Chapter 5 — खंडहर का रहस्य
आर्यन के हाथ-पाँव ठंडे पड़ चुके थे। वह जलता हुआ लालटेन ज़मीन पर पड़ा था, लेकिन उसे पकड़ने वाला बूढ़ा चौकीदार गायब हो चुका था। मोबाइल की वह फोटो चीख-चीख कर कह रही थी कि यहाँ कोई भी वैसा नहीं है जैसा दिख रहा है।
उसने लड़खड़ाते कदमों से उस खंडहर की ओर कदम बढ़ाए, जिसे वह अब तक एक आलीशान होटल समझ रहा था।
अतीत की राख
जैसे ही आर्यन ने मुख्य दरवाज़े के जली हुई चौखट को पार किया, उसे सड़ने और धुएँ की गंध आई। दीवारें काली पड़ चुकी थीं। तभी उसे रिसेप्शन की वही पुरानी डायरी ज़मीन पर गिरी मिली। लेकिन इस बार वह साफ़ थी—उस पर धूल नहीं, बल्कि ताज़ा खून के निशान थे।
पन्ने अपने-आप पलटने लगे और एक जगह जाकर रुक गए। वहाँ एक नया नाम लिखा था:
"तीसरा मुसाफ़िर — विक्रम।"
आर्यन को अचानक याद आया। विक्रम उसका पुराना दोस्त था, जो उस रात उनके साथ था। लेकिन यादों के धुंधलके में विक्रम का चेहरा हमेशा धुंधला रहता था। क्या विक्रम ने ही उस रात कार को टक्कर मारी थी?
बेसमेंट का बुलावा
अचानक, खंडहर के फर्श के नीचे से किसी के रोने की आवाज़ आई। वह आवाज़ ठीक वैसी ही थी जैसी अनन्या की थी।
"आर्यन... बचाओ मुझे... यहाँ बहुत अंधेरा है।"
आर्यन ने टॉर्च जलाई और नीचे जाने वाली टूटी हुई सीढ़ियों की ओर बढ़ा। बेसमेंट का दरवाज़ा भारी था और उस पर बड़े-बड़े ताले लटके थे, लेकिन ताले टूटे हुए थे। अंदर जाते ही उसे जो दिखा, उसने उसके होश उड़ा दिए।
वहाँ एक पुरानी तिजोरी खुली पड़ी थी, और उसके चारों तरफ अनन्या की तस्वीरों का ढेर लगा था। उन तस्वीरों के पीछे एक ही बात लिखी थी— "धोखेबाज़।"
खौफनाक आमना-सामना
"तुम यहाँ नहीं आना चाहिए था, आर्यन।"
पीछे से एक भारी आवाज़ आई। आर्यन पलटा, तो देखा कि वहाँ वही बूढ़ा चौकीदार खड़ा था। लेकिन अब उसकी खाल उतर रही थी और उसके पीछे से एक जाना-पहचाना चेहरा उभर रहा था। वह विक्रम था।
विक्रम की आँखों में पागलपन था। "अनन्या मुझसे प्यार करती थी, आर्यन! लेकिन उसने तुम्हें चुना। उस रात मैंने तुम दोनों को खत्म करने की कोशिश की, पर तुम बच गए। दस साल तक मैं इंतज़ार करता रहा कि तुम वापस आओ और मैं अपना काम पूरा कर सकूँ।"
असली अनन्या कौन?
आर्यन ने चिल्लाकर कहा, "तो वो साया कौन था? वो लड़की कौन थी जो मुझे सड़क पर मिली?"
विक्रम हँसा—एक ऐसी हँसी जिससे रूह कांप जाए। "वो अनन्या नहीं थी। वो इस पहाड़ी का असली शैतान है, जो बदला लेने वालों की तलाश में रहता है। तुमने उसे जगा दिया है, आर्यन।"
तभी, बेसमेंट की दीवारें हिलने लगीं। काली धुंध दीवारों से बाहर निकलने लगी और विक्रम को चारों तरफ से घेर लिया। विक्रम की चीखें पूरे खंडहर में गूँज उठीं। वह काला साया अनन्या के रूप में प्रकट हुआ, लेकिन उसका चेहरा अब जल चुका था।
उसने विक्रम का गला पकड़ लिया और उसे अंधेरे की ओर खींचने लगी। जाते-जाते उसने आर्यन की ओर देखा और एक आखिरी बार मुस्कुराई—इस बार उसकी मुस्कान में दर्द नहीं, बल्कि एक चेतावनी थी।
"अभी सब खत्म नहीं हुआ है, आर्यन... हिसाब अभी बाकी है।"
क्या आर्यन उस जलते हुए खंडहर से ज़िंदा बाहर निकल पाएगा? और उस 'हिसाब' का असली मतलब क्या है?
देखते रहिए — Chapter 6: अंतिम हिसाब