Atit ke panne - 39 in Hindi Fiction Stories by RACHNA ROY books and stories PDF | अतीत के पन्ने - भाग 39

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अतीत के पन्ने - भाग 39

फिर दूसरे दिन सुबह आलेख बैठ कर चाय पीने लगा था फिर देखा पिया आ गई थी।
आलेख ने कहा अरे पिया आज इतनी सुबह सुबह।।
पिया ने कहा हां, क्या करूं तुमने तो मेरी जिंदगी बर्बाद कर दिया है ना।

आलेख ने कहा पर हुआ क्या? जो तुमने चाहा वहीं तो किया मैंने,अब क्या मरने को कहोगी? उसके लिए भी तैयार हैं हम।।
पिया ने कहा अरे नहीं नहीं ऐसा नहीं है पर मुझे तुम ही वो दे सकते हो जो चाहिए मैं और किसी के पास नहीं जा सकती।
आलेख ने कहा अरे बाबा क्या चाहिए पैसे?
पिया ने कहा देखो आलेख मुझे पता है तुम मुझसे प्यार करते हो और मैं जो मांगुगी वो तुम्हे देना होगा।।
आलेख ने कहा हां ठीक है पर ऐसा क्यों लग रहा है मुझे कि तुम कुछ ऐसा मांगोंगी जो मैं नहीं दे सकता।
वैसे वीर कहा है?वो क्यों नहीं आया तुम्हारे साथ?
पिया ने कहा मेरे पास वक्त बहुत कम है तो वो जो मैं कहना चाहती हुं क्या हम तुम्हारे कमरे में चलें।
आलेख ने कहा अरे तुम पागल हो गई हो क्या?
पहले बताओ वीर कहां है? क्या हुआ है तुम दोनों में,सब ठीक तो है?
पिया रोने लगी और फिर बोली मैं कैसे कहूं कि मैं क्या मांगने आई हुं।
ये कहते हुए पिया वहां से निकल गई।


आलेख एकदम चुप हो गया और वो भी अपने काम में व्यस्त हो गया।


आलेख को काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था।
किसी तरह एक दो निवाला खाना खाने के बाद ही वो कुछ सोच कर घर से निकल गया।

सीधे पिया के घर पहुंच गया।
दरवाजा खुला ही था।
आलेख अन्दर पहुंचा तो देखा कि पिया और जतिन दोनों ही बैठ कर चाय पी रहे थे।
जतिन ने देखते ही कहा अरे आलेख बेटा आओ।
आलेख ने देखा कि पिया और जतिन दोनों ही एक-दूसरे को देख रहे थे मानो इनको पता हो कि अभी आएगा ही।।।।
आलेख बैठ गया और बोला मुझे बताईए कि क्या बात है आप लोग क्या छुपा रहे हो?
पिया को जैसे यह बात हज़म नहीं हुआ वो बोली अरे क्या बोल रहे हो पागल हो क्या?
मैं तो बिल्कुल ठीक ही हुं और वीर को विदेश जाना पड़ा जरूरी काम से तो मैं यहां आ गई अपने घर।।
आलेख ने कहा हां, ठीक है पर तुम तो कुछ।।
पिया ने कहा अरे बाबा मैं कल हवेली आती हुं फिर बात करती हुं।।
आलेख को समझ आ गई थी ।।कि वो अंकल के सामने कुछ भी नहीं बोलना चाहती थी।

आलेख वहां से चला गया।
इस तरह से कुछ दिन बीत गए।
एक दिन बहुत जोर से बरसात हो रही थी आज लगता है कोचिंग क्लास बन्द करना होगा। बच्चे नहीं आ पाएंगे।
कुछ देर बाद ही सबका फोन आना लगा तो आलेख ने भी छुट्टी घोषित कर दिया।
शाम की चाय के साथ पकौड़े हो जाएं तो और क्या बात है आलेख ने कहा।
छाया ने कहा हां ठीक है मैं अभी देती हुं।
फिर दरवाजे पर दस्तक हुई तो आलेख ने कहा अरे इतनी बारिश में कौन आ गया?
छाया ने दरवाजा खोला तो देखा कि पिया खड़ी थी।
आलेख ने देखते ही कहा अरे बाबा तुम बरसात में कहां निकली हो ?
पिया ने अरे बाजार आई थी पर फिर बारिश तेज हो गई तो मैं यहां आ गई।
आलेख ने अरे आओ अब पुरी भींग गई हो।बीमार पड़ जाओगी कपड़े बदल लो।
पिया ने कहा अरे नहीं, नहीं।।
आलेख ने कहा अरे बाबा छोटी मां के कपड़े पहन सकती है तुम।
छाया ले जाओ और छोटी मां की साड़ी बैगरह दे दो।
छाया ने कहा हां,आईए ।।
पिया भी इस बात का इन्तजार कर रही थी और फिर कुछ देर बाद ही पिया छोटी मां की साड़ी पहन कर आ गई।
आलेख अपनी नजरें हटा नहीं पा रहा था क्योंकि उसने तो एक ही सपना देखा था कि पिया ही छोटी मां की परछाई है।
पिया ने कहा अरे आलेख क्या हुआ कहां खो गए?
आलेख ने कहा अरे कुछ नहीं आओ बैठो चाय और पकौड़े खाओ।
पिया जान कर आलेख के करीब आकर बैठ गई।
आलेख भी कुछ समझ नहीं पा रहा था।
चाय और पकौड़े खाने के बाद ही पिया ने कहा अरे आलेख मेरी शादी का एलबम कहां है?
चलो दिखाओ।
आलेख ने कहा अरे हां,वो मेरे कमरे में है।
मैं लेकर आता हूं।

पिया ने कहा अरे बाबा चलो हम ऊपर चल कर देख लेते हैं।
आलेख ने कहा हां ठीक है।
फिर दोनों ऊपर कमरे में पहुंच गए।
आलेख ने कहा तुम बैठो मैं अलमारी से निकाल लेता हूं।
पिया ने कहा हां ठीक है।
फिर आलेख आलमारी खोल कर ढुढने लगता है और पिया पीछे से आलेख को पकड़ लेती है और उसे शरीर को चूमने लगती है।
आलेख पहले तो समझ नहीं पाता है और वो भी पिया को आलिंगन करते हुए चुमने लगता है पर उसे याद आता है तो वो पिया को अपने से अलग करते हुए कहता है कि पिया ये सब क्या है? क्यों कर रही हो ऐसा?
तुम शादीशुदा हो ये पाप है!
पिया रोने लगती है और फिर आलेख को कस कर पकड़ लेती है और कहती हैं मुझे प्यार करो तुम।।
आलेख ने गुस्से में आकर एक चांटा जड़ दिया और फिर बोला क्या चाहती हो तुम?
पिया तुम तो मुझसे प्यार नहीं करती थी फिर ये दिखावा क्यों??
क्या चाहिए मुझसे?
पिया रोने लगती है।मैं कैसे कहूं तुमसे कि प्यार करती हूं।
आलेख ने कहा हां, प्यार तो कोई खेल है तुम्हारे लिए।। कुछ दिन पहले तो वीर को प्यार कर रही थी और अब, ये नाटक क्यूं??
बोलो सच क्या है!! तुम झूठ पर झूठ बोल रही हो ऐसा लगता है मुझे!!


पिया ने कहा अच्छा ठीक है फिर सुनो मेरी सच्चाई।।
शादी की पहली रात को ही मुझे सच्चाई का पता चला कि वीर सिर्फ नाम के वास्ते ही वीर है हकीकत में वो तो एक नपुनसक है उसने मेरी जिंदगी ही बर्बाद कर दिया।।
और और आगे सुनो हिम्मत है ना उसने कहा कि उसे एक बच्चा चाहिए बस ।।
कैसे भी एक वंश चलाने वाला।
जब मैंने उससे डिवोर्स मांगा तो मुझे धमकी दी कि वो दुनिया को बताएगा कि मैं एक बचलन औरत हुं और फिर मुझे बहुत मारा भी।
मैं क्या करूं कहा जाऊं?
आलेख सारी बातें सुनकर एक दम सुन्न पड़ गया और बोला मुझसे क्या चाहिए तुम्हें?
पिया ने कहा आलेख मैं बहुत आशा लेकर तुम्हारे पास आई हुं।।

क्रमशः