forgotten memories in Hindi Anything by Rakesh Rakesh books and stories PDF | भूली बिसरी यादें

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भूली बिसरी यादें

बारात घर से निकलने के लिए पूरी तरह तैयार थी लेकिन बिना दूल्हे के घर से बारात कैसे निकाले इस बात की चिंता दूल्हे के पिता छत्रपाल को छोड़कर सबको थी।

और छत्रपाल को दूल्हे को ढूंढने से ज्यादा यह चिंता सता रही थी कि कहीं कोई जलने वाला स्त्री पुरुष लड़की के पिता को फोन करके ना बता दे की जबरदस्ती शादी करवाने की वजह से उनका बेटा राम घर छोड़कर भाग गया है।

छत्रपाल की यह चिंता ज्यादा बढ़ने से पहले ही छत्रपाल के वृद्ध पिता बैंड बाजे से ज्यादा तेज तेज चिल्ला चिल्ला कर कहने लगते हैं कि "राम के मामा जी राम को ढूंढ कर ले आए हैं, राम के मामा जी राम को ढूंढ कर ले आए हैं।"

कम से कम सौ लोगों के समझाने के बाद राम शादी करने के लिए तैयार हो जाता है।

राम का शादी ना करने का कारण था, मां बाप नहीं अपनी पसंद की लड़की से शादी करने की इच्छा इस ख़्वाब को पूरा करने के लिए राम फेरो से पहले आखिरी बार शादी ना करने की कोशिश करता है, परंतु फेरो से पहले ही जब राम की राजा महाराजाओं जैसे इज्जत होने लगती है, तो राम बिना सोचे समझे अपने विवाह की सारी रस्में रिवाजे पुरी करने लगता है।

और अपनी दुल्हन के साथ अपने घर आने के बाद राम को घर आस पड़ोस में भी बहुत अहमियत मिलती है।

जब तक उसकी पत्नी सावन में अपने घर भाई के राखी बांधने नहीं जाती तब तक राम के घर में रोज पकवान पकते हैं और उसे नई नवेली दुल्हन के साथ मेले बाजार करीबी रिश्तेदारों के घर खूब घूमने का मौका भी मिलता है।

राम के पिता छत्रपाल ने उसे कभी भी दोस्तों के साथ फिल्म देखने की इजाजत नहीं दी थी लेकिन अपनी पत्नी के साथ फिल्म देखने से कभी नहीं रोका था।

राम को एक बात सोच कर बहुत सुकून महसूस होता था कि अब तक उसने जितना अपने खाने-पीने सोने पहनने ओढ़ने का ध्यान नहीं रखा था जितना उसकी पत्नी जानकी उसका ख्याल रखती थी।

राम को ढूंढने से भी जानकी में एक भी अवगुण नहीं दिखता था और अपने लिए प्यार इतना दिखता था कि वह सोचने लगा था कि मैं साधारण युवक अपनी पत्नी जानकी की नजरों में इतना अनमोल कैसे हो गया हूं।

और जब जानकी अपने मायके चली जाती है तो तब राम को महसूस होता है कि मैं नहीं जानकी मेरे लिए दुनिया की सबसे कीमती अनमोल स्त्री है। उसने जितनी अच्छी तरह मुझे समझा उतना किसी ने भी नहीं समझा था।

यह सब सोचते सोचते 80 बरस के राम की आंखों में आंसू आ जाते हैं क्योंकि सामने उसकी वृद्ध पत्नी जानकी की चिता जल रही थी।

राम को रोता देखकर राम के दोनों बेटों को थोड़ा सा संतोष मिलता है क्योंकि भूली बिसरी यादों को याद करने की वजह से ही सही मां की मृत्यु के बाद पिता की आंखों में आंसू तो आए अब वह मां की मौत का सदमा बर्दाश्त कर लेंगे, इसलिए वह शमशान घाट से ही फोन करके अपनी छोटी बहन को भी यह बात बता देते हैं।

राम को पत्नी की मृत्यु के साथ-साथ इस बात का भी अफसोस था कि मुझे शादी के बाद जीवन की इतनी बड़ी खुशी मिलने वाली थी और मैं उसे खुशी से दूर भाग रहा था।