(शाम का समय। ऑफिस का कमरा सुनसान। सिमरन अपने डेस्क पर बैठी है। बाहर हल्की धूप और कमरे में अंधेरा मिश्रित।)
"करण की प्यास बढ़ रही थी।
सिमरन अब भी उसकी असली ताक़त और लाल आँखों की प्यास से अनजान थी।
लेकिन उसे रोकना मुश्किल था। उसे पास लाना ही पड़ता था।"
(करण धीरे-धीरे सिमरन के पास आता है। उसकी आँखें लाल, चेहरा गंभीर।)
Karan (धीमे स्वर में) बोला -
"तुम आज देर तक अकेलीकाम कर रही हो।
ये खतरनाक हो सकता है।
मैं तुम्हें सुरक्षित करना चाहता हूँ।"
(सिमरन काँपती है। मासूमियत और डर के मिश्रित स्वर में फुसफुसाती है)
Simran बोली -
"सुरक्षित... आपसे? मुझे डर लग रहा है..."
(करण हल्का मुस्कुराता है। उसकी आँखों की लाल चमक अब थोड़ा कम, मगर गहरी है।)
Karan बोला -
"मेरा मतलब तुम्हारे डर से नहीं, तुम्हारी सुरक्षा से है।
चलो... मैं तुम्हें घर छोड़ दूँ।"
(करण सिमरन को अपनी कार तक लेकर जाता है। सिमरन डरते हुए बैठती है।)
"सिमरन अब भी नहीं जानती थी कि
जो आदमी उसे सुरक्षित ले जा रहा है...
वही एक दिन उसका खून पीने वाला शैतान भी था।
लेकिन फिलहाल... वो उसका रक्षक बन गया था।"
(कार में। सिमरन खिड़की से बाहर देख रही है। करण सामने ड्राइव कर रहा है। उसका चेहरा शांत। लाल आँखें हर पल सिमरन पर नजर रख रही हैं।)
Simran (मन ही मन) बोली -
"ये boss... इतने डरावने , और फिर भी... क्यों मुझे सुरक्षित महसूस करा रहे हैं?"
(करण उसे देखकर किसी शिकारी कि तरह मुस्कुराता है। उसकी लाल आँखें अब भी गहरी और तेज़ चमक रही हैं।)
"डर और सुरक्षा का ये जाल अब दोनों के बीच और गहरा होने वाला था।
सिमरन की मासूमियत और करण की प्यास...
दोनों अब और नज़दीक आने वाले थे।"
(सुबह। एयरपोर्ट। सिमरन अपने बैग के साथ खड़ी है। चेहरा मासूम, आँखों में डर। करण उसके पास खड़ा है, उसकी लाल आँखें दूर से चमक रही हैं।)
"सिमरन और करण को नए शहर में काम के लिए भेजा गया।
सिमरन अब भी पूरी तरह डर और अनजानियत में थी।
उसे नहीं पता था कि उसके सामने खड़ा आदमी... वही सैतान है, जिसकी प्यास कभी शांत नहीं होगी।"
( फ्लाइट में। सिमरन खिड़की से बाहर देख रही है।)
Simran (मन ही मन, डरते हुए) बोली -
"मैं... इतने दूर कैसे चली आई?
और ये boss... मेरे साथ क्यों हैं?"
(करण साइड में बैठा है। उसका चेहरा गंभीर और लाल आँखें झिलमिला रही हैं।)
"करण की प्यास अब और बढ़ रही थी।
कई दिन से उसने खून नहीं पिया था।
नया शहर, नई जगह... और सिमरन उसके सामने थी।
हर पल उसका खून पीने की इच्छा उसे और अधिक मजबूत कर रही थी।
लेकिन उसे खुद पर काबू रखना पड़ता था। मिशन अभी अधूरा था।
(होटल का कमरा। सिमरन अपने बैग unpack कर रही है। कमरे में डर और सन्नाटा। करण खिड़की के पास खड़ा है, बाहर की गली पर निगाहें गड़ी हुई हैं।)
Simran (धीमे स्वर में, खुद से) बोली -
"मैं... यहाँ कैसे रहूँगी?
ये शहर इतना अजनबी है... और ये boss... इतने डरावने।"
(करण धीरे-धीरे पीछे से खड़ा हो जाता है। उसकी लाल आँखें उसकी हर हल्की-सी हलचल को नोट कर रही हैं।)
Karan (धीमे, नियंत्रित स्वर में) बोला -
"डरना छोड़ दो।
यहाँ मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं होने दूँगा।
लेकिन याद रखो... मेरा नियंत्रण हर पल मुश्किल होता जा रहा है।"
(सिमरन काँपती है। उसका मासूम चेहरा डर और अनजानियत से भरा है। वो पीछे हटकर बिस्तर पर बैठ जाती है।)
"सिमरन अब भी नहीं जानती थी कि उसके लिए खतरा सामने बैठा है।
वो आदमी जिसे वो इंसान समझती थी...
वही उसके लिए सबसे बड़ा खतरा था।
और अब नए शहर में, कहानी का खेल और भी खतरनाक होने वाला था।"
(रात का समय। सिमरन होटल के कमरे में अकेली है। बाहर तेज़ हवा और हल्की बारिश हो रही है। सिमरन खिड़की से बाहर देख रही है, डर और बेचैनी में।)
"नया शहर... नई जगह।
लेकिन सिमरन के लिए डर और असुरक्षा वही थी।
उसे नहीं पता कि उसका सबसे बड़ा खतरा उसके बिल्कुल पास खड़ा है।"
(होटल का कॉरिडोर। दो संदिग्ध लोग सिमरन के कमरे की तरफ़ बढ़ रहे हैं। उनका इरादा स्पष्ट है – सिमरन को धमकाना या नुकसान पहुँचाना।)
Slandered Man 1 (धीमे फुसफुसाते हुए) बोला -
"ये वही लड़की है जो कल यहाँ आई थी।
चलो, थोड़ा डर दिखाते हैं। फिर लूट लेंगे।"
(सिमरन अचानक दरवाजे के खटखटाने की आवाज़ सुनकर डर जाती है।)
Simran (घबराकर) बोली -
"ओह नहीं... कोई है? प्लीज़ मुझे मत डराओ!"
(वो कमरे के कोने में खड़ी हो जाती है। दरवाजे को जोर से धक्का लगता है।)
"सिमरन का मासूम दिल डर से तेजी से धड़क रहा था।
और तभी... दरवाजे के पीछे से एक परछाई आती है।"
करण सिमरन के सामने वाले room में ही रहता था। उसने शोर शराबा सुना। तो वो बाहर आया।
करण बोला - जरूर कुछ गड़बड़ है। मुझे देखना होगा।
(करण होटल के कमरे में प्रवेश करता है। उसकी लाल आँखें चमक रही हैं। वह तुरंत संदिग्ध लोगों को पीछे हटाता है।)
Karan (गहरी और धमकाने वाली आवाज़ में) बोला -
"तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो?"
(संदिग्ध लोग काँपते हैं और तेजी से भाग जाते हैं। करण सिमरन की तरफ़ बढ़ता है।)
"करण ने उसे बचा लिया।
लेकिन सिमरन को अब भी नहीं पता था कि जो आदमी उसे सुरक्षित रख रहा है... वही उसकी सबसे बड़ी चुनौती और खतरा भी था।"
(सिमरन काँपती हुई करण की तरफ़ देखती है।)
Simran (धीमे स्वर में, डर और उलझन में) बोली -
"आप... आप हमेशा मेरी रक्षा करते हो... लेकिन मुझे डर क्यों लगता है?"
(करण उसकी तरफ़ देखते हुए मुस्कुराता है। उसकी लाल आँखें अब भी चमक रही हैं, पर चेहरे का भाव शांत है।)
Karan (धीमी, नियंत्रित आवाज़ में) बोला -
"क्योंकि डर और सुरक्षा हमेशा साथ चलते हैं।
और मुझे खुद को रोकना पड़ता है...
लेकिन एक दिन तुम्हारा खून मेरा होगा।"
"सिमरन अब भी मासूम और अनजान थी।
करण की प्यास बढ़ रही थी।
और नए शहर में उनका खेल अब और भी खतरनाक और रहस्यमय होने वाला था।"
(रात का समय। होटल का अँधेरा कॉरिडोर। सिमरन बिस्तर पर बैठी है, डर और थकान में। करण सिमरन के बंद गेट के पास खड़ा है, लाल आँखों से गेट को देख रहा है।)
"सिमरन अब भी मासूम थी।
उसे नहीं पता कि सामने खड़ा आदमी... इंसान नहीं है।
और उसकी प्यास धीरे-धीरे बढ़ रही थी।
हर पल उसे रोकना कठिन हो रहा था।"
(सिमरन बिस्तर पर सिर दबाए बैठी है। अचानक कमरे का दरवाजा खिसकता है और करण अंदर आता है। उसकी लाल आँखें चमक रही हैं।)
Simran (घबराकर, फुसफुसाते हुए) बोली -
"S sir अ... आप यहाँ क्यों हो? मुझे डर लग रहा है..."
(करण धीरे-धीरे उसके पास आता है।)
Karan (धीमी, गहरी आवाज़ में) बोला -
"तुम्हें डर लग रहा है? अच्छा है...
लेकिन याद रखो, तुम्हारी सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है।
और तुम्हारी मासूमियत... मेरी प्यास को और तेज़ कर देती है।"
(सिमरन काँपती है। उसका चेहरा डर और उलझन में है।)
"करण अब और पास आ रहा था।
सिमरन डर रही थी, लेकिन साथ ही उसका दिल कुछ अलग महसूस कर रहा था।
डर और आकर्षण दोनों उसके भीतर उभर रहे थे।"
(करण सिमरन के पास खड़ा होकर धीरे-धीरे उसकी आँखों में देखता है। लाल आँखों की चमक में खतरे और आकर्षण दोनों हैं।)
Karan (धीमे स्वर में, नियंत्रित लेकिन खतरनाक) बोला -
"तुम अब मेरी पास हो... और खासकर तुम्हारा खून मेरा है।
और तुम्हारा मासूम दिल मुझे रोक नहीं सकता।
लेकिन फिलहाल, मैं खुद को रोक रहा हूँ।
एक दिन... तुम्हारा खून मेरा होगा।"
(सिमरन पीछे हटती है। आँखों में डर और दिल में उलझन।)
Simran (मन ही मन, डर और जिज्ञासा में) बोली -
"ये boss... इतने डरावने और खतनाक हैं।
फिर भी... मुझे अजीब सा एहसास होता है उनके पास रहते हुए..."
"नई जगह, नया खतरा, और सामने खड़ा खतरनाक शैतान।
सिमरन की मासूमियत और करण की प्यास अब और नज़दीक आने वाली थी।
और रात का खेल अब शुरू हो चुका था।".
(रात का समय। करण अपने कमरे में बैठा है। कमरे का अँधेरा और उसकी लाल आँखों की चमक माहौल को और खतरनाक बना रही है। उसके सामने उसके बिरादरी के लोग खड़े हैं ।)
"करण अब अकेला नहीं था।
उसके बिरादरी के लोग उसे लगातार भड़काते रहे थे।
सिमरन का खून पीना और मिशन पूरा करना... यही उनका मकसद था।"
(तीन लोग दिखाई देते हैं। उनका स्वर तेज और धमकाने वाला है।)
Biradari Member 1: बोली -
"करण! तुम्हें अब और इंतजार नहीं करना चाहिए।
सिमरन तुम्हारे सामने है।
अपना मिशन पूरा करो और उसका खून पी लो!"
Biradari Member 2: बोला -
"क्यों रुके हो? ये तुम्हारा मौका है।
उसका मासूमियत और डर दोनों तुम्हारे लिए आसान बना रहे हैं।"
(करण के हाथ हल्के कंपकंपा जाते हैं। उसकी आँखें लाल चमक रही हैं। वो खुद पर काबू रखने की कोशिश करता है।)
Karan (धीमे स्वर में, खुद से) बोला -
"ना... अभी नहीं।
मिशन अभी अधूरा है।
और मुझे उसे धीरे-धीरे तैयार करना होगा...
ताकि वह मेरे पास हमेशा रहे।"
(बिरादरी के लोग चिल्लाते हैं।)
Biradari Member 3: बोला -
"जल्दी करो! तुम्हारा समय कम है।
हम तुम्हारी प्यास नहीं रोक सकते!"
(करण अपनी कुर्सी में झुकता है, हाथों से माथा पकड़ता है।)
"करण का दिल और दिमाग दो हिस्सों में बंट चुका था।
एक तरफ़ मिशन और प्यास का दबाव।
दूसरी तरफ़ सिमरन की मासूमियत और सुरक्षा।
और उसे खुद पर काबू रखना था।
लेकिन हर पल उसकी प्यास बढ़ रही थी।"
(सिमरन होटल के कमरे में सो रही है। unaware है कि उसके लिए खतरा कितना करीब है।)
"सिमरन को अब भी नहीं पता था कि खतरा उसके बिल्कुल पास बैठा है।
और करण का संघर्ष... अब हर पल उसकी नज़रों में दिखाई दे रहा था।
एक दिन सिमरन का खून पीना तय था,
लेकिन अभी करण खुद को रोक रहा था।"
रात का समय। होटल का कमरा अँधेरा। सिमरन बिस्तर पर सो रही है। करण कमरे में खड़ा है, लाल आँखों की चमक उसके चेहरे पर खतरनाक और गहरी है।)
"करण के दिल में दो आगें जल रही थीं।
एक तरफ़ प्यास और मिशन का दबाव।
दूसरी तरफ़ सिमरन की मासूमियत और सुरक्षा की जिम्मेदारी।
और अब उसे खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था।"
(करण धीरे-धीरे सिमरन के पास जाता है। उसका चेहरा गंभीर, आँखें लाल और चमकती हुई।)
Karan (मन ही मन, धीमे स्वर में) बोला -
"बस थोड़ी देर और...
अभी नहीं... अभी उसे सुरक्षित रखना ज़रूरी है।
लेकिन उसका मासूम दिल मुझे रोक नहीं पा रहा।"
(वो सिमरन के पास खड़ा होकर उसे देखता है। सिमरन की साँसें धीमी और अनजान हैं।)
"सिमरन अब भी unaware थी कि सामने खड़ा आदमी... उसका सबसे बड़ा खतरा और सुरक्षा दोनों था।
और करण का खून प्यास से भरा दिल हर पल उसे अपनी ओर खींच रहा था।"
(करण धीरे-धीरे सिमरन के पास बैठ जाता है। उसकी लाल आँखें अब उसके हर हाव-भाव को पकड़ रही हैं।)
Simran (धीमे स्वर में, नींद से आधी जागती हुई) बोली -
" Sir आप... यहाँ क्यों हो? शायद मैं सपना देख रही हूं।"
Karan (धीमी, नियंत्रित आवाज़ में) बोला -
" सपना नहीं सच है।
तुम्हें खतरा था।
और मैं तुम्हें सुरक्षित रखने आया हूँ।
लेकिन याद रखना... मेरी प्यास हर पल बढ़ रही है।
एक दिन... तुम्हारा खून मेरा होगा।"
(सिमरन डर से काँपती है। करण उसकी मासूमियत और डर को महसूस करता है, लेकिन खुद को रोकता है।)
"अब रात में...
सिमरन का डर और करण का खतरनाक आकर्षण दोनों एक साथ थे।
और ये नज़दीकियाँ अब और गहरी होने वाली थीं।"