एपिसोड 8: शह और मात का खेल
अंधेरे की ताकत चाहे कितनी भी हो, सुबह की एक किरण के आगे उसे दम तोड़ना ही पड़ता है..."
— समीर ख़ान
शिकागो की वो रात साल की सबसे ठंडी और तनावपूर्ण रातों में से एक थी। कैदो का आलीशान बंगला रोशनी से इस तरह जगमगा रहा था मानो वहाँ कोई जश्न हो, लेकिन उस रोशनी के पीछे साज़िशों का एक गहरा और खौफनाक अंधेरा छुपा था। हर तरफ महंगे फूलों की सजावट थी, शहर के बड़े-बड़े बिज़नेस टाइकून और रसूखदार लोग निकाह की महफ़िल में शामिल होने के लिए पहुँच चुके थे। कैदो दूल्हे के लिबास में, अपनी आँखों में घमंड और जीत की चमक लिए मेहमानों का स्वागत कर रहा था। उसे पूरा यकीन था कि हीर के पिता की लाचारी और रहमान की जान का खौफ हीर को उसके कदमों में लाकर डाल देगा।
लेकिन उसे यह अंदाज़ा नहीं था कि बंगले के ऊपर बने एक बंद कमरे में, दुल्हन के लिबास में सजी हीर रोने के बजाय अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा जुआ खेल रही थी। उसके चेहरे पर लाल घूंघट था, लेकिन आँखें किसी शातिर शिकारी की तरह चमक रही थीं। काशिफ ने अपनी प्लानिंग के मुताबिक हीर को एक स्पेशल एन्क्रिप्टेड पेन-ड्राइव दी थी। हीर ने दबे पाँव चलकर कमरे के कोने में रखे कैदो के पर्सनल लैपटॉप को ऑन किया। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था, क्योंकि अगर इस वक़्त कोई अंदर आ जाता, तो खेल वहीं ख़त्म हो जाता।
हीर की उंगलियाँ कीबोर्ड पर बिजली की तरह चलीं। अपने तेज़ जासूसी दिमाग का इस्तेमाल करते हुए उसने कैदो के उस प्राइवेट फोल्डर को क्रैक कर लिया, जिसे उसने पासवर्ड से लॉक कर रखा था। जैसे ही फोल्डर खुला, हीर की आँखें फटी की फटी रह गईं। वहाँ न सिर्फ उसके पिता के जाली दस्तखत वाले बिज़नेस पेपर्स थे, बल्कि कैदो की शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों), टैक्स चोरी और विदेशी बैंकों में छुपाए गए काले धन के सारे असली दस्तावेज़ मौजूद थे। यह वो बारूद था जो कैदो के पूरे साम्राज्य को एक पल में उड़ा सकता था।
हीर ने बिना एक सेकंड गंवाए पेन-ड्राइव लगाई और सारे सबूत डाउनलोड करने लगी। स्क्रीन पर लोडिंग बार जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा था, हीर की सांसें अटक रही थीं। 90%... 99%... और डाउनलोड मुकम्मल! ठीक उसी पल नीचे से भारी कदमों की आवाज़ आई। कैदो का खास गुर्गा कमरे की तरफ बढ़ रहा था। हीर ने फुर्ती से लैपटॉप बंद किया, पेन-ड्राइव को अपने लिबास के अंदर छुपाया और वापस सोफे पर आकर घूंघट गिराकर बैठ गई। गुर्गे ने दरवाज़ा खोला, हीर को सुरक्षित देखकर वह वापस चला गया।
हीर ने तुरंत अपने फोन से काशिफ के बनाए सुरक्षित सर्वर को एक्सेस किया और वो सारे दस्तावेज़ सीधे एफबीआई (FBI) के चीफ और शिकागो के मुख्य मीडिया हाउसेज को ईमेल कर दिए। ईमेल सेंड होते ही हीर के चेहरे पर एक ठंडी, बेबाक मुस्कान आ गई। शह और मात के इस खेल में हीर ने पहला बड़ा मोहरा चल दिया था।
अब बारी काशिफ के एक्शन प्लान की थी। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने रात के ठीक 12:बजाए, पूरे बंगले की बिजली अचानक गुल हो गई। बैकअप जनरेटर भी चालू नहीं हुआ क्योंकि काशिफ के आदमियों ने पहले ही उसकी वायरिंग काट दी थी। पूरे आलीशान बंगले में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। अंधेरे का फ़ायदा उठाकर हीर ने अपने भारी सैंडल उतारे और कमरे के पिछले दरवाज़े से होकर बालकनी के रास्ते नीचे कूद गई। बंगले की बाउंड्री वॉल के पास सन्नाटे में एक ब्लैक कलर की बुलेटप्रूफ एसयूवी (SUV) खड़ी थी, जिसका इंजन स्टार्ट था। रहमान ने दरवाज़ा खोला और हीर को अंदर खींच लिया। काशिफ ने एक्सीलेटर पर पैर दबाया और गाड़ी टायर चरमराते हुए हाईवे की तरफ भाग निकली।
बंगले में जब लाइट्स वापस आईं, तो कैदो हीर के कमरे की तरफ भागा। कमरा खाली था और लैपटॉप खुला हुआ था, जिस पर 'ईमेल सेंट' का मैसेज चमक रहा था। कैदो के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। उसकी बरसों की काली कमाई और इज्ज़त दांव पर लग चुकी थी। उसका चेहरा गुस्से और पागलपन से खूनी हो गया। उसने अपनी गन निकाली और चिल्लाया, "काशिफ की गाड़ी का पीछा करो! मुझे वो दोनों ज़िंदा या मुर्दा चाहिए!" (जारी है )
लेखक _समीर खान