रिया और आरव की कहानी किसी फिल्म जैसी नहीं थी।
ना उनमें बड़े-बड़े वादे थे, ना हर दिन “आई लव यू” कहने की आदत।
लेकिन फिर भी उनके बीच कुछ ऐसा था, जो बहुत गहरा था… इतना गहरा कि दोनों एक-दूसरे की आदत बन चुके थे।
रिया की सुबह आरव के मैसेज से शुरू होती थी —
“उठ गई?”
और रात उसके उसी पुराने वाक्य पर खत्म होती —
“अब सो जाओ, मैं यहीं हूँ।”
शायद आरव को कभी एहसास भी नहीं हुआ कि उसकी ये छोटी-छोटी बातें रिया के लिए कितनी बड़ी थीं।
जब भी रिया उदास होती, आरव बिना पूछे समझ जाता।
वो उसे हँसाने के लिए बेवजह की बातें करता, उसकी हर ज़िद पूरी करता, यहाँ तक कि उसकी खामोशी भी पढ़ लेता था।
धीरे-धीरे रिया को लगने लगा था कि दुनिया में अगर कोई सच में उसका है, तो वो सिर्फ आरव है।
लेकिन मोहब्बत जितनी खूबसूरत होती है, उतना ही डर अपने साथ लेकर आती है।
और रिया के अंदर भी एक डर हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा बड़ा हो रहा था।
उसे डर था वक्त से।
उस दिन से… जब शायद सब बदल जाएगा।
एक रात दोनों कॉल पर थे।
आरव अपनी आदत के मुताबिक उसे दिनभर की बातें बता रहा था, और रिया सिर्फ चुपचाप उसकी आवाज़ सुन रही थी।
“इतनी चुप क्यों हो?” आरव ने पूछा।
रिया कुछ सेकंड चुप रही, फिर धीरे से बोली—
“आरव… एक बात पूछूँ?”
“हम्म, पूछो।”
“अगर एक दिन तुम्हारी शादी किसी और से हो गई… तो क्या तुम मुझे भूल जाओगे?”
दूसरी तरफ अचानक खामोशी छा गई।
रिया की धड़कनें तेज हो गईं।
वो हँसना चाहती थी, कहना चाहती थी कि “मज़ाक कर रही हूँ”…
लेकिन ये मज़ाक नहीं था।
ये वो सवाल था जो उसे हर रात रुलाता था।
उसने भर्राई आवाज़ में कहा—
“क्या तब भी तुम मुझे ऐसे ही प्यार करोगे?
जब मुझे नींद नहीं आएगी, क्या तब भी मुझे ऐसे ही सुलाओगे?
क्या मेरी छोटी-छोटी ज़िदें तब भी तुम्हें याद रहेंगी?
या फिर किसी दिन मैं तुम्हारी जिंदगी का बस एक पुराना हिस्सा बन जाऊँगी?”
उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे।
उसे पहली बार महसूस हुआ कि वो आरव से कितनी ज्यादा जुड़ चुकी है।
इतनी कि अब उसे खोने का ख्याल भी अंदर से तोड़ देता था।
आरव काफी देर तक चुप रहा।
फिर बहुत धीरे से बोला—
“रिया… जिंदगी हमेशा हमारे हिसाब से नहीं चलती।
कभी-कभी लोग साथ नहीं रह पाते, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि प्यार खत्म हो जाता है।”
रिया चुप रही।
उसे ये जवाब सुनकर सुकून भी मिला और दर्द भी।
क्योंकि उसने समझ लिया था कि
कुछ रिश्ते हमेशा नाम नहीं पाते,
कुछ लोग हमेशा हमारे नहीं हो पाते…
फिर भी हम उन्हें पूरी जिंदगी सबसे ज्यादा प्यार करते हैं।
उस रात रिया बहुत देर तक रोती रही।
लेकिन पहली बार उसे अपने आँसुओं से शिकायत नहीं थी।
क्योंकि वो जान चुकी थी कि
सच्चा प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं होता…
कभी-कभी किसी को खो देने के डर के बावजूद
उसे हर दिन उतनी ही शिद्दत से चाहना भी मोहब्बत होता है। और किसी और के आने या ना आने से कभी सच्चा प्यार कम नही होता ये बात भी उस रात रिया को समझ आ गयी थी की आरव उसके पास रहे या ना रहे पर उसके साथ हमेशा रहेगा किसी ना किसी रूप मे