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7 अच्छी आदतें जो इंसान को बेहतर बनाती हैं ?


अच्छी आदतें हमेशा सबका अच्छा ही करती हैं। एक अच्छी आदत व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ाती है। समाज में उसकी वाह-वाही होती है। उसे सब मानते हैं। अच्छी आदतें ही उसका हमेशा भला करती हैं। वह लोगों की नजरों में हमेशा अच्छा बना रहता है। अच्छी आदतें ही इंसान के जीवन को सफल और बेहतर बना सकती है। अच्छी आदतों का होना एक अच्छे चरित्र की निशानी होती है। आदतें कैसी भी हों उन्हें बदला जा सकता है। बुरी आदतों को बेहतर बनाया जा सकता है।

7 अच्छी आदतें जो इंसान को बेहतर बनाती हैं ?? ये Good Habits आप में, मुझ में और हम सभी में जरूर होनी चाहिए। इन Good Habits को आप दूसरों के साथ भी शेयर जरूर करें।

1.. सच बोलने की आदत
बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो बात बात पर झूठ बोलते हैं और कुछ होते हैं जो खुद को किसी चीज़ से बचाने के लिए झूठ का सहारा ले लेते हैं। जब झूठ के सहारे हमारा काम बन जाता है तो हम सच बोलना ही छोड़ देते हैं। जैसे बचपन से एक छोटे बच्चे को हमेशा अच्छी आदतें सिखाई जाती हैं। गलत करने पर हम उसे डांटते या फटकारते हैं ताकि उसकी गलत आदत हम सुधार सकें। एक बच्चे की अच्छी या बुरी आदत घर के बड़े सदस्यों से भी आती है। जैसा हम करते हैं वैसा बच्चा भी सीखता है. हम झूठ बोलेंगे तो बच्चा भी झूठ बोलेगा, सच बोलेंगे तो बच्चे की आदत भी सच बोलने वाली होगी। इसलिए हमेशा सच बोलें।

कुछ गलत करने पर या किसी काम को छुपाने के लिए हम झूठ बोल देते हैं लेकिन हमें सच बोलना चाहिए ताकि हमें अपनी गलती पर एक ही बार डांट खाने को मिले। हर बात पर झूठ बोलने से लोगों का हम पर से विश्वास उठ जाता है। साथ ही झूठ पकड़े जाने पर बहुत बेइज्जती भी होती है इसलिए सच बोलें और ऐसा कुछ काम ना करें जिसे छुपाने के लिए आपको झूठ का सहारा लेना पड़े।

2..निरंतर संघर्षशील बनने की आदत

हमें निरंतर संघर्षशील बनना चाहिए। कोई भी कार्य चाहे वह कितना ही कठिन क्यों ना हो, हमें उसे छोड़ना नहीं चाहिए। जब तक वह कार्य पूर्ण ना हो उसे हमें नहीं छोड़ना चाहिए। भले उस कार्य को करने में हमें ज्यादा टाइम क्यों ना लग जाए। अगर वो काम जरूरी है तो हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।

आपको लगेगा की ये सब कहने की बातें हैं लेकिन मैंने खुद अपने जीवन में ऐसे व्यक्ति को देखा है जिसके अंदर संघर्ष करने की आदत है। उस व्यक्ति के पास चाहे कितना ही कार्य क्यों ना हो लेकिन जिस कार्य में वह लगा है, उस कार्य को पूरा करने में कितना भी समय लग जाए तब तक वह व्यक्ति दूसरे काम में हाथ नहीं लगाता। ये समझ लीजिए कि वह दूसरा काम करता ही नहीं है।

यही हमारे जीवन का संघर्ष है। संघर्ष ना करने का सबसे बड़ा कारण है: आलस्य। आलस्य मनुष्य को संघर्ष करने से रोकता है। आलस्य की वजह से हम हर काम को अधूरा छोड़ देते हैं। किसी काम को पूरा नहीं कर पाते। जरूर कामों को भी टालने लगते हैं। मेहनत करने से पीछे हटने लगते हैं। अगर सफल बनना है तो आलस्य का त्याग करें और संघर्ष करने की ठान लें।

3.. ईमानदारी से कार्य करने की आदत या ईमानदार बनने की आदत
हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए। छोटे से छोटे कार्य में हमें ईमानदारी दिखानी चाहिए। ईमानदार व्यक्ति की सराहना हर कोई करता है। काम चाहे घर का हो या आपके ऑफिस का उसे हमेशा ईमानदारी से करें। हर चीज में ईमानदारी होना बहुत जरूरी है। आजकल समाज में बेईमान लोग ज्यादा हो गए हैं।

दूसरों की देखा देखी करके जो लोग ईमानदार हैं वो भी बेईमानी करने लगे हैं। आजकल लोग अपने पास हर चीज होते हुवे भी दूसरों से कुछ ना कुछ मांगते रहते हैं फिर चाहे वो धन हो या कुछ और चीज, जब धीरे धीरे समय निकलता जाता है और सामने वाला कुछ नही कहता तो वो उस चीज को लौटाते ही नही। ऐसी आदत अगर आप में भी है तो यह बेईमानी है और आपकी बुरी आदत है।

4.. दूसरों की सहायता करने की आदत

दूसरे व्यक्ति की सहायता करना भी एक अच्छी आदत है। बूढ़े, गरीब या अंगहीन लोग, ऐसे लोग जिन्हें दूसरों की सहायता की जरूरत है, हमें ऐसे व्यक्तियों की सहायता अवश्य करनी चाहिए। आजकल, किसी भी व्यक्ति के पास दूसरे व्यक्ति के लिए टाइम ही नहीं है। इंसान इतना व्यस्त होता जा रहा है कि वह अपने परिवार को भी भूलने लगा है।

इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम एक दूसरे को देखना ही नहीं चाहते हैं। मदद करना तो बहुत दूर की बात है। हम किसी का एक थेला भी उठाना पसंद नहीं करते हैं। अगर किसी की कोई चीज गिर भी जाए तो हम उसे बताना भी उचित नही समझते हैं। इस प्रकार की भावना का त्याग करें। अपने जनों की या कोई भी व्यक्ति जिससे कि आपको लगता है कि उस व्यक्ति को हमारी मदद की आवश्यकता है तो उस व्यक्ति की सहायता अवश्य कीजिए।

5.. परिश्रम करने की और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की आदत
आज की पीढ़ी ने परिश्रम करना तो जैसे त्याग ही दिया है। हर कोई चाहता है कि एक ऐसा रिमोट मिल जाए जिसके बटन दबाते ही सारे काम पूरे हो जाएं। उसे एक जगह से उठना ही ना पड़े, सब कुछ उसके मुंह के सामने आ जाए। मजे कि बात तो यह है कि आज गांव का आदमी भी परिश्रम करने को तैयार नहीं है। वह भी खेतों में काम करना नहीं चाहता है।

उसे भी शहर की चकाचौक पसंद आने लगी है। इसी वजह से कई सालों से गांव के गांव पलायन कर शहर में बस जाते हैं, ताकि उन्हें परिश्रम ना करना पड़े। परिश्रम हमारे शरीर को दुरुस्त रखता है। बिना परिश्रम के कुछ नहीं मिलता। पैसा हो या खानपान जब तक परिश्रम नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं मिलेगा।

सुविधाओं के चक्कर में हमने परिश्रम करना ही छोड़ दिया है। अब बात आती है जिम्मेदारियों की, आज की युवा पीढ़ी जिम्मेदारियों से भागने लगी है। मां बाप बच्चों को पढ़ा लिखा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हैं लेकिन वही बच्चे नौकरी या फिर शादी होने के बाद मां बाप को ही छोड़ कर चले जा रहे हैं।

समाज का हाल इतना बुरा हो गया है की शादी, बच्चे होने के बाद भी लोग दूसरी, तीसरी शादी करने में लगे हैं. कुछ हैं जो दूसरे के पति या पत्नी को ही भगाकर ले जा रहा है। ये सब कुछ नहीं बस अपनी जिम्मेदारियों से भागना है। अगर आप अपने घर, परिवार, पत्नी, बच्चों, नौकरी की जिम्मेदारी लेंगी तो आप कभी किसी गलत काम में नही पड़ेंगे और समाज के एक जिम्मेदार व्यक्ति बनेंगे।

6.. आपस में मिलजुल रहने व परिवार में एकता बनाने की आदत
हमें अपने परिवार के साथ हमेशा मिल जुल कर रहना चाहिए। कहते हैं कि घर का बड़ा सदस्य ही घर की नींव होता है। वही पूरे घर का संचालन करता है या परिवार को संभालता है। परिवार में किसी बड़े जन का समझदार होना बहुत जरूरी है। चाहे वह हमारे बुजुर्ग हो या माता-पिता। सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। किसी को कम व किसी को ज्यादा आकने की भूल कभी नहीं करनी चाहिए। परिवार में थोड़ा तनाव भी परिवार को तोड़ देता है।

7.. समान व्यवहार करने की आदत
आपने ने अपने आस पास ऐसे बहुत से लोग देखें होंगे जो अमीर व्यक्तियों को खूब इज्जत देते होंगे, उनके आगे हाथ जोड़ते होंगे, उनके साथ ऐसा व्यवहार करते होंगे जैसे मानो उनके लिए वो भगवान हों और दूसरी तरफ कोई गरीब व्यक्ति दिख जाए तो उसकी तरफ देखते भी नहीं होंगे, उसके साथ ऐसा व्यवहार करने लगते हैं जैसे मानो वो दूसरी दुनिया से आया हो।

ऐसी गलत आदत हम में से बहुत से लोगों की होती है। कभी भी ऐसा ना करें। हर किसी को समान इज्जत दें। सबके साथ एक जैसा ही व्यवहार करें। किसी की हैसियत, पोजिशन और धन को देखकर अपना व्यवहार ना बदलें। सबके साथ अच्छा व्यवहार करें। किसी को ना खुद से ऊपर समझें और ना ही किसी को नीचा।

इन सब के अलावा और भी है जो आप में जरूर होनी चाहिए ताकि आप और बेहतर बन सकें। जैसे – शराब ना पीने की आदत, किसी से ना लड़ने की आदत, किसी को गंदी नजर से ना देखने की आदत, पीठ पीछे लोगों की बुराई ना करने की आदत, दूसरों की तरक्की से ना जलने की आदत और पैसों की फिजूलखर्ची ना करने की आदत।

ये अच्छी आदतें हमें अपने जीवन में अपनानी होंगी भले ज्यादा नहीं कुछ आदतें तो हम अपने जीवन मैं अपना ही सकते हैं। इन आदतों को अपनाने की कोशिश कीजिए, कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है.