A Page from a Dairy in Hindi Anything by Radhika books and stories PDF | A Page from a Dairy

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A Page from a Dairy

4 April 2026

Sunday 

Dear Dairy 

आज दिन बहुत दर्द भरा था। वैसे तो लगभग हर दिन कुछ न कुछ अनएक्सपेक्टेड हो जाता हैं लेकिन आज कुछ अलग था। 

  वैसे मुझे शुरुआत कहां से करना चाहिए समझ नहीं आ रहा। बस कुछ लिखना चाहती थी मगर दिल और दिमाग पूरी तरह से साथ नहीं दे रहा। क्योंकि आज मैंने अपने एक दोस्त कि स्टोरी सुनी। सुनकर लगा कि जिंदगी हर किसी के लिए फेयर नहीं होता। पहले मैंने इसे सिर्फ सुना था आज महसूस कर लिया। सच़ में जब खुद पर गुज़रती है न तभी समझ आता है।

  मुझे यह भी समझ आ रहा है कि लड़का होने पर सब मिठाई क्यों बांटते हैं क्योंकि एक लड़का ही हैं जो पिता के बाद हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाता है।

 वो मेहनत करता है, अपने भाई बहन का खर्चा उठाता है और मां का सहारा बन जाता है। सुनने को तो सब कुछ ऐसा लग रहा मानों कोई स्टोरी हो और उसमें नायक बहुत तकलीफों में जी रहा है।

बट रियलिटी इज डिफरेंट! यहां नायक एक साधारण सा लड़का है जिसे छोटी सी उम्र में जिंदगी ने मुंह पर तमाचा मारा है। छोटी उम्र में पापा को खोना। घर का बड़ा बेटा, घर की जिम्मेदारी उठाता है, मां का सहारा बनता है और भाईयों के लिए पिता समान बन जाता है।लेकिन बड़े होते होते न जाने क्यों सब कुछ बदल सा जाता है। 

     फैमिली प्रॉब्लम्स ने उसे अंदर से तोड़ कर रख दिया और अब वो एकांत में बैठकर बस खुद को हर बात के लिए दोष दिए जा रहा है। सब उससे मुंह फेरे हुए हैं। मैं उसे हिम्मत नहीं दे पा रही हूं। उसे भाई जैसा मानती हूं, उसके साथ कुछ ग़लत हुआ तो कभी खुद को माफ नहीं कर पाउंगी। बहुत मुश्किल से थोड़ा दिलासा देकर आई हूं उसे। 

यह प्रॉब्लम थोड़ा सा खत्म हुआ ही था कि एक कोरियन मूवी रुलाकर चलीं गईं। मूवी इंतजार के बारे में था। उस मूवी का नाम “वेटिंग फॉर रेन” है। उसमें नायिका मर जाती हैं और नायक बस इंतजार करता है। 

नायिका ने कहा था कि 31 दिसंबर को बारिश होगी तो वो उससे मिलेगी। पर 31 दिसंबर को बारिश होना थोड़ा असंभव सा था क्योंकि बिन मौसम बरसात का कोई अंदाजा नहीं रहता।

 नायिका उससे मिलना तो चाहती थी लेकिन उसके हालात बिल्कुल अलग थे। वो पैरालाइज थीं। वो बोल तक नहीं सकती थी। कुछ चाहिए होता तो एक घंटी के जरिए बताती। इस हालात में भला वो किस तरह उससे मिलती।  बहन के जरिए उसने कई खत लिखें और उसे पोस्ट किया मगर खुद को मौत के करीब देखकर उसने यह फैसला लिया जिसमें उसकी बहन मददगार साबित हुई। नायिका की बहन ने इस कहानी में काफ़ी अच्छा किरदार निभाया है। एक पल को यूं लगा, काश कि वो स्कूल की छोटी लड़की नायिका न होकर उसकी बहन होती कम से कम इतना sad ending तो नहीं होती। खैर आखिरी में बरसात हुई मगर बहुत देर से। सच में बुरा किस्मत चाहकर भी बदल नहीं सकते। बदलने की कोशिश में जिंदगी तहस नहस हो जातीं हैं। 

   मगर इस उम्मीद से हम भगवान भरोसे भी तो बैठ नहीं सकती। वर्ना जिंदगी और बिगड़ जाएंगी। इसलिए मिलने वाले हर तकलीफ़ को हंसकर सहने की हिम्मत रखो क्या पता किस्मत को तुम पर प्यार आ जाएं। काश की कभी मैं भी तकलीफ़ में खुद को ज्ञान दे पाती। 

चलों उनके दुःख दर्द के कारण मैं अपनी तकलीफ भूल गई। अब उसको याद करूं तो वो बहुत ज्यादा तकलीफ़ देगा। इसे भूल जाना ही बेहतर है। 

डियर डायरी, मुझे पता है तुम मेरी हमेशा कि बकवास सुनकर थक जातीं हों लेकिन मेरे लिए यह सारी बकवास मेरी जज़्बात हैं। तुमसे न कहूं तो किससे कहूं।? खैर तुम मेरी एकलौती सहेली हो जिसे मेरा हर सिक्रेट पता है इसलिए मुझे सुन लिया करों, अच्छा लगता है।

 तो चलों आज के दिन का The end करते हैं। क्योंकि कल नयी शुरुआत भी तो करना है। 

        Good night 🌉