Ankaha Junu - 2 in Hindi Drama by Priya Chaudhary books and stories PDF | अनकहा जुनूँ - 2

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अनकहा जुनूँ - 2

(भारी बारिश की आवाज़, जो धीमी होती है। फिर सन्नाटा। अचानक बियर के फोन की टोन बजती है—निकी की कॉल)
नरेटर: फोन की स्क्रीन पर निकी का नाम चमक रहा था। कल रात, बियर ने जो दुआ मांगी थी, वो हकीकत बनकर उसके सामने खड़ी थी। निकी की आवाज़ में वो ठंडी, अधिकार भरी गंभीरता अब भी थी—"तुम कहीं नहीं जाओगे। हम साथ रहेंगे। हमेशा के लिए।" बियर ने कांपते हाथों से फोन काट दिया, लेकिन उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वो दुआ कुबूल तो हो गई थी, लेकिन उसने एक ऐसी डोर को खींच लिया था जिसे अब तोड़ना नामुमकिन था।
अगले दिन, बियर अपनी दुकान पर काम करने की कोशिश कर रहा था, पर उसका मन कहीं और था। उसे लगा कि वो पागल हो रहा है, या शायद उसने कुछ ज्यादा ही सोच लिया था। तभी, दुकान का दरवाज़ा खुला। घंटी बजी। निकी सामने खड़ी थी। उसके बाल गीले थे, और उसकी आँखें... उसकी आँखें बियर को ऐसे देख रही थीं जैसे वो कोई खोया हुआ खजाना हो।
बियर: (हैरानी से) "निकी? तुम... तुम यहाँ क्या कर रही हो?"
निकी: (धीरे से मुस्कुराते हुए) "तुमने कहा था ना कि हम साथ रहेंगे। तो मैं आ गई।"
नरेटर: निकी दुकान के अंदर आई और सीधे बियर के पास आकर खड़ी हो गई। उसके आने से दुकान में एक अजीब सी ठंडी हवा भर गई। बियर ने गौर किया कि निकी ने आज वही कपड़े पहने थे जो उसने उस दिन पहने थे जब वो पहली बार मिली थी।
बियर: "निकी, कल रात... तुमने फोन पर जो कहा, वो मुझे बहुत अजीब लगा। क्या सब ठीक है?"
निकी: "सब कुछ बिल्कुल ठीक है, बियर। उससे बेहतर, जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। कल रात मुझे एहसास हुआ कि मैं अब तक गलत इंसान के साथ थी। तुम ही तो मेरी किस्मत हो। तुम ही तो मेरा जुनून हो।"
नरेटर: बियर के रोंगटे खड़े हो गए। उसे याद आया दुकानदार के वो शब्द—जो मांगोगे, उसका हक़ भी चुकाना पड़ेगा। क्या निकी का ये बदलना उसी हक़ का हिस्सा था? बियर ने दुकान से जल्दी बंद करने का बहाना बनाया और निकी के साथ बाहर निकला। शहर की सड़कों पर लोग थे, शोर था, पर निकी की चुप्पी बहुत शोर कर रही थी। वो बियर का हाथ थामे हुए थी, लेकिन उसका हाथ बर्फ जैसा ठंडा था।
बियर: "निकी, क्या हम कहीं बैठ सकते हैं? मुझे बात करनी है।"
निकी: (अचानक रुकते हुए) "बात? किस बारे में, बियर? क्या तुम अभी भी मुझसे दूर जाना चाहते हो?"
नरेटर: निकी की आवाज़ में अब वो कोमलता नहीं थी। वो एक कमांड थी। बियर ने अपनी नज़रें झुका लीं। उसे लगा कि अगर उसने 'हाँ' कहा, तो कुछ बहुत बुरा हो जाएगा।
बियर: "नहीं... मैं बस... मैं बस सोच रहा था कि क्या हम सब कुछ इतना जल्दी कर रहे हैं?"
निकी: (हँसते हुए, पर हँसी में कोई खुशी नहीं थी) "जल्दी? बियर, हमने सालों इंतज़ार किया है। अब और नहीं।"
नरेटर: शाम ढलने को थी। बियर निकी को उसके घर छोड़कर आया। जब वो अपने घर लौटा, तो उसने अलमारी खोली। उसे वो जादुई खिलौना फिर से देखना था। लेकिन जैसे ही उसने अलमारी का दरवाजा खोला, उसका दिल बैठ गया। खिलौना अपनी जगह पर नहीं था। वहां सिर्फ राख की एक ढेर थी, और दीवार पर कुछ अजीब से निशान बने थे, जैसे किसी ने नाखूनों से दीवार को कुरेदा हो।
बियर: (घबराकर) "ये क्या... ये यहाँ क्या हो रहा है?"
नरेटर: बियर ने कमरे की खिड़की की ओर देखा। बाहर अंधेरा था, पर स्ट्रीट लाइट की रोशनी में उसे एक परछाई दिखी। निकी। वो उसके घर के बाहर खड़ी थी। वो अंदर नहीं आई थी, बस खड़ी थी। रात के दो बज रहे थे, तीन बज गए, चार बज गए... लेकिन निकी वहां से हिली नहीं। वो सिर्फ बियर की खिड़की को घूर रही थी।
बियर को एहसास हुआ कि ये प्यार नहीं, ये एक ऐसी कैद है जिसका पहरेदार खुद वो लड़की है जिसे उसने सबसे ज्यादा चाहा था। वो चाहकर भी अपना फोन चालू नहीं कर पा रहा था, क्योंकि उसे डर था कि निकी की आवाज़ फिर सुनाई देगी—वो ठंडी, वो डरावनी, वो अधिकार भरी आवाज़।
नरेटर: क्या निकी को पता है कि बियर ने उस खिलौने से क्या मांगा था? या फिर ये खिलौना सिर्फ एक जरिया था, और असलियत में बियर ने एक ऐसी ताकत को जगा दिया था जो अब रुकने वाली नहीं है? बियर के कमरे का सन्नाटा अब और गहरा हो गया था। खिड़की के बाहर, निकी ने धीरे से अपना सिर उठाया और बियर की ओर देखकर एक ठंडी मुस्कान दी।
अगले एपिसोड की झलक:
"बियर को एहसास होता है कि निकी अब सिर्फ घर के बाहर नहीं, उसकी सोच में भी दाखिल हो रही है। क्या वो खिलौना वाकई कोई जादुई चीज़ थी, या बियर का दिमाग उसके साथ खेल रहा है? जानिए 'अनकहा जुनूँ' के अगले एपिसोड में।"
"इस कहानी के अगले मोड़ जानने के लिए, अभी 'फॉलो' बटन पर क्लिक करें ताकि कोई भी एपिसोड आपसे मिस न हो! 🎧🔍🌑"