Heer-Ranjha - 3 in Hindi Love Stories by Shaziya Khan books and stories PDF | हीर-रांझा: द मॉडर्न थ्रिलर - 3

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हीर-रांझा: द मॉडर्न थ्रिलर - 3

एपिसोड 3: कैदो की पहली चाल और हीर का पलटवार

"कमज़ोर कश्ती थपेड़ों से डरती है, लेकिन जो लहरों को चीरने का हौसला रखते हैं, तूफ़ान उनका रास्ता खुद बदल देते हैं..."
— समीर ख़ान

रहमान और हीर की मुलाकातें अब रोज़ का सिलसिला बन चुकी थीं। उस छोटे से अपार्टमेंट की खिड़की से आती धूप गवाह थी कि कैसे दो अलग-अलग दुनिया के लोग एक-दूसरे की रूह का हिस्सा बन रहे थे। रहमान की धुनें अब उदास नहीं थीं, उनमें हीर के आने की खुशी साफ़ झलकती थी। लेकिन इस बढ़ते प्यार की भनक अब सिर्फ हवाओं को नहीं, बल्कि कैदो को भी पूरी तरह लग चुकी थी। वह चुप बैठने वालों में से नहीं था।
शाम का वक्त था। आसमान पर सिंदूरी और काले बादल छाए हुए थे। हीर रहमान के अपार्टमेंट से निकलकर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ ही रही थी कि अचानक तीन अजनबी गाड़ियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। गाड़ियों के दरवाज़े खुले और काले सूट पहने कई हट्टे-कट्टे गार्ड्स बाहर निकल आए। उनके बीच से चलता हुआ एक शख्स आगे बढ़ा, जिसकी आँखों में घमंड और चेहरे पर एक शातिर मुस्कान थी। वह कोई और नहीं, कैदो था।
"तो... यहाँ वक़्त गुज़ारा जा रहा है?" कैदो ने अपनी भारी और ठंडी आवाज़ में कहा, उसकी नज़रें ऊपर रहमान के अपार्टमेंट की खिड़की पर टिकी थीं। हीर ने अपनी जगह से एक इंच भी पीछे हटे बिना, अपनी ऐनक हटाई और सीधे कैदो की आँखों में देखा। उसकी आँखों में रत्ती भर भी खौफ नहीं था।
कैदो हीर के करीब आया और लहज़े में धमकी घोलते हुए बोला, "हीर, तुम बड़े घर की लड़की हो। इन सड़क छाप गिटार बजाने वालों के साथ तुम्हारा नाम जुड़ना तुम्हारे खानदान की तौहीन है। तुम्हारे पिता ने तुम्हारी ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी है, और मैं नहीं चाहता कि किसी कचरे की वजह से तुम्हारा दामन मैला हो। सीधे गाड़ी में बैठो और मेरे साथ चलो।"
अगर कोई और लड़की होती तो कैदो के इस खौफनाक रूप और उसके गार्ड्स को देखकर काँप जाती, लेकिन यह आज के दौर की निडर हीर थी। हीर ने एक ठंडी और बेबाक हँसी हँसते हुए कहा, "कचरा? चचा कैदो, कचरा वो नहीं जो अपनी मेहनत से धुनें बनाता है, कचरा वो सोच होती है जो दूसरों की आज़ादी को अपनी जागीर समझती है। और रही बात पापा की, तो उन्होंने आपको मेरा ख्याल रखने को कहा था, मेरा मालिक बनने को नहीं।"
कैदो का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने आज तक किसी को अपने सामने इस तरह बोलते नहीं देखा था। उसने दांत भींचते हुए हीर का हाथ पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन हीर ने झटके से उसका हाथ पीछे ढकेल दिया। हीर की आँखें अंगारे की तरह सुलग उठीं। उसने कड़क आवाज़ में कहा, "दोबारा मुझे छूने की जुर्रत मत करना, चचा! मैं इज़्ज़त करना जानती हूँ, तो अपनी हदें याद दिलाना भी मुझे अच्छे से आता है। रहमान मेरी पसंद है, और मेरी पसंद के बीच में जो भी आएगा, मैं उसे कुचलने में एक पल भी नहीं सोचूँगी।"
हीर बिना डरे अपनी गाड़ी में बैठी और तेज़ी से गाड़ी रिवर्स करके वहाँ से निकल गई। कैदो वहीं खड़ा धूल फाँकता रह गया। उसका अपमान हो चुका था। उसने अपनी मुट्ठियाँ भींचीं और ऊपर रहमान की खिड़की की तरफ देखकर मन ही मन बुदबुदाया, "इस लड़की का घमंड तो उस भिखारी की मौत से ही टूटेगा। अब बहुत हुआ... खेल अब सीधा और खूनी होगा।"(जारी है )
लेखक _समीर खान