Parivartan - 4 in Hindi Adventure Stories by Kishanlal Sharma books and stories PDF | परिवर्तन - उसके प्यार में - 4

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परिवर्तन - उसके प्यार में - 4

राजन अभी भी गहरी नींद में सो रहा था।कुछ देर तक वह खड़ी होकर सोचती रही।राजन को जगाय या नही।फिर कुछ सोचकर बोली,"सुनो
इला ने दो तीन बार पुकारा।पर वह नही जगा तब वह उसके बालो में हाथ फेरते हुए बोली,"चाय पी लो राजन
"अरे तुम चाय भी बना लायी।इतनी जल्दी
"जल्दी कहा है।आठ बजे गए
और राजन और इला चाय पीने लगे।चाय पीकर राजन फिर सो गया।इला ने काफी दिनों बाद अपने हाथ से चाय बनाई थी।बार मे तो वह पास के होटल से चाय मंगा लेती थी।चाय पीने के बाद वह उठी।फ्लेट में जगह जगह सामान बिखरा पड़ा था।इला ने सब कुछ ढंग स करने के बाद फ्लेट की सफाई की और फिर बाथरूम में चली गयी।वह दैनिक कर्मो से निवर्त और फिर नहा धोकर तैयार होने के बाद वह बेडरूम में आई थी।वह आयी तब राजन जग चुका था और आंखे खोलकर पलंग पर लेटा था।"
"अरे तुम तो नहा भी ली,"इला को देखकर राजन बोला,"सुंदर लग रही हो।"
"सुंदर लग रही हूँ।हूँ नही।"
"सुंदर हो।ब्यूटीफुल"
"अब मै जाऊं"
"कहा?"राजन,इला की बात सुनकर बोला।
"वही।जहाँ से रात को तुम मुझे अपने साथ लेकर आये थे।
"क्यो?"
"बारह बजे बार खुल जाता है।तब तक मुझे पहुचना होगा।"
""इला मुझे यह कतई पसंद नही है कि तुम जैसी पढ़ी लिखी,सुंदर और समझदार लड़की बार मे काम करे।"
"काम नही करूंगी तो गुजारा कैसे होगा।पेट कैसे भरूँगी।"
"इला तुम्हे मैं कही नही जाने दूंगा।यही रहो।मेरे साथ।चिंता मत करो।तुम्हे भूखी नही रखूंगा।"
इला को अब तक जितने भी लोग रात में लेकर गए थे।रात के अंधेरे में तो उसके साथ मौज मस्ती करते।लेकिन सुबह चाहते थे।वह उनके पास से जल्दी चली जाए।लेकिन राजन चाहता था।वह उसके पास से न जाये।और इला को राजन की बात माननी पड़ी थी।
"मैं भी तैयार हो लेता हूँ।और फिर चलते है।"
""कहा?"
राजन उसकी बात का जवाब दिए बिना बाथरूम में घुस गया।तैयार होने के बाद वह इला से बोला,"चलो
"
राजन,इला को कार में बैठा कर सबसे पहले रेडीमेड शॉप में ले गया
"यहा क्यो लाये हो।"
"तुम अपने लिए कुछ जोड़ी कपड़े ले लो।"
"कपड़े तो मेरे बार मे रखे है।"
"उन्हें भूल जाओ।"
इला झिझकती रही।तब राजन ने अपनी पसंद से उसके लिये कई जोड़ी खरीद ली थी।और भी बहुत से सामान उसने इला के लिए खरीदा था।
और अब इला बेघर नही रही थी।वह राजन के साथ रहने लगी।राजन ने अपना घर उसके हवाले कर दिया था।इला ने घर के साथ राजन की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ले कि थी।
राजन के घर से जाने का कोई समय निश्चित नही था।कभी वह सुबह जल्दी जाता।कभी रात को जाता तो सुबह लौटता और कभी घर से जाता ही नही था।जब राजन घर पर ही रहता।तब वह इला को अपने साथ ले जाता।वह इला के साथ घूमता,महंगे होटल में उसके साथ खाना खाता और इल के लिए महंगे गिफ्ट खरीदता।
कभी कभी इला सोचती।राजन उसके लिए इतना क्यो कर रहा है।उसका उससे कोई रिश्ता भी तो नही है।इस क्यो का जवाब उसके पास नही था।कोई रिश्ता न होते हुए भी वह उसके साथ रहकर जुड़ाव महसूस करने लगी थी