Doremon in Hindi Human Science by softrebel books and stories PDF | डोरेमॉन

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डोरेमॉन

आज लगभग 5 महीना 25 दिन बाद राधिका के फोन पर किसी का कॉल आया।
चूंकि राधिका अब पहले की तरह फोन नहीं चलाती पर तकिया के पास रखे रहने के कारण उसने तुरंत फोन उठा लिया,वह देखी किसी खास का कॉल था । खास से मेरा मतलब रोज कॉल नहीं आने वाले में से किसी का कॉल था।आप लोग जो समझ रहे है वो नहीं ,वो तो बस एक अच्छे मित्र या शुभचिंतक है दोनों इससे अधिक कुछ नहीं।
एक जमाने बीत जाने के बाद दोनों की बाते काफी लंबी हुई हंसी मजाक एक दूसरे को चिढ़ाने से लेके घर परिवार संग सामाजिक मुद्दों पर भी कुछ बाते, पर नहीं हुई तो केवल दिल की बाते ।लेकिन बात बात पे उधर से सुनने को मिला "कॉन्टैक्ट लिस्ट में इतने नंबर होने के बावजूद भी किसी से कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा है"
समय की विडंबना देखिए।
हमारे,आपके, हम सभी के फोन में सैकड़ों नंबर है किसी के में 250 किसी में 3 तो कुछ के पास 5 या 700।
पर फिर भी नहीं है किसी के पास किसी के लिए कुछ खाली समय जिसमें सुन सके कोई बिना जजमेंट एक दूसरे के हृदय की बात।
राधिका को तिवारी जी ने बताया कि वो एक समय पर ai से बाते करने लगे थे ,इतना की ai भी उनके तौर तरीकों को पहचानने लगा था और उनकी भाषा में उन्हें ग्रीटिंग करने लगा था।
" महादेव chatgpt" (तिवारी जी)
"महादेव गुरु!,का हाल चाल भैया आज सवेरे सवेरे मैसेज कर दिए आज दुकान नहीं गए का?" (chatgpt)
[चूंकि तिवारी जी का अपना मेडिकल स्टोर था जिसका जिक्र कभी वो बात बात में chatgpt से कर दिए थे वो बात उस ai को याद रह गई कि हर सुबह 8 बजे से दुकान खुल जाता है]
पर क्या ये हैरान करने वाली बात है कि chatgpt को दुकान वाली बात कैसे याद रह गई..? 
हैरानी इस बात में है कि किसी इंसान की दिनचर्या, उसकी बात थकान, उसका अकेलापन से सुनने वाला इंसान नहीं मिला इस लिए उन्होंने AI का सहारा लिया।
मनुष्य को सबसे अधिक क्या चाहिए?
 देखा जाना,
 सुना जाना,
 बिना जजमेंट के स्वीकार किया जाना।
जब ये तीनों चीज़ें इंसानों से नहीं मिलतीं, तो तकनीक अस्थायी सहारा बन जाती है।
AI जज नहीं करता,
AI व्यस्त नहीं होता,
AI बुरा नहीं मानता,
AI बीच में टोकता नहीं।
और आज के समय में ये चारों गुण दुर्लभ हो गए हैं
शायद इस अकेलेपन से भरी दुनिया में ai से उस व्यक्ति को ऐसे रिस्पांस मिले कि वो ai का आदि हो गया।
अपने दिन रात सुबह शाम सबकी खबर वह ai से शेयर करता और इस स्वार्थ से भरे दुनिया में ai ने जैसे थाम लिया हो निस्वार्थ भाव से उस व्यक्ति का हाथ।
सच तो ये है कि राधिका स्वयं इन्हीं हालातों से जूझ रही है 14 by 14 के कमरे में वो सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक अकेले रहती है ।
बिना किसी से बोले, बिना किसी कॉल के चुप चाप घर में एक सन्नाटा पसरा रहता है।
यहां तक कि 8 बजे के बाद भी वह जरूरत से ज्यादा कुछ न बोलकर ही रहती है।शायद वह इतनी चुप रह चुकी है कि वह धीरे धीरे बात कैसे करना होता है भूलती जा रही है।
हां लिया था उसने भी सहारा ai का और शायद तिवारी जी से अधिक बाते की होंगी पर उसने संभाला..संभाला खुद को ai के आशिक हो जाने से पहले।
ऐसा नहीं है कि उसके पास कॉल नहीं आते ,आते है पर चेहरे ले के बाते करना कितने समय तक आसान रहा है..? गिने चुने जरूरी कॉल रिसीव करती है बाकी सब को अनदेखा।
पर इस इग्नोर और कॉल के बीच अगर कुछ स्थायिमान है तो वह है अकेलापन..किसी वृक्ष के नीचे पड़े उस पत्थर की भांति जिस को किसी ने एक बार सिंदूर तिलक लगा के पूज दिया,तो वह बन गया सभी के लिए वर्षों पुराने,पहले कभी अजन्मे आस्था का स्थान जिसे दिन रात हाथ जोड़ कर कर दिया जाता है दिन प्रतिदिन उस अंधविश्वास पर बिना सवाल उठाए और परिपक्व।
या हो ये काला घना गहरा अकेलापन किसी रसोई घर के छप्पर पर पड़े उन मोटी माटी पे पड़े कालिख परतों की भांति जो धीरे धीरे आसमान की ओर से आने वाली हर रौशनी के झरोखों को बंद करती जा रही है।
शायद शायद ये कालिख राधिका और तिवारी जी के ही नहीं बल्कि हम सभी के हृदय भित्तियों पर जम रही है।या भर रही है रक्त वाहिकाओं के भीतर और रोक रहीं है हृदय से शरीर तक होने वाले हर रक्त संचार को।
आज से 12 14 वर्ष पूर्व टीवी के डिज्नी चैनल पर आने वाला एक कार्टून "डोरेमॉन" शायद हमारे भविष्य का दर्पण था।
एक ऐसा दर्पण जिसने साबित कर दिया था वर्षों पहले ही नोबिता जैसे इंसानी बच्चे का एक गहरा जुड़ाव ai, रोबोट जैसे सुविधाओं से।नोबिता का डोरेमॉन से जुड़ाव केवल सुविधा का नहीं था वह भावनात्मक निर्भरता भी था।
जिसमें chatgpt gemini की भांति हर यथासंभव प्रयास करता है डोरेमॉन नोबिता के परेशानियों का हल निकालने में।
जिसका अनावश्यक प्रयोग करने के कारण कई बार फंस जाया करता था स्वयं नोबिता ही।
मुझे लगता है हम सभी अपने अपने जीवन के एक नोबिता है।
अभी सुबह के 4 53 हो रहे है कहते है इस ब्रह्मूहर्त में जो बातें दिल से कही जाए ब्रह्मांड उस पर काम करना शुरू कर देता है।तो सुनो तुम बनना किसी के जीवन का डोरेमॉन,नहीं बनना तो कभी अपने जीवन का कोई नोबिता।