Honted Jobplace - 15 in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Honted Jobplace - 15

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Honted Jobplace - 15

ऑफिस — सुबह का समय…पुलिस पूरी बिल्डिंग में फैल चुकी है…कृषांत हाथ में पेनड्राइव लिए खड़ा है…उसमें CCTV फुटेज है…

पुलिस ऑफिसर बोला - 
Mr. कृषांत, ये सबूत काफी मजबूत हैं…

कुछ ही देर में — वही seniors पकड़े जाते हैं…उनके चेहरे पर डर साफ दिख रहा है…पुलिस उन्हें हथकड़ी पहनाती है…।

सिनियर (घबराकर) बोला - 
हमने कुछ नहीं किया… ये सब झूठ है!!

तभी — स्क्रीन पर फुटेज चला दी जाती है…उनके चेहरे… उनका अपराध… सब साफ…उनकी आवाज़ बंद हो जाती है…कृषांत दूर खड़ा सब देख रहा है…उसकी आँखों में संतोष और दर्द दोनों हैं…।

कृषांत (धीरे) बोला - 
अब… सब खत्म…

अचानक — कमरे में हल्की ठंडी हवा चलती है…एक सुकून भरी रोशनी फैलती है…प्रिशा, संतोष और स्मिता की आत्माएँ सामने प्रकट होती हैं…लेकिन इस बार… उनके चेहरे शांत हैं…श्राव्या अब होश में है…वो कृषांत के पास खड़ी है… थोड़ी डरी… पर अब मजबूत…तीनों आत्माएँ उन्हें देखती हैं…।

प्रिशा (धीमे, मुस्कुराकर) बोली - 
अब… सब ठीक है…

प्रिशा संतोष की तरफ देखती है…इस बार बिना गुस्से… सिर्फ प्यार…दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़ते हैं…

संतोष बोला - 
अब… हम साथ हैं…

स्मिता उन्हें देख मुस्कुराती है…उसकी आँखों में भी सुकून है…
प्रिशा, कृषांत की तरफ देखती है…।

प्रिशा बोली - 
धन्यवाद…तुमने हमें भटकने से बचा लिया…।

फिर श्राव्या की तरफ देखती है…

प्रिशा (नरमी से) बोली - 
और तुम्हें… तुम्हारा प्यार…

श्राव्या की आँखों में आँसू आ जाते हैं…धीरे-धीरे — तीनों आत्माएँ रोशनी में बदलने लगती हैं…उनके चेहरे पर अब कोई दर्द नहीं… सिर्फ शांति...रोशनी ऊपर उठती है… और गायब हो जाती है…।

कमरा अब पूरी तरह शांत…कोई डर नहीं… कोई साया नहीं…श्राव्या धीरे से कृषांत के सीने से लग जाती है…।

श्राव्या (धीरे) बोली - 
सब… खत्म हो गया ना?

कृषांत हल्के से मुस्कुराता है…शायद पहली बार…

कृषांत बोला - 
नहीं…अब सब शुरू हुआ है…।

लेकिन… 9th फ्लोर की खिड़की पर एक हल्की रोशनी झलकती है…जैसे कोई याद अब भी बाकी हो…।

कुछ कहानियाँ खत्म नहीं होतीं…वो बस सुकून में बदल जाती हैं…

रात — हल्की चाँदनी खिड़की से कमरे में गिर रही है…हवा अब डरावनी नहीं… ठंडी और सुकून भरी है…।श्राव्या खिड़की के पास खड़ी है…चेहरे पर थकान… पर हल्की मुस्कान भी…।कृषांत दरवाज़े के पास खड़ा उसे देख रहा है…पहली बार उसकी आँखों में न गुस्सा… न सख्ती…बस… प्यार…।वो धीरे-धीरे उसके पास आता है…श्राव्या मुड़ती है…दोनों की नज़रें मिलती हैं…कुछ पल… बिना शब्दों के…।

श्राव्या (धीरे, हल्की मुस्कान के साथ) बोली - 
Sir… अब सब ठीक है ना…?

कृषांत हल्के से मुस्कुराता है…पहली बार सच में…।

कृषांत (नरमी से) बोला - 
हाँ… अब कोई डर नहीं…

वो थोड़ा और करीब आता है…दोनों बहुत करीब खड़े हैं…श्राव्या की साँसें तेज़… पर अब डर से नहीं…कृषांत धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में पकड़ता है…इस बार… न कोई जल्दबाज़ी… न कोई मजबूरी…बस एक शांत एहसास…।

वो धीरे से उसके होंठों को चूम लेता है…गहराई से… लेकिन बहुत नरमी से…श्राव्या आँखें बंद कर लेती है…इस बार डर नहीं… बस अपनापन…कुछ पल बाद…दोनों एक-दूसरे से लगे खड़े हैं…श्राव्या अपना सिर उसके सीने पर रख देती है…।

श्राव्या (धीरे) बोली - 
अब… कहीं मत जाना…

कृषांत उसे और करीब खींच लेता है…

कृषांत बोला - 
कभी नहीं…

हर डर के बाद…एक सुकून भरी कहानी जरूर शुरू होती है…।

सुबह — कमरे में धूप आ रही है…श्राव्या रसोई में खड़ी चाय बना रही है…पीछे से कृषांत आता है… चुपके से उसे गले लगा लेता है…

श्राव्या (चौंककर) बोली - 
अरे! आप… डराते क्यों हैं?

कृषांत (हल्की मुस्कान लिए) बोला - 
अब भूत नहीं डराते… तो सोचा मैं ही सही 😏

श्राव्या हल्का सा उसे मारती है… दोनों हँसते हैं…

ऑफिस — वही बिल्डिंग… लेकिन अब बिना डर के…श्राव्या confidently अंदर आती है…सभी कर्मचारी उसे सम्मान से देखते हैं…कृषांत केबिन में बैठा है…इस बार उसका चेहरा थोड़ा soft है…।

कर्मचारी (धीरे) बोले - 
सर अब पहले जैसे डरावने नहीं रहे…

श्राव्या केबिन में आती है…

श्राव्या (मस्ती में) बोली - 
Good morning sir…

कृषांत (सीरियस बनने की कोशिश करते हुए) बोला - 
Office में… मैं तुम्हारा husband नहीं… boss हूँ…

श्राव्या मुस्कुराती है…

धीरे से झुककर कहती है -
और घर में…?

कृषांत थोड़ा शरमाकर नजरें चुरा लेता है…
लंच टाइम — दोनों साथ बैठे हैं…

श्राव्या बोली - 
आप पहले बहुत अकड़ू थे…

कृषांत बोला - 
और तुम बहुत जिद्दी…

दोनों एक-दूसरे को देखते हैं… फिर हँस पड़ते हैं…
शाम — दोनों ऑफिस की छत (terrace) पर खड़े हैं…वही जगह… जहाँ कभी डर था। वहाँ सिर्फ हवा और सुकून है…

श्राव्या (धीरे) बोली - 
याद है… मैं यहाँ आने से कितना डरती थी…

कृषांत बोला - 
और अब…?

श्राव्या उसका हाथ पकड़ लेती है…

श्राव्या बोली - 
अब डर नहीं लगता… क्योंकि आप साथ हैं…

अचानक — पीछे से हवा चलती है…दरवाज़ा अपने आप बंद होता है… श्राव्या एक पल के लिए घबरा जाती है…

श्राव्या बोली - 
स-sir… ये…?

कृषांत हँस पड़ता है…

कृषांत बोला - 
Relax… हवा है… या फिर…

(वो मज़ाक में फुसफुसाता है -
कोई हमें bless कर रहा है…

दोनों हल्का मुस्कुराते हैं… जैसे समझ गए हों…कृषांत धीरे से श्राव्या को अपनी तरफ खींचता है…।

कृषांत बोला - 
अब कोई हमें अलग नहीं कर सकता…

वो उसके माथे पर किस करता है…श्राव्या उसकी बाहों में सिमट जाती है…आसमान में हल्की रोशनी… जैसे तीन साए दूर से मुस्कुरा रहे हों… 🕊️

जहाँ कभी डर बसता था…आज वहाँ प्यार ने घर बना लिया है…

✨ THE REAL END 💍❤️👻 ✨