poor's daughter books and stories free download online pdf in Hindi

गरीब की बेटी

तो ये कहानी है छोटे से गांव की जहां एक छोटा सा परिवार रहता था., उस परिवार में वाह अपनी पत्नी और 8 बेटियों के साथ रहता था, वे लोग ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे 8 बेटियां होने की वजह से वो बहुत परेशान रहते थे क्योंकि उसने गांव में एक यही ऐसा परिवार था जिसकी 8 बेटियां थी सबसे बड़ी बेटी का नाम रिंकी था जो पढ़ने में बहुत होशियार थी लेकिन वो बहुत बीमार थी, बीमारी की वजह से वो पढ़ाई पे पुरा ध्यान नहीं दे पाती थी, पर समय को कौन रोके उसकी 10वीं की परीक्षा नजदिक आ गई थी।वो बीमार रहने लगी उसे माता पिता ने परीक्षा देने से मना किया,
लेकिन उसकी जिद थी कि वह परीक्षा देगी, उसने बहुत मेहनत की बहुत पढ़ाई की रात को जाग जाग कर वो पढ़ती थी उस समय बिजली भी नहीं रहती थी, फिर भी उसकी निष्ठा छोटी नहीं हुई..वो चांद की रोशनी से पढ़ती थी दीया को जला कर पढ़ती थी और जब परीक्षा की तारीख करीब आई तो पूरा गांव उसे परीक्षा नहीं देने जाने की जिद करने लगा क्योंकि उसकी तबीयत खराब रहती थी..आख़िर में परीक्षा आ गई वो परीक्षा देने जाती है जैसे तैसे करके वाह परीक्षा केंद्र में जाती है और अपने पेपर अच्छे से लिखती है सारे पेपर उसके धीरे-धीरे करके अच्छे जाते हैं ,और अब उसके परिणाम की तारीख आती है,. सारे गांव के लोग डरे हुए होते हैं क्योंकि उस समय उस गांव में केवल एक एकलौती लड़की होती है जो 10वीं की परीक्षा दे रही थी, और उसका परिणाम बहुत अच्छा आता है, पूरा गाव खुशी मनाता है और उसके पिता को बधाई देता है उसे उसका समय उसको अच्छे परिनाम के 50 रुपये मिलते हैं उसके पैसे से उसके उसका इलाज होता है और फिर उसकी अच्छी जगह पे शादी होती है ,और तब से उस गाव में सारे गाव के लोग अपनी अपनी बेटी को पढ़ने के लिए पास के गाव में भेजने लगे, और वो लोग दूसरे गाव की बेटियों को भी उत्साहित करने लगे। सभी गाव वाले ख़ुशी ख़ुशी अपने बच्चों को पढ़ाई करने के लिए भेजना शुरू किआ और पूरा गाव आज ख़ुशी से एक साथ काम करता है और अपने बच्चों को अच्छा काम करने के लिए उत्साह देता है।
इस कहानी से हमें अपने गांव की मिट्टी याद आ गई कि हमारा गांव भी ऐसा ही हुआ करता था और आज जब हम उस गांव में जाते हैं तो उसकी मिट्टी की अलग ही चमक है आज हम अपने गांव पर गर्व करते हैं और अपने गांव का नाम रोशन करे.,लेकिन पूरी कहानी में पिता का नाम बताया ही नहीं, उस महान पिता का नाम था कन्हैया जो अपनी मेहनत से अपनी बेटी को पढ़ता है और उसकी इच्छा पूरी करता है।

आज वो अच्छी जगह पे नौकरी कर रही और अच्छे पैसे कमाने लगी।
इस कहानी से हमें ये सीखने को मिलता है कि हमें कभी भी जिंदगी में हार नहीं माननी चाहिए।
इस कहानी को पढ़ने के लिए धन्यवाद..

धन्यवाद.।।
swati gupta