episode 3 in Hindi Drama by Priya Chaudhary books and stories PDF | अनकहा जुनूँ - 3

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अनकहा जुनूँ - 3

(साउंड: घड़ी की टिक-टिक की आवाज़, जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन में बदल जाती है। बाहर बारिश की धीमी फुहारें)
नरेटर: रात के चार बज रहे थे। बियर अपनी खिड़की के पास बैठा, बाहर उस साये को घूर रहा था जो घंटों से वहीं खड़ा था—निकी। वो बिल्कुल नहीं हिली थी। बियर की आँखों में थकान थी, पर डर ने उसे सोने नहीं दिया था। अचानक, निकी ने खिड़की की तरफ अपना हाथ बढ़ाया और कांच पर एक उंगली से कुछ लिखा। बियर ने गौर से देखा—उसने कांच पर अपना नाम नहीं, बल्कि बियर का नाम लिखा था, और उसके नीचे एक छोटा सा 'हार्ट' बना दिया।
(साउंड: कांच पर उंगली रगड़ने की धीमी और चुभने वाली आवाज़)
बियर: (बुदबुदाते हुए) "ये पागलपन है... मुझे यहाँ से निकलना होगा।"
नरेटर: बियर ने कमरे की बत्तियां बुझा दीं, यह सोचकर कि शायद निकी चली जाए। जैसे ही अंधेरा हुआ, उसने अपने फोन को धीरे से उठाया और अपना कैमरा ऑन किया। वो रिकॉर्ड करना चाहता था कि बाहर आखिर हो क्या रहा है। पर जैसे ही उसने कैमरा निकी की तरफ घुमाया, उसके फोन की स्क्रीन झिलमिलाने लगी। पहले निकी वहां खड़ी थी, फिर अचानक... स्क्रीन पर कुछ और ही दिखाई दिया।
(साउंड: फोन के खराब होने की अजीब सी इलेक्ट्रॉनिक आवाज़)
नरेटर: स्क्रीन पर निकी नहीं, बल्कि बियर का अपना चेहरा दिख रहा था—लेकिन वो चेहरा बियर का नहीं था। उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं और चेहरे पर वही मुस्कान थी जो उस जादुई खिलौने पर थी। बियर ने चिल्लाकर फोन फेंक दिया। उसे लगा कि वो किसी भयानक मतिभ्रम (hallucination) का शिकार हो रहा है। तभी, उसके कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला।
बियर: "कौन है? कौन है वहां?"
नरेटर: कोई जवाब नहीं आया। सन्नाटा इतना गहरा था कि बियर को अपनी खुद की साँसें भी गूँजती हुई सुनाई दे रही थीं। उसने दबे पाँव दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ाए। गली में अंधेरा था। निकी वहां नहीं थी। वह गायब हो चुकी थी। बियर को एक पल के लिए राहत मिली, लेकिन तभी उसे अपने ठीक पीछे किसी की गर्म साँसें महसूस हुईं।
(साउंड: एक ठंडी हवा का झोंका और सिसकने की आवाज़)
निकी की आवाज़ (फुसफुसाते हुए): "तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते, बियर। मैंने तुमसे वादा किया था... हम साथ रहेंगे। हमेशा।"
नरेटर: बियर तेजी से पीछे घूमा, लेकिन वहां कोई नहीं था। फिर उसे महसूस हुआ कि ये आवाज़ हवा में नहीं थी, बल्कि उसके अपने दिमाग के अंदर थी। वो सीधा अपने बिस्तर पर भागा और खुद को कंबल में ढक लिया। सुबह होने तक वो बस प्रार्थना करता रहा। जब सुबह की पहली रोशनी आई, तो बियर ने देखा कि उसकी अलमारी का दरवाजा आधा खुला था।
अंदर कुछ नहीं था—न खिलौना, न राख। पर दीवार पर, जहाँ कल तक कुछ नहीं था, अब निकी की एक तस्वीर बनी थी। वो पेंटिंग नहीं थी, वो निकी की आँखों का एक ऐसा नज़ारा था जो सीधे बियर की रूह को देख रहा था।
बियर: (कांपती आवाज़ में) "ये हो क्या रहा है? ये कौन सी बला है जिसे मैंने दावत दे दी?"
नरेटर: बियर ने दुकान जाने का इरादा बदल दिया। उसने निकी के घर जाने का फैसला किया। उसे सच्चाई जाननी थी। जब वो निकी के घर पहुँचा, तो वहां का मंज़र देखकर उसके पैर ज़मीन पर ही जम गए। घर पर ताला लटका था और बाहर एक नोटिस था—'घर खाली है, पिछले 6 महीनों से यहाँ कोई नहीं रहता।'
बियर: (हैरानी से) "क्या? ये कैसे हो सकता है? मैं तो कल रात उसे छोड़कर आया था! मैंने तो अभी दो दिन पहले ही उससे बात की थी!"
नरेटर: पड़ोस के एक बुज़ुर्ग ने बियर को देखा और धीरे से बोले, "बेटा, यहाँ तो बरसों से कोई नहीं रहता। उस लड़की का तो काफी पहले एक्सीडेंट हो गया था।"
नरेटर: बियर को लगा जैसे उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई हो। अगर निकी नहीं थी, तो वो कौन था जो पिछले तीन दिनों से उसके साथ था? वो कौन था जो उसके साथ कॉफी पी रहा था? और वो कौन था जो रात भर उसकी खिड़की के बाहर खड़ा था? बियर को अचानक वो जादुई खिलौना याद आया। उसका चेहरा... वो खिलौना निकी जैसा ही तो दिख रहा था!
(साउंड: रहस्यमयी और डरावनी धुन तेज़ होती है)
नरेटर: बियर ने निकी को नहीं, बल्कि उस खिलौने के अंदर छिपी किसी चीज़ को ज़िंदा कर दिया था। और अब वो चीज़ निकी का रूप लेकर उसके साथ रह रही थी। बियर ने उसे 'पाया' था, लेकिन हक़ चुकाने की बारी अब आ गई थी।
अगले एपिसोड की झलक:
"जब आपकी सच्चाई ही झूठ हो जाए, तो आप किससे लड़ेंगे? बियर ने जिस जुनून को मांगा, वो अब उसके अस्तित्व को मिटाने पर उतारू है। क्या बियर उस साये से बच पाएगा, या वो खुद एक परछाई बन जाएगा? जानिए 'अनकहा जुनूँ' के चौथे एपिसोड में।"
"इस कहानी के अगले मोड़ जानने के लिए, अभी 'फॉलो' बटन पर क्लिक करें ताकि कोई भी एपिसोड आपसे मिस न हो! 🎧🔍🌑"