He was just passing the time in Hindi Love Stories by aakanksha books and stories PDF | वो बस वक़्त गुज़ार रहा था

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वो बस वक़्त गुज़ार रहा था

बारिश की हल्की बूंदें खिड़की के शीशे पर दस्तक दे रही थीं। कमरे में अंधेरा था और आर्यन अपने बिस्तर पर बैठा पुरानी चैट्स पढ़ रहा था। हर मैसेज, हर तस्वीर और हर याद उसे उसी मोड़ पर ले जा रही थी जहाँ से उसकी दुनिया बदलनी शुरू हुई थी।
कभी सना उसकी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा हुआ करती थी। उसकी सुबह सना के "गुड मॉर्निंग" से शुरू होती और रात उसकी आवाज़ सुनकर खत्म होती। आर्यन को लगता था कि उसे उसकी मंज़िल मिल गई है।
लेकिन कुछ लोग मंज़िल नहीं होते, सिर्फ़ सफ़र का एक छोटा-सा पड़ाव होते हैं।
धीरे-धीरे सना बदलने लगी। पहले जो उसकी छोटी-सी उदासी भी पहचान लेती थी, अब उसकी ख़ामोशियों से भी बेख़बर रहने लगी। आर्यन हर दिन रिश्ते को बचाने की कोशिश करता रहा। कभी अपने अहंकार को छोड़कर, कभी अपने आँसुओं को छुपाकर।
मगर रिश्ते एकतरफा कोशिशों से नहीं चलते।
एक शाम सना ने कहा, "अब पहले जैसा कुछ नहीं रहा।"
बस इतना ही।
न कोई शिकायत, न कोई ग़लती, न कोई वजह।
उस दिन आर्यन को समझ आ गया कि कुछ फैसले सवालों के जवाब नहीं देते, सिर्फ़ कहानियों का अंत लिख देते हैं।
दिन गुज़रते गए। लोग कहते थे, "वक़्त सब ठीक कर देता है।"
लेकिन सच यह था कि वक़्त कुछ ठीक नहीं करता, वह बस जीना सिखा देता है।
आर्यन ने भी जीना सीख लिया। उसने खुद को संभाला, अपने सपनों पर ध्यान दिया और उन रास्तों पर चलना शुरू किया जिन्हें उसने किसी के लिए छोड़ दिया था।
फिर एक दिन उसे एहसास हुआ कि वह जिस प्यार को अपनी पूरी दुनिया समझ बैठा था, शायद वह प्यार था ही नहीं।
प्यार इंतज़ार करवाता है, लेकिन छोड़कर नहीं जाता।
प्यार बदलता है, मगर बेगाना नहीं बनता।
प्यार दूर हो सकता है, मगर अजनबी नहीं होता।
और तब उसे पहली बार महसूस हुआ कि जिस रिश्ते को वह मोहब्बत समझता रहा, शायद वह सिर्फ़ किसी का वक़्त गुज़ारने का ज़रिया था।
उस रात उसने सना की सारी तस्वीरें नहीं मिटाईं। उसने कोई नफ़रत भी नहीं की।
बस आईने में खुद को देखकर मुस्कुराया और कहा—
"धन्यवाद। तुमने मुझे खोया नहीं, बल्कि मुझे मेरी कीमत समझा दी।"
उसकी आँखों में न आँसू थे, न शिकायत।
क्योंकि अब वह समझ चुका था कि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में रहने के लिए नहीं आते, बल्कि हमें मज़बूत बनाकर चले जाने के लिए आते हैं।
और जिस दिन यह बात समझ आ जाए, उस दिन मोहब्बत हार नहीं जाती...
इंसान इंतज़ार करना छोड़ देता है।फिर एक दिन अचानक सना की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर दिखीं।
आर्यन कुछ देर तक स्क्रीन को देखता रहा। कभी जिस लड़की के साथ उसने पूरी ज़िंदगी के सपने देखे थे, आज वह किसी और के साथ अपनी नई ज़िंदगी शुरू कर रही थी।
अजीब बात यह थी कि इस बार उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।
शायद इसलिए क्योंकि दर्द की भी एक उम्र होती है।
वह मुस्कुराया और फोन बंद कर दिया।
उसे याद आया कि कभी वह सना के एक मैसेज का घंटों इंतज़ार करता था। उसकी ऑनलाइन लास्ट सीन देखकर रातें गुज़ार देता था। लेकिन आज वही लड़की उसकी ज़िंदगी में होकर भी उसकी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं थी।
उस रात उसने आसमान की तरफ देखा और पहली बार दिल से दुआ की—
"खुश रहना..."
न उसे वापस माँगा, न कोई शिकायत की।
क्योंकि अब वह समझ चुका था कि मोहब्बत किसी को हासिल करने का नाम नहीं, बल्कि उसकी खुशी में अपनी रज़ामंदी ढूँढ लेने का नाम है।
कुछ महीनों बाद आर्यन उसी शहर की भीड़ में चल रहा था जहाँ कभी हर सड़क उसे सना की याद दिलाती थी।
मगर अब सब बदल चुका था।
सड़कें वही थीं, मौसम वही था, शहर वही था,
बस वह लड़का बदल गया था जो किसी के जाने के बाद खुद को खो बैठा था।
अब उसने खुद को पा लिया था।
और जब कभी कोई उससे पूछता,
"क्या तुम उससे आज भी प्यार करते हो?"
तो वह हल्की-सी मुस्कान के साथ कहता—
"प्यार शायद आज भी है, लेकिन अब खुद से ज़्यादा नहीं।"
क्योंकि उसने सीख लिया था कि किसी के जाने से ज़िंदगी खत्म नहीं होती।
कुछ लोग हमारी कहानी के किरदार होते हैं, मंज़िल नहीं।
और सना...
वह उसकी सबसे खूबसूरत अधूरी कहानी बनकर रह गई। 
लेकिन इस बार कहानी का अंत उदासी से नहीं, खुद को पा लेने से हुआ था।