शहर के उस सबसे महंगे कैफे के बाहर एस्प्रेसो कॉफी और बेक हो रही ब्रेड की महक हवा में घुली थी। कांच की विशाल दीवारों के पार अमीरज़ादे अपनी दौलत का प्रदर्शन कर रहे थे। उसी कांच की दीवार के बिल्कुल बाहर, पार्किंग में आर्यन अपनी नई, डेढ़ लाख रुपये वाली स्पोर्ट्स बाइक पर किसी विदेशी रॉकस्टार की तरह बैठा था। बाइक का क्रोम इंजन धूप में बुरी तरह चमक रहा था। आर्यन ने काले रंग की लेदर जैकेट पहनी थी। उसके बाएँ हाथ की कलाई पर बंधी महंगी घड़ी सूरज की रोशनी को सीधा रिफ्लेक्ट कर रही थी। दाएँ हाथ की उंगलियों के बीच वह एक लाख रुपये की कीमत वाला लेटेस्ट आईफोन नचा रहा था। उसकी आँखों पर लगा ब्रांडेड एविएटर चश्मा उसके चेहरे के घमंड को और अधिक बढ़ा रहा था।वह बस एक ही इंसान की प्रतीक्षा में था। वह चाहता था कि रिया आए और उसकी इस नई दौलत की चमक से चकाचौंध हो जाए।कुछ ही मिनटों में रिया सड़क पार करके वहां पहुँची। उसने एक सादे सूती कपड़े का सूट पहना था। उसके माथे पर गर्मी के कारण पसीने की कुछ बूंदें चमक रही थीं। आर्यन ने उसे देखते ही बाइक की चाबी घुमाई और इंजन को एक भयंकर आवाज़ के साथ रेव किया। आसपास खड़े कुछ लोगों ने मुड़कर उस भारी आवाज़ को देखा। आर्यन का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उसने अपना एविएटर चश्मा उंगली से नीचे सरकाया और फोन को हवा में एक करतब की तरह उछालकर वापस लपका।"कैसी लग रही है मेरी नई जान?" आर्यन ने अपनी बाइक के पेट्रोल टैंक को थपथपाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में अहंकार का नशा साफ झलक रहा था। "कल शाम ही शोरूम से निकाली है। और ये फोन देख! एकदम लेटेस्ट मॉडल है मार्केट में। अब आएगा ना इस शहर में अपना रुतबा! लोग मुड़कर देखते हैं यार।"रिया के चेहरे पर कोई हैरानी, कोई खुशी या कोई तारीफ वाला भाव नहीं था। उसकी शांत आँखें पहले उस चमचमाती स्पोर्ट्स बाइक पर गईं, फिर उस महंगे फोन पर, और अंत में आर्यन के उस चेहरे पर जहाँ एक बहुत ही झूठी, खोखली और सस्ती खुशी नाच रही थी। रिया के होंठों की लकीर एकदम सीधी हो गई। उसके चेहरे पर आर्यन के लिए सिर्फ एक गहरी, बर्फ जैसी ठंडी निराशा थी।"रुतबा?" रिया की आवाज़ में कोई चीख नहीं थी, पर उसकी धार किसी उस्तरे से अधिक तेज़ थी। "आर्यन, इसे रुतबा नहीं कहते। इसे अकल का दिवालियापन और बाप के खून पसीने की बर्बादी कहते हैं।"आर्यन के चेहरे की मुस्कान एक सेकंड में हवा हो गई। उसे इस तरह के कड़वे स्वागत की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी।"ये डेढ़ लाख की बाइक और ये लाख रुपये का कांच का टुकड़ा..." रिया ने फोन की तरफ उंगली उठाई, "क्या ये दोनों तुझे कल सुबह उठकर एक रुपये की भी कमाई लाकर देंगे? आज तूने इसे ख़रीदा है, कल शोरूम के दरवाज़े से बाहर निकलते ही इस लोहे और प्लास्टिक की कीमत आधी हो चुकी है। इन मशीनों ने आज तक किस इंसान को उम्र भर की रोटी कमाकर दी है?"आर्यन की ईगो को बहुत गहरी चोट लगी थी। उसने झल्लाते हुए बाइक का स्टैंड ज़मीन पर पटका।"अरे यार रिया! तुम हमेशा लेक्चर शुरू कर देती हो," आर्यन ने अपना फोन वापस जैकेट की जेब में ठूंसा। "पैसा है तो इंसान उड़ाने के लिए ही तो कमाता है। अगर इंसान जवानी में अपने शौक पूरे ना करे, तो फिर बुढ़ापे में क्या खाक उड़ाएगा?"रिया ने आगे बढ़कर आर्यन की जैकेट का कॉलर बहुत सख्ती से पकड़ लिया। उसकी आँखों में अब एक सुलगता हुआ गुस्सा था।"पैसा तेरा नहीं है आर्यन! वो तेरे बाप के खून का पसीना है!" रिया की आवाज़ में एक भयानक कंपन था। "अपने बूढ़े बाप के घुटनों के दर्द और उनकी उस घिसी हुई चप्पल की कमाई पर हवा में उड़ने का दिखावा करना दुनिया का सबसे आसान काम है। तुझे रत्ती भर भी अकल नहीं है कि दौलत का असली इस्तेमाल कैसे करते हैं! कभी ये नया गैजेट खरीद लिया, कभी वो ब्रांडेड कपड़ा पहन लिया... और आख़िर में तेरे हाथ में क्या आया? सिर्फ एक झूठा और खोखला दिखावा, जिसकी उम्र एक नए मॉडल के आने तक की होती है।"आर्यन कुछ बोलने के लिए मुँह खोलने ही लगा था, पर रिया ने उसका हाथ बहुत ज़ोर से पकड़ा और उसे कैफे के उस कोने की तरफ घुमा दिया जहाँ कांच की दीवार के पास कचरे का डब्बा रखा था।वहां एक बहुत ही कमज़ोर, झुकी हुई कमर वाला बूढ़ा आदमी कैफे की बची हुई जूठी प्लेटें उठा रहा था। उस आदमी की सफेद कमीज़ पर अनगिनत चाय के दाग थे। उसके हाथ थरथर कांप रहे थे। जब वो झुककर किसी अमीरज़ादे का छोड़ा हुआ आधा सैंडविच डस्टबिन में डाल रहा था, तो उसकी आँखों की लाचारी कांच के पार से भी साफ महसूस हो रही थी।"उस आदमी को देख आर्यन," रिया की आवाज़ अब गले में किसी कांटे की तरह अटक रही थी। "उसके कंधों पर दुनिया भर के दुखों का बोझ रखा है। घर की टूटी चारपाई पर उसकी पत्नी किसी गंभीर बीमारी से तड़प रही है, पर उस बेचारे के पास एक मामूली पेन किलर खरीदने के लिए जेब में सौ रुपये नहीं हैं। वो आदमी इस दुनिया में पैसे की असली अहमियत समझता है। क्योंकि उसने उस गरीबी की मार झेली है जो इंसान की खाल उधेड़ देती है। उसे पता है कि एक सिक्के की असली कीमत क्या होती है।"रिया ने आर्यन की आँखों में सीधा झांका। आर्यन अब उस बूढ़े से नज़रें चुरा रहा था।"और दूसरी तरफ एक तुम जैसे नौजवान हो," रिया का लहज़ा अब किसी जज के फैसले जैसा कठोर था, "जिनके पास पैसा तो आ गया, पर अकल कौड़ी भर की भी नहीं। जिन लोगों को पैसे इस्तेमाल करने की असली तमीज़ थी ना आर्यन... वो आज आसमान की ऊँचाइयों पर राज कर रहे हैं। उन्होंने अपनी दौलत को इस फुकरापंती और दिखावे में आग नहीं लगाई। उन्होंने अपना पैसा ऐसी जगह निवेश किया जहाँ से उन्हें ज़िंदगी भर की कमाई, सुकून और समाज में एक असली इज़्ज़त मिले।"रिया का हर एक लफ़्ज़ आर्यन के सीने को चीरकर अंदर तक उतर रहा था। उसकी वो महंगी लेदर जैकेट अब उसे कांटों की तरह चुभने लगी थी।"पैसे को वहाँ लगाओ जहाँ से तुम्हारा भविष्य मज़बूत बने आर्यन," रिया ने आख़िरी वार किया। "कोई नया कारोबार खड़ा करो, कुछ ऐसा बनाओ जो कल को तुम्हारे काम आए। ये जो झूठी शान में तूने आज लाखों रुपये उड़ाए हैं ना... याद रखना मेरी बात, कल जब ज़िंदगी का बुरा वक़्त दरवाज़ा खटखटाएगा, तो ये तेरा चमचमाता आईफोन और ये तेज़ रफ़्तार बाइक तुझे एक वक़्त की रोटी नहीं देंगे। दिखावे की उम्र बहुत छोटी होती है आर्यन, पर हकीकत की जंग इंसान को उम्र भर लड़नी पड़ती है।"रिया ने आर्यन का हाथ छोड़ दिया और बिना पीछे मुड़े वहाँ से चली गई। आर्यन के हाथ में पकड़ी हुई बाइक की चाबी अब बहुत भारी लग रही थी। उसका सारा 'भौकाल', सारा अहंकार और वो झूठा 'स्वैग' कैफे के बाहर की धूल में मिलकर चकनाचूर हो गया था। कांच के पार से उसे उस बूढ़े आदमी की थकी हुई आँखों में अपनी वो सारी बेवकूफी बिल्कुल साफ नज़र आ रही थी। उसे एहसास हो गया था कि वो अब तक सिर्फ हवा में एक पतंग की तरह उड़ रहा था, जिसकी डोर किसी भी पल कट सकती थी, और नीचे मौजूद ज़मीन बहुत ही कठोर थी।**सुखविंदर की कलम से:**आजकल के युवाओं ने 'फुकरापंती' को ही अपनी ज़िंदगी का आख़िरी मकसद मान लिया है। अपने बाप की गाढ़ी कमाई पर हवा में उड़ने वाले ये नौजवान भूल जाते हैं कि महंगी गाड़ियाँ और मोबाइल कभी ज़िंदगी भर का सुकून या रोटी नहीं देते। वो बस दीमक की तरह आपका पैसा सोखते हैं। ज़रा सड़क पर खड़े उस गरीब से पूछ कर देखिए जिसके सिर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, उसे पता है एक रुपये की कीमत क्या है! पैसा उड़ाने के लिए नहीं, बल्कि अपना आने वाला कल सुधारने के लिए होता है। इसे उन चीज़ों में लगाइए जो आपको भविष्य में कोई फायदा दें, कुछ अपना नया खड़ा करिए। वरना लोहे और प्लास्टिक के इन खिलौनों को खरीदते रहने की आदत एक दिन आपकी अपनी ज़िंदगी को कबाड़ बना देगी। पैसे को सही इस्तेमाल करने की अकल सीखिए, क्योंकि दिखावा इंसान को अंदर से खोखला कर देता है।