shapit fatak - 2 in Hindi Horror Stories by Md Siddiqui books and stories PDF | शापित फाटक - 2

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शापित फाटक - 2


यह कहानी पूरी तरह कल्पनिक है।
किसी भी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान से इसका कोई संबंध नहीं है।

फाटक की घटना के बाद गांव में एक अजीब सी शांति थी। लोग सोचते थे कि अब सब खत्म हो गया है, कि शाप कहीं दबी पड़ा है और फिर कभी किसी पर हमला नहीं करेगा। लेकिन बुज़ुर्ग लोग आज भी कहते थे कि कुछ जगहें सिर्फ़ खामोशी नहीं रखतीं, बल्कि वह अपने भीतर दर्द, डर और पुरानी यादें जिंदा रखती हैं। फाटक से थोड़ी दूर एक पुरानी सड़क थी, जिसे दिन में लोग आम रास्ता मानते थे, लेकिन जैसे ही रात होती, वहां सन्नाटा अपना राज करने लगता। पेड़ों की शाखाएं हवा में हिलतीं, पत्थर की तरह सन्नाटे में अजीब-सी आवाजें गूँजतीं, और बारिश के मौसम में वह सड़क और भी डरावनी लगती थी। गांव वाले कहते थे कि वह सड़क पहले फाटक से जुड़ी हुई थी और जो कुछ फाटक पर हुआ, उसकी छाया अब वहां तक पहुँच चुकी थी। दिन में तो सब सामान्य था, लोग अपने काम से गुजर जाते, लेकिन रात होते ही हर किसी के कदम धीमे हो जाते, और हवा में कुछ ऐसा महसूस होता जैसे कोई देख रहा हो।
बरसात की एक रात चार युवक बाइक से घर लौट रहे थे। वे हँसी-मज़ाक कर रहे थे, तेज़ म्यूज़िक बज रहा था और हवा ठंडी थी। सड़क गीली थी, छोटे-छोटे पानी के घड़े और कीचड़ हर जगह थे। तभी आगे वाले लड़के ने अचानक ब्रेक मारा। सड़क के बीचों-बीच एक आदमी खड़ा था। पुराने ज़माने के कपड़े, हाथ में जलती हुई लालटेन और चेहरा बिल्कुल शांत। उसकी आंखें कुछ और देख रही थीं, उसके शरीर की मुद्रा ऐसी थी जैसे वह किसी का इंतजार कर रहा हो। चारों युवक दंग रह गए। हवा में हल्की ठंडक ने उनकी रूहों को झकझोर दिया। अगले ही पल, जैसे कोई अदृश्य शक्ति ने बाइक को हिला दिया, बाइक फिसल गई और नीचे सड़क के किनारे खाई में गिर गई। तीन युवक बेहोश हो गए, लेकिन चौथा होश में था। उसकी आंखें खुली थीं, पर जुबान जैसे डर के कारण बंद हो गई थी। अस्पताल में उसने कांपती आवाज़ में बस इतना कहा, वो हटने को तैयार नहीं था। उसी रात उसकी सांसें थम गईं, और शरीर पर कोई भी चोट नहीं थी जो मौत की वजह बन सकती। केवल डर, अजीब भय और रहस्य ने उसे निगल लिया था।
गांव में धीरे-धीरे यह घटना फैल गई। लोग याद करने लगे कि वह सड़क कभी फाटक से जुड़ी थी और फाटक की आत्मा अब भी उस रास्ते में मौजूद थी। कुछ लोगों ने बरसात की रातों में दूर लालटेन की हल्की रोशनी हिलती देखी। कहानियां फैलने लगीं कि कई बार उस सड़क से गुजरने वाले अचानक डर से कांप उठते, बाइक या कार की स्पीड कम कर देते, और कभी-कभी तो छोटे हादसे हो जाते। एक परिवार की कहानी भी जुड़ी—जहां रात में अचानक सामने कोई खड़ा हो गया और कार का चालक ब्रेक नहीं पकड़ पाया, वाहन फिसलकर सड़क किनारे गिर गया। गांव वाले अब उस सड़क से गुजरते समय धीमे कदम रखते, बातों में कानाफूसी करते और अपने बच्चों को हमेशा याद दिलाते कि फाटक बंद है, लेकिन शाप आज भी रास्ता रोकता है। हवा की खनक, पेड़ों की सरसराहट और बारिश की बूंदें सब कुछ जैसे उन पुराने हादसों की कहानी बयां कर रही हों। और आज भी जब कोई रात में उस सड़क से गुजरता है, तो उसे पीछे कुछ हल्की हल्की आवाज़ें सुनाई देती हैं, कभी लालटेन की हल्की झिलमिलाहट दिखाई देती है और मन में एक अजीब-सा डर पैदा होता है, जो यह याद दिलाता है कि शाप कभी खत्म नहीं होता, सिर्फ़ रूप बदलता है और अब यह सड़क बनकर लोगों के रास्ते में खड़ा है।