भी ठीक वही लक्षण थे जो गौरी अतः डॉक्टरों ने गौरी और रोनित को एक ही वार्ड में रखा एक वार्ड में सिर्फ दो ही बीमार थे रोनित और गौरी पितरुमल एव उनकी पत्नी कामिनी बेटी कि दशा को देखकर विचलित परेशान तो थे ही तब तक रोनित भी उसी हालात का शिकार वहाँ पहुंचा अब तो जैसे पितरुमल परिवार वज्र पात ही हो गया तुरंत रोनित के माता पिता को सूचना पितरुमल ने भेजा और उन्हें लाने के लिए अपने खास मुलाजिम नरोत्तमदास को भेजा नरोत्तमदास दास रोनित के माता पिता रासबिहारी एव जानकी जो रोनित कि शादी के सपने सजोये शुभ घड़ी का इंतज़ार कर रहे थे को लेकर दिल्ली लौट आया ।नरोत्तमदास रासबिहारी एव जानकी के दिल्ली आते ही पूरा सामाज जो भविष्य के खूबसूरत रिश्तो के लिए सपने सजोये था सर गंगा राम अस्पताल में एक साथ खड़ा हंसता चल सूरज को निहार रहा था ।

रोनित एव गौरी के समन्वय का तेज था पूरे दिल्ली में रोनित एव गौरी के लाइलाज बिचित्र बीमारी कि चर्चा समाचार माध्यमो से आग कि तरह फैल चुकी थी ।

कॉलेज के पुराने सहपाठियों को जहाँ तहां जिसको जानकारी मिली जिसका भी दिल्ली आना संम्भवः था सब पहुंच गए कालेज के प्राचार्य दिव्येन्दु साँवरकर एव अन्य आचार्य भी उपस्थित थे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे आज कोई विशेष अवसर है और अति विशिष्ट ऐतिहासिक घटनाएं घटने वाली है।

तभी वार्ड से सिस्टर चिल्लाती हुई बाहर निकली गौरी और रोनित को होश आ गया है सम्भवत अब बेहोश होंगे तो फिर कभी होश में नही आ सकेंगे जिसको मिलना हो मिले डॉक्टरों कि अनुमति है ।

पितरुमल कामिनी रासबिहारी जानकी दिव्येन्दु साँवरकर कॉलेज के सहपाठी धीरज आदि सेठ पिरूमल के फैक्टरी एव व्यवसायिक कर्मचारी लगभग सभी डॉक्टर एकत्र थे पूरा वार्ड खचाखच भरा हुआ था जैसे कोई बहुत अजीब घटना घटने वाली हो सभी बेवश लाचार दर्शक हों ।

तभी गौरी ने कहा मेरा बेड रोनित के बेड से मिला दिया जाय जल्दी से दोनों बेड़ो को एक डबल बेड में बदल दिया गया ।

गौरी ने बोलना शुरू किया मेरी साँसों धडकनों के मुखिया मॉलिक प्यार यार जीवन सपना हकीकत कि सच्चाई रोनित सुनो मैं इस जन्म क्या किसी जन्म में नही छोड़ने वाली याद है जब हम भारतीय प्रशासनिक सेवा कि परीक्षा देने जा रहे थे और मैं बीमार हुई थी तब तुम ही मुझे लेकर यहाँ आये थे और आज भी लेकर ही जाओगे आत्मा को रूह को क्योकि उसी के बाद मेरे सर से बाल सदा के लिए गायब हो गए और मैं गंजी हो गयी तुम्हे बचपन से यही दिखाया गया है कि किसी भी व्यहता के सर से बाल तभी मुड़ाये जाते है जब उसके पति कि मृत्यु हो जाती है तो आज तुम्हारे इस भ्रम को सदा के लिए तोड़ती हूँ क्योकि हम साथ साथ शरीर से रूह आत्मा की यात्रा शुरू करेंगे।

पढ़े लिखे मन मतिष्क कि संकुचित सोच नही है तो क्या है जिसे पता है कि बीमारी के कारण मेरे सर के बाल नही है मैं गंजी हो गयी जिसे वह अपने लिए अशुभ मानते हुए भयग्रस्त हो जबकि दुनियां को व्हीग में भी मैं वैसी ही लगती हूँ जैसी पहले तो तुम्हे क्यो नही ?

प्यार में तो लोग बड़ी से बड़ी कुर्बानी त्याग बलिदान दे देते है रोनित तुम तो कुछ वर्षों कि जिंदगी के लिए डर गए प्यार में भय भ्रम और भयानक जैसे जुमलों या वास्तविकता से नही भागना ही प्यार का सत्यार्थ है।

वास्तविकता है मैंने तुम्हें प्यार किया है कैसे भागने दे सकती मेरे जीवन मे कोई कमी नही देखो मेरे विलखते माँ बाप को जिसकी एकलौती लाडली हूँ दौलत कि कोई कमी नही तुम देखो अपने माँ बाप को जिनकी आशाओं के तुम चिराग सूरज चाँद हो ।

रोनित भी मुस्कुराते हुए अपनी अंतर्मन पीड़ा को दबाते हुए बोला तुम सही हो गौरी प्यार में स्वार्थ नही त्याग परमार्थ का स्थान होता है मुझे अभिमान है कि मैंने अपने युगों युगों के जन्मों के लिए तुम्हे चुना है यह छड़ भंगुर शरीर तो बदलता रहेगा नही बदलेगा तो गौरी रोनित का प्यार युगों युगों का साथ गौरी के चेहरे पर मुस्कान आकस्मिक आ गयी वह बोली रोनित चलो समय आ गया हमारे चिर मिलन का लेकिन साथ साथ इस यात्रा का शुभारंभ करने से पहले सभी आदरणीय डॉक्टरों चिकित्सको को बड़े आदर के साथ बता देना चाहती हूँ कि आप लोग मनुष्य में ईश्वर के साक्षात हो आप लोगो ने हम दोनों को इस भौतिक शरीर मे जीवित रखने के लिये जो अथक प्रयास किया उसके लिए आप सभी के प्रति कृतज्ञता हम दोनों व्यक्त करते है और हाँ मैं गौरी ने स्वयं इस मृत्यु को चुना है।

मैंने जैविक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया है और अनेको जानलेवा विषाणुओं पर अध्ययन किया है मैंने ही घोड़े की नाल का कड़ा बनवाया था और उस पर ऐसे विषाणुओं को जर्मीनेट किया था जिसका इलाज अभी सौ वर्षों तक चिकित्सा विज्ञान नही खोज सकता और उसी का सम्पर्क मैंने स्वंय के खून एव रोनित के खून से खरोच के द्वारा कराया जिसका प्रभाव चौबीस घण्टे बाद दोनों पर एक साथ पड़ा मेरा परीक्षण भी सफल हुआ और प्यार भी मेरा परीक्षण आने वाली दुनियां में एक नए इतिहास को जन्म देगा जो शक्ति का प्रतीक बनकर उभरेगा जो हमारे प्यार को दुनियां में युगों युगों तक जीवित रखेगा इतना कहते ही रोनित ने गौरी को अपने आगोश में जकड़ लिया जब दोनों को अलग किया गया तो दोनों का चिर परिचित मुस्कुराता चेहरा चिरनिद्रा कि मुद्रा पूरे वार्ड में माहौल गमगीन हो गया रोनित और गौरी तो दुनियां में नहीं हैं लेकिन वर्षो बाद भी गौरी का खुद के प्यार और जीवन के त्याग बलिदान का जैविक आविष्कार के चमत्कार का वरदान अभिशाप दुनियां देख रही है।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीतांबर गोरखपुर उतर प्रदेश