बोल बोल के पढ़
अविका निशित और मयंक तीनों बहुत अच्छे दोस्त थेl एक दिन स्कूल की लाइब्रेरी से उन्होंने एक बहुत रोचक सुन्दर कहानियों की चित्रों वाली पुस्तक रैक में देखीl तीनों उसको पहले इशू करवाना चाहते थे l तीनों यह कहकर बहस करने लगे कि पहले पुस्तक किसको मिलनी चाहिए|
"पहले मुझे मिलनी चाहिए अविका ने कहा" , निशित और मयंक भी पहले पढ़ना चाहते थेl अविका ने अपने दोस्तों को कहा कि "क्यों न हम इस पुस्तक को रविवार के दिन तीनों मिलकर एक साथ एक जगह पार्क में बैठकर पढ़ सकते हैं "l सभी अविक की बात पर तैयार हो गए l यह बात तय हो गई थी क्योंकि किसी को उस समय तो आपत्ति नहीं थी पर थोड़ी देर बाद मयंक ने कहा “चलो मैं आज तो स्कूल की छुट्टी में ही ये पुस्तक पढ़ कर पूरी कर देता हूं पढ़कर तुम्हें दे देता हूं” अविका ने कहा “अभी तो अपन सब ने निर्णय किया है”| निशित भी चाहता था कि वह ही पहले किताब पढ़े तब अविका ने दोनों को फिर से कहा,”अब यह निर्णय हुआ कि कल शनिवार है रविवार को हम लोग पार्क में मिलेंगे और साथ बैठकर यह पुस्तक पढ़ेंगे” विचार यह भी था की तीनों एक साथ एक ही पुस्तक को कैसे पुस्तक पढ़ सकते हैंl
अविका ने कहा हम एक साथ क्यों नहीं पढ़ सकते ? शशांक बोला क्यों “ तुम्हें याद नहीं हैं क्या उस दिन टीचर ने कहा भी था कि बोल कर पढ़ने से उच्चारण भी सुधरता हैं और हमारी भाषा भी तो सुधरती है”। इस पर मयंक बोला "क्या तुम जोर-जोर से पढ़ने वाली हो.... अविका ने कहा "नहीं जोर-जोर से नहीं हम सब सुन पाए, बस इतना
ही”l शशांक ने कहा "अच्छा तो तुम इसको नाटकीय अंदाज में पढ़ने वाली हो" तब अविका ने बताया कि तुम्हें याद है उसे दिन हमारी टीचर ने कहा था की "वाक्य को भाव के अनुसार पढ़ना चाहिएl तुम देखना हमको पढ़ने में कितने मजे आएंगे” l
अविका ने लाइब्रेरी से पुस्तक अपने नाम से इशू करवाई और उसने संभाल के अपने बैग में रख दी l रविवार के दिन तीनों
दोस्त सुबह नाश्ता करने के बाद पार्क में आए | अविका अपने साथ बैठने के लिए एक छोटी चटाई लाई थी पर फिर भी अविका और मयंक खड़े होकर सुन रहे थेl
तीनों दोस्त बारी बारी से पढ़ने वाले थेl निशित ने सबसे पहले पढ़ना शुरू किया, निशित को पढ़ने की आदत नहीं थी| ऊंची आवाज में पढ़ने की तो बिल्कुल नहीं , उसने कहा "मैं
तो मन ही मन पढ़ सकता हूं " अविका ने बोला लाओ में पढ़ती हूं “और अविका ने पुस्तक के पहले पन्ने से पढ़ना शुरू कियाl
पहली ही कहानी बहुत रोचक थी l वह दो चीटियों की और एक चिड़िया की कहानी थीl अविका ने बहुत ही भावपूर्ण अंदाज में तीनों को कहानी पढ़कर सुनाई l उसने इस तरह से आनंद लेकर पढ़कर कहानी सुनाना आरंभ किया अब तो मयंक और शशांक बोले "अब
तो सभी कहानियाँ तुम ही पढ़ कर सुनाना " अविका खुश होकर बोली हाँ ठीक हैl अगली कहानी भी बहुत रोचक थी lउस कहानी को पढ़कर तीनों हंस-हंसकर लोटपोट हो रहे थे lइस तरह तीनों ने किताब को पूरा किया, फिर एक-एक ने बैठकर सारे चित्रों को ध्यान से देखाl
कुछ घंटे तक पुस्तक का मजा लेकर तीनों बच्चे अपने-अपने
घर आ गए और उन्होंने निर्णय किया कि "अगली बार भी हम कोई एक ऐसी ही किताब लाइब्रेरी से लेकर आएंगे और तीनों साथ मिलकर पढ़ेंगे"l इस तरह पढ़ने से उन्हें समझ आ गया था कि हमें कठिन शब्दों के अर्थ भी समझ आने लगते हैं और इस तरह से पढ़ते और सुनते समय पढ़ने की रोचकता और अधिक बढ़ जाती हैl मयंक और निशित ने भी बोल कर पढ़ने का अभ्यास
करने का वादा किया| तीनों बच्चों को आज समझ आया कि पढ़ी हुई कहानी से ज्यादा दादी से सुनी कहानी क्यों याद रह जाती है, l
प्रभा पारीक