Ghost hunters - 20 in Hindi Horror Stories by Rishav raj books and stories PDF | Ghost hunters - 20

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Ghost hunters - 20



पेड़ की दरार एक झटके में पूरी तरह फट गई और उसके भीतर कैद वह विकृत आकृति भारी आवाज के साथ बाहर आ गिरी जमीन पर गिरते ही उसके शरीर से काली धुंध निकलने लगी और आसपास की हवा अचानक जम सी गई। मंडल की रेखाएँ काँप उठीं और एक-एक करके दो दीपक धीमे पड़ने लगे।

तांत्रिक ने तुरंत अपने हाथ की मुट्ठी में राख भरी और आगे फेंकी

तांत्रिक- पीछे हटो, कोई भी इसके सामने मत आना।

आरव ने बिना समय गंवाए रोहित और उसके परिवार को पीछे धकेला

आरव- सब लोग दीवार के पास जाओ, एक साथ रहो, कोई अलग नहीं होगा।

रोहित काँपती आवाज में बोला

रोहित- ये.. यही है जो मेरे पीछे था।

कबीर धीरे-धीरे आगे बढ़ा, उसकी नजर उस आकृति पर टिकी थी

कबीर- अब ये सिर्फ तेरे पीछे नहीं है

वो चीज़ जमीन पर झुकी हुई थी, उसकी हड्डियाँ टेढ़ी-मेढ़ी आवाज के साथ सीधी होने लगीं। उसने अपना सिर उठाया और एक लंबी, खुरदुरी साँस ली, जैसे बहुत समय बाद उसे पूरी तरह बाहर आने का मौका मिला हो अजनबी तांत्रिक ने अपने हाथ की हड्डी को कसकर पकड़ा और धीमे स्वर में कुछ बुदबुदाया।

अजनबी तांत्रिक- उठ… अब कोई बंधन नहीं है

उसके शब्दों के साथ ही आकृति ने एक झटका लिया और पूरी तरह खड़ी हो गई। उसकी ऊँचाई सामान्य इंसान से ज्यादा थी और उसका शरीर अस्वाभाविक रूप से मुड़ा हुआ था। उसकी आँखें खाली थीं, लेकिन उनमें एक अजीब खिंचाव था।

मीरा ने धीमे स्वर में कहा।

मीरा- ये पूरी तरह कंट्रोल में है ये खुद से कुछ नहीं कर रहा।

तांत्रिक ने गहरी आवाज में मंत्र शुरू किया

तांत्रिक- ॐ ह्रीं क्लीं भैरवाय नमः…

उसके दोनों शिष्य तुरंत साथ में मंत्र दोहराने लगे। उनके स्वर तेज होते गए और मंडल की टूटी हुई रेखाएँ फिर से चमकने लगीं।

लेकिन इस बार असर धीमा था आकृति ने अचानक अपना सिर घुमाया और सीधे तांत्रिक की तरफ देखा। फिर बिना किसी चेतावनी के वह तेज़ी से उसकी ओर झपटी।

आरव चिल्लाया।

आरव- सावधान!

लेकिन तांत्रिक पहले से तैयार था। उसने अपने गले की रुद्राक्ष माला को पकड़ा और आगे बढ़ाकर मंत्र का उच्चारण तेज कर दिया।

तांत्रिक- स्तंभय!

आकृति जैसे किसी अदृश्य दीवार से टकराकर रुक गई। उसका शरीर झटका खाकर पीछे हिला, लेकिन वह गिरा नहीं। उसने जोर से गुर्राया और फिर से आगे बढ़ने की कोशिश की।

कबीर ने तुरंत राख उठाकर उसकी तरफ फेंकी।

कबीर- पीछे हट!

राख उसके शरीर से टकराई और उसके आसपास की काली धुंध कुछ पल के लिए बिखर गई। आकृति ने दर्द से चीख मारी, लेकिन अगले ही पल वह फिर स्थिर हो गई।

अजनबी तांत्रिक अब शांत नहीं था। उसकी आँखों में तेज़ी आ गई थी।

अजनबी तांत्रिक- तुम्हें अंदाज़ा नहीं है तुम किसे रोक रहे हो।

तांत्रिक ने बिना उसकी तरफ देखे जवाब दिया।

तांत्रिक- मुझे पता है, इसलिए रोक रहा हूँ।

अचानक अजनबी तांत्रिक ने अपनी मुट्ठी कस ली। उसके हाथ की हड्डी से हल्की काली धुआँ उठी और उसी पल आकृति ने फिर से जोर लगाया।

इस बार अदृश्य दीवार टूट गई वह सीधा मंडल के किनारे तक आ गया एक दीपक बुझ गया मीरा ने घबराकर कहा।

मीरा- मंडल टूट रहा है।

आरव ने तुरंत फैसला लिया।

आरव- कबीर, दाईं तरफ संभाल, मीरा बाईं तरफ।

तीनों अलग-अलग दिशा में फैल गए, लेकिन मंडल से दूरी बनाए रखी। मीरा ने गंगाजल की कुछ बूंदें हवा में छिड़कीं और धीरे-धीरे मंत्र दोहराने लगी जो उसने पहले सीखे थे।

मीरा- ॐ नमः…

उसकी आवाज हल्की थी, लेकिन स्थिर थी कबीर ने जमीन से राख उठाकर एक नई रेखा खींचनी शुरू की, ठीक वहाँ जहाँ दीपक बुझा था।

कबीर- इसे खुलने मत देना।

रोहित और उसका परिवार दीवार से सटे खड़े थे। निशा की आँखें उस आकृति पर जमी थीं।

निशा- ये… हमें देख रहा है।

वास्तव में, उस आकृति की नजर अब धीरे-धीरे उनकी तरफ घूम रही थी अजनबी तांत्रिक ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।

अजनबी तांत्रिक- ये अपना काम पूरा करेगा।

तांत्रिक ने पहली बार तेज आवाज में उत्तर दिया।

तांत्रिक- जब तक मैं हूँ, नहीं।

उसने अपनी मुट्ठी जमीन पर मारी और जोर से मंत्र उच्चारित किया।

तांत्रिक- ॐ कालभैरवाय फट्!

मंडल की रेखाएँ एक बार फिर तेज़ रोशनी से चमक उठीं। बुझे हुए दीपक अपने आप जल उठे। आकृति जैसे अचानक पीछे खिंच गई और कुछ कदम दूर जाकर रुक गई।

कुछ सेकंड के लिए सब कुछ स्थिर हो गया हवा रुक गई, आवाजें थम गईं आरव ने धीरे से कहा।

आरव- ये रुका नहीं है, बस रोका गया है।

कबीर ने सिर हिलाया।

कबीर- और ज्यादा देर नहीं रुकेगा।

अजनबी तांत्रिक अब धीरे-धीरे पीछे हटने लगा, लेकिन उसकी नजरें अब भी उसी पर थीं।

अजनबी तांत्रिक- ये खत्म नहीं हुआ  ये तो शुरुआत है।

तांत्रिक ने उसकी तरफ देखा।

तांत्रिक- अगली बार भागने का मौका नहीं मिलेगा।

अजनबी तांत्रिक हल्का हँसा और अंधेरे की तरफ मुड़ गया। कुछ ही सेकंड में उसकी परछाईं गायब हो गई लेकिन जाते-जाते उसने आखिरी शब्द छोड़े।

अजनबी तांत्रिक- इसे रोक सकते हो खत्म नहीं।

आकृति फिर से तड़पने लगी, जैसे उसे वापस खींचा जा रहा हो। धीरे-धीरे उसका शरीर धुंध में बदलने लगा और वह उसी फटे हुए पेड़ के भीतर समाने लगा।

कुछ ही पलों में सब शांत हो गया पेड़ फिर स्थिर खड़ा था।
मंडल की रोशनी धीरे-धीरे मंद पड़ गई कोई आवाज नहीं थी सिर्फ भारी साँसें रोहित जमीन पर बैठ गया।

रोहित- ये चला गया?

तांत्रिक ने पेड़ से नजर हटाए बिना कहा।

तांत्रिक- लेकिन वापस जरूर आएगा 

आरव ने गहरी सांस ली।

आरव- मतलब ये खत्म नहीं हुआ।

कबीर ने हल्का सा कहा।

कबीर- अब असली काम शुरू होगा।

हवा में अभी भी ठंड थी लेकिन अब उसमें एक और चीज जुड़ चुकी थी इंतजार....