episode 8 in Hindi Drama by Priya Chaudhary books and stories PDF | 50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 8

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 8

(एक धीमा, सुरीला लेकिन डरावना संगीत। पक्षियों के चहकने की आवाज़, जो बहुत ही कृत्रिम (artificial) लग रही है। आर्यन के नंगे पैरों के घास पर चलने की दबी हुई आवाज़।)
आर्यन उस बगीचे की ओर बढ़ रहा था। उसे लगा कि वह अपनी 'हवेली' के उस मलबे से बाहर निकल आया है, लेकिन बगीचे की घास उसके पैरों को चुभ नहीं रही थी, बल्कि वह रेशम जैसी मुलायम थी। आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा—वह सफेद कमरा, जहाँ वह लेटा था, अब पूरी तरह से गायब हो चुका था। वहाँ कोई दीवार नहीं थी, कोई दरवाज़ा नहीं था, सिर्फ वह बगीचा था जो अनंत तक फैला हुआ था।
सीन 1: माया का बुलावा
आर्यन ने बगीचे में आगे बढ़ना शुरू किया। हर कदम के साथ उसे अपनी यादें धुंधली महसूस हो रही थीं। उसे यह तो याद था कि वह आर्यन मल्होत्रा है, जिसने कभी एक साम्राज्य खड़ा किया था, लेकिन अब उसे यह याद नहीं आ रहा था कि उसकी कंपनी का नाम क्या था, या उसने अपनी माँ का चेहरा आखिरी बार कब देखा था।
तभी, उसे वह आकृति फिर दिखाई दी—माया। वह एक पुराने झूलों के पास खड़ी थी, जो धीरे-धीरे हिल रहे थे, जबकि हवा बिल्कुल शांत थी। माया ने वही लाल साड़ी पहनी थी जो उसने उस आखिरी रात पहनी थी।
"माया?" आर्यन की आवाज़ कांप रही थी।
माया ने अपना सिर धीरे से घुमाया। उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो उसे अंदर तक डरा गई। "तुम यहाँ आ गए, आर्यन? मैंने तुमसे कहा था न, कि हम यहीं मिलेंगे।"
आर्यन उसके पास जाने के लिए दौड़ा, लेकिन वह जितनी तेज़ी से दौड़ रहा था, माया उतनी ही दूर जा रही थी। यह एक अंतहीन दौड़ थी। आर्यन हाँफने लगा। उसे अपने सीने में वही दर्द महसूस हुआ जो उसे 20 साल पहले उस रात हुआ था—जब उसने अपना अपराध छुपाने के लिए माया का गला घोंटा था।
सीन 2: 44वां दिन—बदलती वास्तविकता
अचानक, बगीचे का रंग बदलने लगा। हरा घास अब राख के रंग का हो रहा था। आकाश का नीला रंग गहरा काला पड़ गया था। आर्यन रुक गया। उसने देखा कि उसके आसपास के पेड़ अब पेड़ नहीं, बल्कि कंकाल जैसे इंसानी हाथ थे जो आसमान की तरफ इशारा कर रहे थे।
तभी, पीछे से वही नर्स की आवाज़ आई, लेकिन इस बार वह नर्स नहीं, बल्कि एक जज की तरह सुनाई दे रही थी।
"आर्यन मल्होत्रा, आप यहाँ केवल अपनी यादों के कैदी हैं। आपने 45 दिन अपनी हवेली की कहानी में बिताए, अब अगले 5 दिन आप अपने किए हुए कर्मों के साये में बिताएंगे।"
आर्यन ने चीखकर कहा, "मैं मर चुका हूँ, तो मुझे सज़ा क्यों दी जा रही है? यह स्वर्ग है या नर्क?"
हवा में एक गूँज हुई: "यह न तो स्वर्ग है, न नर्क। यह तुम्हारा 'अंतर्मन' है। जब तक तुम स्वीकार नहीं करोगे, तुम इसी बगीचे की लूप (loop) में घूमते रहोगे।"
सीन 3: अतीत के पन्नों का हिसाब
आर्यन ने अपनी जेब में हाथ डाला और वही कागज़ की 'जेल की चाबी' निकाली। अब वह कागज नहीं रही थी, बल्कि वह लोहे की हो गई थी। उसने उसे कसकर पकड़ा। उसे याद आया—समीर।
"समीर कहाँ है?" उसने चिल्लाकर पूछा।
तभी ज़मीन फटने लगी और उस दरार से एक हाथ बाहर निकला। वह समीर का हाथ था। आर्यन ने उसे खींचने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन जैसे ही उसने समीर को पकड़ा, समीर का शरीर धूल बनकर उड़ गया। आर्यन के हाथों में सिर्फ समीर का वह पुराना घड़ी (watch) बची थी, जो एक्सीडेंट के बाद रुक गई थी। उस घड़ी पर समय 12:00 बजे का था।
सीन 4: 44वें दिन की खामोशी
आर्यन समझ गया कि यह 44वां दिन उसके लिए सबसे कठिन है। इस दिन उसे किसी से नहीं, बल्कि खुद से लड़ना था। उसने उस घड़ी को अपने कान के पास लगाया। उसमें से टिक-टिक की आवाज़ नहीं आ रही थी, बल्कि उसके अपने अपराधों की फुसफुसाहटें सुनाई दे रही थीं।
"तूने मुझे मारा," समीर की फुसफुसाहट।
"तूने हमारा विश्वास तोड़ा," उसके पार्टनर्स की आवाज़।
"तूने हमें सिर्फ एक सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया," आयशा की आवाज़।
आर्यन अपनी पूरी ताकत से चिल्लाया—इतनी तेज़ कि उसका गला बैठ गया। "मैं गलत था! हाँ, मैं कातिल हूँ! मैंने सबको बर्बाद किया! अब मुझे चैन दो!"
जैसे ही उसने ये शब्द बोले, बगीचे का वह काला आसमान फटने लगा और उससे सफेद रोशनी की एक किरण गिरी। वह कोई मुक्ति नहीं थी, बल्कि एक नया रहस्य था। वह रोशनी सीधे उसके सामने के एक बंद दरवाज़े पर पड़ी। यह वही हवेली का दरवाज़ा था जो ढह गया था, लेकिन अब वह बिल्कुल नया लग रहा था।
सीन 5: नया दरवाज़ा, नया राज़
दरवाज़े के ऊपर लिखा था: "स्वागत है, आर्यन। यह तुम्हारे 5 दिन का आखिरी पड़ाव है।"
आर्यन ने चाबी लगाई। दरवाज़ा खुला और अंदर उसने जो देखा, उससे उसकी रूह कांप गई। वहाँ एक बड़ी मेज लगी थी। मेज के चारों ओर 44 लोग बैठे थे, जिनमें समीर, आयशा, माया, और वे सभी शामिल थे जिन्हें उसने कभी नुकसान पहुँचाया था। वे सब एक साथ खामोश बैठे थे। मेज के सबसे ऊपरी हिस्से पर एक खाली कुर्सी थी, जिस पर उसका नाम लिखा था।
"आर्यन, बैठो," समीर ने कहा। उसकी आवाज़ अब वैसी नहीं थी। वह अब बिल्कुल आर्यन जैसी लग रही थी। "हम तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे। आज का दिन तुम्हारा आखिरी फैसला है।"
आर्यन डरते हुए उस कुर्सी पर जाकर बैठ गया। उसके सामने की प्लेट में उसका 'पछतावा' परोसा गया था। उसे वह सब खाना था।
सीन 6: पछतावे का स्वाद
वह जैसे ही खाने का एक निवाला मुंह में डालने वाला था, वह खाना खून में बदल गया। आर्यन ने उसे थूक दिया।
"यह क्या है?" उसने पूछा।
"यह तुम्हारा सच है," माया ने कहा। "तुमने हमेशा झूठ का स्वाद चखा है, आर्यन। आज तुम्हें सच को गले से नीचे उतारना होगा।"
आर्यन ने एक गहरी सांस ली। उसे पता था कि अगर वह नहीं खाया, तो वह इसी बगीचे के लूप में हमेशा के लिए फँस जाएगा। उसने अपने कांपते हाथों से वह खून भरा निवाला लिया और खा लिया।
जैसे ही उसने उसे निगला, उसे एक असहनीय दर्द हुआ। उसका पूरा शरीर कांपने लगा। उसे अपने किए हुए हर गलत काम की याद एक झटके में आ गई—वह डर, वह लालच, वह हवस। उसने सब कुछ महसूस किया जो उसने दूसरों को दिया था।
नैरेटर: 44 दिन पूरे। आर्यन ने सच का स्वाद चख लिया है। अब उसे यह पता है कि वह क्या है। लेकिन सवाल यह है—क्या इस सच को जानने के बाद, वह खुद को माफ कर पाएगा? या अगले 4 दिन उसे और भी गहरे दर्द में धकेल देंगे?
(सस्पेंस पॉइंट: टेबल के नीचे से एक और चाबी गिरी। आर्यन ने उसे उठाया—वह चाबी जेल की नहीं, बल्कि उसकी अपनी हवेली की 'अंतिम अलमारी' की थी, जिसे उसने आज तक कभी नहीं खोला था। उस अलमारी में क्या है? क्या वह उसका सबसे बड़ा राज़ है, या कुछ और जो उसे हमेशा के लिए खत्म कर देगा?)
लेखक: प्रिया
अगले एपिसोड में: अंतिम अलमारी का राज़ और आर्यन का खुद से आखिरी सामना।