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परिवर्तन - उसके प्यार में - 6

रात को खाना खाने के बाद वे रोज की तरह बेडरूम में आ गए।कुछ देर बाद इला बोली,"राजन
"बोलो।"
"मेरी समझ मे एक बात नही आयी"
"क्या?"इला की बात सुनकर राजन उसकी तरफ देखते हुए बोला।
"उस दिन तुम मुझे मेरे बारे में जानने के बाद अपने घर ले आये।मुझे अपने घर मे सिर्फ आश्रय ही नही दिया।पूरा घर भी मेरे हवाले कर दिया।"
"तो?इसमें क्या गलत है।"
"मेरे बारे में कुछ जाने बगैर पूरा घर हवाले कर दिया"
"उस रात तुमने अपने बारे में सब कुछ तो मुझे बता दिया था।फिर और जानने के लिए क्या राह गया था।"
"मैने जो कुछ बताया वो झूठ भी तो हो सकता था।औरत के बारे में ज्यादा जानने की जरूरत नही होती अगर
इला ने अपनी बात को जान बूझकर अधूरा छोड़ दिया था
"अगर क्या?"राजन ने गर्दन घुमाकर इला की तरफ देखा था।
"अगर औरत के साथ सिर्फ रात गुजारनी हो तो उसके बारे में ज्यादा जानने की जरूरत नही होती,"इला बोली,"उस रात तुम मुझे अपने साथ लाये तब मैने सोचा था।तुम रात गुजारने के लिए मुझे अपने साथ ले जा रहे हो।"
"ऐसा तुमने कैसे सोच लिया?"
"क्योकि मेरे साथ ऐसा होता रहता था।कभी कभी बार मे आने वाला कोई ने कोई मुझे अपने साथ ले जाता था।इसलिय मैने ऐसा सोच था,"इला बोली,"लेकिन तुमने अपने घर मे लाकर एक पलंग पर सोने के बावजूद मेरा इस्तेमाल नही किया तब मुझे हैरानी हुई थी।"
राजन ने इला की बात का कोई जवाब नही दिया तब वह फिर बोली थी,"औरत के पास होकर भी उसका उपभोग दो ही तरह के लोग नही करते
"कौन लोग?"
"पहुंचा हुआ तपस्वी या चोट खाया इंसान
"शायद तुम सही हो।बचपन मे ही अनाथ हो जाने के कारण में रास्ते से भटक गया था।पेट भरने के लिए मैं चोरी और अन्य गलत काम करने लगा।बड़ा होने पर मैं तस्करों के सम्पर्क में आया,"राजन ने इलआ के सामने अपने अतीत के पन्ने खोल दिये,"पहले मैं अपना गुजारा कर पाता था।लेकिन तस्करी के धंधे में आने के बाद मेरे पास दौलत आने लगी।मेरी अमीरी को देखकर अनेक औरतों ने मेरे से सम्बन्ध जोड़े।मेरे करीब आयी हर औरत का मकसद एज ही था।मेरे से ज्यादा से ज्यादा पैसा हड़पना।लेकिन पहली बार मुझे लगा कि अब तक मेरी जिंदगी में जितनी भी औरते आयी है।तुम उनसे अलग हो।"
राजन एक क्षण को चुप रहने के बाद बोला,"न जाने मुझे ऐसा क्यो लगा कि तुम ही वह औरत हो जो मेरे दिल को समझ सकती हो।"
"एक तरफ मुझे अपना राजदार बनाना चाहते हो दूसरी तरफ अपने पास रखकर भी दूरी बनाए हो।"
"इला मैने तुम्हे अपने साथ इसलिए रखा ताकि हम एक दूसरे को समझ सके और हमारे बीच की दूरी मिट जाए।"
"अब तो हम एक दूसरे को समझ गए है,"इला ,राजन से सटाते हुए बोली,"अब तो दूरी मिट जानी चाहिए ".""
"तुम मेरी बात को गलत समझ रही हो।अगर दूरी मिटना इसे ही कहते है तो यह दूरी तो उसी रात मिटा लेता।जब तुम्हे अपने घर लाया था।"
"फिर हमारे बीच की दूरी कैसे मिटेगी?""
"तुम्हे अपनी बनाकर।"
"मतलब शादी।"राजन की बात का आशय समझते हुए इला बोली थी।
"क्या तुम नही चाहती।तुम्हारी माँ की इच्छा पूरी हो।"
"शादी हर औरत का सपना होती है।क्या मेरा अतीत जानकर भी मुझे पत्नी बनाओगे।"."
"अतीत तुम्हारा भी है और मेरा भी।हम दोनों अपना अतीत भूलकर नई शुरुआत जरे।"
"ऐसा हो सकता है लेकिन
"लेकिन क्या
"मैने तो तुम्हारे कहने से अपना काम छोड़ दिया।लेकिन अगर तुम सचमुच मुझे चाहते हो तो अपने धंधे छोड़कर दूसरी जगह चलकर जिंदगी की शुरुआत करनी होगी
और राजन ने इल का हाथ थाम लिया था

"