Bhediya in Hindi Horror Stories by Vedant Kana books and stories PDF | Bhediya

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Bhediya

पहाड़ों के बीच बसा छोटा सा गाँव देवगढ़ उस दिन कुछ अलग ही खामोशी में डूबा हुआ था। हवा में एक अजीब सी घुटन थी, जैसे किसी अनजाने खतरे की आहट हो।

लोग अपने दरवाजे जल्दी बंद कर चुके थे, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से गाँव में एक के बाद एक अजीब मौतें हो रही थीं। हर लाश के पास एक ही निशान मिलता था, गहरे पंजों के निशान और मांस का फटा हुआ हिस्सा। लोग उसे बाघ समझते थे, पर बूढ़े कहते थे, यह कोई साधारण जानवर नहीं है।

गाँव में एक नया आदमी आया था, नाम था रघुवीर। वह शहर से आया एक शिकारी था, जिसने सुना था कि यहाँ कोई खूंखार जानवर लोगों को मार रहा है। उसने गाँव वालों से कहा कि वह उस जानवर का शिकार करेगा। पर जब उसने लाशें देखीं, तो उसकी आँखों में भी एक पल के लिए डर उतर आया। क्योंकि यह किसी जानवर का काम नहीं लग रहा था, बल्कि किसी इंसान और जानवर के बीच की चीज का।

उस रात रघुवीर ने जंगल में जाने का फैसला किया। हाथ में बंदूक और दिल में हिम्मत लेकर वह अकेला निकल पड़ा। जंगल के अंदर जाते ही उसे महसूस हुआ कि कोई उसे देख रहा है। हर पेड़ के पीछे, हर झाड़ी में जैसे कोई छिपा हो। अचानक दूर से एक लंबी और भयानक हुआं की आवाज आई। वह आवाज इतनी डरावनी थी कि उसकी रूह काँप गई, लेकिन वह आगे बढ़ता रहा।

कुछ देर बाद उसे जमीन पर ताजा खून के निशान दिखे। वह उन्हें पीछा करते हुए एक पुराने खंडहर तक पहुँच गया। खंडहर के अंदर अंधेरा था, और दीवारों पर अजीब निशान बने हुए थे। जैसे किसी ने नाखूनों से उन्हें नोचा हो। तभी उसे अंदर से किसी के कराहने की आवाज सुनाई दी।

वह धीरे धीरे अंदर गया और जो उसने देखा, उसे देखकर उसकी सांस रुक गई। वहाँ एक आदमी पड़ा था, आधा जिंदा, आधा मरा हुआ। उसका शरीर बुरी तरह से फटा हुआ था। वह आदमी मुश्किल से बोल पा रहा था। उसने रघुवीर का हाथ पकड़ लिया और कांपती आवाज में कहा, यह जानवर नहीं है… यह हम में से ही कोई है…

इतना कहकर वह आदमी मर गया।

रघुवीर का दिल जोर जोर से धड़कने लगा। तभी अचानक बाहर से फिर वही हुआं की आवाज आई, लेकिन इस बार बहुत करीब से। वह बाहर भागा, और जैसे ही उसने पीछे मुड़कर देखा, उसकी आँखें फैल गईं।

चाँदनी के नीचे एक विशाल काया खड़ी थी। उसका शरीर इंसान जैसा था, लेकिन चेहरा भेड़िये का। आँखें लाल, दांत नुकीले, और पूरे शरीर पर काले बाल। वह धीरे धीरे रघुवीर की ओर बढ़ रहा था।

रघुवीर ने बंदूक उठाई और गोली चला दी। गोली सीधे उस प्राणी के सीने में लगी, लेकिन वह रुका नहीं। बल्कि और तेज़ी से उसकी ओर दौड़ा। रघुवीर डर के मारे पीछे हटने लगा, तभी अचानक वह प्राणी रुक गया।

कुछ पल के लिए दोनों एक दूसरे को देखते रहे।

फिर वह प्राणी अचानक दर्द से तड़पने लगा। उसका शरीर कांपने लगा, और धीरे धीरे वह वापस इंसान के रूप में बदलने लगा। जब वह पूरी तरह बदल गया, तो रघुवीर के पैरों तले जमीन खिसक गई।

वह इंसान कोई और नहीं, बल्कि गाँव का मुखिया था।

रघुवीर को समझ नहीं आया कि क्या करे। तभी मुखिया ने आँखें खोलीं और हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, तुमने बहुत देर कर दी… अब यह श्राप तुम्हारे पास आ चुका है…

रघुवीर ने डर के मारे अपने हाथों को देखा। उसकी नसें उभरने लगी थीं, और त्वचा पर काले बाल उगने लगे थे। उसके अंदर एक अजीब सी भूख जागने लगी।

अगले दिन गाँव वालों को जंगल के पास एक नई लाश मिली। वह रघुवीर की थी, या शायद नहीं। क्योंकि उसका शरीर पूरी तरह से फटा हुआ था, पहचानना मुश्किल था।

उस रात फिर वही हुआं की आवाज पूरे गाँव में गूंज उठी। लेकिन इस बार वह आवाज पहले से ज्यादा गहरी और खतरनाक थी।

और गाँव के बाहर, अंधेरे जंगल में, एक नई लाल आँखें चमक रही थीं, जो किसी अगले शिकार का इंतजार कर रही थीं।