Dedicated man. in Hindi Anything by softrebel books and stories PDF | समर्पित पुरुष।

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समर्पित पुरुष।

__समर्पित पुरुष___
एक पुरुष के लिए बेहद कठिन है प्रेम कर पाना और उससे भी कठिन शायद उस प्रेम में समर्पित हो जाना..।
इसमें गलती उनकी भी नहीं, यह तो हमारे समाज में उत्पन्न कुविचारों के कारण है।
गलती हमारे परिवेश ,हमारे लालन-पालन, भरण-पोषण के तौर तरीकों में है।
एक बच्चा जो अपने घर परिवार और समाज में देखता है वही सीखता है।
उस बच्चे ने अपने पिता की कठोरता,बिना गलती मां और अन्य घर की स्त्रियों पर चिल्लाना, खुद की गलती को न मानना,किसी भी फैसले में स्त्रियों के हस्तक्षेप को वर्जित रखना।
अपनी बात रख रही स्त्रियों व बच्चों को "मुंह लग रही है,जुबान लड़ाती है बड़ों से" इत्यादि कहना...अर्थात अपने अहम के आगे किसी को भी टिकने न देना,हर हाल में खुद को सही ठहराना ही बचपन से देखा है।
अतः दोषी ये अहम है जिसे हम आम भाषा में male ego कहते है,जिस दिन वह अपनी भावनाओं को दबाना बंद कर ,अपने अहम को बगल में रख अपनी दुनिया को देखेंगे उस दिन वह दुनिया स्वर्ग हो जाएगी।
ऐसा बिल्कुल नहीं है कि घरेलू कलह में केवल पुरुष का योगदान है अपितु स्त्रियों का भी भरपूर है पर पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को अधिक सहनशील, गुणवान,त्याग और ममता की मूरत बनने के कारण भी यह रिश्ते एकतरफे हो जाते है यही कारण है कि मेरी नजरों ने अबतक जितनी भी दुनिया बेहद करीब से देखी है।
उसमें से अधिकतर दुनिया में मैने पाया है, एक से एक बेहद समर्पित स्त्रियों को, जो मार गाली इत्यादि खा कर भी उस रिश्ते में है ।
जिसमें दुनिया के सामने अपने पति को अच्छा तो कहा गया है पर उनके हृदय पर हाथ फेरने पर यही समझ आया है कि इनके यहां के पुरुष भी वैसे ही है बस थोड़ी आदतें और तरीके अलग है कोई ज्यादा अहंकारी है कोई थोड़ा कम पर है उसी विचार धारा के।
मैने यहां तक पाया है कि वह स्त्रियां जिनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया जाता है उनके पति खो देते है पुनः अपनी पत्नियों के भावनाओं को जानने का अधिकार।
वह चुप हो जाती है, रिश्ता खत्म नहीं होता बस उसकी आत्मा निकल जाती है।
वह रहती है, निभाती है, लेकिन जुड़ी नहीं रहती।
और यह किसी भी रिश्ते का सबसे खतरनाक मोड़ होता है, जब वह शांत हो जाती है यहां तक कि विद्रोह करना तक बंद कर देती है वह भौतिक और शारीरिक रूप से साथ तो होती है हंसती, बोलती है, सभी कार्यों को करती भी है किन्तु भावनात्मक रूप से अलग हो जाती है ।
वह किसी आपातकालीन,विपत्ति इत्यादि के समय भावुक भी होती है अपने पतियों भाइयों इत्यादि के लिए दुश्मन से भी लड़ती है किन्तु पुनः पहले जैसी कभी नहीं हो पाती है।
अर्थात वह जज्बातों को ज़ाहिर करना बंद कर देती है।
dear future मै,एक अतिभावुक सी लड़की , तुम मेरे दिल में दरवाज़े से झांकना,यूं अचानक कुछ कभी नहीं पहले आने की आहट दे , फिर धीरे सांकल बजाना पर कभी भी मत बनना मेरे लिए ऐसे पुरुष जिनके समक्ष मुझे भावनाओं को ज़ाहिर करने में भी कठिनाई होने लगे।
मेरे दिल के दरवाजे कभी भी बंद हो सकते है यहां तक कि किवाड़ों पर किले और सांकल पर ताले भी लटक सकते है।