cheenu's death in Hindi Short Stories by manshi books and stories PDF | चीनू की मौत

The Author
Featured Books
Categories
Share

चीनू की मौत

चीनू एक भोली भाली लड़की है। वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। कुछ ही दिनों पहले उसके पिता का स्थानांतरण हुआ था। जिसकी वजह से वे गाँव से शहर आए थे। चीनू का असली नाम चाँदनी है, लोग उसे प्यार से चीनू बुलाया करते थे। चीनू बहुत ही खूबसूरत थी, जिसकी वजह से उसका यह नाम पड़ा था। चीनू ने शहर में एक बड़े विद्यालय में दाखिला करवाया था। आज उसके नए विद्यालय में उसका पहला दिन था। चीनू बहुत ही डरी हुई थी। वह विद्यालय गई। वहाँ कई छात्रों ने उससे बात करने की कोशिश की। पर चीनू ने किसी पर खास ध्यान नहीं दिया। कुछ दिन बीत गए। चीनू का उस विद्यालय में कोई दोस्त नहीं बना। उसे अकेलापन महसूस होने लगा। चीनू एक होशियार लड़की थी। चीनू से अन्य विद्यार्थियों को घृणा होने लगी। अब वे हमेशा चीनू को हराने की ताक में रहने लगे। एक दिन विद्यालय में भाषण प्रतियोगिता हुई। सभी विद्यार्थियों ने उसमें भाग लिया। अध्यापिका ने सभी का निरीक्षण किया। चीनू का भाषण अध्यापिका को सबसे ज्यादा पसंद आया। बाकी छात्रों को भय था, कि चीनू कहीं जीत ना जाए। प्रतियोगिता की तैयारी जोरों शोरों से चल रही थी। सभी बच्चे बहुत उत्सुक थे। प्रतियोगिता के दिन चीनू की कक्षा की कुछ छात्राओं ने मिलकर चीनू के भाषण का पृष्ठ चोरी कर लिया। उन्हें लगा कि, चीनू अब भाषण नहीं दे पाएगी, और उसे सब के सामने ज़लील् होना पड़ेगा। चीनू अपना पृष्ठ ना पाकर घबरा गई। पर उसे भाषण याद था। चीनू ने बहुत अच्छा भाषण दिया। चीनू उस प्रतियोगिता में जीत गई। अब वे चीनू से और भी ज्यादा जलने लगीं। ऐसे ही एक दिन जब चीनू हाथ धोने के लिए नल के पास आई, तब एक छात्रा ने उसे धक्का दे दिया। चीनू को चोट लग गई। वह अध्यापिका की ओर बढ़ी, ताकि उन्हें अपने साथ घटी घटना बता सके। पर वह छात्रा चीनू से पहले अध्यापिका के पास पहुँच गई। उसने चीनू पर झूठा आरोप लगाते हुए कहा, “मेरी कोई गलती नहीं है, मैं आ रही थी, तो चीनू ने मुझे धक्का दे दिया"। फिर अध्यापिका ने चीनू को सजा के रूप में पूरी कक्षा के सामने जलील किया। चीनू बहुत उदास हो गई। वह रोने लगी। घर आने पर भी वह बस रोती रही। उस दिन उसने अन्न का एक भी दाना अपने मूँह में नहीं डाला। वह बीमार हो गई। उसे सिर दर्द और सख्त बुखार हो गया। वह दो दिन तक विद्यालय नहीं गई। कुछ दिन बीत गए। आज अध्यापिका ने सबकी पाठ्य पुस्तक जाँचनी थी। एक छात्रा ने कहा, “कई दिनों से हमने मस्ती नही की है। क्यों ना आज कोई धमाल करें। एक अन्य छात्रा ने कहा, “तुम्हे मस्ती सूझ रही है, और मुझे डर लग रहा है।दूसरी छात्रा ने कहा, “तुम्हें किस बात का डर लग रहा है"? उस छात्रा ने कहा, “आज अध्यापिका पाठ्य पुस्तक जाँचेंगी, और मैं अपनी पाठ्य पुस्तक लाना ही भूल गई। पहली छात्र ने कहा, “मेरे पास एक तरकीब है"। कैसी तरकीब? पहली छात्रा ने कहा,“तुम चीनू की पाठ्य पुस्तक चुरा लो, इससे तुम्हें पाठ्य पुस्तक भी मिल जाएगी और मस्ती भी हो जाएगी। ऐसा कहकर वे सभी हँसने लगे। अपनी तरकीब के मुताबिक उन्होंने चीनू की पाठ्य पुस्तक चोरी कर ली। चीनू अपनी पाठ्य पुस्तक ना पाकर घबरा गई। अध्यापिका ने उसके पास पाठ्य पुस्तक ना होने की वजह से उसे सारी कक्षा के सामने जलील किया। चीनू रोने लगी। वह पूरी तरह से निराश हो चुकी थी। उसने आत्म हत्त्या करने की ठान ली। अगले दिन अध्यापिका ने उसे दोबारा उसी बात के लिए पूरी कक्षा के सामने जलील किया। चीनू ने आधी छुट्टी के समय विद्यालय की छत से कूदकर जान दे दी।