बेसमेंट की दीवारें किसी कागज़ की तरह फटने लगी थीं। काला साया, जो अब अनन्या का रूप ले चुका था, विक्रम को घसीटते हुए अंधेरे के उस कोने में ले गया जहाँ से लौटकर कोई नहीं आता।
विक्रम की चीखें धीरे-धीरे धीमी होती गईं और फिर एक सन्नाटा छा गया—एक ऐसा सन्नाटा जो कान फाड़ने वाला था।
आर्यन ज़मीन पर गिरा हुआ था, उसकी आँखों के सामने सब कुछ धुंधला हो रहा था। उसे लगा कि सब खत्म हो गया, लेकिन तभी वह काली धुंध वापस उसकी ओर बढ़ने लगी।
एक पुरानी चाबी और हकीकत
आर्यन का हाथ फर्श पर पड़ी एक छोटी सी धातु की चीज़ से टकराया। वह एक चाबी थी, जिस पर 'Room No. 404' लिखा था। जैसे ही उसने चाबी छुई, उसे एक ज़ोरदार झटका लगा और उसके दिमाग की आखिरी परत भी खुल गई।
उसे याद आया—उस रात एक्सीडेंट के बाद वह कार से बाहर निकल आया था। उसने अनन्या को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन वह कार नहीं, बल्कि होटल का कमरा नंबर 404 था जहाँ असली हादसा हुआथा।
विक्रम ने उसे जो याद दिलाया था, वह आधा सच था।
असली गुनहगार विक्रम नहीं... बल्कि वह खुद था? या यह भी उस साये का एक और भ्रम था?
रूहानी इंसाफ
वह काली धुंध अब आर्यन के सीने पर सवार थी। अनन्या का चेहरा उसके सामने आया। उसके होंठ हिले—
"तुमने उसे क्यों नहीं रोका, आर्यन?"
आर्यन रोने लगा। "मैं डर गया था, अनन्या! मैं आग देखकर भाग गया था!"
उसे याद आया कि कैसे दस साल पहले उस कमरे में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी और वह अपनी जान बचाने के लिए अनन्या को वहीं छोड़ आया था। विक्रम तो सिर्फ एक गवाह था जिसे आर्यन ने अपने दिमाग में विलेन बना लिया था ताकि वह अपने गुनाह को छिपा सके।
खंडहर का अंत
अचानक पूरा खंडहर थरथराने लगा। जली हुई लकड़ियाँ गिरने लगीं। आर्यन ने देखा कि अनन्या का साया धीरे-धीरे शांत हो रहा था। उसकी आँखों से अब खून नहीं, बल्कि रोशनी निकल रही थी।
उसने अपना हाथ आर्यन के माथे पर रखा। एक पल के लिए आर्यन को वही पुरानी शिमला की ठंडी हवा महसूस हुई, लेकिन इस बार उसमें कोई बोझ नहीं था।
"माफ किया... पर भूलना मत," अनन्या की आवाज़ हवा में गूंजी।
आखिरी सुबह
जब आर्यन की आँख खुली, तो सूरज की पहली किरणें उसकी आँखों पर पड़ रही थीं। वह किसी होटल के बिस्तर पर नहीं, बल्कि उसी पहाड़ी सड़क के किनारे पड़ा था जहाँ वह पहली रात को टहला था।
उसका मोबाइल उसके पास पड़ा था। उसने डरते-डरते गैलरी खोली।
वहाँ कोई फोटो नहीं थी। कोई रिकॉर्डिंग नहीं थी। '10 साल पुराना' फोल्डर खाली था।
उसने राहत की साँस ली और उठकर चलने लगा। लेकिन तभी उसकी नज़र अपनी जैकेट की जेब पर गई। उसने हाथ डाला तो उसके अंदर वही कमरा नंबर 404 की पुरानी जली हुई चाबी थी।
उसने पीछे मुड़कर देखा। पहाड़ियों के बीच वही धुंध फिर से उठ रही थी। और उस धुंध के बीच, दूर कहीं, एक सफेद साया हाथ हिलाकर उसे अलविदा कह रहा था... या शायद फिर से बुला रहा था।
क्या यह सब सिर्फ आर्यन के दिमाग का खेल था, या शिमला की उन वादियों में आज भी कोई हिसाब अधूरा है?
देखने के लिए बने रहें — Chapter 7: धुंध की वापसी