Vinay Damani हल्की मुस्कान के साथ फ़ाइल बंद करते हुए कहते हैं—
“Vaani, baaki saari formalities HR se complete kar lo…
Aur haan, kal se join kar lena.”
वाणी की आँखों में चमक आ जाती है।
वो सिर हिलाकर विनम्रता से बोलती है—
“Thank you, sir.”
वो अपना फोल्डर उठाती है और HR के केबिन की तरफ चली जाती है।
HR मैम वाणी को देखकर मुस्कुरा देती हैं—
“Congratulations Miss Vaani, please… have a seat.”
वाणी बैठ जाती है और joining form, ID proof, offer letter—सब ध्यान से भरने लगती है।
दिल तेज़ धड़क रहा था… पर चेहरे पर वही शांत कॉन्फिडेंस।
HR:
“Welcome to Damani Enterprises.”
वाणी हल्की मुस्कान देती है।
Vinay Damani अपने intercom पर बटन दबाते हैं—
“Agastya ko bolo… mujhe half an hour mein uski meeting chahiye. It’s important.”
वो अपनी कुर्सी पर पीछे टिकते हुए एक गहरी सोच में पड़ जाते हैं।
आँखों में वही चमक—जैसे कोई पुरानी फाइल दुबारा खुलने वाली हो।
Agastya अपना लैपटॉप बंद करता है,
black crisp shirt की sleeves हल्की-सी fold करता है
और assistant को कहता है—
“car ready rakhna …
Main 10 minute mein nikal raha hoon.”
उसके चेहरे पर वही sharp, dominating expression।
ना ज़रा-सा स्माइल, ना कोई softness।
Pure business mode.
वो अपना phone उठाता है और office से बाहर निकल जाता है।
इंटरव्यू कम्प्लीट होने के बाद वाणी HR ke room से बाहर निकल रही थी कि
पीछे से कोई सीटी बजाता हुआ आता है—
कबीर।
काला फॉर्मल, बेफिक्र चाल, चेहरे पर वही attitude वाली स्माइल।
Kabir (हाथ बाँधकर):
“सुन… तूने अपनी scooty गलत जगह पार्क कर दी है।
जाकर सही से लगा के आ।”
Vaani:
“Key ले जाओ।
Tum bhi कर सकते हो।”
कबीर हँस देता है—
वो typical बड़ा भाई वाला attitude।
Kabir:
“Sorry, yahan मैं तुम्हारा BOSS हूँ।
So… apna काम खुद करो।”
वाणी उसे घूरते हुए करीब आती है—
Vaani (धीरे से बड़बड़ाते हुए):
“Ruko… ghar pe milo.
Batati hoon tumhe…”
और गुस्से में उसके पास से निकल जाती है।
कबीर हँसते हुए सिर हिलाता है—
“Pagal ladki…”
उधर अगस्त्य Singhania Ke office से निकलकर खुद गाड़ी ड्राइव कर रहा था।
आज उसका मूड पहले ही खराब था—
और वो फोन कॉल पर किसी से तेज़ स्वर में बात कर रहा था।
ड्राइवर पास वाली सीट पर बैठा गति देखकर घबराया हुआ था।
Driver (धीरे से):
“Saab… thoda dheere—”
अगस्त्य हाथ से इशारा करता है—
चुप।
गाड़ी तेज़ रफ्तार में मोड़ लेती है और
जैसे ही Damani Office के gate में एंटर करने वाली होती है—
टक्कर!
एक scooty साइड से गाड़ी से टकरा जाती है।
सकूट की पिछली लाइट टूटकर गिर पड़ती है।
वाणी अपनी स्कूटी को संभालती है,
गुस्सा उसके पूरे चेहरे पर साफ था।
ड्राइवर तुरंत बाहर कूदता है—
Driver:
“Madam sorry! Bahut sorry! गलती—”
वाणी उसकी बात काटकर
स्ट्रेट अगस्त्य की सीट की तरफ चल देती है।
अगस्त्य अभी भी फोन पर था—
“Ha… I said NO! You handle this—”
वाणी खिड़की पर नॉक करती है।
अगस्त्य irritation से window नीचे करता है—
और जैसे ही नज़र वाणी से टकराती है—
वो दो सेकंड के लिए रुक जाता है।
उसे उम्मीद नहीं थी कि कोई यूँ उसकी कार पर आकर खड़ी हो जाएगी।
पर वाणी नहीं रुकती।
वो झपट कर उसका फोन छीनती है—
और सीधे रोड पर फेंक देती है।
धड़ाम!
अगस्त्य का चेहरा…
अब पूरी तरह बर्फ से आग में बदल चुका था।
वह गुस्से में
Agastya (धमकते हुए):
“WHAT THE HELL!
ARE YOU MAD OR WHAT?!
Do you even realize what you just did?
You creepy, crazy girl—”
वाणी भी चिल्लाने लगती है—
बिना एक इंच पीछे हटे।
“Aur आपको पता है आपने क्या किया?!
मेरी scooty का हाल देखिए!
Government bolti rehti hai
DON’T TALK AND DRIVE,
DON’T DRINK AND DRIVE…
par aap jaise paise wale log
ye board padhna bhool jate hain!”
ड्राइवर एकदम घबराया हुआ—
Driver:
“ma'am , chhor dijiye… galti—”
अगस्त्य एक word नहीं सुन रहा था अब।
उसकी नसें चेहरे पर उभर आई थीं।
ड्राइवर: “Saab? Saab??”
अगस्त्य एक्सिलरेटर दबाता है…
गाड़ी पीछे लेता है…
और वाणी की स्कूटी को
सीधे—
जोर से—
धक्का मार देता है।
धड़ाम!
स्कूटी उड़कर सामने दीवार में जा लगती है—
चूर–चूर।
टुकड़े चार तरफ बिखर जाते हैं।
वाणी दो सेकंड के लिए पत्थर बन जाती है।
उसकी आँखें फैल जाती हैं।
ये वही स्कूटी थी
जो उसने अपनी पहली कमाई से खरीदी थी।
धीरे-धीरे उसकी नजरें
टूटी हुई स्कूटी से अगस्त्य के चेहरे पर जाती हैं।
और अगस्त्य…
बिल्कुल शांत।
ठंडी नज़र।
जैसे कुछ हुआ ही न हो।
बस इतना कहता है—
Agastya (धीमे, पर खतरनाक स्वर में):
“Next time…
meri car or mere samne saamne mat aana nahi to tumhara haal bhi ye fatichar scooty ke jese hoga......Miss opportunist.”
Agstya के मुंह से ऑप्शनिस्ट सुन के वाणी को एक पल के लिए बुरा लगता हैं । पर अभी वो अपनी स्कूटी के गम में डूबी हुई होती हैं।
अगस्त्य के जाने के बाद
पूरा माहौल कुछ सेकंड के लिए खामोश हो जाता है।
ड्राइवर भी डर से जड़ खड़ा है।
वाणी धीरे-धीरे उस टूटी हुई स्कूटी की तरफ चलती है—
उसके हर कदम में ऐसा लगता था जैसे दिल का कोई हिस्सा टूट रहा हो।
दीवार में घुसी स्कूटी के प्लास्टिक और मेटल के छोटे-छोटे टुकड़े
ज़मीन पर बिखरे पड़े थे।
वाणी घुटनों के बल बैठती है…
उंगलियों से उन टुकड़ों को छूती है—
और आखिरकार
उसकी आँखों से आँसू बिना अनुमति के गिर पड़ते हैं।
ये सिर्फ एक स्कूटी नहीं थी।
उसकी पहली कमाई थी।
उसकी आज़ादी थी।
उसकी मेहनत थी।
उसका गर्व था।
वाणी होठ दबाकर रोना रोकने की कोशिश करती है, पर गला भारी हो जाता है—
Vaani (टूटी आवाज में खुद से):
“koi insaan kaise kar sakta hai…
Kaise koi itna… cruel ho sakta hai…”
उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं,
आँसू गालों पर बहते जा रहे थे।
कबीर दूर से दौड़ता हुआ आता है—
उसने पूरे टकराव को दूर से देखा था।
जैसे ही वह टूटी हुई स्कूटी देखता है,
उसकी बैंगनी नसें आँखों में उभर जाती हैं।
Kabir (चिल्लाते हुए):
“VAANI!
Tu theek hai na?”
वाणी बस सिर हिलाती है—
आँसुओं को रोकती हुई।
कबीर उसकी स्कूटी की हालत देखता है
और अगले ही पल
उसका चेहरा खून जैसा लाल हो जाता है।
वह दाँत भींचकर हवा में मुठ्ठी मारता है ।
Kabir:
“Yeh kisne kiya?!
KAUN THA WOH?!”
लेकिन उसी वक़्त
वाणी धीरे-धीरे उठती है।
उसकी आँखें लाल थीं,
पर उसका चेहरा…
खामोश। स्थिर। टूटकर भी संभला हुआ।
वह बिना किसी ग़ुस्से के,
बहुत शांत आवाज़ में कहती है—
Vaani (थकी हुई, संयमित आवाज़ में):
“Kabir… please… mujhe ghar chod dega kya?”
कबीर उसके चेहरे की तरफ देखता है—
वह तलाश रहा था गुस्सा, चीख, शिकायत…
पर वाणी में सिर्फ दर्द और थकान थी।
Vaani:
“Ye scooty… garage me dalwani hai.
Help karega?”
उसकी यह अजीब-सी शांति
कबीर को और बेचैन कर देती है।
वह पलकें झपकाता है,
गुस्सा अंदर उतारता है
और धीरे से बस इतना कहता है—
Kabir (धीमी, भारी आवाज़ में):
“Ha… haan, theek hai.”
वह स्कूटी के टूटे हिस्से उठाता है,
उसके संभलने की कोशिश देखकर
उसके भीतर फिर एक चिंगारी जलती है—
पर वह खामोश रहता है।
वाणी कार की तरफ बढ़ती है
और तभी पीछे से कबीर बोलता है—
Kabir:
सुन दमानी सर ने एक मीटिंग रखी है पहले वो मीटिंग अटैंड करते है बाद में घर चलते हैं
वाणी एक पल उसके चेहरे को देखती है
उसने सिर्फ सिर हिलाया
और धीरे से बोली— “Okay.”