Ghost hunters - 14 in Hindi Horror Stories by Rishav raj books and stories PDF | Ghost hunters - 14

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Ghost hunters - 14

कुछ  भी सामान्य नहीं था पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए और शरीर जैसे आधा ठोस, आधा धुआँ

कबीर - हाहाहा अब आया न दोस्त , क्या दोस्त खाएगा गोस्त 😜

कोई भी हिल नहीं रहा था आरव एक कदम आगे बढ़ा


कबीर ने तुरंत अपने device की settings बढ़ा दी

कबीर- field stable है लेकिन ज्यादा देर नहीं रोक पाएगा

मीरा की नजर उस आकृति पर टिकी थी

मीरा- ये पूरी तरह यहाँ नहीं है आधी उर्जा बाहर हैं आधी अंदर।

फिर वही आवाज गूंजी

“वापस चल”

इस बार साफ था ये आवाज रोहित के लिए थी रोहित के पैर जैसे जमीन में जड़ गए थे उसकी सांसें भारी हो रही थीं

रितिका- रोहित…

उसने उसका हाथ पकड़ना चाहा, लेकिन आरव ने बीच में रोक दिया

आरव- अभी नहीं 

आवाज़ फिर से आई, इस बार थोड़ी तेज़

“वापस. चल”

रोहित ने अचानक एक कदम आगे बढ़ाया

निशा- पापा नहीं

कबीर ने तुरंत react किया

कबीर- hold करो इसे

लेकिन रोहित जैसे सुन ही नहीं रहा था। उसकी आँखें खाली थीं जैसे कोई उसे खींच रहा हो मीरा ने तेज़ आवाज में कहा

मीरा- ये control करने की कोशिश कर रहा है

आरव ने बिना समय गंवाए अपनी जेब से एक छोटा metallic pendant निकाला और जमीन पर एक तेज़ रेखा खींची

आरव- इसके पार मत आने देना!

कबीर ने तुरंत device उस line के पास activate कर दिया, जैसे ही रोहित उस रेखा के करीब पहुँचा वह अचानक रुक गया उसका शरीर जोर से झटका खाकर पीछे हुआ रोहित जमीन पर गिर पड़ा रितिका उसकी तरफ भागी

रितिका- रोहित

इस बार आरव ने नहीं रोका , मीरा की नजर अब भी उस आकृति पर थी

मीरा- ये उसे ले जाना चाहता है उसी जगह

कबीर- पेड़

आरव ने सिर हिलाया

आरव- connection वहीं बना है

दीवार पर बनी आकृति अचानक और गहरी हो गई उसके आसपास की हवा हिलने लगी फिर एक झटका और वह आकृति दीवार से अलग होकर फर्श पर उतर आई
अब वो सिर्फ परछाई नहीं थी वो सामने थी
कमरे के बीच उसकी ऊँचाई थोड़ी ज्यादा शरीर टेढ़ा और चेहरा साफ नहीं

लेकिन उसकी नजर सीधे रोहित पर थी आर्यन पीछे हट गया

आर्यन- ये… ये सच में है भभ...भूत 👻☠️

कबीर ने दाँत भींचे

कबीर- अब मजाक नहीं है

मीरा धीरे-धीरे आगे बढ़ी

मीरा-  कुछ करना होगा… अभी

आरव- कबीर, net

कबीर- ready 

जैसे ही आकृति एक कदम आगे बढ़ी कबीर ने device activate किया एक हल्की energy mesh उसकी तरफ गई आकृति ने उसे छूते ही जोर से झटका खाया
एक अजीब-सी आवाज निकली ना पूरी चीख ना पूरी आवाज लेकिन वह रुकी नहीं वह फिर आगे बढ़ी
इस बार तेज़ सीधे रोहित की तरफ

आरव बीच में आ गया

आरव- रुक जाओ

कुछ सेकंड के लिए सब कुछ स्थिर हो गया आकृति उसके सामने रुक गई दोनों आमने-सामने आरव ने धीरे से कहा

आरव- ये गलती थी जानबूझकर नहीं

कोई जवाब नहीं, बस वही भारी सन्नाटा

फिर अचानक आकृति का सिर टेढ़ा हुआ जैसे वह सुन रही हो और फिर उसने बहुत धीमी आवाज में कहा

“वापस…”

आरव- नहीं जाएगा

कबीर ने पीछे से कहा

कबीर- ये मानने वाला नहीं है

मीरा- क्योंकि ये अकेला नहीं है

आरव ने एक सेकंड के लिए उसकी तरफ देखा

आरव- time नहीं है

उसने तुरंत फैसला लिया

आरव- इसे यहीं खत्म नहीं कर सकते connection तोड़ना होगा

कबीर- मतलब वहाँ जाना पड़ेगा

मीरा ने धीरे से कहा

मीरा- अभी

रितिका ने घबराकर पूछा

रितिका- क्या मतलब?

आरव ने सीधा जवाब दिया

आरव- ये यहाँ तब तक रहेगा जब तक हम उस जगह को बंद नहीं करते जहाँ से ये जुड़ा है

कबीर- पेड़

कमरे में खामोशी छा गई बाहर रात पूरी तरह उतर चुकी थी
हवा तेज़ हो गई थी दीवार पर लगी खिड़की अपने आप हिलने लगी

ठक… ठक…

आकृति फिर से हिली इस बार और बेचैन जैसे समय खत्म हो रहा हो आरव ने तुरंत कहा

आरव- हम अभी निकलते हैं

मीरा- ये भी आएगा

कबीर- और अगर रास्ते में कुछ किया तो?

आरव- तब वहीं खत्म करेंगे

उसने रोहित की तरफ देखा रोहित अब धीरे-धीरे होश में आ रहा था

आरव- चल पाएँगे?

रोहित ने मुश्किल से सिर हिलाया

रोहित- हाँ

आरव ने बाकी सबकी तरफ देखा

आरव- कोई पीछे नहीं रहेगा

कबीर- great रात, गाँव, और haunted पेड़ perfect combination।


मीरा ने दरवाज़े की तरफ देखा

मीरा- ये रास्ता खुद खोलेगा

उसी समय घर का मुख्य दरवाज़ा अपने आप धीरे-धीरे खुल गया बाहर काला अंधेरा था और दूर वही पेड़ हवा अब सीधे उसी दिशा से आ रही थी

आर्यन - वाह ये भूत तो इन सबका बात मान रहा है 

आकृति दरवाज़े की तरफ मुड़ी फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ी
जैसे रास्ता दिखा रही हो आरव ने एक आखिरी बार घर के अंदर देखा फिर कहा 

आरव- चलते हैं

और सब उसके पीछे बाहर निकल गए रात अब पूरी तरह उनकी हो चुकी थी वो लोग वहां पेड़ के पास गए वैसे वो पेड़ दुर था लेकिन उनकी खिड़की से दिखता था 

रात गहरी हो चुकी थी। घर के बाहर हल्की ठंड थी, लेकिन अंदर एक अजीब बेचैनी फैली हुई थी रोहित का परिवार हॉल में बैठा था किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि अकेले किसी कमरे में जाए वो सब वापस आ गए थे वहां उन्हें कुछ नहीं मिला था 

आरव खिड़की के पास खड़ा बाहर देख रहा था उसकी नजर बार-बार उसी पेड़ पर जा रही थी कुछ देर की खामोशी के बाद वह धीरे से मुड़ा।

आरव- शुरुआत वहीं से हुई थी है ना?

रोहित ने सिर झुका लिया। उसके चेहरे पर थकान और डर साफ दिख रहा था रोहित बहुत उदास था लग रहा था जैसे अब वो रो देगा 

रोहित- हाँ उस दिन मैं ड्यूटी से लौट रहा था रास्ते में उस पेड़ के पास रुक गया

रोहित ऐसे बोल रहा था जैसे कोई बच्चा बड़े से शिक़ायत कर रहा हो ,कबीर हल्का सा मुस्कुराया, लेकिन उसकी आँखें गंभीर थीं

कबीर- रुक गए या कुछ और भी किया?

रोहित थोड़ा झिझका, फिर धीरे से बोला

रोहित- मैंने वहीं पेशाब कर दिया था

कमरे में कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई मीरा ने तुरंत अपनी नोटबुक में कुछ लिखा

आर्यन (गला फार फार के हंसते हुए) 🤣- आपने.. आपने वहां पेशाब कर दिया हाहाहा 🤣, इसलिए तो वो हमें परेशान कर रही है 🤣🤣

रितिका  अपना आंख दिखाती  है जिसे देखकर आर्यन शांत हो जाता है 

मीरा- और उसके बाद?

रोहित- उसके बाद पहले कुछ नहीं हुआ लेकिन उसी रात मुझे लगा कोई मुझे देख रहा है मैंने सोचा वहम है लेकिन फिर

रितिका ने बात आगे बताई

रितिका- फिर घर में चीजें अपने आप हिलने लगीं दरवाजे खुलने लगे और ये

उसने रोहित की तरफ देखा

रितिका- ये बदलने लगे

आरव ने ध्यान से रोहित को देखा

आरव- कैसे बदले?

रोहित ने गहरी सांस ली

रोहित- गुस्सा, बहुत ज्यादा गुस्सा आने लगा था  बिना वजह और कई बार मुझे खुद याद नहीं रहता था कि मैंने क्या किया

आर्यन धीरे से बोला

आर्यन- अच्छा इसलिए, एक बार पापा ने मुझे धक्का दे दिया था लेकिन बाद में उन्हें याद भी नहीं था मुझे लगा मम्मी से  डांट परी है 

निशा ने डरते हुए कहा

निशा- और वो रात को उठकर उस पेड़ की तरफ देखने लगते थे

कमरे का माहौल और भारी हो गया कबीर अब पूरी तरह गंभीर हो चुका था

कबीर- मतलब ये सीधा attachment नहीं है ये influence है

मीरा ने सिर हिलाया।

मीरा- और ये influence सिर्फ डराने के लिए नहीं ये धीरे धीरे control लेने की कोशिश कर रहा है

आरव ने फिर वही सवाल पूछा, लेकिन इस बार आवाज थोड़ी सख्त थी

आरव- उस दिन उस पेड़ के पास तुम्हें कुछ अजीब लगा था?

रोहित ने आँखें बंद कर याद करने की कोशिश की, कुछ सेकंड बाद उसका चेहरा थोड़ा बदल गया

रोहित- हाँ एक बात थी

सबकी नजरें उस पर टिक गईं

रोहित- वहाँ पहले से कुछ पड़ा था जमीन पर

कबीर तुरंत आगे झुका

कबीर- क्या?

रोहित- मुझे लगा कोई पुरानी चीज है  जैसे कपड़ा या राख मैंने ध्यान नहीं दिया और बस

कबीर - आपने बिना दिया मुत, अब भूत फार रही है आपकी ....

आरव - चुप, चुप,चुप  भाई यहां तो सिरियस हों जा 

वो चुप हो गया, मीरा ने धीरे से कहा

मीरा- तुमने सिर्फ पेड़ को disturb नहीं किया तुमने कुछ और भी छेड़ा है

रितिका की आवाज कांप गई

रितिका- मतलब ये सब हमारी गलती है?

आरव ने तुरंत सिर हिलाया

आरव- नहीं गलती नहीं लेकिन अब जिम्मेदारी है इसे ठीक करने की

उसी समय… ऊपर वाले कमरे से हल्की खट… खट… की आवाज आई।

सब एक पल के लिए चुप हो गए निशा ने धीरे से माँ का हाथ पकड़ लिया

निशा- वो फिर आ गया

कबीर - ये छुप छुप के हमारी बातें सुन रहा है 

लेकिन इस बार आरव ने ऊपर नहीं देखा उसकी नजर अभी भी रोहित पर थी

आरव- ये तुम्हें क्यों चुन रहा है इसका जवाब अभी पूरा नहीं मिला है

कबीर धीरे से बोला

कबीर- लेकिन एक बात साफ है ये सिर्फ गुस्सा नहीं है ये अपमान का जवाब तो है ही लेकिन इसका मक़सद कुछ और ही लग रहा है 

मीरा ने जोड़ा

मीरा- और शायद वो चीज जो वहाँ पड़ी थी वही इसका असली कारण है

आरव ने फैसला ले लिया

आरव- सुबह होते ही हम उस जगह को फिर से देखेंगे इस बार ध्यान से

कबीर हल्का सा मुस्कुराया

कबीर- और इस बार बिना गलती के

ऊपर से फिर वही आवाज आई

खट… खट…

लेकिन इस बार उसमें एक रिदम था जैसे कोई इंतजार कर रहा हो आरव ने पहली बार ऊपर देखा

आरव- ये जल्दी करेगा इससे पहले कि ये पूरी तरह control ले हमें कुछ करना होगा कमरे में फिर खामोशी छा गई


अब ये सिर्फ एक डरावनी घटना नहीं थी ये एक कारण ढूंढने की दौड़ थी और अगर वो कारण समय पर नहीं मिला तो  शिकार रोहित खुद होगा।