Kavach - Kali Saktiyon Se - 5 in Hindi Horror Stories by DINESH DIVAKAR books and stories PDF | कवच - काली शक्तियों से - भाग 5

Featured Books
Categories
Share

कवच - काली शक्तियों से - भाग 5

मेरे बेटे को छोड़ दो तुम जो कहोगे वो मैं करने के लिए तैयार हूं, लेकिन मेरे बेटे को कुछ मत करना। प्लीज मैं तुम्हारे पांव पड़ता हूं, नहीं नहीं मेरे बेटे को छोड़ दो.........

आज तीन साल हो गए उस हादसे को हुए हम दोनों ने उसे भुलाने का बहुत कोशिश किया लेकिन भुला नहीं पाए जब भी उस हादसे की याद आती है तो रूह काप जाती है खैर छोड़िए अभी इन सब बातों को

चैत्रा और मेरी शादी होने के बाद हमारा एक प्यारा सा बच्चा हुआ वह बहुत खूबसूरत था जब नर्स ने उसे उठाकर मुझे देने आयी तो वह रोना लगा तब मैंने पुचकारते हुए उसे अपने गोद में उठाया मेरे गोद में लेते ही उसका रोना बंद हो गया और वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगा। उसकी आंखें बिल्कुल चैत्रा जैसी थी और फेस मेरे जैसा

देखो चैत्रा कितना प्यारा बच्चा है मैं चहकते हुए चैता से बोला

हां आखिर बेटा किसका है चैत्रा हंसते हुए बोली

रोहन- हां वह तो हैं, अच्छा हम इसका एक प्यारा सा नाम रख देते हैं?

चैत्रा- मुझे तो कोई नाम याद नहीं आ रहा तुम कोई अच्छा सा नाम बताओ?

रोहन- अअअ.... समन नाम कैसा रहेगा

चैत्रा- हां नाम तो बहुत अच्छा हैं तो ठीक हैं अब से हमारे बेटे का नाम होगा समन

हम दोनों समन के प्यार में उस हादसे को भूल गए धीरे-धीरे समन 3 साल का हो गया आज समन का बर्थडे था सुबह से ही हमने घर को सजाना चालू कर दिया था रात में हमने सनम को एक सुंदर सी ड्रेस पहनाकर केट कटवाने ले आए।

मेरे और चैत्रा के सारे फ्रेंड उपस्थित थे सभी हैप्पी बर्थडे टू यू गाना गा रहे थे

तब मैंने समन का हाथ पकड़ कर केक कटवाया हमने बहुत देर तक इंजाय किया। तभी समन के मुंह से एक ऐसा वर्ड निकला जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था वो वर्ड था - पा. पापा

अक्सर सभी बच्चे अपने मुंह से पहला वर्ड"मां" पुकारते हैं लेकिन समन ने मुझे पापा कहकर पुकारा। मेरे खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

रात के 1:00 बज गए थे धीरे धीरे सभी मेहमान चले गए।

चैता समन को सुला कर वापस आईं हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। दिन भर में थकान से हमारी नींद कब लग गई पता नहीं चला।

सुबह चैत्रा के आंखों में आसूं बह रहे थे और मेरे भी आंखों में आसूं थे मेरे हाथ में एक लेटर था और एक लॉकेट। वहीं लॉकेट जिससे हमने भल्लालदेव की आत्मा को खत्म किया था

उस पत्र में लिखा था- आई एम बैक 3 साल बाद में वापस आ गया हूं तुम लोगों से बदला लेने हा हा हा..... तुम्हारे किए कि सजा पहले किसी और को भुगतना होगा फिर तुम्हारी बारी हां हां हां.......


नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं चिल्ला कर बोला हूं

चैत्रा- क्या हुआ रोहन तुम ऐसे क्यों चिल्ला रहे हो कोई बुरा सपना देखा?

रोहन- क्या यह सपना था एकदम डरावना उस हादसे का मुझे फिर से याद दिला दिया

रोहन पसीने से तरबतर हो गया

रोहन- समन समन कहां है चैत्रा समन कहां है?

चैत्रा- रिलैक्स रोहन, समन अभी सो रहा होगा तुम यहीं रुको मैं उसे लेकर आती हैं

चैत्रा अंदर जाती हैं कुछ ही देर में चैत्रा की चीख सुनाई देती है रोहन दौड़ते हुए समन के कमरे में पहुंचता है वहां चैत्रा और समन दोनों हैरान नजरों से समन के बेड को देखते हैं.............

समन उस कमरे से गायब था हम दोनों बेचैनी से समन को ढूंढ रहे थे लेकिन वह नहीं मिला। चैत्रा बेहोश हो गई मैं चैत्रा को होश में लाने के लिए पानी का गिलास को ढूंढने लगा

पानी टेबल पर रखा था मैं उसे के लिए गया उसे उठाकर आने लगा तो मेरा नजर एक लेटर पर पड़ी मैंने उसे उठाया तो उसमें से एक लाकेट निचे गिरा। लाकेट देखकर मैं डर गया ये तो वही लाकेट है जिससे हमने उस शैतान भल्ललदेव का अंत किया था?

मैं उस लेटर को पड़ने लगा उसमें लिखा था- हैरान हो गए ना इस लाकेट को देखकर, बहुत खुशियां मना रहे थे आज से तुम दोनों की उल्टी गिनती शुरू में वापस आ गया हूं और एक बात तुम्हारा प्यारा बच्चा समन मेरे पास है अगर उसे दोबारा देखना चाहते हो तो वापस उस जंगल में आ जाओ तुम्हारे साथ एक गेम खेलना है और हां जल्दी आना नहीं तो तुम्हारे बच्चे को मैं खा जाऊंगा हां हां हां.........

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था तभी मुझे चैत्रा कि याद आया मैंने उसे होश में लाया और उसे लेटर के बारे में बताया।

तब मैंने एक फैसला लिया, मैंने अपना बैग पैक किया और अपने बेटे को उस शैतान से बचाने के लिए निकल गया...