Ghost hunters - 17 in Hindi Horror Stories by Rishav raj books and stories PDF | Ghost hunters - 17

Featured Books
Categories
Share

Ghost hunters - 17



दोपहर ढल रही थी सूरज की रोशनी पेड़ तक पहुँच तो रही थी लेकिन उसके नीचे खड़े लोगों तक नहीं जैसे उस जगह ने रोशनी को स्वीकार करने से इंकार कर दिया हो

पेड़ के नीचे रखा खुला डिब्बा उसके अंदर बंधा हुआ वो कपड़ा और उसके आसपास फैली राख—अब सब कुछ स्पष्ट संकेत दे रहे थे कि ये कोई साधारण बाधा नहीं

आरव चुप खड़ा था उसके चेहरे पर वही ठंडा संतुलन था लेकिन अंदर वह फैसला ले चुका था।

आरव- ये हमारे तरीके का केस नहीं है।

कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।

कबीर- आखिर मान ही लिया तूने।

मीरा ने गंभीर स्वर में पूछा।

मीरा- तो अब?

आरव- अब… असली खिलाड़ियों को बुलाया गया है।

उसी समय… दूर कच्चे रास्ते पर धूल उठी।

धीरे-धीरे तीन आकृतियाँ दिखाई दीं।

कोई गाड़ी नहीं… कोई आवाज नहीं… बस पैदल चलते हुए तीन लोग।

जैसे-जैसे वे पास आए उनका रूप साफ होता गया सफेद धोती ऊपर गेरुआ कपड़ा गले में रुद्राक्ष और माथे पर भस्म का तिलक।

बीच में जो था उसकी उम्र पचास के आसपास होगी लेकिन उसकी आँखें असामान्य रूप से स्थिर थीं वो लोग सीधे आकर पेड़ के सामने रुक गए

कुछ सेकंड तक किसी ने कुछ नहीं कहा फिर उस आदमी ने धीमे स्वर में पूछा—

तांत्रिक- किसने छेड़ा है इसे?

आरव ने बिना हिचके जवाब दिया

आरव- हमने नहीं इसने
(उसने रोहित की तरफ इशारा किया)

तांत्रिक की नजर रोहित पर गई और कुछ पल के लिए वहीं ठहर गई रोहित की साँस जैसे अटक गई

तांत्रिक- पेड़ के नीचे अपवित्र किया था?

रोहित ने धीरे से सिर हिला दिया

तांत्रिक ने आँखें बंद कीं जैसे कुछ महसूस कर रहा हो

फिर उसने पेड़ के तने पर हाथ रखा जैसे ही उसकी उँगलियाँ तने से छुईं पेड़ अचानक जोर से हिल गया
हवा का तेज झोंका उठा निशा डरकर पीछे हट गई
तांत्रिक ने आँखें खोलीं

तांत्रिक- ये आत्मा नहीं है

कबीर ने तुरंत पूछा

कबीर- तो?

तांत्रिक की आवाज धीमी लेकिन भारी थी।

तांत्रिक- ये बंधी हुई शक्ति है जिसे किसी ने साधना से वश में किया था

मीरा ने धीरे से कहा।

मीरा- और अब वो बंधन टूट रहा है…

तांत्रिक ने सिर हिलाया।

तांत्रिक- नहीं…
(रुककर)
बंधने वाला… अभी भी ज़िंदा है।

एक पल के लिए… सब कुछ शांत हो गया।

आरव की आँखें सिकुड़ गईं।

आरव- मतलब… ये सब वही चला रहा है?

तांत्रिक- हाँ… और वो चाहता है कि ये शक्ति पूरी तरह मुक्त हो जाए।

उसी समय… पेड़ के पीछे वही परछाईं फिर से दिखी।

इस बार… कुछ सेकंड के लिए।

लंबा शरीर… बिखरे बाल… और आँखें… जो सीधे इन्हें देख रही थीं।

रोहित घबरा गया।

रोहित- वही है…!

तांत्रिक ने उसकी तरफ देखे बिना कहा।

तांत्रिक- डरना मत… वो अभी दूर है।

फिर उसने अपने साथ आए दो लोगों को इशारा किया।

तांत्रिक- मंडल बनाओ।

दोनों तुरंत सक्रिय हो गए।

उन्होंने जमीन पर राख से एक गोल घेरा बनाना शुरू किया… फिर उसमें कुछ चिन्ह बनाए… और चारों दिशाओं में दीपक रखे।

कबीर ध्यान से देख रहा था।

कबीर- ये रक्षा मंडल है…

तांत्रिक ने उसकी तरफ देखा।

तांत्रिक- रक्षा भी… और कैद भी।

आरव आगे बढ़ा।

आरव- प्लान क्या है?

तांत्रिक ने पेड़ की तरफ देखते हुए कहा।

तांत्रिक- पहले इसे यहाँ से अलग करेंगे…
फिर… उस तक पहुँचेंगे जिसने इसे बाँधा है।

मीरा- और अगर वो सामने आ गया?

तांत्रिक की आँखों में हल्की चमक आई।

तांत्रिक- तब… असली युद्ध होगा।

उसी पल… पेड़ के अंदर से एक ज़ोरदार दरार की आवाज आई।

क्र्र्र्र…

तना थोड़ा सा फट गया।

अंदर… कुछ हिल रहा था।

निशा चीख उठी।

निशा- वो बाहर आ रहा है…!

तांत्रिक ने तेज़ आवाज में मंत्र उच्चारण शुरू किया।

तांत्रिक- ॐ क्ष्रौं… क्ष्रौं… क्लीं…

जैसे ही मंत्र गूँजा…

मंडल के चारों दीपक एक साथ जल उठे।

हवा रुक गई।

और पेड़… अचानक स्थिर हो गया।

लेकिन… ये शांति असली नहीं थी।

आरव ने धीरे से कहा।

आरव- ये सिर्फ शुरुआत है…

कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया।

कबीर- और इस बार… मज़ा आएगा।

दूर अंधेरे में खड़ी वो परछाईं… अब साफ मुस्कुरा रही थी।

जैसे… वो भी इसी पल का इंतजार कर रही हो।

अब खेल बदल चुका था।

अब ये सिर्फ एक भूत भगाने का मामला नहीं था…

ये था—
दो साधकों के बीच युद्ध 

फॉलो कर लो यार सबको फॉलो बैक दे दूंगा।