Ghost hunters - 15 in Hindi Horror Stories by Rishav raj books and stories PDF | Ghost hunters - 15

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Ghost hunters - 15



सुबह अभी पूरी तरह उजली नहीं हुई थी। आसमान हल्का धुंधला था, और गाँव के उस हिस्से में एक अजीब सन्नाटा पसरा हुआ था। रात की घटनाओं के बाद किसी ने ठीक से नींद नहीं ली थी।

आरव बाहर आँगन में खड़ा था। उसकी नजर सीधे उसी पेड़ पर टिकी थी। दिन की रोशनी में वो पेड़ सामान्य दिख रहा था लेकिन अब सब जानते थे कि वो सामान्य नहीं है।

कबीर हाथ में एक छोटा बैग लिए बाहर आया। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह हल्की मुस्कान थी, लेकिन आँखें पूरी तरह सतर्क थीं।

कबीर- चलें या अभी और सोचोगे?

आरव- जितना सोचना था, सोच लिया। अब देखना है।

मीरा भी बाहर आ गई उसने अपना डिवाइस ऑन किया।

मीरा- दिन में readings कम होंगी लेकिन traces मिल सकते हैं।

रोहित थोड़ी दूरी पर खड़ा था। उसके चेहरे पर डर साफ था, लेकिन इस बार वो पीछे नहीं हट रहा था।

रोहित- मैं भी चलूँगा

आरव ने उसकी तरफ देखा

आरव- जो शुरू किया है उसे समझना भी पड़ेगा

चारों धीरे-धीरे पेड़ की तरफ बढ़े जमीन पर ओस जमी थी, लेकिन जैसे-जैसे वो पास पहुँचते गए मिट्टी सूखी लगने लगी।

मीरा ने स्क्रीन पर नजर डाली

मीरा- यहाँ temperature बाकी जगह से कम है और ये normal नहीं है

कबीर सीधे पेड़ के तने के पास गया और नीचे झुककर जमीन को ध्यान से देखने लगा

कबीर- कल रात हमने जो देखा था वो यहीं कहीं होना चाहिए

आरव भी नीचे बैठ गया उसने मिट्टी को हाथ से हटाना शुरू किया कुछ ही देर में उसे वही जगह मिल गई जहाँ मिट्टी थोड़ी अलग थी

आरव- यही है

दोनों ने मिलकर धीरे-धीरे मिट्टी हटाई इस बार उन्होंने सावधानी रखी बिना जल्दबाजी के थोड़ी देर बाद वही जंग लगा हुआ छोटा डिब्बा फिर से सामने आ गया

लेकिन इस बार उसके आसपास कुछ और भी दिखा काले रंग की सूखी राख और कुछ पुराने कपड़े के टुकड़े
मीरा तुरंत झुककर देखने लगी

मीरा- ये किसी ritual का हिस्सा लग रहा है

कबीर ने बिना छुए ध्यान से देखा

कबीर- और ये नया नहीं है काफी पुराना है 

रोहित की सांसें तेज हो गईं

रोहित- मैंने यही देखा था उस दिन

आरव ने उसकी तरफ देखा

आरव- तुमने इसे छुआ था?

रोहित ने तुरंत सिर हिलाया

रोहित- नहीं बस पास खड़ा था

कबीर ने हल्का सा सिर झुकाया

कबीर- छूना जरूरी नहीं होता disturb करना ही काफी होता है

मीरा ने डिवाइस की स्क्रीन आरव को दिखाई

मीरा- energy यहीं concentrated है ये ही anchor है

कुछ सेकंड के लिए सब चुप रहे फिर आरव ने धीरे से कहा

आरव- खोलते हैं

रोहित घबरा गया

रोहित- अभी ?

कबीर ने उसकी तरफ देखा।

कबीर- अभी नहीं खोलेंगे तो ये खुद खुलेगा और तब हालात हमारे हाथ में नहीं होंगे

मीरा ने धीरे से जोड़ा

मीरा- लेकिन जैसे ही ये खुलेगा reaction होगा

आरव ने बिना कुछ बोले हाथ बढ़ाया और धीरे से डिब्बे को उठाया।

जैसे ही डिब्बा जमीन से पूरी तरह अलग हुआ पेड़ की टहनियाँ हल्का-हल्का हिलने लगीं हवा अचानक ठंडी हो गई।

रोहित पीछे हट गया

रोहित- ये शुरू हो गया

आरव ने डिब्बे को अपने सामने रखा।

उस पर जंग जमी थी और ऊपर कुछ निशान बने हुए थे जो साफ नहीं दिख रहे थे

कबीर ने ध्यान से देखा

कबीर- ये किसी ने बंद किया है ताकि अंदर जो है वो बाहर ना आए

मीरा- या ताकि वो कहीं और ना जाए

एक पल के लिए सबने एक-दूसरे की तरफ देखा

फिर आरव ने धीरे से ढक्कन पर हाथ रखा।

आरव- तैयार रहो।

कबीर ने तुरंत अपनी जेब से राख और ताबीज निकाल लिया।

मीरा ने डिवाइस की sensitivity बढ़ा दी।

रोहित की धड़कनें तेज हो गईं।

आरव ने धीरे-धीरे डिब्बा खोलना शुरू किया।

कर्क…

जैसे ही ढक्कन थोड़ा सा उठा…

अंदर से ठंडी हवा का तेज झोंका निकला।

मीरा- readings spike कर रही हैं…!

ढक्कन पूरा खुल गया।

अंदर… एक छोटा सा कपड़े में लिपटा हुआ गुच्छा था… और उसके साथ… कुछ बाल।

रोहित का चेहरा पीला पड़ गया।

रोहित- ये क्या है…

कबीर की आवाज इस बार बिल्कुल गंभीर थी।

कबीर- ये binding object है…

मीरा- मतलब किसी की आत्मा को बाँधने के लिए इस्तेमाल किया गया

आरव ने कपड़े को छुए बिना देखा

आरव- और इसका मतलब है ये सब accident नहीं है

उसी पल पेड़ के पीछे कुछ हिला सबकी नजर एक साथ उधर गई लेकिन वहाँ कुछ साफ नहीं दिखा सिर्फ एक हल्की सी परछाईं जो तुरंत गायब हो गई

कबीर ने धीरे से कहा

कबीर- वो फिर आ गया

मीरा- ये हमें देख रहा है

आरव ने डिब्बे को बंद नहीं किया उसकी नजर अब अंधेरे की तरफ थी

आरव- अब ये सिर्फ रोहित के पीछे नहीं है

कुछ सेकंड के लिए सब शांत हो गए

फिर बहुत हल्की आवाज आई जैसे कोई दूर से फुसफुसा रहा हो

“वापस रख दो”

रोहित के हाथ कांप गए

रोहित- तुमने सुना ?

कबीर ने हल्का सा सिर हिलाया।

कबीर- हाँ और ये चेतावनी नहीं है

आरव की आँखें सख्त हो गईं

आरव- ये सब नोर्मल नहीं है हमें उनकी मदद फिर लेनी पड़ेगी 

हवा अचानक और ठंडी हो गई पेड़ की टहनियाँ अब तेज़ी से हिलने लगीं और इस बार साफ था अगला कदम बहुत सोच-समझकर उठाना होगा क्योंकि अब वो चीज छेड़ दी गई थी जिसे छेड़ना नहीं चाहिए था....